Global Warming के कारण अंटार्कटिका में हुआ बूरा हाल, पूरी दुनिया पर मंडरा रहा संकट!

क्या दुनिया में तबाही मचाने वाले हैं
ग्लेशियर क्या बर्फीली दुनिया में ऐसा
बवंडर उठ रहा है जिसके आगे सुपर पावर
मुल्क भी सरेंडर करते नजर आएंगे आखिर
ग्लेशियर के संसार में ऐसी कौन सी

उथल-पुथल मची है जिसने टेंशन बढ़ा दी है
क्योंकि अंटार्कटिक में ग्लेशियर का घटता
दायरा इसी खतरे का लान बजा रहा है यह
रिपोर्ट देखिए बर्फ की ऊंची ऊंची चट्टानें
ध्वस्त हो रही हैं बर्फीली दुनिया में

भयानक बवंडर उठ रहा है ग्लेशियर के संसार
में संकट खड़ा हो रहा है क्योंकि तेजी से
तबाह हो रहे हैं ग्लेशियर सवाल है कि
ग्लेशियर क्यों बर्बाद हो रहे हैं

ग्लेशियर की तबाही के पीछे क्या कारण है
तेजी से पिघलते ग्लेशियर क्या संकेत दे
रहे हैं और क्या ग्लेशियर की वजह से धरती
पर खतरा मंडा रहा है इन सभी सवालों के

जवाब तलाशें लेकिन पहले कुदरत के उस अलर्ट
पर नजर डालना जरूरी है जो आ रहा है
अंटार्कटिका से जहां बर्फीली दुनिया पर
तेजी से खतरा पैदा हो रहा है तुर्की के
वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि पिछले 3

साल में ही अंटार्कटिका में तुर्की के
आकार के बराबर बर्फ कम हो गई है रिसर्चर
ने यूएई और सैटेलाइट से डाटा लेकर इस
महाद्वीप की बर्फ को लेकर यह आशंका जताई
है जिसके मुताबिक इस अवधि के दौरान
अंटार्टिका से तकरीबन 78 105000 वर्ग

किलोमीटर तक फैली बर्फ गायब हो गई है 2022
से 2023 के बीच हॉर शू आइलैंड पर 1000
वर्ग मीटर इलाके में बर्फ में 7 क्यूबिक
मीटर की औसत कमी आई है ऐसे में
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि

वर्तमान बर्फ पिघलने की दर पर लगाम नहीं
लगाई गई तो वायुमंडल में वाटर वेपर और
ग्रीन हाउस गैसें बढ़ सकती हैं जिससे

जलवायु परिवर्तन में तेजी आ सकती है मतलब
धरती के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है
अंटार्कटिका में छोटे-बड़े सभी मिलाकर कई
हजार ग्लेशियर हैं इनमें से 500 से ज्यादा

ग्लेशियर का नामकरण किया जा चुका है और
यहां के ग्लेशियर पर मंडरा रहे खतरे को
लेकर वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं लेकिन

अभी तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला है
माना जा रहा है कि ग्लेशियर की तबाही की
सबसे बड़ी वजह है ग्लोबल वार्मिंग
अंटार्टिका में गर्मी बढ़ रही है जिसके

चलते ग्लेशियर पिघल रहे हैं कुछ दिनों
पहले अमेरिका स्पेस एजेंसी नासा ने बताया
था कि पूर्वी अंटार्कटिका में बर्फ का एक
विशाल पहाड़ टूटकर अलग हो गया था

वैज्ञानिकों के मुताबिक इसका आकार दिल्ली
से थोड़ा सा छोटा था जबकि अमेरिका के लॉस
एंजलिस और इटली की राजधानी रोम के बराबर
था अंटार्कटिका पृथ्वी का पांचवा सबसे
बड़ा महाद्वीप है जिसका 58 फीदी हिस्सा

औसतन 1.6 किमी मोटी बर्फ से ढका हुआ है
अंटार्कटिका में हर तरफ सिर्फ ग्लेशियर ही
नजर आते हैं यहां के तापमान की बात करें
तो आज तक यहां पर सबसे ज्यादा तापमान 14.5
डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है करीब

53 साल पहले यह बहुत गर्म इलाका था तब
यहां पर तापमान 20 डिग्री सेल्सियस हुआ
करता था लेकिन चिंता यह है कि पिछले कुछ
सालों में यहां का तापमान फिर बढ़ने लग
गया है जिसे ही ग्लेशियर की तबाही की वजह
माना जा रहा है इस खबर में बस इतना ही यह

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