Jayant Chaudhary फिर मार सकते हैं पलटी, BJP नहीं दे रही भाव!

नमस्कार आज फिर से बात करेंगे उत्तर
प्रदेश पर उस प्रदेश पर जो राजनीतिक लिहाज
से पूरे देश की राजनीति पर ठीक ठाक असर
डालने की क्षमता रखता है उस प्रदेश पर जो
दोनों धरों के लिए एक सियासी जमीन बन चुका

है केंद्रीय जमीन बन चुका है उस प्रदेश पर
जिसको लेकर के भारतीय जनता पार्टी भी बहुत
सजग है और वो चाहती है कि जिस प्रदे देश
के

अयोध्या राम मंदिर काशी मथुरा जो बीजेपी
की राजनीति का केंद्रीय कोर है वह भी
उत्तर प्रदेश में है और दूसरी तरफ विपक्षी
दलों की सबसे बड़ी उम्मीद उत्तर प्रदेश है

उत्तर प्रदेश की 80 सीटें जिसको लेकर के
बीजेपी की रणनीति यह है कि मंदिर बनाने के
बाद 80 के 80 क्यों ना जीत जाए ताकि
बार-बार जो नरेंद्र मोदी 207 का का ख्वाब
दिखा रहे हैं उसको हकीकत में तब्दील करते

हुए कहे कि अब तो हम कहीं नहीं जाने वाले
इसलिए वो जरूरत पड़ती है तो जैन चौधरी के
गठबंधन को भी तोड़ लेते हैं जरूरत पड़ती
है तो कई ओबीसी दलित नेताओं को भी इस तरह
से उकसा हैं ताकि वह विपक्षी दलों के
गठबंधन से दूर हो जाए और वही विपक्षी दलों

ने भी अपनी तमाम बाधाओं और मुश्किलों को
पार करते हुए इंडिया गठबंधन कर लिया और कल
उसका अचार कलान भी हो गया तो क्या इंडिया
गठबंधन की रणनीति और क्या है बीजेपी की
रणनीति इन दोनों की काट कहां है और क्या

वजह है कि जयंत चौधरी जब यह देख रहे होंगे
कि 17 सीट कांग्रेस को मिल गई 63 सीटें
समाजवादी पार्टी को मिल गई और अब समाजवादी
पार्टी अपने बाकी दलों के साथ बैठकर उन्हे
एडजस्ट करने की रणनीति में शुरू हो गई

होगी जयन चौधरी सोच रहे होंगे कि हमें
कितने मिले क्या मिला आज जैन चौधरी जब यह
सब देख रहे होंगे तो उनका दिल क्या कर रहा
होगा आज पूरी वीडियो में इन सारे पहलुओ
पर बात करेंगे और बात यह भी करेंगे कि
बीजेपी की रणनीति क्या है उत्तर प्रदेश को

लेकर के विपक्षी दलों की रणनीति क्या होगी
उत्तर प्रदेश को लेकर के और अगर इसी दिशा
में चुनाव हुआ तो उसके परिणाम क्या हो
सकते हैं स्वागत है आप सबका 4 पीएम न्यूज

नेटवर्क पर मैं हूं डॉक्टर लक्ष्मण यादव
आज बात यहीं से शुरू करते हैं कि एक बात
है कि दुश्मनी जमकर करो लेकिन यह गुंजाइश
रहे जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा
ना हो भारतीय राजनीति में बशीर बद्र का यह

शेर शायद गंभीरता से नहीं लिया जाता लेकिन
इसकी दूसरी लाइन को बहुत गंभीरता से लिया
जाता है और वो दूसरी लाइन यह कहती है कि
दुश्मनी कितनी भी करो

लेकिन जब हम दोस्त होते हैं तो उसके लिए
हम कोई भी दिक्कत कोई भी परेशानी नहीं
देखते और दोस्त होना होता तो हो जाते हैं
भले ही कितनी भी दुश्मनी रही हो आज बात
शुरू करते हैं जयंत चौधरी से क्योंकि

इंडिया गठबंधन होने के बाद जो एक शख्स जो
इस गठबंधन के कोर में हुआ करते थे बिना उन
पर बात किए यह बातचीत अधूरी रह जाएगी जयन
चौधरी जिन्होंने पहले के दिनों में भी यह

कोशिश हो रही थी कि जयन चौधरी क्या करने
वाले हैं जयन चौधरी किस दिशा में जाने

वाले और इसको लेकर के लगातार एक कयास हो
रहा था कभी खीर और दूध का प्रतीक आ जा रहा
था तो कभी चवन्नी का लेकिन जयंत चौधरी ने
अपना दिल हार दिया और एनडीए में शामिल हो
गए हालांकि अभी औपचारिक घोषणा उस तरह से

नहीं हुई है क्योंकि अभी उन्हें पता ही
नहीं चल पा रहा है कि उन्हें कितनी सीटों
पर चुनाव लड़ना है और और यह मुश्किल जयंत

चौधरी के सामने गंभीर मुश्किल बन कर के
खड़ी है कल्पना करिए कि जयंत चौधरी से
समाजवादी पार्टी का झगड़ा क्या हुआ और किस
झगड़े के आधार पर उन्होंने यह तय किया कि
वो इंडिया गठबंधन में नहीं रहेंगे अभी तक

उन्होंने खुलकर कुछ बोला नहीं है लेकिन
जितना इशारों में बोला है उससे यह दिख रहा
था कि कई सीटें लोकसभा चुनाव में जैन
चौधरी खुद चाहते थे और सपा उन सीटों को
नहीं दे रही थी असली झगड़ा तो यह था और
क्या यह झगड़ा कांग्रेस और सपा के बीच

नहीं हुआ क्या यह झगड़ा पल्लवी पटेल की
पार्टी अपना दल कमेरा वादी और सपा के बीच
नहीं हो रहा है क्या यह झगड़ा आम आदमी

पार्टी और कांग्रेस के बीच दिल्ली और
पंजाब में नहीं हो रहा यानी यह झगड़ा बहुत
सहज और स्वाभाविक झगड़ा है यह मतभेद बेहद
सहज और स्वाभाविक है लेकिन इस मतभेद के
बाद दो रास्ते राजनीतिक दलों के सामने

निकलते हैं अगर आप सामने से बात कर रहे
हैं कि उन्होंने बहाना क्या बनाया तो मैं
अभी उसका विश्लेषण कर रहा हूं पर्दे के
पीछे क्या क्या खेल था छोड़ देते हैं

कि अगर आप यह बहाना बनाते हैं जो नीतीश
कुमार बहाना अगर मैं इसको नाम दूं तो यह
नाम होगा नीतीश कुमार बहाना मतलब इसका
क्या है हम मोदी को हराने के लिए विपक्षी
दलों को एकजुट करके पूरे देश में आंदोलन

और एकजुटता बनाना चाह रहे थे और लोग हमारा
साथ नहीं दिए एकजुटता नहीं बनी इसलिए हम
से ही जाकर मिल गए यह नीतीश कुमार बहाना
इसको आप नोट कर लीजिए तो नीतीश कुमार

बहाना कितने लोग बना रहे हैं उनमें से
शायद एक जयंत चौधरी भी नहीं है मैं बारबार
कह रहा हूं कि जयंत चौधरी एक उभरते हुए
युवा नेता है उनकी अपनी पार्टी पर पकड़ है
बेहद संवेदनशील है और जिस तरीके से मैं

तारीफ करता हूं नीतीश कुमार की उसी तरीके
से मैं तारीफ करूंगा जयंत चौधरी की आप ती
कुमार के बयान ले लीजिए या जयंत चौधरी के
बयान ले लीजिए एक भी जगह आपको नफरत नहीं
दिखेगी और आज की तारीख में अगर किसी नेता
में नफरत न दिखे तो यह कोई सामान्य बात
नहीं है यह बड़ी बात है अब शिकायत केवल यह
होगी कि जिसके दिल में नफरत नहीं थी

मोहब्बत की पैरो कारी करते करते वह नफरत
लोगों के साथ कैसे खड़ा हो गया इसकी
शिकायत और इसकी आलोचना एक नागरिक के र पर
भी हम सवाल के तौर पर इन नेताओं से करते
रहेंगे अब इस बात के नितीश बहाना नितीश

कुमार बहाना पर आए तो जयंत चौधरी ने कहा
कि भाई आप सात सीटें दे रहे थे और कह रहे
थे कि चार पर हमारा कैंडिडेट रहेगा और तीन
पर आरएलडी का कैंडिडेट रहेगा आपके लोग

दबाव डालते हैं आप इससे नाराज होते हैं और
आप चले जाते हैं एनडीए में शामिल हो जाते
हैं अब जरा इसका जवाब कौन देगा कि अगर आप
एनडीए में शामिल हो गए

तो आपको कितनी सीट मिली आपको क्या
मिला किस वजह से आप एनडीए में शामिल हो गए
केवल झगड़े से नहीं यह झगड़ा तो कांग्रेस
और सपा के बीच ठीक ठाक लेवल तक उत्तर

प्रदेश में
था दोनों ने उस झगड़े से पार पाया ना
लगातार संवाद करते रहे अपनी नाराजगी को
जाहिर करते रहे अपनी शर्तों को सामने रखते
रहे बातचीत करते रहे टूटते टूटते या इसे
यूं कहे कि सत्ताधारी दल की साजिशों के
तोड़े जाने के हद तक जाने के बावजूद यह
गठबंधन कामयाब हो गया फिलहाल इसकी घोषणा

हो चुकी है जयन जी आप अगर इस चीज को देख
रहे होंगे तो आपको क्या नहीं महसूस होगा
कि सात सीटों में से चार सपा अपना
कैंडिडेट दे रही थी तीन आरएलडी की दे रही

था जीतने का यह हुनर भी आजमाना चाहिए जंग
अगर भाई से हो तो हार जाना
चाहिए मैं बार-बार इस शेर को कहता हूं पर

यह सामान्य बात नहीं
है आप अपने भाई से लड़ रहे थे आप लड़ते
अखिलेश यादव से आप अपनी दावेदारी को
पुख्ता तरीके से रखते आप कहते कि नहीं तीन
नहीं पांच हमारे कैंडिडेट होंगे दबाव
डालते उनकी शर्तों को पूरा करते कि ये
पांच सीटें हैं और इन पांच सीटों में इस
समीकरण के मुताबिक यह चुनाव हम जीतेंगे और

हमारे अमुक प्रत्याशी होंगे इसलिए यह पांच
सीट हमें दीजिए हमें उम्मीद है कि पांच
मिल जाती या चार तो मिली जाती या पांच भी
मिल सकती थी जब ये लगने लगता कि नहीं नहीं
भाई है हमारा जयंत भाई है पश्चिमी उत्तर
प्रदेश की वो जोड़ी जयंत चौधरी जी आपको
याद होगा आरएलडी आई रे समाजवादी आई र
कितना माहौल बना लेकिन वोट नहीं मिला

विश्लेषण तो आपने भी किया होगा ने जैन जी
क्या वो आरोप सही क्या है कि आपका वोटर ही
आपके साथ नहीं था वह स्वाभाविक तौर पर
बड़ी तादाद में ओबीसी की पहचान की बजाय
धर्म की पहचान पर हावी होकर के जा रहा था

यह लेकिन नेता का फर्ज है कि किसान आंदोलन
चौधरी चरण सिंह की विरासत और तमाम चीजों
पर अपने वोटर को शिफ्ट करना था कि भैया
संविधान ही नहीं रहेगा तो धर्म का क्या
करोगे इसलिए ऐसी पार्टी को मत वोट दो जो
संविधान बदलने की बात करती है कि किसानों

को मार रही है जयन चौधरी जी तस्वीरें आप
भी देख रहे होंगे एक टर्बन पहने हुए पुलिस
अधिकारी को जब सामने बीजेपी के नेताओं ने
कहा कि यह खालिस्तानी है तो जो चीख और
गुस्सा उस पुलिस अधिकारी के जहन में था

आपने दो लाइन ट्वीट किया ना कि यह कितना
बुरा है किसी की पहचान को देख कर के उनको
यह करने का कि वो सिख अगर है तो
खालिस्तानी जयन जी आप उन्ही के साथ साथ
चले गए जन जी दिल लगता है आपका जिस दिल को
आपने हार दिया एक राज्यसभा सीट जो कि
अखिलेश जी ने आपको पहले ही दे रखी थी
गठबंधन धर्म को निभाते हुए पिछली बार

राज्यसभा सीट जयंत जी आप उस भाई भाई के
रिश्ते से पाए थे आप एक अच्छे नेता मैं
फिर से कह रहा हूं अगर जयन चौधरी जी आप
अच्छे नेता नहीं होते तो उस सिख को
खालिस्तानी कहने पर आपको दर्द नहीं हो

आपको दर्द हुआ क्योंकि आप नफरत के नेता
नहीं है आप किसान नेता है और किसान किसी
से नफरत नहीं करता किसान कमेरा कौम जो हाथ
से श्रम करती है वह नफर लोगों के साथ कैसे
खड़ी हो सकती है दर्द हुआ ना आपको जब

सिखों को खालिस्तानी कहा जा रहा है दर्द
होता है ना आपको जब मुसलमानों को
पाकिस्तानी कहा जाता है दर्द होता है ना
आपको जब किसान आंदोलन पर गोलियां चलाई
जाती है दर्द होता है ना आपको जब एक
नौजवान किसान के मारे जाने की खबर आप तक
पहुंचती होगी

और सीट नहीं मिली अभी तक कि किन सीटों पर
कितना लड़ेंगे चुनाव तो साहब आप पहले भी
हारे थे चुनाव फिर हार जाएंगे या जीत
जाएंगे मगर आंख से आंख मिलाकर कैसे रह

वक्त में आप साथ देने चले
गए चले भी आओ कि गुलो गुलों में रंग भरे
वादे नौ बहार चले चले भी आओ कि नफरत का
कारोबार रुक के मैं अहमद फराज के शेर को

थोड़ा बदल करके आपसे एक पैगाम देना चाहता
हूं कि गुलों में रंग भरे वादे नौ बहार
चले चले भी आओ कि नफरत का कारोबार
रोके इसलिए मैं सोचता हूं कि इस समीकरण को
आप देखेंगे किसान आंदोलन को आप देख रहे
होंगे आपका मन नहीं मान रहा होगा यह मुझे

पता है लेकिन आपके नेता जो चाहते हैं कि
उत्तर प्रदेश में एक कैबिनेट मंत्री बन
जाए एक स्टेट मंत्री बन जाए आप आपके नेता
जिसमें से कोई एक चाहता होगा कि केंद्र
में मंत्री बनेंगे तो मेरा नाम ना हो आपके
नेता जो चाहते होंगे कि राज्यसभा में जो
सीट मिलने वाली वो मेरी होगी और आपके

कार्यकर्ता चाहते होंगे कि ईडी और सीबीआई
से बच जाए केस मुकदमे जेल जाने से बच जाए
इसलिए आपको दबाव डाल कर के एनडीए तरफ ले
गए पूछिए जरा उन नेताओं से इतिहास में जब
इस देर का मूल्यांकन होगा तो कितना आप
सोचो ना कि तेजस्वी यादव आंख में आख डालकर
जनता के बीच उतर गया यादव जैसे नेता शान

से घूमते हैं साहब वो आंख में आंख डाल के
बोल लेते हैं अखिलेश यादव जैसा नेता वो
आंख में आख डाल कर के कहता है कि बाबा
साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के संविधान को
बचाने के लिए डॉक्टर राम मनोर लोहिया के
समाजवाद को बचाने के लिए पीडीए के 90 पर
लोगों को उनका हक दिलाने के लिए आइए सब
लोग एकजुट हो जाए अभी देर नहीं ई जन जी
अगर आप तक मेरी ये बात पहुंचे तो मैं

उम्मीद करूंगा कि आप इन बातों को सोचेंगे
जरूर क्योंकि मैं जानता हूं आप एक किसान
कमेरा कौम का एक स्वाभाविक पक्ष रखते हैं
आपके अंदर दिल है जो नौजवानों और किसानों
के लिए धड़कता है नफरत हों के लिए अपने

दिल को मत हारिए देखिए कि उत्तर प्रदेश
में राहुल गांधी जैसा एक नेता आंख में आख
डाल कर के अपने नौजवानों से कह रहा है तुम

बब्बर शेर हो डरना नहीं है 6800 शिक्षक
भर्तियों के मामले को पोस्टर उठा कर के
बीजेपी बलात्कारियों की पार्टी है यह
नौजवानों को रोजगार नहीं दे रही यह देखो

पेपर लीक करवा रही है जैन जी आप नहीं बोल
पा रहे होंगे जबकि मैं चाहूं मैं जानता
हूं कि जैसे अखिलेश जी बोल रहे हैं जैसे
राहुल गांधी बोल रहे हैं इससे ज्यादा तेवर
के साथ आप बोलना चाहते हैं और आप चाहते
हैं कि यह पक्ष रखा जाए तो इस चीज को

देखिए और उत्तर प्रदेश में जो गठबंधन हुआ
17 सीट कांग्रेस के पास है 63
सीट समाजवादी पार्टी के पास है एक बात
देखिए ना कि मैं बार-बार इस गठबंधन को यह
कह के देख रहा हूं कि यह गठबंधन
सामान्य गठबंधन नहीं है क्योंकि यह
विचारों और ख्यालों का गठबंधन है यह सपनों
का गठबंधन है और जितने लोगों के स्वप्न

साझा है जाति
जनगणना जाति जनगणना राहुल गांधी के भाषणों
का कोर है ये अलग बात है कि राहुल गांधी
के अपनी पार्टी के बहुत सारे लोग इस बात
को बोलते ही नहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस में

किसी ने इस बात को बोला ही नहीं जबकि
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बात बोली जानी
चाहिए थी कि ये गठबंधन केवल दलों का नहीं
दिलों का हो रहा है और दिलों में दर्द है
और सपने हैं दर्द के दवा के लिए गठबंधन हो
रहा है और सपनों के पूरा करने के लिए
गठबंधन हो रहा है दर्द किसानों का है दर्द
नौजवानों का है दर्द दलित पिछड़े
आदिवासियों का है दर्द हिस्सेदारी ना
मिलने का है दर्द अपमान का है दर्द
बेईमानी का है दर्द बलजर और भ्रष्टाचार के
जरिए जेल में डाले जाने और मुकदमे का और
स्वप्न जाति जनगणना का है स्वप्न संविधान
को लागू कराने का है स्वप्न संविधान के
साथ समाजवादी मूल्यों को लागू कराने का
इसलिए उत्तर प्रदेश पूरे देश के सामने एक
नजीर बनने जा रहा है और अगर समाजवादी
पार्टी के नेता अपने नेता अखिलेश यादव के
तेवर को जिसमें कल का ट्वीट देखिए ना कल
का ट्वीट साफ कहता है कि एक वैचारिक
गठबंधन है एक विचारधारा जो इस देश को
बचाना चाहती है और हजारों साल से जिनके
साथ अन्याय हुआ अत्याचार हुआ शोषण हुआ उस
90 पर आबादी को उसका हक दिलाना चाहती है
एक विचारधारा जो राहुल गांधी के शब्दों
में नजर आती है उनकी जबान में एक वास्तविक
सच्चाई बनकर सामने आती है एक विचारधारा जो
पीडीए की बात करती है एक विचारधारा जो
भारत के संविधान को बचाने की की बात करती
अगर यही
विचारधारा मुकम्मल तरीके
से उत्तर प्रदेश की राजनीति में पुख्ता
तरीके से जमीन पर उतर जाए तो जयंत जी आपका
मन नहीं लगेगा वहा नीतीश जी से पूछिए आजकल
अगर बात हो आपकी तो नितीश जी का भी मन
नहीं लग रहा हो बीजेपी एक समंदर है भक्ति
आंदोलन के हमारे कवि कहा करते थे हमारे
गुरु बड़े भृंगी भृंगी एक कीड़ा होता है
और भक्ति आंदोलन के कवियों ने कहा कि जिस
कीड़े को अपना बनाना होता है पहले वो उस
कीड़े के ऊपर आता है और जोर जोर से चक्कर
लगाकर उसके ऊपर नाचता है उसे कहते
हैं और इतना वो नाचता है कि कुछ देर बाद
वो दूसरा कीड़ा भी उसी की तरह नाचने लगता
है फिर वो दोनों तीसरे कीड़े के पास चले
जाते संत काव्य का व्यक्ति कहता है संत
हमारा कवि कहता है कि हमारे गुरु इस भृंगी
की तरह है जब अपना अपना चेतना अपना खवाब
अपना ज्ञान हमें दे देते हैं तो मैं भी
गुरु की तरह सोचने लगता हूं
राजनीति में यह चेतना तो आप सब में
है इस समय कहां खड़े होना था जंगल में आग
लगी है और इस कविता के जरिए लोगों तक
पहुंचाएगा जयंत जी आप भी नितीश कुमार जी
आप भी स्वामी प्रसाद मौर्य जी आप भी तमाम
वे लोग ओम प्रकाश राजभर जी जरा इसको
सोचिए आग लगी इस वृक्ष को जलने लागे पात
उड़ते क्यों नहीं प
जब पंख तुम्हारे पास इस कविता का जवाब
मेरा एक पैगाम समझिए उत्तर प्रदेश की
राजनीति आपकी बाट जोह रही है आप नहीं भी
होंगे कल्पना करिए तो जिस दिन उत्तर
प्रदेश की सड़कों पर राहुल गांधी और
अखिलेश यादव एक साथ उतरेंगे वल्लवी पटेल
होंगी साथ में स्वामी प्रसाद मौर्या को भी
होना चाहिए इन्हीं के साथ में ओम प्रकाश
राजभर जी आपके लिए भी सेम वही पैगाम है जो
जो जो जो ज चौधरी जी के लिए क्योंकि
राजनीति का समीकरण तो आप देख ही रहे हैं
एनडीए ने आपको मंत्री नहीं बनाया ओम
प्रकाश राजभर जी और आज तक अब तो आचार
संघिता लगने वाली है क्या बीत रही होगी
आपके ऊपर इतना अपमान इसका दसवा हिस्सा भी
अपमान अगर समाजवादी पार्टी में होता तो
आपने क्या क्या नहीं सुना दिया जरा
सामाजिक न्याय के लोग इस बात का जवाब दे
कि आपके साथ इतना अपमान होता है तो हमें
कष्ट होता है कि आप हमारे नेता है लेकिन
थोड़े से पद और ईडी के डर से आप कहां चले
गए और इतना आप पान झेल रहे हैं इस कविता
का आखिरी पैगाम उन तमाम लोगों को जो उत्तर
प्रदेश के राजनीति में अभी भी गुंजाइश
रखते हैं कि उन पक्षियों ने जवाब दिया आग
लगी इस वृक्ष को जलने लागे पात उड़ते
क्यों नहीं पक्षियों से पंख तुम्हारे पास
उन पक्षियों ने कहा कि फल खाए इस वृक्ष का
और गंदे कीने पास धर्म हमारा यही है जले
इसी के साथ मैं उम्मीद करता हूं
कि सीट बंटवारे के इस समीकरण के बाद जयंत
चौधरी जी ओम प्रकाश राजभर जी पल्लवी पटेल
जी स्वामी प्रसाद मौर्य जी संजय निषाद जी
तमाम जी लोग हैं यह सारे लोग संविधान और
सामाजिक न्याय के लिए समाजवाद और जाति
जनगणना के लिए किसान नौजवान के लिए
महिलाओं के सम्मान के लिए गठबंधन के लड़ते
हुए लोगों को जब देखेंगे तो दिल यही होगा
भले जीते या हारे खुदारी से आंख में आंख
मिलाकर कहेंगे कि जब सबसे मुश्किल वक्त था
चुनाव का तो हम लड़ रहे थे जब सबसे
मुश्किल वक्त था चुनाव का हमारे साथियों
को हमारे खिलाफ खड़ा कर दिया गया अपनी
गलतियों के बावजूद हम लड़ रहे थे हम एकजुट
थे और हम लड़ने के लिए सामने खड़े थे तब
आपसे लोग पूछेंगे कि आप जिनके साथ गए थे
वो तो सीट भी नहीं दे रहे थे वो आपको यह
भी नहीं बता रहे थे कि कहां से लड़ो के
कितने लोग लड़ो के आप क्या जवाब देंगे
आपका क्या मानना है नीचे कमेंट बॉक्स में
जरूर बताइएगा फिर मिलेंगे किसी और विशेषण
के साथ तब तक के लिए बहुत-बहुत
धन्यवाद

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