Chirag Paswan-Mukesh Sahani पर इस दिन होगा फैसला, Lalu-Tejashwi ने बुलाई मीटिंग, Sandeep Saurav ने…

मोटा मोटी देखिए हम लोग का सीट का बंटवारा
भी पॉजिटिव डायरेक्शन से लाइन लेंथ पर बात
हो चुकी है यह एक तरह का चुनाव से पहले की
रणनीति है और हमारा पूरा फोकस इस बात के
लिए है कि हम 40 का 40 सीट जीते लेकिन

हमें लगता है कि महागठबंधन की जो बैठक
होगी बहुत जल्दी होगी उसमें ठीक तरीके से
बातचीत हो जाएगा तय हो जाएगा जो सीटों का
कब तक क्लियर हो जाएगा कि महागठबंधन एनडीए
से पहले हो जाएगा ऑफर दे रहे हैं निश्चित
तौर से अगर वो भाजपा को समझ करके कि ये

लोग कितने डेंजरस इस देश के लिए हो चुके
हैं अगर वो इधर आते हैं तो आ सकते हैं
नमस्कार हमारा नाम है समरीन और आपने देखना
शुरू कर दिया है लाइव सिटीज देखिए लोकसभा
चुनाव में अब काफी कम समय बचा हुआ है और
ऐसे में अब सबकी निगाहें टिकी हुई है कि

आखिर किसके खाते में कितनी सीटें आएंगी हम
आपको याद दिला दें आपको याद होगा कि
बीजेपी ने कुछ दिनों कबल ही यानी कि कुछ
दिनों पहले ही अपने उम्मीदवारों की पहली
सूची भी जारी कर दी है लेकिन ऐसे में अब

बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इंडिया
गठबंधन या फिर आप यह कहिए कि बिहार में
महागठबंधन का क्या होगा इनके सीटों का
गणित क्या है तो आज हम इसी मुद्दे पर सीधी
बातचीत करेंगे सीपीआईएमएल विधायक संदीप
सौरव जी से सबसे पहले बहुत शुक्रिया बात
करने के लिए जी शुक्रिया जी सबसे पहले तो

हम जानना चाहेंगे कि रैली तो बिल्कुल
शानदार रही यानी कि आप लोग ने तो कमाल कर
दिया इतिहास रज दिया एक बार देखिए रैली
में जो बड़ी भागीदारी हुई और जिसके चलते
एनडीए खेमे में हड़कंप मचा हुआ है लोग उल
जुल बयान दे रहे हैं तो यह रैली ने साबित
किया कि जन विश्वास जो है वो लोकतंत्र के

पक्ष में है जन का विश्वास संविधान के
पक्ष में है और जन का विश्वास महागठबंधन
के पक्ष में है क्योंकि आप देख लीजिए कि
बगैर कोई तामझाम के रैली हुआ था बहुत आनन
फानन में हम लोगों ने रैली बुलाया था और
जितनी संख्या आपको गांधी मैदान में दिखी

उससे ज्यादा संख्या गांधी मैदान से बाहर
थी बिलकुल जी और लगभग उतनी ही संख्या पटना
के बाहर जाम में लोग फंसे हुए थे जाम में
लोग फंसे हुए थे आप समझ लीजिए कि गांधी
मैदान की कैपेसिटी जो है वो 15 लाख के
आसपास है

तो 10 लाख से ज्यादा लोग गांधी मैदान में
और उतना ही लोग ज्यादा बाहर हम तो यह तब
हुआ जब यह मोदी जी की तरफ कोई प्रायोजित
रैली नहीं थी मोदी जी का जिस तरीके का
होता है रैली जिसमें सारे सरकारी बसों को
लगा दिया जाता है सरकारी अधिकारियों को सब
कर्मचारियों को कि आपको आना पड़ेगा अपने
बच्चों को भेजना पड़ेगा उस तरह की रैली
नहीं थीय ये स्वतः स्फूर्त विस्फोट एक तरह

का कहिए जनता का और ये जनता का बिहार को
बचाने के लिए देश को बचाने के लिए एक तरह
की प्रति प्रतिबद्धता हम ये हम लोग को
दिखा ठीक है रैली का यही संदेश है लेकिन
आपको हम बता दें कि जैसे ही रैली खत्म हुई
वैसे ही अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं भी

आने लगी सीधा सवाल संदीप सौरव से कितना
पैसा देके लोगों को बुलाया था मतलब जेडीयू
वाले बीजेपी वाले लगातार कह रहे हैं कि
पैसा देके भीड़ आई है और उसके बाद मतलब
फ्लॉप ही रहा एक तरह से आप फ्लॉप रहा मतलब
पैसा देके आप तो आप तो रैली में थी जी तो
आप तो ये कह नहीं सकती कि फल वही तो हम
जानना चाहते हैं पैसा दिया वाले कहेंगे

पैसा जो लेकर के रैली में आते हैं वो
पहचान में आ जाते हैं अच्छा उनको कहां
खड़ा रहना है कितना मुस्कुराना है कब
स्लोगन देना है कब पैसा लेकर निकल जाना है
ये पता रहता है उनको अच्छा महागठबंधन में
इस तरह का कोई सीन नहीं है दूसरी बात कि
ये जो पैसे के बल पर रैली पैसे के बल पर
राजनीति पैसे के बल पर चुनाव जी यानी

राजनीति में पैसा वाद अच्छा ये जो पैसा
वाद है उसपे एक छत्र राज बीजेपी का है हम
अभी सुप्रीम कोर्ट का जो निर्णय आया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गैर संवैधानिक
तरीके से आपने इलेक्टोरल बंड को देश के
ऊपर थोपा हम गैर राजनीतिक तरीके से जी मने
गैर संवैधानिक तरीके से तो इलेक्टोरल बंड

के माध्यम से जिनके पास आज के समय में
इलेक्टोरल बंड के चलते ईडी और सीबीआई के
चलते कहां किसी विपक्ष के पास पैसा बचा
हुआ है किसी विपक्ष के पास इवन कांग्रेस
के पास 70 साल में कांग्रेस के खाता में

जितना पैसा है 70 साल से वो लोग हैं शासन
में अधिकांश समय रहे हैं उनका खाता आप चेक
करवा लीजिए और यह 10 साल में भाजपा का
खाता चेक करवाइए तो पैसा देके कौन ला सकता
है किसकी क्षमता है भाजपा की है अच्छा आज
के समय में देश मतलब आप कह रहे किसी को
पैसा नहीं दिया गया भीड़ खुद ब बहुत यस
बहुत ओबवियस बात है अच्छा ये हम नहीं कह
रहे हैं ये आप भी जान रही है लेकिन आपको
चक सवाल एक पूछना है तो आप पूछ र नहीं

बिल्कुल जो आरोप है तो हम तो जवाब मांग
आरोप तो तरह-तरह के लोग लगाते हैं मैंने
वही कहा ना कि ये जो रैली हुई और इसमें
जनता की जो लहर दिखी तो जाहिर सी बात है
कि जो तानाशाह लोग हैं बार-बार कहता हूं
कि तानाशाह की एक प्रवृत्ति होती है हम वो
है कि वो अनिवार्य रूप से डरपोक होते हैं

तो रैली देख के डरे हुए हैं लोग और डर में
कुछ कुछ ब निकलता है ठीक ठीक है ठीक है
ठीक है हम मान लेते हैं कि रैली देखकर जन
का समर्थन देखकर डर है वहां पर आपकी बात
ही मान लेते हैं अच्छा ये बताइए कि क्या
क्योंकि अब तो आपको मालूम है कि अब लोकसभा
चुनाव काफी नजदीक है सीटों के बटवारे का

क्या हुआ क्या भीतर ही भीतर महागठबंधन ने
सीटों का गणित तय कर लिया है मोटी देखिए
हम लोग का सीट का बंटवारा भी पॉजिटिव
डायरेक्शन से लाइन लेंथ प बात हो चुकी है
अब उसमें थोड़ा बहुत बात जो फाइनल टच होना

है वो कर रहे हैं और उसके लिए अधिकारिक
व्यक्ति तो मैं नहीं हूं हम हमारी पार्टी
के राष्ट्रीय महासचिव हैं पार्टी की जो
केंद्रीय कमिटी है उन्होंने दो-तीन लोगों
को इसके लिए जिम्मेदारी दी है वो लोग बात
कर रहे हैं ठीक है जस्ट रैली खत्म हुई
मेरे ख्याल से बहुत ही जल्द ये हो जाएगा
लेकिन इस खेमे में आप देख लीजिए कि आसानी
से सीट बंटवारा होगा अच्छा दूसरा खेमा जो

है जिधर नीतीश जी पलट ही बात कर रहे हैं
जिधर नीतीश जी पलट के गए हैं और जो यहां
पे कह रहे थे कि हमको 16 से एक सीट कम
नहीं चाहिए अब वहां पे देखिए उनको क्या
होता है वहां पे कितनी मार अभी फंसी हुई

हैा मतलब आप कह रहे हैं कि बहुत माथा पची
होगी व एकदम वहां पे है 195 की जो सीट
लिस्ट आई है एक भी बिहार का क्यों नहीं दे
पाए लोग क्योंकि बिहार में ये फंसे हुए
हैं अच्छा फंसे हुए हैं हम ये आपसे जानना
चाहते हैं कि ठीक है आप कह रहे हैं वो[संगीत]

मोटा मोटी देखिए हम लोग का सीट का बंटवारा
भी पॉजिटिव डायरेक्शन से लाइन लेंथ पर बात
हो चुकी है यह एक तरह का चुनाव से पहले की
रणनीति है और हमारा पूरा फोकस इस बात के

लिए है कि हम 40 का 40 सीट जीते लेकिन
हमें लगता है कि महागठबंधन की जो बैठक
होगी बहुत जल्दी होगी उसमें ठीक तरीके से
बातचीत हो जाएगा तय हो जाएगा जो सीटों का
कब तक क्लियर हो जाएगा कि महागठबंधन एनडीए
से पहले हो जाएगा ऑफर दे रहे हैं निश्चित
तौर से अगर वो भाजपा को समझ करके कि ये
लोग कितने डेंजरस इस देश के लिए हो चुके
हैं अगर वो इधर आते हैं तो आ सकते हैं
नमस्कार हमारा नाम है समरीन और आपने देखना
शुरू कर दिया है लाइव सिटीज देखिए लोकसभा
चुनाव में अब काफी कम समय बचा हुआ है और
ऐसे में अब सबकी निगाहें टिकी हुई है कि

आखिर किसके खाते में कितनी सीटें आएंगी हम
आपको याद दिला दें आपको याद होगा कि
बीजेपी ने कुछ दिनों कबल ही यानी कि कुछ
दिनों पहले ही अपने उम्मीदवारों की पहली
सूची भी जारी कर दी है लेकिन ऐसे में अब
बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इंडिया

गठबंधन या फिर आप यह कहिए कि बिहार में
महागठबंधन का क्या होगा इनके सीटों का
गणित क्या है तो आज हम इसी मुद्दे पर सीधी
बातचीत करेंगे सीपीआईएमएल विधायक संदीप
सौरव जी से सबसे पहले बहुत शुक्रिया बात
करने के लिए जी शुक्रिया जी सबसे पहले तो

हम जानना चाहेंगे कि रैली तो बिल्कुल
शानदार रही यानी कि आप लोग ने तो कमाल कर
दिया इतिहास रज दिया एक बार देखिए रैली
में जो बड़ी भागीदारी हुई और जिसके चलते
एनडीए खेमे में हड़कंप मचा हुआ है लोग उल
जुल बयान दे रहे हैं तो यह रैली ने साबित
किया कि जन विश्वास जो है वो लोकतंत्र के

पक्ष में है जन का विश्वास संविधान के
पक्ष में है और जन का विश्वास महागठबंधन
के पक्ष में है क्योंकि आप देख लीजिए कि
बगैर कोई तामझाम के रैली हुआ था बहुत आनन
फानन में हम लोगों ने रैली बुलाया था और

जितनी संख्या आपको गांधी मैदान में दिखी
उससे ज्यादा संख्या गांधी मैदान से बाहर
थी बिलकुल जी और लगभग उतनी ही संख्या पटना
के बाहर जाम में लोग फंसे हुए थे जाम में
लोग फंसे हुए थे आप समझ लीजिए कि गांधी

मैदान की कैपेसिटी जो है वो 15 लाख के
आसपास है
तो 10 लाख से ज्यादा लोग गांधी मैदान में
और उतना ही लोग ज्यादा बाहर हम तो यह तब
हुआ जब यह मोदी जी की तरफ कोई प्रायोजित
रैली नहीं थी मोदी जी का जिस तरीके का
होता है रैली जिसमें सारे सरकारी बसों को
लगा दिया जाता है सरकारी अधिकारियों को सब

कर्मचारियों को कि आपको आना पड़ेगा अपने
बच्चों को भेजना पड़ेगा उस तरह की रैली
नहीं थीय ये स्वतः स्फूर्त विस्फोट एक तरह
का कहिए जनता का और ये जनता का बिहार को
बचाने के लिए देश को बचाने के लिए एक तरह

की प्रति प्रतिबद्धता हम ये हम लोग को
दिखा ठीक है रैली का यही संदेश है लेकिन
आपको हम बता दें कि जैसे ही रैली खत्म हुई
वैसे ही अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं भी
आने लगी सीधा सवाल संदीप सौरव से कितना
पैसा देके लोगों को बुलाया था मतलब जेडीयू
वाले बीजेपी वाले लगातार कह रहे हैं कि
पैसा देके भीड़ आई है और उसके बाद मतलब
फ्लॉप ही रहा एक तरह से आप फ्लॉप रहा मतलब
पैसा देके आप तो आप तो रैली में थी जी तो
आप तो ये कह नहीं सकती कि फल वही तो हम
जानना चाहते हैं पैसा दिया वाले कहेंगे

पैसा जो लेकर के रैली में आते हैं वो
पहचान में आ जाते हैं अच्छा उनको कहां
खड़ा रहना है कितना मुस्कुराना है कब
स्लोगन देना है कब पैसा लेकर निकल जाना है

इस तरह का कोई सीन नहीं है दूसरी बात कि
ये जो पैसे के बल पर रैली पैसे के बल पर
राजनीति पैसे के बल पर चुनाव जी यानी
राजनीति में पैसा वाद अच्छा ये जो पैसा

वाद है उसपे एक छत्र राज बीजेपी का है हम
अभी सुप्रीम कोर्ट का जो निर्णय आया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गैर संवैधानिक
तरीके से आपने इलेक्टोरल बंड को देश के
ऊपर थोपा हम गैर राजनीतिक तरीके से जी मने
गैर संवैधानिक तरीके से तो इलेक्टोरल बंड
के माध्यम से जिनके पास आज के समय में
इलेक्टोरल बंड के चलते ईडी और सीबीआई के
चलते कहां किसी विपक्ष के पास पैसा बचा
हुआ है किसी विपक्ष के पास इवन कांग्रेस

के पास 70 साल में कांग्रेस के खाता में
जितना पैसा है 70 साल से वो लोग हैं शासन
में अधिकांश समय रहे हैं उनका खाता आप चेक
करवा लीजिए और यह 10 साल में भाजपा का
खाता चेक करवाइए तो पैसा देके कौन ला सकता
है किसकी क्षमता है भाजपा की है अच्छा आज

के समय में देश मतलब आप कह रहे किसी को
पैसा नहीं दिया गया भीड़ खुद ब बहुत यस
बहुत ओबवियस बात है अच्छा ये हम नहीं कह
रहे हैं ये आप भी जान रही है लेकिन आपको
चक सवाल एक पूछना है तो आप पूछ र नहीं

बिल्कुल जो आरोप है तो हम तो जवाब मांग
आरोप तो तरह-तरह के लोग लगाते हैं मैंने
वही कहा ना कि ये जो रैली हुई और इसमें
जनता की जो लहर दिखी तो जाहिर सी बात है
कि जो तानाशाह लोग हैं बार-बार कहता हूं
कि तानाशाह की एक प्रवृत्ति होती है हम वो
है कि वो अनिवार्य रूप से डरपोक होते हैं

तो रैली देख के डरे हुए हैं लोग और डर में
कुछ कुछ ब निकलता है ठीक ठीक है ठीक है
ठीक है हम मान लेते हैं कि रैली देखकर जन
का समर्थन देखकर डर है वहां पर आपकी बात

ही मान लेते हैं अच्छा ये बताइए कि क्या
क्योंकि अब तो आपको मालूम है कि अब लोकसभा
चुनाव काफी नजदीक है सीटों के बटवारे का
क्या हुआ क्या भीतर ही भीतर महागठबंधन ने
सीटों का गणित तय कर लिया है मोटी देखिए
हम लोग का सीट का बंटवारा भी पॉजिटिव
डायरेक्शन से लाइन लेंथ प बात हो चुकी है
अब उसमें थोड़ा बहुत बात जो फाइनल टच होना
है वो कर रहे हैं और उसके लिए अधिकारिक
व्यक्ति तो मैं नहीं हूं हम हमारी पार्टी
के राष्ट्रीय महासचिव हैं पार्टी की जो
केंद्रीय कमिटी है उन्होंने दो-तीन लोगों
को इसके लिए जिम्मेदारी दी है वो लोग बात
कर रहे हैं ठीक है जस्ट रैली खत्म हुई
मेरे ख्याल से बहुत ही जल्द ये हो जाएगा
लेकिन इस खेमे में आप देख लीजिए कि आसानी
से सीट बंटवारा होगा अच्छा दूसरा खेमा जो
है जिधर नीतीश जी पलट ही बात कर रहे हैं
जिधर नीतीश जी पलट के गए हैं और जो यहां
पे कह रहे थे कि हमको 16 से एक सीट कम
नहीं चाहिए अब वहां पे देखिए उनको क्या
होता है वहां पे कितनी मार अभी फंसी हुई
हैा मतलब आप कह रहे हैं कि बहुत माथा पची
होगी व एकदम वहां पे है 195 की जो सीट
लिस्ट आई है एक भी बिहार का क्यों नहीं दे
पाए लोग क्योंकि बिहार में ये फंसे हुए
हैं अच्छा फंसे हुए हैं हम ये आपसे जानना
चाहते हैं कि ठीक है आप कह रहे हैं वो
फंसे हुए हैं वो कह रहे हैं आप फंसे हुए
हैं आप लोग कब इसको सार्वजनिक करिएगा कि
किसके खाते में कितनी सीट क्या यहां पर भी
कोई पेच फसा हुआ है संदीप जी नहीं नहीं
पेच नहीं फसा हुआ है यह एक तरह का चुनाव
से पहले की रणनीति है और हमारा पूरा फोकस
इस बात के लिए है कि हम 40 का 40 सीट जीते
40 की 40 जीते लेकिन मालूम है ना कि उस
बार कितनी मिली थी अब उस बार का मौसम अलग
है इस बार का मौसम अलग है लग रहा है कि
बदलाव है दिख गया है गांधी मैदान में दिखा
ना कि बदलाव है अच्छा जो यूथ पिछली बार दो
करोड़ नौकरी के चक्कर में मोदी जी के
चुंगल में फंस रहे थे उन सबको समझ में आ
गया है इस बीच में गंगा में कितनी पानी
कितना पानी बहा जी ये आप लोग जानते हैं कि
बीच में नौजवानों को जो सेना की बहाली में
जाने की इच्छुक नौजवान है उनको अग्नि पथ
ला करके बर्बाद कर दिया रेलवे को
प्राइवेटाइज किया और पा साल की जो बहाली
आनी चाहिए थी लगभग 5 लाख वहां पर 600
बहाली दी गई तो आप कर क्या रहे हैं तो
इसलिए युवाओं का जो आक्रोश है इस बार बहुत
ज्यादा खामियाजा बीजेपी को मतलब इस बार 40
में से 40 एनडीए को निश्चित त नहीं मिल
पाएगा बिहार में 40 में से 40 40 40 वो
हारेंगे ब क्या बात कर रहे हैं एकदम ये
ओवर कॉन्फिडेंस है आपका ये ओवर कॉन्फिडेंस
नहीं है अगर देखिए हम तो आप लोग कहते हैं
कि बीजेपी जो है वो अकेले मोदी जी हैं
बाकी सब लोग मिले हुए हैं हम कह रहे हैं
कि अकेले मोदी जी नहीं है वो तो छोड़
दीजिए वो तो मोदी का परिवार है अब तो
परिवार में कौन-कौन लोग हैं जी आपने देखा
कैसे कैसे हत्या
बलात्कारी जिनको पैरोल से जबरदस्ती नियम
की धज्जियां उड़ाते हुए जेल से बाहर रख
रहे हैं जिसको 15 अगस्त के दिन गुजरात में
ले जाकर के माला पहनाया बलात्कारी को तो
यही लोग तो मोदी जी के परिवार हैं अच्छा
जो
जी के परिवार हैं अच्छा ठीक है ठीक है हम
समझ गए लेकिन संदीप जी से हम ये जानना
चाहेंगे कि माले को कितनी सीट है देखिए
माले में हम लोगों
ने आठ सीटों की सूची दी है आठ सीट लगता है
मालिक को आठ सीट मिलेगी आठ सीट की सूची दी
है हमने कहा कि इसी के भीतर हम लोग को हां
बातचीत होगी उसी कौन-कौन सी सीटें तो
सार्वजनिक अखबारों में कई बार छपा हुआ है
फिर भी हम चाहेंगे कि एक बार आप बता ही
दीजिए देखिए हमने दिया है आरा सिवान कारा
काट
जहानाबाद पाटलीपुत्र
वाल्मीकि नगर कटिहार और नालंदा जी आपने
सिवान का भी जिक्र किया सिवान में मालूम
है ना कि सिवान में तो एक तो जेडीयू की
सिटिंग सीट है ही वो आपको यह भी मालूम है
कि वहां पर हिना साहब भी है यानी कि वोह
शाहबुद्दीन का गढ़ है और शहाबुद्दीन के
गढ़ में माले कोई कमाल कर पाएगा अच्छा
आपको पता है कि नहीं कि सिवान जो है वो
माले का भी गढ़ है बिल्कुल लेकिन अब तो
हवा और बयार अलग है अब तो मौसम बदला हुआ
है ची ये सारी चीजें तय करने के लिए कुछ
लोग अधिकृत किए जाते हैं जी सब पार्टी से
हम तो राष्ट्रीय जनता दल से भी कुछ लोग
अधिकृत हैं हमारी पार्टी से भी कुछ लोग
अधिकृत है वो लोग बैठ के बात करेंगे उसमें
से कौन-कौन सी सीटें मिलेंगी ये तो आपको
बहुत जल्द पता चल जाएगा अच्छा ये बताइए कि
कितने सीटों पर कंप्रोमाइज कर लीजिएगा
मतलब आठ से हो सकता है ना कि एक सीट एक ही
सीट मिले माले को ना भी सीट ये भी हो सकता
है जब होने हो सकता ही पे बात है लेकिन
हमें लगता है कि महागठबंधन की जो बैठक
होगी बहुत जल्दी होगी
उसमें ठीक तरीके से बातचीत हो जाएगा तय हो
जाएगा अच्छा पाटली पुत्रा की भी आपने
जिक्र कर दिया यहां पर क्या पाटली पुत्रा
से संदीप सौरव मैदान में होंगे यह चीज भी
तय करना पार्टी का काम है
अच्छा पाटली पुत्रा में हम लोग का पाटली
पुत्रा में हम लोग का दो विधानसभा सीट है
जी उसके अलावा मसौरी में हम लोग का पहले
रह चुका है तो हो सकता है कि पाटली पुत्रा
प हम लोग का क्लेम है पार्टी का अब उसमें
अगर तय होगा और पार्टी ने मुझे जिम्मेदारी
दीी तो मैं लडूंगा लड़गा अच्छा एक आखिरी
सवाल है कि कब तक यह जो सीटों का गणित है
कब तक क्लियर हो जाएगा कि महागठबंधन में
एनडीए से पहले हो जाएगा एनडीए से पहले हो
जाएगा मतलब एनडीए तो अब करने ही जा रहा है
र एक से दो दिन का इंतजार और ना ना ना
माथा फुटबल बचा हुआ है सब
अच्छा चाचा भतीजा को कहां सीट मिलेगा हमको
कहां मिलेगा नीतीश जी को कहां मिलेगा
बीजेपी कहां लड़ना चाहेगी हम य बहुत माथा
फुट मतलब आप कह रहे हैं कि एनडीए टूटने
वाली है क्या माथा फुटल है है माथा पुटो
वल का जिक्र कर दिया है तो क्या टूट के
आसार नजर आ रहे हैं संदीप सौरव को संभव है
क्योंकि उधर जो लोग भी गए हुए हैं उनको
वैचारिक से कोई मतलब नहीं है वो सिर्फ
चुनावी लालच में ईडी सीबीआई बैकग्राउंड
में काम कर रहा होगा निश्चित तौर से पैसा
वाद काम कर रहा होगा और बार-बार जो ये लोग
बीजेपी के लोग परिवारवाद की बात करते हैं
आप लोग को ये भी समझना चाहिए कि परिवारवाद
चलिए वो अच्छा नहीं है किसी पार्टी में
बीजेपी में भी परिवारवाद है वो भी अच्छा
नहीं हम लेकिन परिवारवाद से राजनीति को
जितना नुकसान है जी उसे 1000 गुना हम पैसा
वाद से नुकसान है अच्छा और भाजपा
परिवारवाद से ज्यादा खतरनाक है
पैसावाला की आंधी में आप लोकतांत्रिक
मूल्यों की धज्जिया उड़ा देते हैं हम
परिवारवाद अगर कोई है या किसी के परिवार
के अगले जनरेशन के और वो देखिए देश की
बनावट में परिवारवाद है आप पिता का
संपत्ति पुत्र के नाम हो रहा है पिता े
पुत्र के नाम हो रहा है तो पिता की विरासत
पुत्र संभालते हैं लेकिन लेकिन एक बात हम
आपको बता द लेकिन लेकिन पैसा बाद जहांज पे
आ जाएगा जी तो आप समझ लिए कि जनता का
वोटिंग राइट जो है वो अपने पक्ष से अपने
मन से किसी को चुन रहा है लेकिन पैसा वाद
हावी हुआ और जिसको चुना वो किसी और पार्टी
में चला गया मतलब आप कह रहे हैं कि
लोकतंत्र खतरे में आ जाएगा लेकिन हम आपको
बता दें ये मेरा आखिरी सवाल होगा संदीप जी
बीते दिन से यानी कि कल से एक चर्चा जोरों
पर है और लगातार महागठबंधन के तमाम नेता
चिराग पासवान और मुकेश नी को इनवाइट कर
रहे हैं ऑफर दे रहे कि उधर छोड़िए ना उधर
बहुत झमेला है आप इधर आ जाइए तो क्या
संदीप सौरव भी कोई ऐसा ऑफर देंगे चिराग
पासवान मुकेश मैं क्यों ऑफर दूंगा अच्छा
मैं जानता हूं कि ये चिराग पासवान है या
बाकी लोग हैं हा मुकेश स कोई वैचारिक
प्रतिबद्धता नहीं है जी भाजपा से आरएसएस
से लड़ने के लिए वैचारिक प्रतिबद्धता
जरूरी है जैसे नीतीश जी जब थे इधर उस समय
भी हम लोग मानते थे कि इंडिया गठबंधन में
वह कोर भूमिका में नहीं आ पाएंगे क्योंकि
वह विचार धाराम स्तर पे भाजपा के खिलाफ
खड़े नहीं हो पाएंगे उन्होंने काम हमने
काम करवाया उन्होंने काम नहीं करवाया यह
फ्रेम नहीं हो सकता है ह फ्रेम यह होना
चाहिए कि कैसे बीजेपी देश के लोकतंत्र और
संविधान की धज्जियां उड़ा रही है हम यह
फ्रेम होना चाहिए तो इस पे जिनका कमिटमेंट
है वह लोग आए एक एक जगह पे बाकी जो
महागठबंधन का नेतृत्व कारी लोग हैं वह लोग
तय करेंगे किनको ऑफर फायदा होगा चिराग और
अगर मुकेश सहनी आ जाते हैं महा भाजपा के
खिलाफ देखिए ये भाजपा जो बिहार देश में
अभी है ये दुनिया में और भी जगह पर ऐसे
हुआ है कि इस तरह की ताकतें आती हैं जो
सत्ता के सारे मोर्चे को अपने चुनावी
फायदे के लिए अपने राजनीतिक फायदे के लिए
गलत तरीके से इस्तेमाल करती हैं और उसमें
उसके खिलाफ लड़ना है तो बड़ी एकजुटता एक
ऐतिहासिक जरूरत होती है मतलब बड़ी टीम
बड़ी टीम ज्यादा लोग मतलब फिर चिराग भी आ
जाए सहनी भी आ जाए एकदम आ सकते हैं खुला
है दरवाजा
ऑफर दे रहे हैं निश्चित तौर से अगर वो
भाजपा को समझ करके कि ये लोग कितने डेंजरस
इस देश के लिए हो चुके हैं अगर वो इधर आते
हैं तो आ सकते हैं तो आ सकते हैं लेकिन
इसका इसको इस बात को करने के लिए हम
अधिकृत नहीं है बिल्कुल जी तो सुना आपने
क्या कुछ कहा है संदीप सौरव ने देखिए
तफसील से हम लोगों ने चर्चा की है कि आखिर
महागठबंधन अपने पत्ते कब खोलेगी और कब पता
चलेगा कि आखिर किसके खाते में कितनी सीटें
जाएंगी तो यह पूरी बातचीत आपको कैसी लगी
है कमेंट करके हमें जरूर बताइएगा तो इस
तरह के तमाम अपडेट्स के लिए ऐसे ही हमारे
साथ बने रहिएगा और देखते रहिएगा लाइव
सिटीज बहुत
[संगीत]
शुक्रिया
फंसे हुए हैं वो कह रहे हैं आप फंसे हुए
हैं आप लोग कब इसको सार्वजनिक करिएगा कि
किसके खाते में कितनी सीट क्या यहां पर भी
कोई पेच फसा हुआ है संदीप जी नहीं नहीं
पेच नहीं फसा हुआ है यह एक तरह का चुनाव
से पहले की रणनीति है और हमारा पूरा फोकस
इस बात के लिए है कि हम 40 का 40 सीट जीते
40 की 40 जीते लेकिन मालूम है ना कि उस
बार कितनी मिली थी अब उस बार का मौसम अलग
है इस बार का मौसम अलग है लग रहा है कि
बदलाव है दिख गया है गांधी मैदान में दिखा
ना कि बदलाव है अच्छा जो यूथ पिछली बार दो
करोड़ नौकरी के चक्कर में मोदी जी के
चुंगल में फंस रहे थे उन सबको समझ में आ
गया है इस बीच में गंगा में कितनी पानी
कितना पानी बहा जी ये आप लोग जानते हैं कि
बीच में नौजवानों को जो सेना की बहाली में
जाने की इच्छुक नौजवान है उनको अग्नि पथ
ला करके बर्बाद कर दिया रेलवे को
प्राइवेटाइज किया और पा साल की जो बहाली
आनी चाहिए थी लगभग 5 लाख वहां पर 600
बहाली दी गई तो आप कर क्या रहे हैं तो
इसलिए युवाओं का जो आक्रोश है इस बार बहुत
ज्यादा खामियाजा बीजेपी को मतलब इस बार 40
में से 40 एनडीए को निश्चित त नहीं मिल
पाएगा बिहार में 40 में से 40 40 40 वो
हारेंगे ब क्या बात कर रहे हैं एकदम ये
ओवर कॉन्फिडेंस है आपका ये ओवर कॉन्फिडेंस
नहीं है अगर देखिए हम तो आप लोग कहते हैं
कि बीजेपी जो है वो अकेले मोदी जी हैं
बाकी सब लोग मिले हुए हैं हम कह रहे हैं
कि अकेले मोदी जी नहीं है वो तो छोड़
दीजिए वो तो मोदी का परिवार है अब तो
परिवार में कौन-कौन लोग हैं जी आपने देखा
कैसे कैसे हत्या
बलात्कारी जिनको पैरोल से जबरदस्ती नियम
की धज्जियां उड़ाते हुए जेल से बाहर रख
रहे हैं जिसको 15 अगस्त के दिन गुजरात में
ले जाकर के माला पहनाया बलात्कारी को तो
यही लोग तो मोदी जी के परिवार हैं अच्छा
जो
जी के परिवार हैं अच्छा ठीक है ठीक है हम
समझ गए लेकिन संदीप जी से हम ये जानना
चाहेंगे कि माले को कितनी सीट है देखिए
माले में हम लोगों
ने आठ सीटों की सूची दी है आठ सीट लगता है
मालिक को आठ सीट मिलेगी आठ सीट की सूची दी
है हमने कहा कि इसी के भीतर हम लोग को हां
बातचीत होगी उसी कौन-कौन सी सीटें तो
सार्वजनिक अखबारों में कई बार छपा हुआ है
फिर भी हम चाहेंगे कि एक बार आप बता ही
दीजिए देखिए हमने दिया है आरा सिवान कारा
काट
जहानाबाद पाटलीपुत्र
वाल्मीकि नगर कटिहार और नालंदा जी आपने
सिवान का भी जिक्र किया सिवान में मालूम
है ना कि सिवान में तो एक तो जेडीयू की
सिटिंग सीट है ही वो आपको यह भी मालूम है
कि वहां पर हिना साहब भी है यानी कि वोह
शाहबुद्दीन का गढ़ है और शहाबुद्दीन के
गढ़ में माले कोई कमाल कर पाएगा अच्छा
आपको पता है कि नहीं कि सिवान जो है वो
माले का भी गढ़ है बिल्कुल लेकिन अब तो
हवा और बयार अलग है अब तो मौसम बदला हुआ
है ची ये सारी चीजें तय करने के लिए कुछ
लोग अधिकृत किए जाते हैं जी सब पार्टी से
हम तो राष्ट्रीय जनता दल से भी कुछ लोग
अधिकृत हैं हमारी पार्टी से भी कुछ लोग
अधिकृत है वो लोग बैठ के बात करेंगे उसमें
से कौन-कौन सी सीटें मिलेंगी ये तो आपको
बहुत जल्द पता चल जाएगा अच्छा ये बताइए कि
कितने सीटों पर कंप्रोमाइज कर लीजिएगा
मतलब आठ से हो सकता है ना कि एक सीट एक ही
सीट मिले माले को ना भी सीट ये भी हो सकता
है जब होने हो सकता ही पे बात है लेकिन
हमें लगता है कि महागठबंधन की जो बैठक
होगी बहुत जल्दी होगी
उसमें ठीक तरीके से बातचीत हो जाएगा तय हो
जाएगा अच्छा पाटली पुत्रा की भी आपने
जिक्र कर दिया यहां पर क्या पाटली पुत्रा
से संदीप सौरव मैदान में होंगे यह चीज भी
तय करना पार्टी का काम है
अच्छा पाटली पुत्रा में हम लोग का पाटली
पुत्रा में हम लोग का दो विधानसभा सीट है
जी उसके अलावा मसौरी में हम लोग का पहले
रह चुका है तो हो सकता है कि पाटली पुत्रा
प हम लोग का क्लेम है पार्टी का अब उसमें
अगर तय होगा और पार्टी ने मुझे जिम्मेदारी
दीी तो मैं लडूंगा लड़गा अच्छा एक आखिरी
सवाल है कि कब तक यह जो सीटों का गणित है
कब तक क्लियर हो जाएगा कि महागठबंधन में
एनडीए से पहले हो जाएगा एनडीए से पहले हो
जाएगा मतलब एनडीए तो अब करने ही जा रहा है
र एक से दो दिन का इंतजार और ना ना ना
माथा फुटबल बचा हुआ है सब
अच्छा चाचा भतीजा को कहां सीट मिलेगा हमको
कहां मिलेगा नीतीश जी को कहां मिलेगा
बीजेपी कहां लड़ना चाहेगी हम य बहुत माथा
फुट मतलब आप कह रहे हैं कि एनडीए टूटने
वाली है क्या माथा फुटल है है माथा पुटो
वल का जिक्र कर दिया है तो क्या टूट के
आसार नजर आ रहे हैं संदीप सौरव को संभव है
क्योंकि उधर जो लोग भी गए हुए हैं उनको
वैचारिक से कोई मतलब नहीं है वो सिर्फ
चुनावी लालच में ईडी सीबीआई बैकग्राउंड
में काम कर रहा होगा निश्चित तौर से पैसा
वाद काम कर रहा होगा और बार-बार जो ये लोग
बीजेपी के लोग परिवारवाद की बात करते हैं
आप लोग को ये भी समझना चाहिए कि परिवारवाद
चलिए वो अच्छा नहीं है किसी पार्टी में
बीजेपी में भी परिवारवाद है वो भी अच्छा
नहीं हम लेकिन परिवारवाद से राजनीति को
जितना नुकसान है जी उसे 1000 गुना हम पैसा
वाद से नुकसान है अच्छा और भाजपा
परिवारवाद से ज्यादा खतरनाक है
पैसावाला की आंधी में आप लोकतांत्रिक
मूल्यों की धज्जिया उड़ा देते हैं हम
परिवारवाद अगर कोई है या किसी के परिवार
के अगले जनरेशन के और वो देखिए देश की
बनावट में परिवारवाद है आप पिता का
संपत्ति पुत्र के नाम हो रहा है पिता े
पुत्र के नाम हो रहा है तो पिता की विरासत
पुत्र संभालते हैं लेकिन लेकिन एक बात हम
आपको बता द लेकिन लेकिन पैसा बाद जहांज पे
आ जाएगा जी तो आप समझ लिए कि जनता का
वोटिंग राइट जो है वो अपने पक्ष से अपने
मन से किसी को चुन रहा है लेकिन पैसा वाद
हावी हुआ और जिसको चुना वो किसी और पार्टी
में चला गया मतलब आप कह रहे हैं कि
लोकतंत्र खतरे में आ जाएगा लेकिन हम आपको
बता दें ये मेरा आखिरी सवाल होगा संदीप जी
बीते दिन से यानी कि कल से एक चर्चा जोरों
पर है और लगातार महागठबंधन के तमाम नेता
चिराग पासवान और मुकेश नी को इनवाइट कर
रहे हैं ऑफर दे रहे कि उधर छोड़िए ना उधर
बहुत झमेला है आप इधर आ जाइए तो क्या
संदीप सौरव भी कोई ऐसा ऑफर देंगे चिराग
पासवान मुकेश मैं क्यों ऑफर दूंगा अच्छा
मैं जानता हूं कि ये चिराग पासवान है या
बाकी लोग हैं हा मुकेश स कोई वैचारिक
प्रतिबद्धता नहीं है जी भाजपा से आरएसएस
से लड़ने के लिए वैचारिक प्रतिबद्धता
जरूरी है जैसे नीतीश जी जब थे इधर उस समय
भी हम लोग मानते थे कि इंडिया गठबंधन में
वह कोर भूमिका में नहीं आ पाएंगे क्योंकि
वह विचार धाराम स्तर पे भाजपा के खिलाफ
खड़े नहीं हो पाएंगे उन्होंने काम हमने
काम करवाया उन्होंने काम नहीं करवाया यह
फ्रेम नहीं हो सकता है ह फ्रेम यह होना
चाहिए कि कैसे बीजेपी देश के लोकतंत्र और
संविधान की धज्जियां उड़ा रही है हम यह
फ्रेम होना चाहिए तो इस पे जिनका कमिटमेंट
है वह लोग आए एक एक जगह पे बाकी जो
महागठबंधन का नेतृत्व कारी लोग हैं वह लोग
तय करेंगे किनको ऑफर फायदा होगा चिराग और
अगर मुकेश सहनी आ जाते हैं महा भाजपा के
खिलाफ देखिए ये भाजपा जो बिहार देश में
अभी है ये दुनिया में और भी जगह पर ऐसे
हुआ है कि इस तरह की ताकतें आती हैं जो
सत्ता के सारे मोर्चे को अपने चुनावी
फायदे के लिए अपने राजनीतिक फायदे के लिए
गलत तरीके से इस्तेमाल करती हैं और उसमें
उसके खिलाफ लड़ना है तो बड़ी एकजुटता एक
ऐतिहासिक जरूरत होती है मतलब बड़ी टीम
बड़ी टीम ज्यादा लोग मतलब फिर चिराग भी आ
जाए सहनी भी आ जाए एकदम आ सकते हैं खुला
है दरवाजा
ऑफर दे रहे हैं निश्चित तौर से अगर वो
भाजपा को समझ करके कि ये लोग कितने डेंजरस
इस देश के लिए हो चुके हैं अगर वो इधर आते
हैं तो आ सकते हैं तो आ सकते हैं लेकिन
इसका इसको इस बात को करने के लिए हम
अधिकृत नहीं है बिल्कुल जी तो सुना आपने
क्या कुछ कहा है संदीप सौरव ने देखिए
तफसील से हम लोगों ने चर्चा की है कि आखिर
महागठबंधन अपने पत्ते कब खोलेगी और कब पता
चलेगा कि आखिर किसके खाते में कितनी सीटें
जाएंगी तो यह पूरी बातचीत आपको कैसी लगी
है कमेंट करके हमें जरूर बताइएगा तो इस
तरह के तमाम अपडेट्स के लिए ऐसे ही हमारे
साथ बने रहिएगा और देखते रहिएगा लाइव
सिटीज बहुत
[संगीत]
शुक्रिया

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