INDIA Alliance & Modi : केजरीवाल ने हिम्मत दिखायी..अब मोदी क्या क्या करेंगे !

दोस्तों नमस्कार डील तो टूट गई इस डील के
आसरे माना जा रहा था इंडिया गठबंधन टूट
जाएगा लेकिन डील ही टूट गई और डील के आसरे
क्षत्रप को भरोसा दिया जा रहा था आपको जेल
में नहीं डालेंगे आपके खिलाफ कार्रवाई
नहीं करेंगे जो भी पैसा आपने जिस रूप में

बनाया है उसको आप सहेज कर रखिए ईडी कारवाई
नहीं करेगी लेकिन डील तोड़ने और टूटने का
मतलब बहुत साफ है कि अब कारवाई आने वाले
वक्त में तेज हो जाएगी वह इनकम टैक्स
डिपार्टमेंट हो वह ईडी हो वह सीबीआई हो या

खुद सरकार की अपनी राजनीतिक विसात हो इस
दायरे में अब दोदो हाथ त्रपोर्टल
सी दौर में हर क्षत्रप को भी समझ में क्या
आ गया कि 2024 का चुनाव कितना
महत्त्वपूर्ण है और राजनीतिक तौर पर
तत्काल की रियायत आने वाले वक्त में

मुश्किल हालात पैदा कर देगी इसीलिए बिहार
उत्तर प्रदेश दिल्ली और महाराष्ट्र 175
सीट इन जगहों पर इंडिया गठबंधन जिस मजबूती
के साथ सीटों के तालमेल की दिशा में बढ़
चुका है और एक-एक करके हर राज्य से अब
सीटों का तालमेल उभर रहा है उसने संकेत
बहुत साफ कर दिए हैं कि अब दिल्ली में

 

बैठी हुई सत्ता की धड़कने अगर पढ़ रही है
तो उन धड़कनों को संभालने के लिए अब साम
दाम दंड भेद हर रास्ते को अपनाया जाएगा इस
रास्ते में पहला रास्ता तो यही होता है कि
पॉलिटिकल पार्टी के तमाम उन रास्तों पर
नकेल कस दी जाए जहां से पैसा आता है लेकिन
यह कहां किसे पता था कि इस रा ते को बंद

करने के लिए कानून भी अपने हाथ में लेने
से सरकार अब कतराए गी नहीं कांग्रेस के
साथ आज यही हुआ 5 करोड़ रुपए एक झटके में
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने वसूल लिए यह
सरकार ने वसूल लिए या सरकार के निर्देश पर
इनकम टैक्स के अधिकारियों ने वसूल लिए

बैंकों के मैनेजरों को क्या धमकी दी गई एक
पॉलिटिकल पार्टी से टैक्स नहीं लिया जाता
है एक कच्चा चिट्ठा यह कहता है दूसरा कहता

है कि अब जो सातवा नोटिस दिया गया है ईडी
की तरफ से केजरीवाल को उनका रास्ता अब जेल
की दिशा में जाने को तैयार है तीसरी बात
कही जाती है जो भी अखिलेश यादव के पास
पूंजी है और तीसरी तरफ जो महाराष्ट्र की
राजनीति में उद्धव ठाकरे बैठे हैं अब वहां
पर भी घेराबंदी तेज होगी क्योंकि साम दव
दंड भेद अब कोई ऐसे रास्ते को छोड़ेगा

नहीं लेकिन क्या वाकई इस इंडिया गठबंधन
में होती हुई डील को तोड़ने के बाद के
समझौतों ने मुश्किल खड़ी बीजेपी के सामने
कर दी है क्योंकि इसी दौर में पूर्व
राज्यपाल सत्यपाल मलिक जो करप्शन का
मुद्दा उठा रहे थे सीबीआई ने दोदो एफआईआर
दर्ज की आज उन्हीं के घर पर छापा पड़ गया
इसी दौर में बकायदा सोशल मीडिया के भीतर
वह भी
दिखा रहा है बोल रहा है अपने कमेंट को कर

रहा है उस पर आप पाबंदी लगा दीजिए और खुले
तौर पर पहली बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर
सोशल मीडिया को संभाले हुए एक्स ने कहा यह
अभिव्यक्ति की आजादी को खत्म करने की दिशा
में बढ़ते हुए कदम है और पूरी दुनिया में
यह बात खुलकर सामने आ गई कि भारत के भीतर

चुनाव करीब आ गए हैं भारत के भीतर चुनाव
जीतने का मतलब क्या होता है और इस दौर में
खास तौर से मोदी सत्ता जिसको लेकर इस देश
का कॉरपोरेट इस देश का मीडिया इस देश के
तमाम संस्थान ब्यूरोक्रेट्स जिनका सब कुछ
मोदी सरकार के साथ स्टेक पर लगा हुआ है
उसे कौन कैसे गवाना चाहेगा तो हर रास्ते
पर पहरेदारी बैठा दी गई है राजनीतिक तौर
पर जो डील होनी थी डील टूट गई है सियासी

तौर पर
छत्रपति उफान पर है और दिल्ली की धड़कने
पढ़ी हुई है तो आइए आज एकएक पन्नों को
खोला जाए इन पन्नों के आसरे जरा समझने की
कोशिश कर ली जाए कि आखिर साम दाम दंड भेद
क्या होगा इस दौर में यह भी समझ लिया जाए

कि इस गठबंधन में सीटों के तालमेल का मतलब
क्या होता है और सामाजिक और आर्थिक तौर पर
किस तरीके से और राहुल गांधी अपनी छवि को
बिल्कुल अलग तरीके से इस दौर में क्यों
बोल रहे हैं क्यों रख रहे हैं तीनों

परिस्थितियों को समझने के लिए हमें लगता
है शुरुआत तो आज कांग्रेस से ही करनी
चाहिए जिसके बैंक में जमा पैसे में से 65
करोड़ रुपए इस दौर
में सरकार ने वसूल लिए लेकिन सुनिए जरा
कांग्रेस की
बात आप लोगों को मैं बताना
चाहूंगा कि पॉलिटिकल पार्टीज इनकम टैक्स
से एप्टेड होती

हैं जहां तक के इंडिविजुअल्स की बात
है मुझे पता चला है कि हमारे इनकम टैक्स
डिपार्टमेंट्स और इवन फाइनेंस मिनिस्टर ने
भी डी ब्रीफिंग के दौरान कहा कि इनकम
टैक्स तो देना पड़ेगा हम भी देते हैं हम
सब लोग इनकम टैक्स देते हैं खरगे जी भी
इनकम टैक्स देते हैं राहुल जी भी इनकम
टैक्स देते हैं हम सब इंडिविजुअल्स इनकम

टैक्स देते हैं लेकिन पॉलिटिकल पार्टी
इनकम टैक्स नहीं
देती अगर आपको कंपेयर करना है तो भारतीय
राष्ट्रीय कांग्रेस को भाजपा से कंपेयर
करिए दूसरी नेशनल पार्टी से कंपेयर करिए
क्या भाजपा ने आज तक के कभी भी इनकम टैक्स
दिया क्या भारतीय जनता पार्टी के ने के
ऊपर कभी भी पनला इज करके कभी भी इनकम

टैक्स लिया गया हम लोगों के पास में जो
पैसा आता है यह पैसा हमारी देश के राजनीति
के लिए डेमोक्रेसी को जिंदा रखने के लिए व
पैसा खर्च किया जाता है यह इनकम नहीं है
कोई किसी की इनकम नहीं हो रही है इसलिए
पॉलिटिकल पार्टीज को हमेशा इनकम टैक्स से
अलग रखा जा जाता है हमेशा पॉलिटिकल

पार्टीज इसी वजह से इनकम टैक्स एमटे होती
है हमेशा भारतीय जनता पार्टी ने आज तक कभी
भी पेनल्टी नहीं दी भारतीय जनता पार्टी ने
आज तक कभी भी इनकम टैक्स नहीं दिया तो फिर
कांग्रेस कांग्रेस से क्यों मांगा जा रहा
है कांग्रेस के लिए यह बिल्कुल नायाब
कारवाई है इस देश के राजनीतिक दलों के लिए

भी यह चौकाने वाला सच है क्योंकि 65 करोड़
88
8147 4 बैंक के खातों से मोदी सरकार ने
निकाल लिया इनकम टैक्स को सामने करके
जिसमें इंडिया के यूथ कांग्रेस का जो पैसा
था वह तकरीबन 4 करोड़ 20 लाख 35000 था

एनएसयूआई का पैसा तकरीबन 1 करोड़ 43 98000
था और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी का पैसा
तकरीबन 60 करोड़ 25 लाख था बैंक ऑफ बड़ौदा
यूनियन बैंक पंजाब नेशनल बैंक और एसबीआई
इन चार बैंकों में पैसा जमा था और एक झटके

में कहा गया कि हम आपसे इनकम टैक्स की
वसूली कर रहे हैं और यही सवाल कांग्रेस ने
उठाया यह कब से हो गया और बीजेपी ने इससे
पहले पॉलिटिकल पार्टी के तौर पर टैक्स कब
दिया जवाब सरकार की तरफ से नहीं आया लेकिन

एक जवाब राहुल गांधी ने अपने ट्वीट के
जरिए दिया उन्होंने कहा दरअसल इस दौर में
किसान अगर एमएसपी मांगता है तो उसे गोली
मारी जाती है जवान अगर नियुक्ति मांगता है
तो उसकी बात सरकार सुनने को तैयार नहीं
होती है पूर्व गवर्नर अगर सच बोलता है तो
घर पर सीबीआई भेज दी जाती है सबसे प्रमुख

विपक्षी दल के अकाउंट को फ्रीज कर दिया
जाता है मीडिया हो या सोशल मीडिया सच की
आवाज को दबा दिया जाता है और सच की यह
आवाज अंतरराष्ट्रीय तौर पर भारत के
राजनीतिक सवालों को लेकर तब गूंजी जब भारत
सरकार ने एक्स से कुछ अकाउंट को ब्लॉक

करने का आदेश दे दिया और एक्स ने सरकार के
इस आदेश को यह कहते हुए स्वीकार किया कि
वह इससे सहमत नहीं है लेकिन यह भारत सरकार
कह रही है तो एक्स ने कहा कि भारत सरकार
के आदेशों से कुछ एक्स अकाउंट को ब्लॉक या
सस्पेंड कर रहे हैं लेकिन हम इससे सहमत
नहीं है लोगों को बोलने की आजादी होनी

चाहिए और बकायदा एक्स के ग्लोबल अफेयर टीम
ने एक पोस्ट जारी की और अंतरराष्ट्रीय तौर
पर यह मामला सामने आ गया कि भारत की
राजनीति कितने उबाल पर है क्योंकि इस

पोस्ट में यह कहा गया हर चीज की जानकारी
दी गई कि भारत सरकार ने कार्यकारी आदेश
जारी किया है जिसमें कुछ एक्स अकाउंट
खातों और पोस्टों पर कारवाई करने की बात
कही है इन अकाउंट पर जुर्माना और जेल की
सजा जैसी कार्रवाई की बात कही गई है और

आदेशों के अनुपालन में हम इन खातों और
पोस्टों को केवल भारत में ही रोकेंगे यानी
जो पोस्ट होगी अंतरराष्ट्रीय तौर पर लोग
देख सकते हैं लेकिन भारत में कोई नहीं

देखेगा हालांकि हम इन कार्रवाइयों से
असहमत हैं और मानते हैं कि अभिव्यक्ति की
स्वतंत्रता इन पदों तक विस्तारित होनी
चाहिए हमें अपनी नीतियों के अनुसार
प्रभावित उपभोग कर्ताओं को इन कार्रवाइयों
की सूचना प्रदान कर दी है और कानूनी
प्रतिबंधों के कारण हम कार्यकारी आदेशों

को प्रभावित करने में असमर्थ हैं लेकिन
हमारा मानना है कि ट्रांसपेरेंसी यानी
पारदर्शिता के लिए उन्हें सार्वजनिक करना
आवश्यक है सरकार ने सोचा नहीं था कि यह
बात सामने आएगी लेकिन बात सामने आ गई यह

दूसरी स्थिति थी और तीसरी स्थिति यह निकल
कर आई इस दौर में जब पूर्व राज्यपाल ने जब
करप्शन के मामलों को लेकर सीबीआई के सामने
बताया था कि उन्हें घूस देने की कोशिश की

गई तो एक झटके में उन्हीं के घर जब वह खुद
अस्पताल में थे सत्यपाल मनिक उस दौर में
उनके घर पर छापे पड़ गए और कहा गया इसलिए
छापे मारे गए क्योंकि जो कार्रवाई सीबीआई
को करनी थी उसमें कीरू हाइड्रो
इलेक्ट्रॉनिक प्रोजेक्ट जो था जो 6 जुलाई

2022 को 16 जगहों पर जो छापेमारी की गई थी
उसी की कड़ी में यह किया गया है और यह
यहां जानना जरूरी है कि 2019 में एक निजी
फॉर्म को कीरू हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के
सिविल कार्य के लिए 2200 करोड़ का
कांट्रैक्ट देने में भ्रष्टाचार पाया था

और इसकी शिकायत उसी शख्स ने की थी जिसके
घर आज सीबीआई पहुंच गई अब यहां पर सवाल है
कि अलग-अलग रास्ते चाहे वह कांग्रे
कांग्रेस को लेकर हो चाहे वह सोशल मीडिया
को लेकर हो चाहे छापे को मारने को लेकर हो
यह तमाम कारवाई हो रही है लेकिन अगला सवाल
इसके आगे का है यह सवाल है कि इंडिया
गठबंधन जिन 175 सीटों पर तालमेल की स्थिति

में आकर खड़ा हो चला है तो क्या यह
राजनीतिक तौर पर बीजेपी के लिए संकट काल
तो नहीं है यह सवाल अब इसलिए महत्त्वपूर्ण
है क्योंकि पूरा चुनाव 400 पार के नारे के
साथ बीजेपी लेकर चल रही है और इसी दौर में
अब उसे समझ में आ गया है कि देश में
नैरेटिव क्या बनाया जाए डेवलपमेंट का

बनाया जाए अंतरराष्ट्रीय छवि का बनाया जाए
विश्व गुरु का बनाया जाए अयोध्या राम
मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का बनाया जाए या इस
देश के भीतर एक मोटी लकीर हिंदू मुस्लिम
को लेकर खींचने की जरूरत है जिससे वोटों
का ध्रुवीकरण हो

सके प्रधानमंत्री खुद आज एक कोऑपरेटिव
मामले कोऑपरेटिव संस्थाओं को लेकर गुजरात
में मौजूद थे वहां पर जाहिर तौर पर जिस
डेवलपमेंट का जिक्र होना चाहिए होना चाहिए
था हो रहा था हो रहा था इन तमाम बातों का

जिक्र बीजेपी अपने तौर पर कर रही है लेकिन
प्रधानमंत्री किन बातों का जिक्र वहां कर
रहे थे हमें लगता है इसको भी एक वक्त के
लिए सुनिए नैरेटिव यही से बनता है
बहनों हमारे यह
मंदिर सिर्फ देवालय है ऐसा नहीं
है सिर्फ पूजा पाठ करने की जगह है ऐसा भी
नहीं
है बल्कि ये हमारी हजारों वर्ष
पुरानी संस्कृति के परंपरा
के प्रतीक
है हमारे
यहां
मंदिर ज्ञान और विज्ञान के केंद्र रहे
हैं देश और समाज
को अज्ञान से ज्ञान की तरफ ले जाने के
माध्यम रहे
जाहिर है जिस वक्त प्रधानमंत्री मंदिर और
देवालय का जिक्र कर रहे थे ज्ञान विज्ञान
और भारत के सांस्कृतिक महत्ता को और भारत
की परंपरा और ज्ञान को मंदिरों के जड़ों
में खोज रहे थे उसी वक्त छापे पड़ रहे थे
और छापे जिस शख्स के यहां पढ़ रहे थे उसने
कुछ मामलों को कैसे उठाया सीबीआई ने दरअसल
दो एफआईआर दर्ज की 60 करोड़ रुपए का
कांट्रैक्ट जारी करने में करप्शन था
201718 में में जम्मूकश्मीर का जो हेल्थ
डिपार्टमेंट है वहां पर बीमा योजना का
ठेका देने के लिए एक इंश्योरेंस कंपनी से
रिश्वत के तौर पर यह पैसा लिया गया था और
दूसरा 2019 में एक निजी फॉर्म को किस
तरीके से 20200 कोड़ के कांट्रैक्ट में
भ्रष्टाचार पाया गया और वह उनको मिल जाए
इसके लिए सतपाल मलिक ने सीबीआई से कहा था
कि मुझे एक बड़े उद्योगपति ने और जो
महबूबा मुफ्ती और बीजेपी गठबंधन की सरकार
में एक मंत्री रहे व्यक्ति ने 150 50
करोड़ रुपए की रिश्वत दी थी अब सवाल है कि
छापे तो इसलिए पड़ रहे थे कहीं चुनाव के
ऐलान के बाद उस डॉक्यूमेंट को सत्यपाल
मलिक राजनीतिक तौर पर सामने लेकर ना आ
जाएं यह एक राजनीतिक जरूरत है सत्ता की कि
उसके खिलाफ कोई दस्तावेज इस दौर में सामने
ना आए तो छापे पढ़ने चाहिए और छापे पढ़कर
उस डॉक्यूमेंट को सरकार के वापस खजाने में
डाल देना चाहिए लेकिन फिर वही सवाल आकर
अटका कि यह तमाम डील अपने-अपने तरीके से
इंडिया गठबंधन के भीतर भी चल रही थी और अब
उत्तर प्रदेश की 80 सीट बिहार की 40 सीट
दिल्ली की सात सीट महाराष्ट्र की 48 सीट
यानी कुल 175 सीटें हैं और इस गठबंधन में
सीटों के तालमेल का मतलब सिर्फ यह नहीं है
कि पिछली बार की तरह कांग्रेस है या
की झोली खाली है क्योंकि उत्तर प्रदेश में
समाजवादी पार्टी के पास सिर्फ पांच सांसद
जीते थे कांग्रेस के एक ही जीते थे बिहार
में तो आरजेडी एक भी सांसद नहीं जीता
कांग्रेस का एक जीता दिल्ली में तो सातों
सीट हार गए थे आम आदमी पार्टी और कांग्रेस
और महाराष्ट्र के भीतर में शिवसेना जीती
थी 18 सीट क्योंकि बीजेपी साथ में खड़ी थी
इस बार तो पार्टी भी टूट गई बीजेपी भी
नहीं है अब कांग्रेस और एनसीपी साफ है जो
कि अपने तौर पर खुद शिवसेना के राजनीतिक
पृष्ठभूमि को इस दौर में बदल चुकी है तो
क्या कांग्रेस तीन सीटों पर और बाकी छत्र
27 सीटों पर कुल मिलाकर 30 सीट 175 में से
30 सीट इंडिया गठबंधन के पास इस दौर में
जिसमें शिवसेना भी टूट गई सवाल यह नहीं है
कि इस दौर में जिस परसेप्शन और नैरेटिव को
बनाने की तैयारी हो रही है सवाल उसके आगे
की उस राजनीति का है जो पहली बार 2014 के
चुनाव के मद्देनजर इस देश की राजनीतिक
जमीन बचेगी या नहीं बचेगी उस लोकतंत्र के
आसरे जहां राजनीतिक तौर पर संघर्ष होगा या
नहीं होगा इस चुनौती के आसरे यह तमाम
चीजें इस दौर में परखी समझी जा रही है और
शायद इसीलिए अगर आप ध्यान दीजिए तो बीजेपी
ने एक राग को पकड़ा है कोई नहीं हरा सकता
है और यह सवाल आज राजनाथ सिंह से भी किया
गया तो वह एक कदम और आगे बढ़ गए उन्होंने
कहा तीसरी बार अरे जनाब चौथी बार भी जीत
जाएंगे जनता ने इतना विश्वास दिया हमारे
प्रधानमंत्री मोदी जी को अब लोग य मानने
लगे हैं कि तीसरे टर्म में भी केंद्र में
किसी की सरकार होगी तो मोदी जी के नेतृत्व
की सरकार होगी और चौथे टर्म में के बारे
में क्या
बोले सरकार के बारे में क्या बो दरअसल ये
सरकार की अपनी सोच है बीजेपी का अपना
नैरेटिव है असल सवाल तो यह है कि आखिर
तेजस्वी यादव हो अखिलेश यादव हो केजरीवाल
हो हेमंत सोरेन हो यह एक ऐसी कतार है या
उद्धव ठाकरे हो इनके लिए 2024 का चुनाव
शायद बीजेपी के लिए जिस तरीके से साम दम
दंड भेद अपनाते हुए चुनाव जीतने का है
शायद इनके लिए भी यह चुनाव मरने मारने
वाली स्थिति का है क्योंकि राजनीतिक तौर
पर इसके बाद उन्हें खड़े होने की स्थिति
में कोई लेकर आएगा नहीं और यह एक आखिरी
लड़ाई की दिशा में बढ़ता हुआ कदम है
क्योंकि इस दौर में अगर राहुल गांधी की
न्याय यात्रा को भी परखिए तो ध्यान दीजिए
वह किस तरीके से इस देश की जनता और युवाओं
पर सीधी चोट यह कहकर कर रहे हैं कि हमें
भी पता है इस दौर में सत्ता में कौन है
लेकिन सत्ता जिस अंदाज में चल रही है
उसमें आपके हाथों में कुछ भी नहीं होगा
बेरोजगारी आपके साथ होगी महंगाई से आप
प्रताड़ित होंगे और सड़कों पर घूमते फिरते
हाथों में नारे लगाकर हाथों में बैनर
पकड़कर नारे लगाने की स्थिति से आगे आप
बढ़ नहीं पाएंगे यह राजनीतिक तौर पर एक
ऐसी लड़ाई है जिस लड़ाई को लेकर अब
छत्रपुर भी यही सवाल है क्या इस लड़ाई को
2024 में एक ऐसी संघर्ष में तब्दील किया
जा सकता है जहां 272 का आंकड़ा ना छुपाए
बीजेपी और गठबंधन के आसरे और परसेप्शन और
नैरेटिव के आसरे अगर बीजेपी अपने तौर पर
400 पार का नारा लगा रही है तो दूसरी तरफ
इंडिया गठबंधन और उसके वह नेता जो जानते
हैं कि उत्तर प्रदेश में अब अखिलेश के
सामने मुश्किल है वह जानते हैं कि तेजस्वी
को भी ईडी फांस चुकी है गाहे बगाहे कभी भी
किसी भी रूप में उनके खिलाफ भी कार्रवाई
हो सकती है हर कोई जानता है कि उद्धव के
परिवार के इर्दगिर्द भी शिकंजा कसा जा रहा
है राहुल गांधी को भी हेरा केश में बख्शा
नहीं गया लेकिन उन सबके बावजूद भी कुछ
निकलता क्यों नहीं है और यही हालात तो
केजरीवाल को लेकर खड़ी की गई लेकिन
केजरीवाल को जेल में डालें या ना डालें
राजनीतिक तौर पर कद बढ़ जाएगा या नहीं
बढ़ेगा इसी उपो के भीतर भारत की राजनीति
तमाम संबंधों और डील को लगातार अपनाए हुए
थी लेकिन अब वह धारा टूट गई और उस टूटती
हुई धारा के बीच में हमें लगता है राहुल
गांधी की अब इस न्याय यात्रा में 25 तारीख
को अखिलेश यादव शामिल होंगे तब क्या होगा
और तब यह बेखौफ की परिस्थिति कहीं और तीखी
होगी क्योंकि जो दो दिन पहले दिखाई दिया
उत्तर प्रदेश में उसका एक छोटा सा हिस्सा
राहुल गांधी जो कह रहे हैं सुनना
चाहिए राम मंदिर खुलता है राम मंदिर में
आपको नरेंद्र मोदी दिखेगा आपको अंबानी
दिखेगा आपको अदानी दिखेगा आपको हिंदुस्तान
के सब पति
दिखेंगे आपको एक पिछड़ा नहीं दिखेगा आपको
एक दलित नहीं दिखेगा आपको एक आदिवासी नहीं
दिखेगा क्यों
नहीं यह व आपकी जगह नहीं भा और बहनों आपकी
जगह सड़को पर भीख मांगने की
है आपका
काम हिंदुस्तान में सड़क पर जाकर ऐसे
पोस्टर दिखाने का है और का
काम उनका कुछ नहीं हो
भैया उनका
काम पैसा गिनने का
है यह राहुल गांधी की बदलती हुई छवि भर
नहीं है बल्कि भारत की राजनीति में युवाओं
के सामने कितना बड़ा अंधेरा है और युवा
कितनी बड़ी तादाद में वोटर के तौर पर
मौजूद है अगर चुनाव आयोग की फाइलों को ही
टटोल लीजिए और इस दौर में चुनाव आयोग
अलग-अलग राज्यों में जो युवाओं वोटरों की
जानकारी राज्यों में घूम-घूम कर दे रहा है
उसमें बिहार के भीतर तकरीबन सवा करोड़
युवा जो 20 से 29 वर्ष के बीच है उनकी
तादाद है उत्तर प्रदेश के भीतर यह तकरीबन
न करोड़ से ज्यादा की है और उत्तर प्रदेश
का सच तो यह भी है कि दो करोड़ यहां पर
अगर रजिस्टर्ड बेरोजगार हैं और जिनकी उम्र
जो है वह 30 बरस के पार जाने की स्थिति
में है अगर उन पूरे वोटरों को ले लीजिएगा
और युवा इस देश में अगर जागृत हो गया
जिसको रोजगार चाहिए काम नहीं मिल रहा है
कॉलेज में पढ़ाई नहीं हो रही है और इन
तमाम परिस्थितियों में फीस बढ़ा दी गई यह
तमाम परिस्थितियों के साथ अगर युवा इस देश
का एकजुट होकर जुड़ गया जब वह देखता है
परीक्षा देने जाता है तो पेपर लीक और पेपर
लीक का एक अपना पॉलिटिकल बिजनेस इस देश के
भीतर में चल रहा है तो राजनीतिक तौर पर इस
देश के भीतर अखिलेश यादव के पास उम्र है
तेजस्वी यादव के पास उम्र है केजरीवाल के
पास उम्र है राहुल गांधी के पास उम्र है
और उद्धव ठाकरे के पास भी उम्र है उम्र के
लिहाज से यह संघर्ष करने की स्थिति में है
हेमंत सोरेन के पास भी अपनी उम्र है तो
राजनीतिक तौर पर उम्र अगर मायने रखती है
तो इनके पास अभी आने वाले वक्त में संघर्ष
को और तीखा करके आने वाले वक्त में
राजनीति को अपनी राजनीतिक जमीन में तब्दील
करने की सोच और वक्त दोनों है सवाल सिर्फ
इतना था कि जो सत्ता की डील थी उस डील को
मानने के बाद तत्काल की राहत तो हो सकती
थी लेकिन आने वाले वक्त में राजनीतिक जमीन
कैसे बचती शायद यह बड़ा सवाल हर किसी को
डरा रहा था और उसी डर पर जीत हासिल करते
हुए पहली बार सत्ता के खिलाफ या कहे सत्ता
की विसात के विरोध में जो शह देने की
स्थिति नेताओं ने जो इंडिया गठबंधन के साथ
साथ थे उन्होंने जो करनी शुरू की तालमेल
के साथ इसने वाकई दिल्ली की धड़कने बढ़ा
दी है और राजनीतिक तौर पर अब तीन सवाल
सामने हैं पहला सवाल यह है अगले 15-20 दिन
यानी नोटिफिकेशन से पहले अभी तो सरकार
सोशल मीडिया पर गई पूर्व राज्यपाल के घर
पर छापा पड़ा और कांग्रेस के 65 करोड़ 88
लाख रुप आईटी के जरिए सरकारी खजाने में आ
गए अब क्या होगा और इन राज्यों में जो
बिजनेसमैन है जो राजनीतिक तौर पर फंडिंग
करने की स्थिति में है उनके खिलाफ गोलबंदी
होगी या उनको घेरे में लेकर राजनीतिक
कार्रवाई की शुरुआत होगी उसके आगे की बात
है क्या सीधे तौर पर अब यह माना जा सकता
है जब सातवां नोटिस केजरीवाल को दिया जा
चुका है तो अब रास्ता जेल की दिशा में
जाता है यहां पर एक दूसरा सवाल बड़ा
महत्त्वपूर्ण है जेल में जाने के बाद नेता
कहते हैं बड़ा हो जाता है लेकिन भारत की
राजनीति में क्या यह 21वीं सदी में संभव
नहीं है क्योंकि जेल में जाने के बाद
नेताओं को जनता भूल जाती है यह भी इस दौर
में देखा गया और सत्ता इस मिजाज के साथ है
कि जेल में डालने के बाद नेता को जनता याद
रखेगी नहीं क्योंकि इस दौर में पॉलिटिकल
पार्टी सिर्फ एक व्यक्ति के इर्दगिर्द आकर
टिक जाती है और दूसरी कतार का कोई नेता
बचता नहीं है तो पहली कतार ही अगर गायब हो
जाएगी तो फिर दूसरी कतार कुछ नहीं कर
पाएगी तो इस दिशा में दूसरा कदम होगा और
तीसरी कारवाई जो राजनीतिक तौर पर नजर आती
है उसमें साम धाम डंड भेद में चुनाव आयोग
की सक्रियता आपको नजर आ सकती है उन
राजनीतिक दलों को लेकर जो राजनीतिक दल
इंडिया गठबंधन के साथ है इशारा सत्ता का
होगा सियासत का होगा और सरकार का होगा और
उसके बाद इन तीन रास्तों पर आने वाले वक्त
में आपको कार्रवाई दिखाई देने लगेगी लेकिन
आख ि में यही कहिए जो डील थी वह टूट गई
नेताओं ने हिम्मत दिखा दी बहुत-बहुत
शुक्रिया बहुत-बहुत शुक्रिया

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