Farmers Protest: राकेश टिकैत ने फिर दी सरकार को चुनौती

किसानों के भारत बंद आह्वान को देखते हुए
यूपी से लगे दिल्ली के बॉर्डर पर सुरक्षा
व्यवस्था को पहले से और ज्यादा चाक चौबंद
कर दिया गया है इसी के साथ अब राकेश टिकैत
भी दिल्ली कूछ कर रहे हैं किसानों का साथ

देते हुए ग्रामीण भारत बंद का ऐलान कर नया
कांसेप्ट दिया है राकेश टिकेट ने एबीपी
नेटवर्क से खास बातचीत में ग्रामीण भारत
बंद क्यों की इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी
उन्होंने कहा भारत ग्रामीण में बसता है
इसलिए इस नए कांसेप्ट के जरिए हम अपने

किसान भाइयों का साथ दे रहे हैं जो भारत
है वो गांव में बसता है सबने कहा हमने कहा
भा गांव की तरफ भी चलो सरकार भी कह रही के
गांव में चलो चौपाल करो हमने भी कहा कि
चौपाल करेंगे तो इनसे क्वेश्चन पूछना तो
भी तो चौपाल करने दो इनसे लोग क्वेश्चन
करेंगे लेकिन वहां पर बैरी केटिंग लगा के
छनछन के लोगों को अंदर जाने दे कि यह कौन
है क्या क्वेश्चन करेगा हा तो ग्रामीण
भारत
बंद तो यह होगा एक नया वह है य
कांसेप्ट और किसान अपने खेत में नहीं
जाएगा गन्ने की तोल ना करे छोल ना
करें हम क्यों शहर में आएंगे दुकान बंद

करो वही दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों की
जगह जगह दिल्ली कुछ करने से रोक दिया गया
है इस पर राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों
के अलग-अलग ज आगे पीछे चले इसलिए पुलिस ने
उन्हें रोक पाई जब सब साथ हो जाएंगे तो

कोई नहीं रोक पाएगा लेकिन हमारा आंदोलन आज
से शुरू हो गया है किसान रोक दिए इतनी दूर
का किसान क्या करता था पंजाब की सारे
जत्थे बंदी एक जगह आ जाए तो इनको कोई नहीं
रोके अभी कुछ लोग एक दिन पहले चल दिए कुछ
लोग दो दिन बाद में चल र एसकेम का आंदोलन
आज से शुरू है संयुक्त मोर्चे का ये एक
दूसरा संगठन है उसने कॉल दे दी तो अलग-अलग
उस पर लोग लड़ रहे हैं मुद्दे सबके एक है
तो जैसे दिल्ली का आंदोलन जीता गया वे सब

 

लोग इकट्ठा रहना
चाहिए राकेश टिके ने कहा संयुक्त किसान
मोर्चा को जब हमारी जरूरत होगी तभी हम साथ
खड़े दिखाई देंगे क्योंकि दिल्ली हमारे
लिए ज्यादा दूर नहीं है यानी कि राकेश
टिकैत बस अपनी तैयारी में बैठे हैं जैसे
ही आहवान होगा वो दिल्ली के लिए कुछ
करेंगे नहीं हमारा तो एसकेएम के साथ में
हम है एसकेएम की आज भारत बंद की कॉल है और
जो भी एसकेएम निर्णय लेगा ये नहीं कि

आंदोलन दिल्ली जाएंगे तो जब
होगा दिल्ली तो हमारे गांव और हमारी सड़क
दिल्ली है मैं अपने गांव के बाहर निकल कर
बैठ गया मेरी दिल्ली यही है तो वहां से भी
आंदोलन शुरू
होगा किसानों के साथ है किसान तो हम तो
किसान और कम कहां रहेंगे हम कोई
इंडस्ट्रीज के साथ में किसानों के साथ में

उन किसानों के साथ में कोई भी नाइंसाफी
होगी तो देश का किसान साथ है नावे किसान
दूर हम से है और ना हमारे से दिल्ली दूर
है दिल्ली नजदीक और किसान में ज्यादा टाइम
लगा लेकिन दिल्ली नजदीक है हमारे से राकेश
टिकैत ने सरकार पर आने वाले कुछ सालों पर
किसानों की जमीन पर कब्जा करने का आरोप

लगाया कहा पहले भी पूंजीपतियों के पास
जमीने थी और फिर जब उन्हें जमीने देने की
कोशिश की जा रही है उद्योगपतियों का कर्ज
तो माफ हो जाता है पर किसान क्यों नहीं
साथ ही किसानों के आंदोलन के लंबा चलने की
बात कही इनका अभी 30 40 साल जमीन पर कब्जा
करने का प्लान है इने कहा कि सृष्टि थोड़ा
खत्म हो जाएगी भाई किसान के पास तो जमीन
50 60 70 साल ही तो रही उससे पहले भी बड़े
लोगों के पास में थी जो बड़े जमीदार और

होते थे पूंजीवाद किने कहा कि तो जमीन चली
गई इनके पास वे फिर जमीन छीनने का प्लान
कर रहे हैं बड़ा उद्योगपति कर्जा लेगा
उसका कर्जा माफ होगा वह पैसा फिर जमीन में

लगाएगा फिर कर्जा लेगा किसान को कर्जा
देंगे उसकी कर्जे में जमीन छिन देंगे इनका
कर्जा माफ होगा इस तरह से राकेश टिकैत एक
बार फिर से किसानों के साथ खड़े होने की
पूरी तैयारी में लग गए हैं और अगर सरकार
किसानों की मांगे पूरी नहीं करती तो शायद
कहीं यह आंदोलन फिर से बड़ा रूप ना ले
ले एबीपी गंगा खबर
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