Chirag Paswan की Tejashwi Yadav से हो गई बात ?, अगले 3 दिन में खेला, मना रही BJP

नमस्कार आपके साथ मैं हूं रोहित कुमार आप
न्यूज फ नेशन पर तेजस्वी यादव की पटना के
ऐतिहासिक गांधी मैदान में तमाम इंडिया
एलायंस के बड़े नेताओं के साथ हुंकार और
उस हुंकार के बाद लगातार इस बात की चर्चा
कि क्या तेजस्वी यादव ने इस रैली के सहारे

अपने एमेज को और बड़ा कर लिया है इन तमाम
चीजों पर तो चर्चा हो ही रही है लेकिन इस
पूरे सीन से एक बड़ा बिहार का युवा नेता
जो है वो गायब है नाम है चिराग पासवान
चिराक पासवान एनडीए का हिस्सा है अपने आप
को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान

कहते हैं लेकिन क्या चिराग पासवान नाराज
चल रहे हैं या चिराग पासवान की फाइनल बात
जिस तरह की स्थितियां एनडीए के अंदर बनी
हुई है चाचा को लेकर तस्वीर साफ है नहीं
सिर शेयरिंग पर बात बन नहीं पा रही है तो
क्या चिराग पासवान की बात तेजस्वी यादव से
हो गई है इन तमाम मसलों पर हम बात करेंगे

हमारे सहयोगी देवांशु हमारे साथ मौजूद हैं
देवांशु कल जब रैली हुई उसके बाद तमाम
नेता जो है मुखर थे मतलब बीजेपी के ले
लीजिए आप हिंदुस्तानी मोर्चा को ले लीजिए
जो एनडीए बिहार का हिस्सा है लेकिन चिराग
पासवान की ना तो इस पार्टी इसम मसले पर

कुछ बोलती हुई नजर आई ना चिराग पासवान ने
कुछ कहा ना उनके अधिकारी र हैंडल से कोई
ट्वीट या बयान सामने आया चल क्या रहा है
चिराग की चुप्पी के पीछे की बात क्या है
देखिए ने शुरुआत में कहा कि क्या चिराग
पासवान नाराज है तो क्या को हटा दीजिए

चिराग पासवान नाराज है हम क्यों नाराज है
बेसिकली इस वीडियो में हम लोग विस्तार से
बताएंगे और इस तरीके से बताएंगे कि जो भी
लोग इस वीडियो को देखेंगे वो खुद ये मानने
लगेंगे कि चिराग पासन वाकई में नाराज
नाराजगी की वजह देखिए लालू यादव से लेकर
लालू प्रसाद यादव हो चाहे टीएसपी यादव तीज
प्रताप यादव मंच पर हल्ला बोला जाता है

नीतीश पे हमला बोला जाता है चलो कोई बात
नहीं विरोधी हमला बोला मोदी पर इतना
जोरदार अटैक किया गया मतलब कि मोदी हिंदू
नहीं है ये कहा गया मोदी का परिवार नहीं
है यह कहा गया और यहां तक तो तेजसवी यादव

ने परिवारवाद पर बोला पशुपति पारस का नाम
भी लिया उस परिवारवाद का हिस्सा कहीं ना
कहीं चिराग पासवान भी है लेकिन चिराग
पासवान का नाम नहीं लिया गया ते एसपी यादव
के द्वारा तो कहने का तात्पर्य है कि तेस

पी यादव चिराग पर मौन है और चिराग पासवान
भी जो है वो पूरी तरीके से मौन धारण रैली
पर एक भी टिप्पणी नहीं इतना ही कह दिया
जाता है उनकी पार्टी की तरफ से
इतना भी नहीं कहा गया पार्टी के में एक

नहीं दो नहीं कई प्रवक्ता एं हैं नेशनल
स्पोक पर्सन से लेकर राज्य स्तर पर
प्रवक्ता हैं महासचिव है कोई भी सामने आता
है ये बोल देता है कि रैली को लेकर कोई दो
बात यानी कि महागठबंधन की रैली का विरोध
बिल्कुल नहीं करना है चिराग पासवान तो चुप

है ही कहीं ना कहीं चिराग पासवान ने अपने
नेताओं को भी कह कह दिया है कि अभी
महागठबंधन के खिलाफ कुछ भी नहीं बोलना हैम
मुंह बंद रखना है कब तक रखना है वो तो
अगले आदेश तक रखना आखिर क्यों क्यों चिराग
ने चिराग खुद और उनके पार्टी के नेता
महागठबंधन पर कुछ भी नहीं बोल रहे हैं
इतना अच्छा मौका था कहीं ना कहीं नरेंद्र

मोदी की नजरों में और चरने का मौका था
क्योंकि नरेंद्र मोदी पर इतना जोरदार अटैक
हुआ सामने आते चिराग पासवान जोरदार
अटैकिंग मोडिंग में ते एसपी पर बात बोलते
लालू पर बोलते लेकिन वो चुप है एकदम खामोश
है तकरीबन 20 फरवरी को आखिरी बार चिराग

पासवान जम में देखे गए थे उसके बाद से आज
उसके बाद बिहार लौटकर नहीं आया आने का
कार्यक्रम जो पार्टी के से बता रहे हैं कि
आगामी 9 मार्च को वो पटना लैंड करेंगे हम
ठीक है और आज सुबह कई पार्टी के जो लोग
हैं उन्होंने चिराग पासवान से मुलाकात भी
की है हालांकि एक इंडस्ट्रियलिस्ट में भी
मुलाकात की है जिनका नाम है निशिकांत

सिन्हा जो कि नवादा के रहने वाले हैं
कुशवाहा समाज से आते हैं और कहा जा रहा है
कि वो टिकट की जुगाड़ में चिराग पासवान के
पास गए तो वो एक अलग मसला पार्टी के
नेताओं ने उनसे पूछा कि कब आ रहे हैं तो
उन्होंने बताया कि 9 मार्च को आ रहे है तो
हमारे पास ये जानकारी आई कि 9 मार्च को आ

रहे है और चिराग पासवान ने अपने पार्टी के
नेताओं से कहा कि दो तीन दिनों के अंदर
लिस्ट जो है हम बीजेपी को दे देंगे लिस्ट
कौन सा लिस्ट अपने पार्टी के उम्मीदवारों
का लिस्ट यानी कि अगले दो से तीन दिन बहुत
ही क्रुशल होने जा र है देखिए मेरे पास जो
जानकारी है है कि एनडीए में चिराग पासवान
को तीन सीटें मिल रही है चिराग पासवान ये
बिल्कुल कतेही नहीं चाहते वो कम से कम
चाहते हैं पांच सीट उसमें भी हाजीपुर

इंक्लूडेड हो तो चिराग पासवान की दोनों ही
डिमांड जो है जो मेरे सोर्सेस बता रहे हैं
अभी तक पूरी नहीं हुई है हो सकता है कि
चिराग पासवान एक प्रेशर पॉलिटिक्स जो है
वो कर रहे हो और इस प्रेशर पॉलिटिक्स में

कहीं ना कहीं तेजस्वी यादव अपना फायदा देख
रहे हो क्योंकि नीतीश कुमार के महागठबंधन
छोड़ने के बाद कहीं ना कहीं एक वैक्यूम ता
है उनके पास देने के लिए चिराग को बहुत
कुछ है सीटें ज्यादा दे सकते हैं वो

हाजीपुर सीट दे सकते हैं वो तो तो कहीं ना
कहीं चिरा तेजसवी यादव जो है अपना फायदा
देख रहे हैं और उन्हें लग रहा है कि चिराग
पासवान नाराज हो सकता है कि दोनों नेताओं
के बीच में दो-तीन बार बात भी हुआ होगा
चिराग ने कहा कि अभी रुकिए दो-तीन दिन
रुकिए देखते हैं क्या होता है एक फाइनल जो
है देखिए कल नीतीश कुमार भी दिल्ली में कई
जगह आई कि कल एनडीए की बैठक होनी है जब
हमने अपने सोर्सेस से बताया कि क्या वाकई

में कल कोई एनडीए की बैठक है तो कोई एनडीए
की बैठक है ही नहीं कल तो दिल्ली में ही
नहीं है अमित शाह पूरे कार्यक्रम जो है वो
दिल्ली से बाहर है और कल देर रात
पहुंचेंगे तो कल कोई एनडीए की बैठक होनी
नहीं है हां कल पशुपति पारस नितीश कुमार

और चिराग पासवान सब जो है वो दिल्ली में
रहेंगे ये एक है सत्य है तो कुल मिला कहे
कि चिराग पासवान मुझे यहां से लग रहा है
नाराज है हो भी सकते हैं दूसरा वो जो है
वो प्रेशर पॉलिटिक्स भी कर सकते हैं कि
मुझे इतनी सीट दीजिए क्योंकि उनके समाज
देखिए क्यों वजन जो है वो चिराग पासवान का
बढ़ा हुआ है वजन इसलिए वो बढ़ा हुआ है

क्योंकि उनकी जाति के जो वोट है वो 7.31
पर पासवान जाति का वोट बैंक है और चिराग
पासवान लगातार कई मंचों से कहते रहे
हाजीपुर सीट उन्हें चाहिए प्लस पांच सीट
अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को वो कहते थे
कि पांच सीट ऊपर बातचीत जो है वो हो गई है
लेकिन हुई नहीं है दो से तीन दिन बहुत ही
इंपॉर्टेंट है तभी जाकर फाइनल जो है वो
होगा चिराग पासवान

नाराज है हमला नहीं बोल रहे हैं देखिए
सबसे बड़ी बात है देखिए राम जो है वो
हनुमान के घर में आते हनुमान नहीं रहते
कोई बात नहीं राम पर इतना बड़ा हमला हो
रहा है हनुमान कुछ नहीं मतलब इतना शांत
शांत रहिए इतना भी शांत मत रहिए ऐसा लगे
कि आप है ही नहींन प्रधानमंत्री मोदी को
हिंदू तक नहीं बताया लालू यादव ने और उस
पूरे मामले पर भी जो है चिराग पासवान
क्यों चिराग पासवान बिहार के वो इकलौते
नेता हैं जो बीजेपी सत्ता में हो नहीं हो

नितीश कुमार के साथ हो विरोध में हो चिराग
पासवान बहुत मुस्तादी के साथ जो है वो
खड़े नजर आए साल 2019 के लोकसभा चुनाव की
बात करें तो कुल 40 सीटें बिहार के अंदर
में है 17 पर बीजेपी 17 पर जदयू और बाकी
की बच्ची सीटों पर लोजपा चुनाव लड़ी हुआ
यूं कि लोजपा के चुनाव लड़ने के बाद

जिसमें से चिराग पासवान की खुद की सीट
जमुई हाजीपुर वैशाली समस्तीपुर के साथ-साथ
जो है खगड़िया और नवादा जैसे महत्त्वपूर्ण
सीटें उनके पास आई थी सब पर जीत गए मतलब
स्ट्राइक रेट 100 का था उनका चिराग पासवा
देवांशु बता रहे हैं कि 7.31 फी उनका अपना
एक वोट है और बड़ा कंक्रीट वोट है अगर
मतलब अगर आप ये बिहार में लेके चले कि

एमवाई का जो समीकरण है वो लालू यादव या डी
के साथ बड़ा मुस्तादी के साथ रहता है तो
चिराग के मामले में आप कहेंगे कि ये 75 पर
जो करीब-करीब वोट है वो उनके साथ है इंटेक
रहता है और ये दिखा भी राम विलास पासवान
के निधन के बाद कहा जा रहा था कि हो सकता
है कि ये वोट बैंक जो है वो पशुपति पारस
के खेमे में कुछ चला जाए लेकिन उन्होंने
प्रूफ किया मुकमा उपचुनाव में क्या हुआ

आखिरी दिन चुनाव प्रचार करने जाते हैं और
पासवान समाज का जो वोट है वो बीजेपी के
उम्मीदवार को मिलता है हालांकि जीत नहीं
हो पाता है वो अलग मसला है लेकिन ये बताने
में कामयाब होते हैं कि बिहार का जो
पासवान है मुकाम का जो पासवान समाज है वो

इनके साथ है तो कहीं ना कहीं उन्होंने
प्रूफ किया कि जो वोट बैंक है उनके समाज
का उनके साथ जो है वो वोट बैंक है अब अब
यहां से आगे का रास्ता जाता कहां अब इसम
थोड़ा सा बात कर लेते हैं देखिए चिराग
पासवान नाराज तो है वो अपने हिसाब से
चाहते हैं कि हां भाई मुझे इतनी सीट चाहिए
चिराग पासवान देखिए जब से उनकी पार्टी
टूटी है उसके बाद से ही उन्हें ऑन फील्ड
रहने की जो आदत हुई तो इस दौरान चिराग

पासवान को यह लगने लगा कि कहीं ना कहीं
उनके पास वोट बैंक है उसके उनके पास ताकत
है राजनीतिक रूप से और क्यों ना इसका लाभ
उठाया जाए क्योंकि इसलिए वो बारगेन कर रहे
हैं क्योंकि चिराग पासवान अगर कहे चाचा भी
उनके साथ नहीं है पार्टी में वो इकलौते
सांसद है इस वक्त ठीक है अगर मैं कहूं तो
फिर भी चिराग पासवान को लगता क्योंकि

उन्होंने बिहार में एक जिले में करीब लगता
है कि मुझे 20 20 303 सवाय कर दी होंगे
डेढ़ दो सालों में उन्हें यह लगने लगा है
कि कि मैं ताकतवर नेता हूं और मु मुझे तो
कम से कम सीट चाहिए पांच उसमें इंक्लूडेड
हाजीपुर और दिक्कत बीजेपी के साथ है कि
हाजीपुर कैसे दे दे क्योंकि वो उनके
पशुपति पारस एक और स कैबिनेट मंत्री है
अगर उनका टिकट काटते हैं तो मैसेज नेगेटिव
परसेप्शन भी बन सकता है बीजेपी के के
खिलाफ यह भी एक खतरा होता है ना तो सब कुछ
नाप तल वाला फेज है लेकिन टच में चिराग
पासवान जो है वो तेजस्वी यादव के साथ भी
है अगर बात देखिए चिराग पासवान एक चीज और
है चाहते हैं कि वो एनडीए के साथ रहे
लेकिन कोई तभी तो रहेगा जब समान जनक
स्थिति रहेगी आपको सीट ही कम मिलेगा तो फि
आपके समान का तीन सीट देंगे तो कोई क्यों
रहेगा हां तो वो उधर भी बातचीत हो रही है
और इधर भी बातचीत हो रही है दोनों तरफ
बातचीत हो रही है और दो से तीन दिन जो है
वो बहुत ही इंपॉर्टेंट होने वाला है कि
चिराग पासवान करेंगे क्या एनडीए में है
टेक्निकली अभी है लेकिन रहेंगे या नहीं
रहेंगे यह अी क्लियर नहीं है अगर सीट
उन्हें एनडीए में पांच नहीं मिलती है तो
मुश्किल होगा चिराग पासवान को अमित शाह या
पीएम मोदी के लिए अपने पास रखना हां चार
सीटों पर भी मान जाएंगे वो मुझे लगता है
लेकिन हाजी हाजीपुर चाहिए हाजीपुर
प्रेस्टीज इशू हो गया हा प्रेस्टीज वाला
इशू हो गया क्योंकि वो ना होता है ना कि
कि वक्त के साथ किसी को माफ कर देने वाले
नेता वो नहीं है चिराग ये थोड़ा नए जमाने
के नए नेता होते हैं ना वैसे ट्रीट कर रहे
हैं देखिए बिहार में यही चल रहा है चुराग
पासवान एक तरीके से कह सकते हैं आप कि कोप
भवन में खुद इस वक्त अभी कैद हो गए
बिल्कुल रामायण में जिस तरीके से हुआ था
कई कई ने जिस तरीके से खुद कैद किया था
कुछ कुछ उसी भूमिका में हनुमान से उस
भूमिका में आ गए हैं सीटों पर बातचीत नहीं
हो रही है अपने चाचा को माफ करने को तैयार
नहीं है हर कीमत पर हाजीपुर चाहिए मतलब
चाहिए उससे समझौता नहीं हो सकता चिराग
पासवान जो है छह की जगह चार तीन पर भी मान
जाएंगे अगर बीजेपी चाहती अगर चाहे तो
लेकिन हाजीपुर चाहिए तो चाहिए क्योंकि वो
उनके पिता की सीट है पैथिक सीट है और
क्योंकि बिहार में क्योंकि बीजेपी लगातार
तमाम राज्यों के लिए जो है प्रत्याशी के
नामों का लान करें लेकिन बिहार में एक
बड़ा गठबंधन है 40 सीटें हैं और तीन बड़ी
पार्टियां हैं उपेंद्र कुशवा को कितना
मिलेगा मानजी को कितना कितनी सीटें
मिलेंगी ये सब कुछ अभी फिलहाल क्लियर नहीं
है लिहाजा चिराग पासवान जैसा देवांशु भी
कह रहे हैं कि दो-तीन दिन बहुत
महत्त्वपूर्ण है एनडीए के लिए बिहार में
चिराग पासवान फैसला ले सकते हैं वो अपनी
लिस्ट बना कर के जो है वो संभवतः जेपी
नड्डा या अमित शाह को या प्रधानमंत्री
मोदी तक वो पहुंचा देंगे उसके बाद अगर
दो-तीन दिनों में फैसला नहीं हुआ यानी कि
नीतीश कुमार की विदेश जाने के पहले तब
चिराग पासवान बिहार में कोई बड़ा फैसला ले
सकते हैं और अगर चिराग पासवान और तेजस्वी
यादव एक साथ आते हैं तो जानकार ऐसा ही
मानते हैं कि दो युवा नेताओं के एक मंच पर
आने का मतलब है कि कई सीटों पर इसका असर
पड़ेगा विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान
ने ये प्रूफ करके दिखाया है हर विधानसभा
के अंदर में 10000 से ज्यादा वोटर हैं
उनके और एक लोकसभा में अमूमन छह
विधानसभाओं होती हैं तो छह को अगर 10 से
गुना कर दे तो करीब 60000 वोटर का वोट
बैंक चिराग पासवान के पास लगभग हर लोकसभा
में एक पॉकेट के तौर पर है चिराग पासवान
अपनी इस ताकत को जानते हैं और शायद यही
वजह है कि प्रेशर पॉलिटिक्स को फिलहाल व
करने में लगे हुए हैं फिलहाल इस में इना
ही देखते र न्यूजनेशन
नमस्कार

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