INDIA गठबंधन से आ रही 3 ख़बरों से बीजेपी में तनाव! यूपी -दिल्ली के बाद बंगाल से बड़ी खबर!

भारतीय जनता पार्टी तो कह रही है कि इस
बार 400 पार पूरा मीडिया भी कह रहा है कि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लौटना तय है

मगर इंडिया गठबंधन हिम्मत नहीं हार रही और
यही लोकतंत्र का तकाजा है दोस्तों आप बेशक
हार जाओ बेशक आपको सामने चुनौती बहुत कठिन
दिखाई दे रही है मगर लड़ और यही लोकतंत्र

का तकाजा है यही मुकाबले का भी तकाजा है
खबर क्या है मैं आपको बताता हूं दोस्तों
तमाम मीडिया ने पहले खबरें फैला दी थी कि
भाई समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में बात

नहीं बन रही है उनमें रिश्ते टूट गए हैं
आप जानते हैं इस तरह की तमाम खबरें चलाई
गई थी कि बात टूट गई बात नहीं हो रही है
इस तरह की बातें हो रही थी गठबंधन को लेकर

लगातार सवाल उठा रहे थे मगर फिर यह
व्यक्ति यानी कि अखिलेश यादव अचानक तुरुप
का एक पत्ता खेलता है और वोह कहता है कि
17 सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी और 63
पर समाजवादी पार्टी चुनाव लड़ेगी हम यह

बात स्पष्ट कर दें कि जयंत चौधरी पहले से
ही इंडिया गठबंधन से बाहर निकल गए हैं कुछ
हद तक इसने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में
अखिलेश यादव के लिए मुश्किलें आसान कर दी
थी अब वह धर्म संकट उनके पास नहीं रहा

नतीजा यह हो गया दोस्तों कि अब कांग्रेस
जो है वह 17 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और
समाजवादी पार्टी 63 सीटों पर चुनाव लड़
रही है खबर अब दिल्ली से भी आ रही है

 

दोस्तों दिल्ली में भी चार तीन का
फार्मूला सामने उभर कर आया है यानी कि आम
आदमी पार्टी चार सीटों पर और कांग्रेस तीन
सीटों पर और किस सीट पर कौन लड़ रहा है वो
भी मैं आपको बताना चाहता हूं कांग्रेस और

आम आदमी पार्टी के दिल्ली गठबंधन के
फॉर्मूले में आम आदमी पार्टी नई दिल्ली
नॉर्थ वेस्ट दिल्ली वेस्ट दिल्ली और साउथ
दिल्ली से चुनाव लड़ेगी वहीं कांग्रेस

पूर्वी दिल्ली उत्तर पूर्वी दिल्ली और
चांदनी चौक से चुनाव लड़ेगी स्पष्ट हो
जाता है दोस्तों दिल्ली में पहली बार बात
बनती दिखाई दे रही है चार तीन का फर्मूला

सामने उभर कर आ गया है क्योंकि मैं आपको
बतलाना चाहूंगा कि पार्टी के नेता य
लगातार कह रहे थे कि भाजपा जो है उन्हें
लगातार धमका रहा है कि इंडिया गठबंधन से

बाहर आ जाओ वरना अरविंद केजरीवाल को
गिरफ्तार कर लेंगे और मैं आपको बता दूं
ईडी ने प्रवर्तन निदेशालय ने अरविंद
केजरीवाल को एक बार फिर बुलाया है मगर

अरविंद केजरीवाल कदम पीछे नहीं हटा रहे
हैं इस बात को लेकर सुट थी कि ईडी की डर
से हो सकता है कि सातों सीटों पर आम आदमी
पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी मगर यह गठबंधन

करके आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है
कि हम ईडी से नहीं डरते हैं और उस दबाव
में नहीं आने वाले हैं दोस्तों चाहे यूपी
हो चाहे दिल्ली हो इन दोनों के गठबंधन के
क्या मायने हैं कुछ देर बाद मैं आपको
बताऊंगा मगर जो बड़ी खबर आ रही है वो
पश्चिम बंगाल से पश्चिम बंगाल में ममता

बैनर्जी और कांग्रेस के बीच में गठबंधन
टूट गया था ममता बैनर्जी ने इस बात का
ऐलान कर दिया था कि कांग्रेस हमारी बात
नहीं सुन रही है ऊपर से अधीर रंजन चौधरी

यह शख्स लगातार ममता बैनर्जी और टीएमसी के
बारे में अनर्गल बयान दे रहे थे और जब यह
गठबंधन टूटा था तब पार्टी के नेता डेरेक ओ
ब्रायन सामने आए थे और उन्होंने कहा था कि

इस गठबंधन की टूटने की तीन वजह अधीर रंजन
चौधरी अधीर रंजन चौधरी अधीर रंजन चौधरी और
अब खबर क्या आ रही है मैं आपको पढ़ के
सुनाना चाहता हूं आपकी स्क्रीन पर और ये

खबर कोई और नहीं अडानी का न्यूज़ चैनल दे
रहा है आपकी स्क्रीन पर सूत्रों के
मुताबिक कांग्रेस और टीएमसी के बीच पश्चिम
बंगाल असम और मेघालय की सीटों को लेकर

बातचीत चल रही है और यह सकारात्मक दिशा
में बढ़ रही है सीट शेयरिंग फॉर्मूले के
तहत बंगाल में टीएमसी को 36 और कांग्रेस
को पा पाच सीटें मिल सकती हैं पहले ममता

बैनर्जी ने बंगाल में सभी 42 सीटों पर
अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया था अब यह
फार्मूला यहां पर 36 और पा का है यानी कि
फार्मूला स्पष्ट हो रहा है दोस्तों बंगाल

फर्मूला होगा चाती उत्तर प्रदेश में
फार्मूला होगा 63
17 और मैं आपको बता दूं दोस्तों जहां
उत्तर प्रदेश की बात है यहां पर समाजवादी
पार्टी बहुत तेजी से काम कर रही है जिन 63

सीटों पर समाजवादी पार्टी जो चुनाव लड़
रही है वहां पर बाकायदा नामों के ऐलान किए
जा रहे हैं मसलन आपकी स्क्रीन पर यह
समाजवादी पार्टी का प्रेस रिलीज उन्होंने
अनाउंस किया है कि मुजफ्फर नगर से हरेंद्र

बलिक आंवला से नीरज मौर शहजानपुर से राजेश
कश्यप हरदोई से श्रीमती उषा वर्मा मिशिक
से राम गोपाल राजवंशी आप देख सकते हैं

बाकायदा नामों के ऐलान किए हैं सपा के
कौन-कौन से प्रत्याशी लोकसभा चुनाव में
मैदान में उतर उतरेंगे उनके नाम आपके
सामने प्रतापगढ़ से एसपी सिंह पटेल बहरा
से रमेश गौतम गोंडा से श्रीमती श्रेया

वर्मा गाजीपुर से अफजाल अंसारी चंदौली से
वीरेंद्र सिंह बाकायदा तमाम लोगों के ऐलान
यहां पर किए जा रहे हैं यानी कि उत्तर
प्रदेश में मुकाबला अब स्पष्ट हो चुका

यानी कि जिस शख्स को क्या वोट देना है
उसके सामने विकल्प है और दूसरी तरफ
जयंत चौधरी और भारतीय जनता पार्टी मगर
यहां भारतीय जनता पार्टी के लिए दिक्कत है

और मैं जानता हूं आप क्या सोच रहे हैं आप
कहेंगे कि भाई मायावती भी तो है उसका भी
जवाब दूंगा मगर आपको मैं बतलाना चाहता हूं
कि इस वक्त बीजेपी और रालोद के साथ दिक्कत
क्या है दोस्तों सबसे पहली बात यह मुगालता

किसी को नहीं होना चाहिए कि प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ
निर्विवाद
सबसे लोकप्रिय नेता है उत्तर प्रदेश में
यह जो दो तुरुप के पत्ते भाजपा के पास हैं

उसका मुकाबला नामुमकिन है और हम यह ना
भूले राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद
प्रधानमंत्री को जिस तरह से उनका महिमा
मंडन किया था कई जगहों पर उन्हें ईश्वर

समान बताया गया था चंपत राय माननीय ने तो
उन्हें विष्णु का अवतार बता दिया
था आपको याद होगा वो कौन यजमान थे उनको

तो
हमने देखा ही नहीं मंदिर में सिर्फ और
सिर्फ प्रधानमंत्री को दिखाया गया था यानी
मास मीडिया के जरिए प्रधानमंत्री जो पहले
से ही लोकप्रिय थे उन्हें और बढ़ाया
गया मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की अपनी

मौजूदगी है और ऐसे में मुकाबला करना बहुत
मुश्किल होने वाला
है साथ ही धर्म का तड़का लगातार लगाया
जाता है अभी कुछ ही दिनों पहले
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने मथुरा की बात की

थी श्री कृष्ण मंदिर की बात की थी यानी कि
राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो गई है
मगर लगातार मथुरा को लेकर ज्ञान व्यापी को
लेकर तापमान को उग्र किया जा रहा है यानी
कि भाजपा जानती है कि अगर 80 में से 80

सीटें लेनी है तो एकमात्र रास्ता क्या है

कि धर्म को लेकर माहौल को गर्म किया जाए
मगर दिक्कत क्या है दोस्तों पश्चिमी उत्तर
प्रदेश में किसान आंदोलन हर गुजरते दिन के
साथ उग्र होता जा रहा है राकेश टिकैत कह
रहे हैं कि जिस तरह से किसानों पर जुल्म
किया जा रहा है हम उसका मुकाबला करेंगे

किसान लगातार कह रहे हैं कि हम पर जुल्म
किया जा रहा
है जयंत चौधरी जो अब तक किसानों के साथ थे

पिछली बार के आंदोलन में इस बार पूरी तरह
से खामोश है पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता
य लगातार देख रही है कि राजनीति के लालच
में यह व्यक्ति किसानों को भूल गया जिस
तरह से जैन चौधरी ने पलटी मारी है पश्चिमी
उत्तर प्रदेश यह लगातार देख रहा है इसलिए
जहां-जहां से रालोद चुनाव लड़ेगी

स्वाभाविक सी बात है दोस्तों किसान उस चीज
पर निगाह बनाए रखेगा वो देख रहा है कि किस
तरह से विचारधारा की तिलांजलि
डालकर जयंत चौधरी पलटी मार गए क्यों

 

क्योंकि एक या दो सीटों पर बात नहीं बन पा
रही थी यह सब बेकार की बातें हैं दोस्तों
दिक्कत यह है कि आंदोलन का हिस्सा होने
में हर किसी में हिम्मत नहीं होती है हर
कोई विचारधारा पर नहीं बने रह सकता लोग
सांसद बनना चाहते हैं मंत्री पद चाहते हैं
और जयन चौधरी को य दिखाई दे रहा है कि
2024 में भाजपा की राह आसान है कम से कम
उत्तर प्रदेश में है इसीलिए पलटी मारी मगर
जनता यह देख रही है तो एक तरफ यह है और

 

मैं जानता हूं मायावती फैक्टर भी है मगर
मायावती का किरदार बहुत रहस्यमय हो गया
दोस्तों अमूमन वो ऐसे उम्मीदवारों को
मैदान में उतारती है जिससे समाजवादी
पार्टी का नुकसान हो और यही उत्तर प्रदेश
विधानसभा चुनावों में हुआ

था बीएसपी की खुद की सीटें बहुत जोरों से
गिर गई होंगी मगर उसने समाजवादी पार्टी को
नुकसान
पहुंचाया और इस बात को लेकर सुगबुगाहट है
कि क्या पर्दे के पीछे कोई डील हुई थी
जिसके तहत बहन जी ने जानबूझकर समाजवादी
पार्टी को नुकसान
पहुंचाया इसी तरह से कहा जा सकता है

दोस्तों कि बीएसपी का किरदार मायावती जी
का किरदार जो है वह बहुत ही रहस्यों से
घिरा हुआ है यही वजह है कि चुनावों में
उन्हें गंभीर किरदार नहीं माना जा रहा
क्योंकि वह भाजपा का मुकाबला करती नहीं
दिखाई देती जो कि स्वाभाविक तौर पर होना

चाहिए ना चलिए वोह इंडिया गठबंधन का
हिस्सा नहीं है मगर कायदे से उन्हें
मुकाबला करना चाहिए और वह ऐसा नहीं कर रही
तो यानी कि उत्तर प्रदेश में माहौल
बिल्कुल साफ है एक एक तरफ अखिलेश राहुल

और
दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यानी
भाजपा रालोद और कहीं ना कहीं मायावती भी
भाजपा गठबंधन यानी एनडीए को परोक्ष
प्रत्यक्ष तौर पर फायदा पहुंचाती दिख रही
हैं जनता के सामने बिल्कुल माहौल साफ है
उत्तर प्रदेश में तो ये तो यूपी की बात

हुई दोस्तों अब हम बात करते हैं दिल्ली की
मैं आपको याद दिलाना चाहूंगा कि पिछली बार
जब 2019 में चुनाव हुए थे
तो लगभग हर सीट में भाजपा को 50 फीसद से
ज्यादा वोट मिले थे इसका अर्थ क्या हुआ
पिछली बार अगर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस

में समझौता हो भी जाता तब भी शायद बीजेपी
जीत जाती और उस वक्त आपको याद है पुलवामा
को लेकर लहर थी आप कह सकते हैं कि इस बार
राम मंदिर को लेकर तापमान बढ़ाया जा रहा

है बिल्कुल सही कह रहे हैं आप मगर अगर राम
मंदिर को लेकर भाजपा पूरी तरह से आश्वस्त
होती उससे मिलने वाले वोटों को लेकर पूरी
तरह से आश्वस्त होती तो बिहार में खेला
नहीं होता जी हां बिहार में जो नीतीश और
जिस नीतीश कुमार की पुलिस ने सड़क पर घसीट
घसीट के भाजपा के नेताओं की पिटाई की थी
दोबारा आप उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाते
और दोबारा सम्राट चौधरी मरेठा उतारे बगैर

डेप्युटी चीफ मिनिस्टर नहीं बन जाते यानी
कि राम मंदिर से चुनावी फायदा हो इस बात
को लेकर भाजपा में विश्वास नहीं है लिहाजा
जरूरी नहीं है कि दिल्ली में इस बार वोट
फीसद जो है वह 50 फीसद को क्रॉस कर सकता
है 10 साल गुजर चुके हैं एंटी इनकंबेंसी

भी सामने है कई मुद्दे मु बाहे सामने खड़े
हैं छोटे व्यापारी
बेरोजगारी
अर्थव्यवस्था नौकरी यह तमाम मुद्दे हैं जो
सामने उभर कर आ रहे हैं और इन तमाम

मुद्दों का जवाब भाजपा के पास नहीं है
भाजपा क्या करती है जैसे ही मुद्दे सामने
आते हैं वो ले देके या तो राम मंदिर की

बात करती है या धार्मिक मुद्दों की बात
करती है या हिंदुओं में मुसलमानों को लेकर
एक काल्पनिक डर पैदा करती है बताइए
साहब 10 साल से हिंदू हृदय सम्राट देश के
प्रधानमंत्री हैं मगर अब भी मुगल आके हम

पर राज करेंगे दूसरी बार मुख्यमंत्री
आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन

गए हैं मगर अब भी मुगल आके राज करेंगे
दिल्ली में पुलिस किसकी है अमित शाह की
पुलिस है मगर फिर भी मुगल आकर राज कर

जाएंगे अगर मोदी जी चले गए तो ये बातें
पुरानी हो गई है दोस्तों इसलिए मेरा मानना
है कि दिल्ली में भी मुकाबला बहुत दिलचस्प
हो गया है रही बात पश्चिम बंगाल की पश्चिम

बंगाल में अगर यह फार्मूला हो जाता है
365 तो ये स्पष्ट हो जाता है कि ममता
बैनर्जी कांग्रेस के साथ मिलकर भाजपा से
मुकाबला करना चाहती है क्योंकि एक बात

स्पष्ट कर दूं दोस्तों पिछली बार 2019
में कई सीटों में कांग्रेस और वामपंथी
दलों
ने ममता का नुकसान किया
था और यही बात उत्तर प्रदेश में भी दिखाई
दी थी जब कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी का

नुकसान कई सीटों में किया था 2019 के
लोकसभा चुनावों में और उसके बाद हाल ही
में जो उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव
हुए थे अब दोनों एक मंच पर हैं
यानी कि व हज 2000 5000 वोट जिसके अंतर से

भाजपा जीत रही थी कांग्रेस की वजह से अब
वो नहीं होने वाला है ना वो पश्चिम बंगाल
में होगा ना वह दिल्ली में होगा और ना वो
उत्तर प्रदेश में होने वाला
है यह चिंता भाजपा के रणनीतिकारों को

लगातार सता रही है कांग्रेस और अखिलेश
यादव के साथ आने से ममता और कांग्रेस के
साथ आने से और दिल्ली में केजरीवाल और

कांग्रेस के साथ आने से इसलिए मैं कह रहा
हूं दोस्तों इंडिया गठबंधन के लिहाज से यह
एक सुखद खबर है य इनके लिए अच्छी खबर है
मगर बात यहां तक नहीं बनेगी क्योंकि आप
जानते हैं जब राजनीति की बात आती है जब
चुनावों की बात आती है तब कई फैक्टर्स काम
करते हैं आप एनजीओ की तरह बातें नहीं कर
सकते आप एक राजनीतिक दल है मैं आपको
कांग्रेस के एक महानुभव है जयराम रमेश

उनका बयान दिखाना चाहता हूं दोस्तों यह
लोग अब भी नहीं सीख रहे हैं
देखिए चुनावी यात्रा नहीं है यह वैचारिक
यात्रा है आज अमेठी पहुंचेगी कांग्रेस की
यात्रा जब पत्रकार ने कांग्रेस नेता जयराम

रमेश से पूछा कि क्या राहुल अमेठी से
चुनाव लड़ेंगे तो सुनिए उन्होंने क्या
कहा जयराम रमेश कह रहे हैं चुनावी यात्रा

नहीं है यह वैचारिक यात्रा है सबसे पहले
माननीय जयराम रमेश आप एक पॉलिटिकल पार्टी
चला रहे हैं एनजीओ नहीं चला रहे हैं तो ये
जो सोच है इसे दिमाग से बाहर निकालिए आप
एक पॉलिटिक पार्टी राहुल गांधी न्याय
यात्रा कर रहे हैं उसका मकसद राजनीतिक है
और होना भी चाहिए दिक्कत क्या है दोस्तों
कांग्रेस में दो तीन ऐसे चेहरे हैं जो
पर्दे के पीछे हैं मगर वह अपनी सोच से

कांग्रेस का काम लगातार खराब कर रहे हैं
और यह कौन लोग हैं आप भी जानते हैं यह लोग
लगातार अपनी एनजीओ नुमा सोच से कांग्रेस
के रास्ते में रोड़े अटका रहे हैं मैं
नहीं जानता हूं यह लोग क्यों कर रहे हैं

गांधी इन्ह क्यों सुनते हैं कांग्रेस को
दो तीन चीज समझ जानी चाहिए नंबर वन यूर
नॉट एन एनजीओ य पॉलिटिकल पार्टी आप एक
राजनीतिक दल है लिहाजा राजनीतिक दल के तौर
पर चुनाव लड़े नंबर दो 2014 से पहले का

माहौल नहीं है जब आप सरकार में थे अब आप
50 सीटों वाली पॉलिटिकल पार्टी है और अगर
आप बाज नहीं आए तो आप 40 से नीचे आ जाने
वाले हैं कहने का अर्थ क्या है अब आपका वो

 

रुतबा नहीं है चाहे पश्चिम बंगाल हो चाहे
उत्तर प्रदेश हो चाहे बिहार हो आप इन सभी
राज्यों में क्षेत्रीय दलों के मुकाबले
जूनियर पार्टी हैं अहंकार को
त्याग अहंकार से बाहर आइए अब आपकी वो पहले
वाली बात नहीं है वो पहले वाला रसूख नहीं
है इसलिए अपने क्षेत्रीय दलों को सुनिए आप

सुनेंगे आप उनके साथ एक टीम के तौर पर काम
करेंगे तभी जाकर आप मुकाबला कर पाएंगे
दोस्तों ये जो खबर आ रही थी में उत्तर
प्रदेश में बात बिगड़ गई कुछ नहीं होने
वाला ऐसा क्यों हो रहा था आप जानते हैं
क्योंकि उत्तर प्रदेश में पार्टी के कुछ

ऐसे नेता हैं जो लगातार न जाने रहस्यमय
कारणों से कांग्रेस के लिए मुश्किलात पैदा
कर रहे हैं अविनाश पांडे अजय राय यह लोग न
जाने
क्यों कभी अखिलेश यादव के बारे में अनर्गल

बयान कुछ कुछ लगातार बोल रहे थे और आपको
याद है मध्य प्रदेश के चुनावों में
कमलनाथ जो पूरी शिद्दत के साथ भाजपा की
गोद में बैठना चाहते थे मगर उनका खेला
खराब हो गया उन्होंने क्या कहा था अखिलेश
यादव के बारे में अखिलेश अखिलेश मुझे खुशी

है कि मध्य प्रदेश में भी जो गठबंधन हुआ

है उसके तहत खजुराहो से समाजवादी पार्टी
चुनाव लड़ेगी तो यह साफ हो रहा है कि इस
वक्त कांग्रेस के अंदर कोई सलीके से सोच

रहा है मगर कांग्रेस के अंदर ऐसे कई नेता
है जो उसके लिए मुश्किलात पैदा कर रहे हैं
जो पार्टी को एनजीओ बना देना चाहते हैं
कांग्रेस को समझना पड़ेगा कि वो पहली वाली
पार्टी नहीं है वक्त बदल गया है हालात बदल
गए हैं बाज आइए अहंकार को त्याग टीम के

तौर पर काम कीजिए एक तो मुझे बात समझ नहीं
आ रही है कि न्याय यात्रा में अब जो राहुल
गांधी ब्रेक देने वाले हैं कायदे से नया

यात्रा करनी चाहिए और मैं उसके पक्ष में
हूं क्योंकि अगर आप घर में ही बैठे रहते
तो आप कुछ भी नहीं करते कम से कम न्याय
यात्रा के जरिए आप जनता के बीच जा रहे हैं
जो अच्छी बात है मगर मैं आपसे एक सवाल

पूछना चाहता हूं राहुल गांधी विदेश यात्रा
पर भी जा रहे हैं क्योंकि उनका कोई शायद
भाषण है
कहीं इस वक्त एक एक दिन मायने रखता है आप
विदेश क्यों जा रहे हैं आपको कायदे से

नहीं जाना चाहिए आपको ममता बैनर्जी
केजरीवाल तेजस्वी उनके साथ बैठकर बात करनी

चाहिए और आपको कलकत्ते जाना चाहिए पटना
जाना
चाहिए आपको तेजस्वी की जन विश्वास यात्रा
में शामिल होना चाहिए बाहर निकल
आप अपने समर्थकों के लिए मसीहा हो सकते
हैं मगर राजनीति ऐसे नहीं लड़ी जाती है

सबसे पहली बात जयराम रमेश जी यह एनजीओ
नहीं है यह पॉलिटिकल पार्टी है तो इस सोच
को यहां
से जैसे मैंने कहा ना राजनीति में आप
खेलते हैं हराने के लिए आप हार जाते हैं
तो आपको हारा हुआ माना जाता है और सामने
वाला विजेता जो जीता वही सिकंदर जो हारा
वो

बंदर अब सार शर्मा को दीजिए इजाजत नमस्कार
स्वतंत्र और आजाद पत्रकारिता का समर्थन
कीजिए सच में मेरा साथी बनिए बहुत आसान है
दोस्तों इस जॉइन बटन को दबाइए और आपके
सामने आएंगे ये तीन विकल्प इनमें से एक

चुनिए और सच के इस सफर में मेरा साथी बनिए

Leave a Comment