BJP की विदाई का कौन नेता कर रहा इंतजार? कांग्रेस क्यों नहीं खोल रही बीजेपी वालों के लिए दरवाजे

नमस्कार नकिंग न्यू . कॉ में आपका स्वागत
है मैं हूं गिरिजेश वसिष्ठ
जब राम मंदिर को लेकर माहौल पूरा उफान पर
था तब और उससे

पहले और मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह
के इतना बड़ा आयोजन था इतना बड़ा इवेंट था
उसके एक हफ्ते के अंदर मैंने आपको कह दिया
था कि बीजेपी की

सीटें से ज्यादा जाने के आसार देख नहीं
रहे और आज सभी लोग इस बात को दोहरा रहे
हैं अगर आप इस बात
को दो मिनट के लिए अलग रख दे क्योंकि आज
मैं बात करने वाला हूं इसी से टॉपिक है तो
भी अभी पिछले दिनों कमेंट में मुझे बताया
किसी ने और मुझे याद आया कि जब आरबीआई कह
रहा था कि 2000 का नोट बंद करने की कोई
योजना नहीं है तब भी मैं आपसे कह रहा था
कि यह नोट तो बंद होगा ही

होगा खुशी है आप लोग इस तरह की टिप्पणियां
लिखते हैं ध्यान से वीडियो देखते हैं
बातें याद रखते हैं और वह मिलती हैं आज
मैं कुछ ऐसी जानकारी आपसे साझा करने जा
रहा हूं जो मेरे विश्लेषण पर आधारित नहीं
है सूचनाओं पर आधारित है जो मुझे अलग-अलग
स्रोतों से मिल रही

है खबर मेरे पास बहुत दिनों से थी कि कुछ
ऐसा चल रहा
है लेकिन बातों बातों में अभी दो

दिन
पहले पवन खेड़ा कांग्रेस पार्टी के
प्रवक्ता ने इस बात के संकेत दे दिए हैं
कि भारतीय जनता पार्टी में जो मोदी से
दुखी लोग हैं वह कांग्रेस पार्टी में जाने
के लिए व्यग्र दिखाई दे रहे हैं लाइन लगाए
हुए
हैं लेकिन राहुल गांधी ने रास्ते रोक
रखे इसमें बहुत सारे नेता बड़े बड़े नेता
है और ऐसे नेता

हैं जो मुंह खोल द तो मोदी जी के लिए और
सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं
ऐसे नेता

हैं जो सब कुछ जानते हैं लेकिन चुप हैं और
ऐसे नेता

हैं जो सब कुछ जानते हैं इसी बात को
लेकर पार्टी के अंदर उन पर सख्त निगाहे
हैं उन पर सख्त नजर रखी जा रही है दो भाई
दो मित्र दो दोस्त दो पार्टी के
डॉन

इस कदर पार्टी में अपना एकछत्र राज्य बनाए
हुए हैं कि यह लोग पार्टी छोड़ने को मजबूर
हैं पवन खेड़ा ने जो कहा उसके हिसाब से
उन्होंने कहा कि कुछ लोग संपर्क में हैं
बातचीत चल रही है हमारी पार्टी में हर
स्तर पर विचार होता है आसानी से ऐसा नहीं
होता एक व्यक्ति के हाथ में किसी को भी
पार्टी में ले लिया किसी को भी निकाल दिया
इस पर विचार विमर्श चलता है कई स्तर पर
बातचीत होती है

और यह लोग इसलिए नहीं आ पा रहे हैं
क्योंकि कांग्रेस पार्टी के अंदर जो लोग
कट्टर पंथी हैं विचारधारा को ले

कर कट्टर
लोग हैं वह यह कह रहे हैं कि
हमको इस हद तक जाकर राजनीति नहीं करनी है
कि हम आरएसएस के लोगों को पार्टी में
शामिल करा ले हमारा अपना कार्यकर्ता जो
इतने बुरे समय में भी लड़ रहा है हमारे
साथ खड़ा हुआ है ईडी सीबीआई सारी चीजें
देखते हुए
उस कार्यकर्ता

को दुखी करके इनको अंदर नहीं लाया जा
सकता पवन खेड़ा कह रहे हैं कि कुछ लोग ऐसे
विचारधारा के कट्टर पंथी हैं जबकि हालत यह
है कि जो राहुल गांधी है और राहुल गांधी

का ऑफिस है वह इस बात को लेकर ड़ा हुआ
है और उनका कहना यह है कि राजनीति भले ही
कितनी प्रैक्टिकल राजनीति हो लेकिन उसूल
की राजनीति तो करनी ही है तो आरएसएस के
लोग लोग की कांग्रेस पार्टी में नो एंट्री

पर राहुल गांधी का वोट है लेकिन राहुल
गांधी कोई भी
बात जोर से तो कह सकते हैं अंतिम रूप से
नहीं कहते हैं यह कांग्रेस पार्टी का
रिवाज
है कांग्रेस पार्टी में राहुल गांधी ने
कहा कि भैया मेरे ख्याल से तो आरएसएस के
खिलाफ मैं इतना लड़ रहा हूं वहां के लोगों
को जो आरएसएस से जुड़े हुए बीजेपी के लोग
हैं उनको पार्टी के अंदर नहीं लाना

चाहिए लेकिन बाकी लोगों का कहना है कि इस
समय अगर बीजेपी से लोग इधर शामिल होते हैं
तो एक मैसेज जाएगा कि सत्ता परिवर्तन का
समय आ रहा है इसलिए लोग कांग्रेस की तरफ
जा रहे हैं अब यहां मामला है विचारों का
और प्रैक्टिकल राजनीति के बीच के संघर्ष
का आपको मैंने बताया था कि किस तरह से

प्रैक्टिकल राजनीति के चक्कर में ना पड़
के विचारों से चिपके रहने का नुकसान भारत
की वामपंथी पार्टियां उठा रही हैं वामपंथी

पार्टियां कॉर्पोरेट से चंदा नहीं लेती
हैं और इस देश में चुनाव बगैर पैसे के
लड़ा नहीं जा सकता लोगों के 100 100 5050
10 10 20 20 रप के चंदे
से चुनाव लड़ा नहीं जा सकता इसलिए यह

पार्टिया कुछ कर नहीं पा रहे हैं और यही
वजह है कि जब अभी पिछले दिनों चुनावी चंदे
की याचिका हुई तो उसमें याचिका करता
पार्टी कौन थी सीपीएम

तरफ
नहीं जाती है कांग्रेस और उनको विचारधारा
को गले से लगाए रहते हैं तो इसके बहुत
सारे जोखिम
है अब आप कहेंगे कि भारतीय जनता पार्टी ने
भी तो विचारधारा से बाहर लोगों को रख लिया
ज्यादा इंपॉर्टेंट होता है सरकार बनाए
रखना लेकिन भारतीय जनता पार्टी आज पावर

में है भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व
कार्यकर्ताओं के साथ के भरोसे नहीं आपको
बता दूं अभी अगर आपकी नजर ना गई हो खबर पे
तो अभी हाल में भारतीय जनता पार्टी का जो
अधिवेशन हुआ था उस अधिवेशन में उन्होंने
अपने संविधान को बदल दिया
है अब पार्टी के अध्यक्ष के चुनाव के लिए
पूरी प्रक्रिया अपनाने की जरूरत नहीं है

नीचे से सबके वोट लेने की जरूरत नहीं है
अगर नड्डा साहब को दोबारा बनाना है तो
संसदीय दल नड्डा साहब के नाम का प्रस्ताव
कर
देगा और नड्डा साहब बन
जाएंगे इसी तरह से अगर

नड्डा साहब का कोई प्रस्ताव उसको संसदीय
दलने अनुमोदित कर दिया पास है यानी पार्टी
की डेमोक्रेसी में यह जो ऊपर के 10 लोग
हैं 15 लोग हैं पांच लोग हैं जो भी हैं

संसदीय दल और पार्टी के पदाधिकारी
यह पार्टी के राजा हो गए बाकी कार्यकर्ता
हो गया कीड़ा मुखड़ा और जिस पार्टी में
ऐसा सिस्टम अथॉरिटेरियन सिस्टम हो
अथॉरिटेरियन सिस्टम आरएसएस की विचारधारा

में भी आता है लोकतंत्र वहां पर भी नहीं
है जिस पार्टी में ऐसा अथॉरिटेरियन सिस्टम
हो उस पार्टी में कार्यकर्ता की परवाह कौन
करता
है आज भारतीय जनता पार्टी में मैंने आपको
अभी दो दिन पहले वीडियो बनाया था कि किस
तरह से हर तरफ से सारी विचारधाराओं के लोग

लाकर बिठा दिए गए हैं जो कोई आदमी 20 साल
से कोई 30 साल से सुबह सुबह हाफ पेंट के
ऊपर धोती पहन के कितने लोगों को शाखा जाते
मैंने देखा
है और ऊपर टोपी लगा केर बुजुर्ग
लोग उन सब लोगों को एक रख
के सिर्फ पार्टी

में पावर रखो यह इंतजाम किया जा रहा है
भारतीय जनता पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं
को दूर कर दिया ज्योतिरादित्य सिंधी आते
हैं उन्हीं उनकी उन्हीं उनकी चलती है वहां
पर उनके लोगों की चलती है पुराने पार्टी

वाले एक तरफ हो गए जो पुराने महल के
विरोधी थे सिंधिया खानदान के विरोधी थे
आरएसएस वाले जो लोग पुराने

लोग वो नरेंद्र सिंह टमर संसद की जगह
विधानसभा का चुना चुनाव लड़ रहे थे और
उनको विधानसभा अध्यक्ष बनाकर एक तरफ बिठा
दिया
गया और अब उन्हीं नरेंद्र सिंह तोमर को
बदनाम करने के लिए कई तरह की बातें फैलाई

जा रही है चाय की दुकान पर एक आदमी कह रहा
था जो मुझे विश्वसनीय नहीं लगता है लेकिन
यह लोग बात कर रहे
हैं कि नरेंद्र सिंह तोमर की 10000 बस हैं

साहब
10000 अब यह बात कहीं से सच नहीं लगती है
लेकिन वह आदमी जो चाय की दुकान पर बैठा
हुआ एक ट्रक
वाला गांव की चाय की दुकान है आज मैं

ट्रेवलिंग कर रहा था और वह बोल रहा
है तो
आप एक बात सोचिए कि एक तरफ आपने अपनी
पार्टी के कार्यकर्ता को कमजोर करके सिर
पर बाहर से लाकर आदमी

बिठाया और हालत यह है कि अपनी पार्टी के
कार्यकर्ता को अब बदनाम भी करना शुरू कर
दिया
है नरेंद्र सिंह तोमर अच्छे हैं बुरे हैं
इसका फैसला करने वाला मैं नहीं हूं और यह
आरोप गलत है सही है इसका फैसला करने वाला
भी मैं नहीं हूं लेकिन यह बात जनता के बीच
में वह लोग पहुंचा रहे हैं जो लोग नहीं
चाहते कि नरेंद्र सिंह तोमर की वह हैसियत

रहे जो सिंधिया परिवार को चुनौती दे सकती
है जयभान सिंह
पवैया जिनके डर से माधवराव सिंधिया को सीट
बदलनी पड़ी थी
उसी ग्वालियर से आते हैं पार्टी में कहीं
एक कोने में पड़े हुए हैं एक जमाने में

जयवंत सिंह पवैया का जलवा था बजरंग
दल कितने नाम लेंगे आप सारे नेता एक तरफ
से प्रभात छ होते
थे बहुत पावरफुल थे तो उस पूरे जगह पर
आपने एक आदमी को उठाकर लाए आप कांग्रेस से

और पूरी पार्टी के सर पर बिठा दिया तो आज
वहां पर क्यों नहीं बीजेपी के कार्यकर्ता

यह उदाहरण दिया जाता है कि भाई कांग्रेस
पार्टी भी ला सकती है क्यों नहीं ला रही
है वहां पर सत्ता की मलाई
है और मलाई से ज्यादा सत्ता का डर है चू
चपड़
करोगे तो ईडी अपने लोगों के य भी पहुंच
सकती है सत्यपाल मलिक का केस आपके

 

सामने और भले ही पहुंच सकती है इसकी किसी
ने धमकी दी हो ना दी हो लेकिन एक मैसेज है
सोसाइटी में कि वह आ सकती है इसलिए चुपचाप
बैठे रहो शिवराज सिंह चौहान
आंख बंद करके अगर किसी आदमी को उठाएंगे आप
तो यह कहेगा कि मध्य प्रदेश में लोकसभा का
विधानसभा का चुनाव अगर किसी आदमी ने
जिताया तो शिवराज सिंह चौहान ने
जिताया लेकिन यह बात खुद शिवराज सिंह

चौहान भी कहने की हैसियत नहीं रखते हमारे
आपके जैसे इंडिपेंडेंट लोग बोल दे बोल
दे तो इस पूरे प्रकरण के बीच में बहुत
सारे शिवराज सिंह चौहान और बहुत सारे
दूसरे लोग हैं जो आरएसएस की बैकग्राउंड से
आते हैं पुराने बैकग्राउंड ग्राउंड से आते

हैं और वह अब कोई भविष्य नहीं देख रहे हैं
क्योंकि उनको लगता है कि 2024 के बाद तो
यह एकदम ही मोदी शाह एंड एसोसिएट हो जाएगी
भारतीय जनता पार्टी नहीं
बचेगी तो वह जो खौफ है उसके कारण वह लोग
चाहते हैं कि किसी और जगह चले जाए पहली

चीज दूसरा एक यह भी धुंध खा है अब इतना
स्पष्ट नहीं रहा कि 24 में मोदी को आने
आना है अब यह रहता है कि अगर मोदी आए नहीं
आए और अगर मोदी की थोड़ा धक्का हमारे
मारने से भी अगर मोदी को हटाया जा सकता है
तो हम भी मार देते हैं इस जुगत में लोग
लगे हुए मैं आपको बता तो रहा हूं कि किस

तरह से एक के बाद एक कुल्हाड़ी पर पैर
मारी जा रहे
हैं किस तरह से मोदी की तरफ से ऐसे फैसले
सामने आ रहे हैं सत्यपाल मलिक की
गिरफ्तारी आत्मघाती फैसला
है सहयोगी आते आते रुक गए हैं जयंत चौधरी

आते आते ठक गए हैं अशोक चौहाण ने अपने
साथियों को कह दिया मैंने वीडियो में
बताया था आपको कि भैया अभी मत
आना खतरा
है और दूसरी
तरफ कांग्रेस पार्टी में राहुल गांधी की

तरफ से ग्रीन सिग्नल मिलने की देरी है
अनगिनत भाजपाई कांग्रेस में आ
जाएंगे लेकिन बड़ा सवाल यह है कि फिर
आरएसएस के खिलाफ कैस मुंह से लड़ाई

लड़ेंगे राहुल गांधी आज राहुल गांधी के
पास सरकार नहीं है कि लोग सरकार की मलाई
के चक्कर में टिके रहे हैं
कार्यकर्ता और यह वोह कार्यकर्ता हो जिनको
सत्ता की मलाई खानी होती तो अभी तक कहीं
और जा चुके होते लेकिन वोह पार्टी में
इनकी पार्टी में टिके हुए हैं तो इसीलिए
टिके हुए हैं बहरहाल जो भी है कांग्रेस
पार्टी का हौसला बुलंद है आसमान पे उनका
उनका हौसला है ममता बैनर्जी भी तमाम सारा
इंडिया गठबंधन को झटका देने के
बाद अब गठबंधन में वापस आ रही है यह भी
खबरें
इंडिया गठबंधन में और यह भी खबर हैं कि
नितीश भी दुविधा में फिर पड़ गए सोच रहे
मैं गिनीज बुक में रिकॉर्ड बना ही लू कि
अब जो है अगले 100 साल तक कोई ना तोड़ पाए
जो भी
है लेकिन स्थितियां ऐसी है जो यह बताती
हैं कि सिर्फ एक तरफा हवा नहीं बह रही अभी
तक का जहां तक सवाल है रात रात भर बनारस
की सड़कों पर मोदी जी घूमकर मुआयना कर रहे
हैं
वो मोदी जी जिनके बनारस का सांसद रहते हुए
गंगा में स्टीमर चला एक होटल कंपनी ने
चलाया भारतीय संस्कृति के नाम पर काम करने
वाली सरकार के चलते उस स्टीमर में वॉइस
राय रूम यह रूम सारे कॉलोनियल नाम वाले
कमरे थे सभी प्रकार का इंक्लूडिंग बीफ
गंगा की गोद
में खाना परोसा जाता था
और दुर्भाग्य से वर्ल्ड बैंक से जो पैसा
गंगा की सफाई के लिए आता था उस पैसे का भी
इस्तेमाल इस प्रोजेक्ट में किया
गया और कतई फिकर नहीं हुई क्योंकि बहुत
सुपर पावर
थे बनारस में मंदिर
तोड़े फिक्र नहीं की क्योंकि मोदी जी को
लगता था कि मैं हूं तो मुमकिन है अब वही
मोदी जी आज आधी रात को बनारस में सफाई हो
रही है कि नहीं काम ठीक से हो रहा है कि
नहीं प्रोजेक्ट ठीक से चल रहे हैं कि
नहीं इस सब में लगे हुए हैं तस्वीरें
बाकायदा आ रही है आधी आधी रात
को और तब जब राहुल गांधी अभी वहां से होकर
गुजरे
हैं तो हालात जो हैं वह कुछ इशारा कर रहे
हैं क्या इशारा कर रहे हैं किधर मामला
जाएगा कांग्रेस पार्टी इन पूरे हालात को
किस तरह से अपने पक्ष में ले सकती है कोई
तकनीकी अड़चन तो नहीं
आती कोई मशीन कोई यंत्र
तो गड़बड़ी नहीं करता
है अगर कुछ नहीं होता है तो एकदम 100
पर चीजें सकारात्मक है इनके लिए कांग्रेस
वालों के लिए और इसीलिए बड़े कॉन्फिडेंस
के साथ पार्टी कह रही है और अब पार्टी ने
बाहर कहना भी शुरू कर दिया है कि हमारे
पास इतने नेता
इतने आने को भी तैयार है बड़े वाले उनके
साथ छोटे वालों की बात अलग है और इनको अगर
हरी झंडी मिल जाती है तो और भी आ जाएंगे
अब नाम उनका बस मैं इतना कहूंगा यह वह लोग
हैं जब से मोदी पावर में आए हैं तब से
उनकी हालत खराब है साइड लाइन लगा दिए गए
हैं माला के अंदर मुंडी घुसाते हैं और
उनको निकालनी पड़ती है लेकिन यह राजना
सिंह नहीं
है बिल्कुल क्योंकि गलत इशारा जा सकता है
बहरहाल नाम मैं बिल्कुल डिस्क्लोज नहीं
करूंगा लेकिन जो मेरे पास खबर
है ऐसे नेता हैं जिनको मोदी जी ने कभी चैन
से रहने नहीं दिया पार्टी के अंदर जिनका
करियर खत्म करने में कोई कसर नहीं
छोड़ी ऐसे नेता हैं जिन्होंने मोदी जी की
दुनिया हिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी
और
आज वह उचित अवसर पा रहे हैं कि मोदी को
मैं धक्का दे सकता
हूं उम्मीद कर
j

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