Mayawati पर है मुस्लिम नेताओं का बड़ा दबाव… क्या INDIA गठबंधन में होंगी शामिल?

बसपा के बड़े मुस्लिम नेताओं ने मायावती
पर इंडिया गठबंधन में शामिल होने का दबाव
बनाना शुरू कर दिया है तो वहीं बसपा के
कुछ सांसदों को हार का डर भी सताने लगा है
आज हम इसी पर करेंगे बात नमस्कार 4 पीएम

में आप सभी का स्वागत है लोकसभा चुनाव को
लेकर अब बस कुछ ही दिन बचे हैं ऐसे में
सभी राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव की
तैयारियां जोरों से शुरू कर दी है
राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां प्रचार

प्रसार में है जहां राहुल गांधी भारत
जोड़ो न्याय यात्रा कर रहे हैं तो वहीं
बिहार में तेजस्वी यादव ने भी अपनी यात्रा
शुरू कर दी है वहीं देश के सबसे बड़े और

सबसे अधिक लोकसभा सीटों वाला राज्य उत्तर
प्रदेश में सपा कांग्रेस गठबंधन का ऐलान
हो गया है और सीटों को लेकर भी सहमति बन
गई है कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 17 सीटों
पर चुनाव लड़ेगी इस ऐलान के बाद से इंडिया

गठबंधन को बड़ी राहत मिली है क्योंकि जिस
तरीके से इंडिया गठबंधन के हालात हैं और
थे है उससे जो कल ऐलान हुआ सपा कांग्रेस

गठबंधन का तो इंडिया गठबंधन को एक बड़ी
राहत मिली है तो वही उत्तर प्रदेश की
राजनीति में अगर किसी की सबसे ज्यादा
चर्चा इस लोकसभा चुनाव में है तो वो है
बसपा प्रमुख मायावती जी हां मायावती अभी
किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं है और वो

कई बार यह ऐलान कर चुकी है कि वो किसी के
साथ भी गठबंधन नहीं करेंगी हालांकि बीच
में बसपा की तरफ से यह कहा गया कि मायावती
यूपी उत्तराखंड की क्षेत्रीय पार्टियों को
छोड़कर
कुछ राज्यों की क्षेत्रीय पार्टियों के
साथ गठबंधन कर सकती हैं लेकिन अभी तक ऐसा
होता हुआ दिख नहीं रहा है तो वहीं इंडिया
गठबंधन में शामिल कांग्रेस शुरू से यही
चाह रही है कि मायावती भी इंडिया गठबंधन

का हिस्सा हो इसलिए कांग्रेस के नेताओं की
तरफ से कई बार यह कहा जाता रहा है कि
मायावती को इंडिया गठबंधन में आकर गठबंधन
को मजबूत करना चाहिए और बीजेपी को हैट्रिक
मारने से रोकना चाहिए तो वही अब खबर यह है
कि बसपा के मुस्लिम नेताओं ने मायावती पर
इंडिया गठबंधन में शामिल होने का दबाव

बनाना शुरू कर दिया है और कुछ बसपा
सांसदों को बिना गठबंधन के हार का डर भी
सता रहा है जी हां उन सांसदों को हार का
डर सता रहा है और वोह लोग यह सोच रहे हैं
कि अकेले जीतना इतना आसान नहीं होने वाला

है अगर मायावती ने किसी के साथ गठबंधन
नहीं किया तो जी हां मुस्लिम नेताओं के
दबाव बनाने के पीछे की वजह यह है कि अगर
मायावती अकेले लड़ती है तो इंडिया और
एनडीए गठबंधन के सामने जीतना इतना आसान
नहीं होगा और कई सीटों पर मुस्लिमों का
वोट भी बढ़ जाएगा जिससे सीधा फायदा भाजपा

को होगा इसलिए बसपा के तमाम नेता यही चाह
रहे कि मायावती इंडिया गठबंधन में शामिल
हो जाए तो जहां पार्टी के बड़े मुस्लिम
नेताओं ने बसपा सुप्रीमो मायावती पर
इंडिया गठबंधन में शामिल होने का दबाव
बढ़ा दिया है वही बसपा के सांसद लोकसभा

चुनाव को लेकर निराश भी नजर आ रहे हैं
सूत्रों के मुताबिक मायावती की पार्टी के
कई सांसद दूसरी पार्टियों के संपर्क में
है अमरोहा से सांसद दानिश अली को पार्टी
ने पहले ही सस्पेंड कर दिया था माना जा
रहा है कि वह कांग्रेस में शामिल हो सकते

हैं अभी तक वह ऑफिशियल तौर पर कांग्रेस
में शामिल नहीं हुए लेकिन यह कहा जा रहा
है कि वह कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी
उनको देखा गया है और कांग्रेस अमरोह से उन
पर दांव भी लगा सकती है जी हां कांग्रेस
दानिश अली पर दांव लगा सकती है अमरोह से
वही 2019 के लोकसभा चुनाव में गाजीपुर से

बसपा के टिकट पर जीत दर्ज करने वाले बसपा
सांस अफजल अंसारी को इस बार सपा ने टिकट
दिया है तो ऐसे में बसपा के आठ सांसदों को
भी डर सताने लगा है और वह यह तय नहीं कर

पा रहे कि उनको टिकट मिलेगा भी या नहीं
मिलेगा बसपा के सांसद सपा बीजेपी और
कांग्रेस में संभावनाएं तलाश रहे है बता
दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने
उत्तर प्रदेश में 10 सीटें जीती थी राज्य
में बीजेपी के बाद बसपा दूसरी सबसे बड़ी
पार्टी थी लेकिन उस वक्त गठबंधन था

समाजवादी पार्टी और आरएलडी के साथ लेकिन
इस बार वह अभी तक अकेले हैं बता दें कि
बसपा अपने सियासी इतिहास में सबसे बुरे
दौर से गुजर रही है बसपा के तमाम बड़े

नेता साथ छोड़कर चले गए हैं और पार्टी एक
के बाद एक चुनाव हारती जा रही है इसके
बावजूद मायावती इस लोकसभा चुनाव में अकेले
चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं 2019 के
लोकसभा चुनाव में बसपा ने सपा और आरएलडी

के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा था बसपा 10
सीटें जीतने में कामयाब रही थी जबकि

अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को मात्र
पांच सीटें मिली थी बसपा से जीते हुए
ज्यादातर सांसद चाहते हैं कि मायावती इस
लोकसभा चुनाव में गठबंधन का हिस्सा बने
क्योंकि अकेले चुनाव लड़ना सियासी तौर पर
ना उनके लिए और ना ही पार्टी के लिए बेहतर
होगा बसपा सांसद का एक धड़ा इंडिया गठबंधन
के साथ मिलने की पैरवी कर रहा है तो दूसरा
धड़ा एनडीए के साथ जाने की वकालत कर रहा

है गठबंधन ना होने की स्थिति में बसपा से
जीते हुए सांसद अपने लिए नया सियासी
ठिकाना भी तलाश रहे हैं ऐसे में बसपा के
टिकट पर 2019 में जीते सांसदों में से

कितने इस लोकसभा चुनाव में पार्टी से
चुनावी मैदान में उतरेंगे यह एक बड़ा सवाल
है वहीं बसपा के टिकट पर जीतने वाले
ज्यादातर सांसद को मायावती इस लोकसभा
चुनाव में रिपीट नहीं करेंगे बल्कि उनकी

जगह पर नए चेहरों को मौका मिल सकता है ऐसा
सूत्रों के हवाले से खबर है बसपा का
सियासी ट्रेंड भी रहा है कि वह अपने
मौजूदा सांसद की जगह ज्यादातर नए चेहरों
को चुनाव लड़ाती है इसके चलते पार्टी के
सांसद दूसरी पार्टी में अपनी संभावनाएं
तलाश रहे हैं तो इस बार इस लोकसभा चुनाव
में मायावती का हाल क्या होगा और मायावती

किसके साथ जाना पसंद करेंगी क्या अकेले ही
वह चुनाव लड़ेंगी या फिर एंड टाइम पर वो
कोई फैसला लेती है यह देखने वाली बात होगी
अ तमाम वीडियोस को देखने के लिए आप बने
रहे 4 पीएम के

साथ

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