Lok Sabha Election में क्या Akhilesh Yadav और Rahul Gandhi करेंगे कमला ?, Rajiv Ranjan से समझिए

राजीव आप सहमत हैं इस बात से ठीक है और जब
हम यह कह रहे हैं कि एक बार फिर जो है दो
लड़कों की यह जोड़ी दिखेगी और क्या यह
माने कि एक बार फिर यूपी की राजनीति वहीं
2017 वहीं पर पहुंच गई है क्या तब भी दो

लड़कों की जोड़ी कमाल करेगी कई नारे दिए
गए थे लेकिन नतीजा क्या हुआ वह सबने देखा
और आज की स्थिति से अगर हम कंपेयर करते
हैं पहले तो अगर बात हम सीट शेयरिंग की कर
ले तो यहां अगर गठबंधन के लिए इंडिया

गठबंधन के लिए यह सीट शेयरिंग आसान हो गई
तो वही मुश्किलें वहां पर एनडीए गठबंधन के
लिए बढ़ जाती है और दूसरी तरफ अब यह
चुनौती किसके लिए दिख रही है क्या वाकई
जिस तरह से मानस कह रहे हैं कि अब वो सेफ

पैसेज बीजेपी के लिए नहीं दिख रहा है जो
पहले नजर आ रहा
था देखिए पूजा एक शेर है यह इश्क नहीं आसा
बस इतना समझ लीजिए एक आग का दरिया है और
डूब के जाना है तो भारतीय जनता पार्टी
इतनी मजबूत है उत्तर प्रदेश में कि इंडिया

गठबंधन या विपक्षी दलों के लिए यह इतना
आसान काम नहीं है उन्होंने गठबंधन भले कर
लिया है लेकिन इसके बावजूद उत्तर प्रदेश
में भारतीय जनता पार्टी जमीनी स्तर पर
बहुत मजबूत है योगी और मोदी की जो बात आप

कर रही हैं इसमें कहीं कोई दोराय नहीं कि
इस जोड़ी ने उत्तर प्रदेश के सियासी
समीकरण को उलट पुलट कर दिया है लेकिन इस
आधार पर विपक्षी दल घर बैठ जाए या इस

चुनाव की तैयारी ना करें ऐसा नहीं हो सकता
दूसरी बात जो महत्त्वपूर्ण है आप इस पर
ध्यान दीजिएगा कांग्रेस पार्टी को आरएलडी
के रहते हुए आपने न्यूज़ 20 आपके

कार्यक्रम में भी और बहुत बार मैं कह चुका
हूं कि ज्यादा से ज्यादा 17 और 18 सीटें
ही अ अ समाजवादी पार्टी कांग्रेस को देगी
आरएलडी के रहते हुए भी अ कांग्रेस पार्टी
को इतनी ही सीटों का ऑफर समाजवादी पार्टी

ने दिया था आरएलडी अभी है कि नहीं है
क्योंकि आरएलडी के जिन सीटों पर दावा था
उन सीटों पर कोई एक सीट कांग्रेस के खाते
में अभी नहीं गई है सवाल यह है कि 1012
दिन से चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न मिलने
के बाद जो उत्साहित हुए थे जयंत चौधरी वह

10 122 दिन से इतने खामोश क्यों हैं और
अभी जो उन्होंने 24 घंटे पहले ट्वीट किया
था जिसमें आईपीएस अधिकारी जसप्रीत सिंह
जिनको कि पश्चिम बंगाल का जो विवाद है जो
उनको भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने
बोला था उस पर जयंत चौधरी का ट्वीट आया है

कि मैं उनका गुस्सा उस आईपीएस अधिकारी का
समझ सकता हूं इससे उनकी नाराजगी भी समझ
में आती तो तो अभी जैन चौधरी खुद पश उपेश
में पड़ गए हैं क्योंकि जिस तरह की उनको
चाहत थी उस तरह का भारतीय जनता पार्टी कुछ
उनको देने के मूड में दिख नहीं रही दूसरी

बात अब ये किसान आंदोलन हो गए और 27 फरवरी
को यूपी में एमएलसी का चुनाव भी है तो जब
तक वो सारे विधायकों का वोट बीजेपी के
उम्मीदवार के पक्ष में नहीं देते हैं मुझे
नहीं लगता बात आगे बढ़ेगी तो वोह सीटें भी
छोड़ दी तो अभी भी जैन चौधरी किधर है मेरे

समझ में थोड़ा कम आ रहा है लेकिन इतना
जरूर है कि अब जयन चौधरी को अगर एनडीए की
तरफ आए तो वही करना होगा जो बीजेपी चाहेगी
जैसे ओम प्रकाश राजब को 5 महीने से शपथ
दिला रही है तो अब बात यह है कि इंडिया
गठबंधन का जो यह समझौता हुआ है ऐसा

बिल्कुल नहीं है कि
अ अगर आप 14 का चुनाव देखें तो 75 सीटें
एनडीए ने जीती थी अगर आप 19 का चुनाव
देखें तो वो 64 सीटें जीती थी 10 11 सीटों
का उसे नुकसान हुआ था इंडिया गठबंधन की भी
कोशिश सिर्फ इतनी है वो 60 सीटें जीतने का
और मीडिया में चाहे जो कह दें उनकी भी

कोशिश इतनी है कि कम से कम वह यूपी में
अपने खाते में 20-25 सीटें जोड़ ले ताकि
बीजेपी की जो टैली है वह यूपी से 10 से 15
कम हो जाए उनकी पूरी कोशिश है कि देश में
इस तरह का गठबंधन कड़ा खड़ा किया जाए कि
बीजेपी के 70 80 90 सीटें हम कम कर सकय

उनकी रणनीति का हिस्सा है चुनाव के परिणाम
एक तरफ बीजेपी 400 पार की बात क रही है उस
दिशा में आगे पढ़ रही है मैं दोनों की
रणनीति की बात कर रहा हूं उस दृष्टि से यह

जो सीटें कांग्रेस पार्टी पार्टी को मिली
है कभी नाना कभी कांग्रेस पार्टी ने पिछले
चार लोक दो को छोड़ दीजिए 2014 के बाद कि
भारत की राजनीति बिल्कुल अलग है लेकिन
उसके पहले इन सीटों पर अ कांग्रेस पार्टी
ने अच्छा प्रदर्शन किया था जो बात मानस कह

रहे थे अल्पसंख्यक वोटों का बिखराव रोकने
के लिए यह गठबंधन हुआ है और जिस तरीके से
2022 में आजादी के बाद अल्पसंख्यकों ने एक
मुश्त अखिलेश यादव को वोट दिया था और

जिसकी वजह से उनका ना सिर्फ वोट परसेंटेज
बढ़ा बल्कि उनके विधायकों की संख्या 100
से ज्यादा हो गई तो अ ये अगर इसी तरह का
ट्रेंड रहा तो निश्चित तौर पर इंडिया
गठबंधन की स्थिति में कुछ सुधार हो सकता

है और इसकी संभावना बहुत है और इसके अलावा
जो मैं देख पाता हूं इन 17 कांग्रेस की जो
सीटें इसमें छह सात बहुत मजबूत उम्मीदवार
हैं और मेरी जानकारी के मुताबिक अमेठी से

राहुल गांधी चुनाव लड़ेंगे और प्रियंका
गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी अमरोहा
से जो जिनको लेकर के विवाद हुआ था उनका
नाम अभी मैं भूल रहा हूं जो बीएसपी में थे

अ तो अमरोहा से उनको इंडिया गठबंधन से
उतारा जाएगा व एक मजबूत सीट है तो इस
तरीके से पांच-छह सीटें सात उम्मीदवार इस

अ कांग्रेस पार्टी के मजबूत स्थिति में
होंगे हरेंद्र मलिक मुजफ्फरनगर से
समाजवादी पार्टी के एक मजबूत कैंडिडेट के
तौर पर होंगे अफजाल अंसारी गाजीपुर से एक
मजबूत कैंडिडेट होंगे अखिलेश यादव आजमगढ़
से चुनाव लड़ने जा रहे हैं यह 100% फीदी

तय हो चुका है अखिलेश यादव आजमगढ़ से
चुनाव लड़ेंगे तो वह बहुत मजबूत स्थिति
में होंगे तो इस तरह मैं आपको मैनपुरी
उनका राय है तो इस तरह से कम से कम जो

संख्या में रोका जाए लेकिन असल खेल अभी
बाकी है मायावती पर बहुत कुछ डिपेंड करेगा
कि उनके कैंडिडेट किसके किस तरह के और
कैसे आते हैं यह उत्तर प्रदेश के नतीजे को
बहुत हद तक प्रभावित करेगा सुन्य में आया

कि अपने भतीजे आकाश आनंद को लोकसभा चुनाव
लड़ना चा लड़ाना चाहती हैं वह भी अपने
पत्ते अगले हफ्ते बोल दंगे ठीक है ठीक है
राजी बहुत अच्छे से और बहुत ही डीपी आपने
क्योंकि यूपी की राजनीति आप बहुत अच्छे से

समझते भी हैं और समझाते भी हैं तो ऐसे में
बहुत अच्छे से समीकरण भी समझाया है और
तमाम पार्टियों का पक्ष यहां पर रखा है तो
कम से कम आज कोई पार्टी ये नहीं कहेगी
आपके किसी विश्लेषण पर कोई टिप्पणी नहीं
करेगी चलिए आगे बढ़ते

 

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