Maa Kali ने आपको चुना है अगर ये परीक्षा आपकी हो रही है |

नमस्कार दोस्तों आप सभी पर मां का

आशीर्वाद और बजंग बली की कृपा सदैव बनी

रहे जब ईश्वर के किसी भी स्वरूप से हम

जुड़ते हैं उसकी तरफ हमें खिंचाव महसूस

होता है तो यह हमारे स्वयं के चाहने से

नहीं होता वरन वो देवीय शक्ति हमें अपनी

तरफ खींचती है अपनी तरफ आकर्षित करती है

मां काली की भक्ति सौभाग्य वश जब हमें

प्राप्त होती है तो यह मां की ही अनुकंपा

होती है कि हमें उनकी तरफ आकर्षण महसूस

होता है अधिक से अधिक मां का ध्यान करने

का उनके नाम जप करने का का एक भाव मन में

पैदा होता है और लगता है कि मां के नाम के

बिना हर चीज अधूरी है और सर्वोच्च

पराशक्ति मां काली की भक्ति जब एक भक्त को

प्राप्त होती है तो कई परीक्षाओं से भी

उसे गुजरना पड़ता है और कई बार यह

परीक्षाएं बहुत ज्यादा चुनौतीपूर्ण होती

हैं और हर परीक्षा के साथ कई विकार कई पाप

कर्म हमारे संचित कर्म भस्म हो जाते हैं

नष्ट हो जाते हैं और मां अपने भक्तों को

वैसे ही निखारती हैं उन्हें वैसे ही

दोषमुक्त और और विकार मुक्त करती हैं जैसे

अग्नि में तपक स्वर्ण बाहर निकलता है तो

आज हम बात करेंगे ऐसी कुछ परीक्षाओं की जो

मां अपने भक्तों की अवश्य लेती हैं और

जिसमें सबसे पहली परीक्षा है कि नेगेटिव

एनर्जी का अटैक बहुत ज्यादा जीवन में होने

लगता है और किसी भी रूप में होता है जीवन

बहुत ज्यादा तनावपूर्ण हो जाता है इस

प्रकार से नेगेटिव एनर्जी के अटैक होते

हैं कि नित्य पूजा में विघ्न आने लगते हैं

इस प्रकार की स्थिति बनती है कि सपोज आपने

कोई संकल्प उठाया पूजा में लेकिन उसे

पूर्ण करना आपको असंभव प्रतीत होता है

लगता है कि हम इस संकल्प को पूरा नहीं कर

पाएंगे शारीरिक कष्ट बढ़ जाते हैं और ऐसा

लगता है कि पूजा में हम नहीं बैठ पाएंगे

क्योंकि शरीर में पीड़ा होती है या फिर घर

का वातावरण तनावपूर्ण हो जाता है

नकारात्मकता बहुत तीव्र हो जाती है और जब

यह स्थिति आती है तो हमेशा याद रखें कि

आपकी परीक्षा का समय है और इस समय नित्य

पूजा पाठ आपको छोड़ना नहीं है बल्कि पूरी

दृढ़ता के साथ मां के मंत्रों का जप आपको

करते रहना है जो भी पाठ आदि आप नियम से कर

रहे हैं उन्हें आपको करते रहना है क्योंकि

यह समय आपका गुजर जाएगा जितने भी आपके पाप

कर्म है संचित कर्म है वो नष्ट हो रहे हैं

और आपकी ऊर्जा निखर रही है तीव्र हो रही

है और मां की निरंतर भक्ति से यह जो

नकारात्मक ऊर्जा है इसका प्रभाव धीरे-धीरे

कम होने लगता है और अंत में समाप्त हो

जाता है तो यह पहली परीक्षा भक्तों की

होती

है दूसरी परीक्षा जो मां अपने भक्तों की

लेती है कि जीवन संघर्षमय प्रतीत होता है

बहुत ही सारे संघर्ष

और चुनौतियां सामने आते हैं जितनी कार्य

करने की क्षमता है जितने हमारे संसाधन हैं

उससे ज्यादा जिम्मेदारियां उत्तरदायित्व

का बोझ हमारे ऊपर आ जाता है जिन्ह पूर्ण

करने की चुनौती हमारे सामने होती है और

मां यह परीक्षा अपने सभी भक्तों की अवश्य

लेती हैं कि वह अपनी जिम्मेदारियों को किस

तरह से पूर्ण कर रहे हैं और कितनी

ईमानदारी से पूर्ण कर रहे हैं भक्तों के

भाव की परीक्षा होती है कि मां के ऊपर

उनका विश्वास कितना दृढ़ है डिगा या नहीं

डिगा क्या उनका यह भाव है कि हां मां

हमारे साथ है मां का आशीर्वाद हमारे साथ

है और उनकी कृपा से यह जितनी भी

जिम्मेदारियां हैं वह मैं पूरी करूंगा या

पूरा

करूंगी कई बार वो लोग जिनके ऊपर आप आंख

मूंदकर विश्वास करते थे वह आपकी मदद को

आगे नहीं आते हैं बल्कि मुंह मोड़ लेते

हैं तो इन सबके पीछे जो मां का उद्देश्य

है कि मां आपको सत्य से परिचित करवाती हैं

संसार का जो मोह जाल है माया जाल है इससे

परिचित करवाती हैं और कार्यक्षमता से भी

अधिक जिम्मेदारियों को पूरा करने की एक

इच्छा शक्ति आपके अंदर पैदा करती हैं

आत्मबल और मानसिक बल आपके अंदर पैदा करती

हैं तीसरी कड़ी परीक्षा भक्तों की होती है

कि उनके नैतिक मूल्यों की परीक्षा होती है

यह बहुत ही कड़ी परीक्षा है और कई बार जो

बड़े-बड़े साधक होते हैं कई सालों से

साधना कर रहे होते हैं उनका भी ईमान यहां

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