INDIA में Mayawati की एंट्री ? Modi के लिए झटका साबित होगा |

उल्टा चश्मा यूसी में दोस्तों आपका स्वागत
है मैं हूं आपके साथ राशिद जहीर मायावती
का फिर एक बार बयान ऐसे समय में आया है कि
जब कांग्रेस और अखिलेश यादव की पार्टी के
अंदर महसूस यह हो रहा है कि शायद गठबंधन
नहीं होगा कांग्रेस सूत्र बताते हैं 20

सीटें मांग रही है और अखिलेश यादव यानी कि
समाजवादी 17 दे रहे हैं संभवत शायद ये
डिस्टेंस बढ़ जाए स्वामी प्रसाद मौर्य
अपनी पार्टी बनाने का ऐलान कर चुके हैं
ऐसे समय में मायावती का बार-बार यह कहना
कि हम अकेले चुनाव में लड़ रहे हैं

जानकारों का दोस्तों कहना यह है कि
राजनीति में जो कहा जाता है वो होता नहीं
है और जो होता है उसको कहा नहीं जाता एक
नया समीकरण जो राजनीतिक विश्लेषक बता रहे
हैं वो मैं आपके सामने हाजिर हुआ बताने के

लिए कि अगर अखिलेश यादव और कांग्रेस का
समाजवादी पार्टी का आपस में पचप नहीं होता
है तो आने वाला वक्त कौन से समीकरण बदलने
वाला है कौन से समीकरणों को को मैं कह
सकता हूं इफेक्ट डालने वाला है उसके बारे
में देसी मिसाल मेरे जहन में आती है कि
100 सुनार की एक लोहार की जैन चौधरी हो या
अशोक चौहान हो कमलनाथ के कमलनाथ के रूप
में एक अफवा हो या नीतीश कुमार का हटाना

हो पूरे देश भर में जो राजनीतिक दलों को
ईडी सीबीआई या राजनीतिक दल डरा करके या तो
अपनी तरफ कर रहे हैं या फिर उनको कह रहे
हैं कि इंडिया गठबंधन में शामिल ना हो ऐसे
समय में माया के बारे में यह कहा जा रहा

है दोस्तों कि अगर अखिलेश यादव का
कांग्रेस से पैक्ट नहीं होता है कांग्रेस
से आपस में कह सकता हूं समीकरण नहीं बन
सकता है सीटों पर किसी प्रकार की लड़ाई हो
सकती है तो एक नया समीकरण यह निकल करर आने
की उम्मीद की जा रही है कि मायावती

अधिसूचना जारी होते ही शायद कांग्रेस से
पैक्ट कर ले और अगर ऐसा हो गया तो मायावती
की भी सोच बहुत लंबी है यह तो आप जानते
हैं कि मायावती अगर खुद स्टैंड होकर

इलेक्शन को लड़ ले तो तो भारतीय जनता
पार्टी की तरफ जो उनका जाट ऑफ समाज का वोट
जाता है वो रुक जाएगा तो वो जो समीकरण है
मायावती का वो पूरे देश भर को लेकर है आप
जानते हैं पंजाब में बहुजन समाज का वोट
कितना है उत्तराखंड हिमाचल और मध्य प्रदेश

दिल्ली पंजाब और उत्तर प्रदेश इन चार पांच
प्रदेशों में वाया मती का प्लान राजनीतिक
विश्लेषक बताते हैं दोस्तों कि उनका
कांग्रेस से अगर पैक्ट हो जाता है तो वो
हिमाचल में भी लड़ेंगी पंजाब में भी

लड़ेंगी राजस्थान में सॉरी मध्य प्रदेश
में भी लड़ना का स्वाभाविक है सीटें
राजस्थान में भी उनकी आई है आप जानते हैं
विधानसभा की तो ऐसे समय में मायावती का
अगर अखिलेश यादव के साथ ये गठबंधन हो जाता

है दोस्तों सॉरी कांग्रेस के साथ ये
गठबंधन हो जाता है तो वो जो मैंने मिसाल
आपके सामने कही कि 100 सुनार की एक लोहार
की यह काफी है भारतीय जनता पार्टी को इतना
बड़ा झटका लगेगा यहां आकर के उत्तर प्रदेश
में कि वोह उम्मीद नहीं कर सकते अब आपकी

समझ में यह बात आएगी कि भाई अखिलेश यादव
और मायावती पिछली बार एक साथ आए तो थे
उनके आने में और मायावती कांग्रेस के आने
में बड़ा फर्क है सुनिए क्या है प्रदेश का
यानी कि उत्तर प्रदेश की अगर मैं बात करूं
आपसे यहां का अल्पसंख्यक समाज समझ चुका है
कि अखिलेश यादव कब उनके मसले में बहुत

ज्यादा सीरियस है और कब नहीं है उनके साथ
जो दल है वो भी धीरे-धीरे छिटक जा रहे हैं
जैन चौधरी चले गए स्वामी प्रसाद मौर्य

पल्लवी पटेल आप सब सारे समीकरण से वाकिफ
हैं तो ऐसे समय में अल्पसंख्याक समाज
कांग्रेस की तरफ शत प्रतिशत जाने की
उम्मीद की जा रही है क्योंकि लोकसभा के भी
चुनाव है एक बात दूसरी बात मायावती अगर

मजबूती से लड़ जाती हैं तो मायावती के साथ
थोड़ा सा अति पिछड़ा और गैर एससी यानी कि
जाटव के अलावा जो वोट है वह भी आएगा और
मायावती का अपना वोट 21 पर बन जाता है 20
फीस अल्पसंख्यक और 21 फीसद अगर मिसाल के

तौर पर एससी समाज पूरा आ जाता है उधर 67
पर अगर कांग्रेस अपना जो परंपरागत उसका
वोट था हालांकि पिछली बार कुछ कम हो गया
था वो भी जुड़ जाता है तो दर्शकों यह
हालात बन जाते हैं लगभग 45 और 50 के बीच
में और आप यह भी जानते हैं कि बहुत सारा

एंटी इनकंबेंसी का वोट है यह वाला समीकरण
उत्तर प्रदेश में ऐसा झटका पहुंचा देगा
भारतीय जनता पार्टी को कि उन्होंने सपने
में भी नहीं सोचा होगा तो अब कांग्रेस के

और अखिलेश यादव के बीच के डिस्टेंस की जो
खबरें आ रही हैं उससे अगर अगले महीने अगर
आपके सामने खबर आ जाए कि मायावती और
कांग्रेस का जबरदस्त तरीके से इंपैक्ट है
क्यूंकि सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी

से ट्यूनिंग बहुत अच्छी बताई जाती है
मायावती जी की और अगर सोनिया गांधी जी
कहती हैं तो ममता बनर्जी हो या मायावती हो
उनके कहने से वह आमना सदक ना कर देती हैं
यानी कि लब्बैक कर देती हैं कि हम साफ
शामिल हो सकते हैं ऐसे समय में दोस्तों

इंडिया गठबंधन का रूप भले ही थोड़ा
बिगड़ता जा रहा हो लेकिन मायावती और
कांग्रेस ये लोग अगर साथ आ गए तो एक ऐसा
समीकरण जिसको पीडीए वो तो बचा कर रख नहीं
पा रहे अखिलेश यादव इसमें कोई दोराई नहीं
कि बहुत मजबूत पार्टी है कुछ जगह उनका

लेकिन उनका ज्यादातर वोट अल्पसंख्यकों का
है वो अपने आप चला जाएगा कांग्रेस में
ऑटोमेटिक क्योंकि भारतीय जनता पार्टी से
जो भी मजबूत संगठन लड़ता हुआ नजर आएगा
अल्पसंख्यकों को वह वहां जाएगा और जा
जानते हैं कि आप यह पा छ या सात फीसद जो

यादव वोट है यह ज्यादा कारगर नहीं होता है
और ऊपर से महान दल और यह जैन चौधरी और
स्वामी प्रसाद मौर्य और पल्लवी पटेल और
बहुत सारे ऐसे पीडीए के लोग हैं जिनको
सहेज कर नहीं रख पा रहे अखिलेश यादव बहुत
पहले हमने अपने अपने ही प्लेटफार्म पर
आपको बताया था कि अखिलेश यादव यदि

कांग्रेस को ज्यादा सीटें देते हैं तो
वहां उम्मीद यह है कि अगर कांग्रेस वहां
बनिया पंडित ठाकुर ऐसे मजबूत कैंडिडेट
उतारती है जो एक से डेढ़ लाख वोट अगर लेकर
जाता है ऊपर से उनके साथ कुछ यादव वोट कुछ
अल्पसंख्यक वोट मिल जाता है तो यह समीकरण

हो सकता है घोषित उपचुनाव में क्या हुआ है
दोस्तों ऐसा नहीं है कि वहा पीडीए का या
इंडिया गठबंधन का प्रत्याशी जीता है नहीं
वहां भारतीय जनता पार्टी का कैंडिडेट जीता
है अब आप कहेंगे नहीं यार वहां तो सुधाकर
सिंह थे वो कैसे हो गए वो तो समाजवादी के
थे मैं आपको बताऊ सुधाकर सिंह जो थे वो

ठाकुर हैं 40000 वोट घोषि उपचुनाव के अंदर
ठाकुर समाज का है जो भारतीय जनता पार्टी
पर जाना था वह भारतीय जनता पार्टी पर ना
जाकर अपने कैंडिडेट यानी कि अपनी बिरादरी
की वजह से सुधाकर सिंह को मिला और बाकी
अल्पसंख्यक और तमाम जो यादव य सब समाज

उन्हे मिल गया इस वजह से वह जीते थे आप
उत्तर प्रदेश के खतौली में आ जाइए वहां पर
मदन जो है मदन सिंह जीते थे वहां गुजर जो
थे बिरादरी वाद की वजह से वहां आ गए थे
ऐसा बताया जाता है तो यह वो जाति समीकरण
है जिसको भेदने में अमित शाह बहुत ज्यादा
मैं सकता हूं चाणक्य माने जाते हैं लेकिन

अब अगर मिसाल के तौर पर बिल्कुल इलेक्शन
के करीब मायावती की जैसे कि सुगबुगाहट हो
रही है उन्होंने आकर कहा लेकिन एक बड़े
पत्रकार कह रहे थे कि जो कहते हैं व होता
नहीं है राजनीति में मायावती अक्सर छ

महीने पहले अपने लोकसभा प्रत्याशी जो है
लोकसभा प्रभारी उनको नियुक्त कर देती है
उन्हीं में से ज्यादातर यह होता है कि वही
कैंडिडेट बन जाते हैं वह तो बन नहीं पा
रहे हैं उनको तो उन्होंने बनाया नहीं है
इसका मतलब यह है कि अभी चांसेस हैं
कांग्रेस के साथ पैक्ट होने के बड़ा

समीकरण बदल सकता है कुछ समय की बातें
दर्शकों राजनीतिक गलियारे में चर्चा थी इस
समीकरण पर मैं आपको कोई मजबूत एविडेंस के
साथ तो नहीं बता सकता लेकिन पूरा का पूरा
हालात जो हैं सुधाकर उधर स्वामी प्रसाद
मौर्य का जाना अखिलेश आदम ने कहा था कि
मैं यात्रा में हो रहा हूं लेकिन अब कह

रहे हैं कि हम दोनों की एक द एक दूसरे को
सूची दे रहे हैं हम सूची फाइनल होके हम
यात्रा में आ जाएंगे यानी कि इसका मतलब
पेंच फंसा हुआ है अखबारों की सुर्खियां भी
बनी हुई है तो आने वाले वक्त में दर्शकों
यह समीकरण अगर आपके सामने आए कि मायावती
और कांग्रेस और यह जो गठबंधन बन जाता है

तो आप यकीन मानिए भारतीय जनता पार्टी के
लिए ज्यादा चिंता का सबब बन जाएगा आपको
खबर कैसी लगी अपनी राय कमेंट्स बॉक्स में
जरूर दीजिए चैनल को सब्सक्राइब कीजिए शेयर
कीजिए नेक्स्ट टाइम में किसी खबर के साथ
हाजिर होता हूं जय हिंद

Leave a Comment