Modi की ‘400 की गारंटी’ तो छोड़िए अब 200 भी नहीं पूरा कर पाएंगे, बड़ा खेला

नमस्कार मैं हूं संजय शर्मा आप देख रहे
हैं 4 पीएम न्यूज नेटवर्क नेता झूठ बोलते
हैं कहते भी झूठ बोलो और जोर से बोलो और
जोर से बोलो लेकिन नेता सोचते हैं कि झूठ
इतना बोला जाए तो जनता उनके झूठ को पहचान
ना पाए लेकिन हमारे प्रधानमंत्री जी ने

गजब कर रखा है और प्रधानमंत्री जी के
साथ-साथ हमारी गोदी मीडिया ने उनकी स्तुति
गान गाने में उनसे भी आगे झूठ का अंबार
खड़ा कर दिया पहाड़ खड़ा कर दिया है अभी

भी नारे लग रहे हैं अबकी बार 400
पार जब किसी गोदी मीडिया के बड़े पत्रकार
से पूछने लगो किय 400 पार का आंकड़ा तो
समझा दीजिए कहां से आया दक्षिण में भाजपा
साफ उत्तर पूर्वी राज्य में हालत खराब

महाराष्ट्र में बुरी हालत कर्नाटक में
भारी नुकसान उत्तर प्रदेश में सफ कांग्रेस
से गठबंधन के बाद सीट का शेयरिंग के बाद

पसीने उड़े तो खेल हो कहां रहा है बिहार
में नीतीश बाबू को लाया तेजस्वी का ग्राफ
बढ़ गया 405 या फिर 272 के लिए लाले पड़ना
और उत्तर प्रदेश जो भाजपा बड़ा सुरक्षित

मान रही थी वहां जो गुल खिल रहे हैं उसने
लखनऊ से दिल्ली तक तापमान बढ़ा
दिया योगी आदित्यनाथ के तेवर उनकी
रणनीतियों
ने दिल्ली को समझा दिया है कि योगी को

सिर्फ प्यादा समझने की भूल ना करें
योगी के समर्थकों के संदेश बड़े मायने रख
रहे हैं उनमें से एक नाम है रघुराज प्रताप

राजा
भैया समाजवादी पार्टी से 36 का आंकड़ा
रहता था लेकिन सपा के प्रदेश अध्यक्ष गए
तो उनके सामने बैठ के खाने की थाली वाला

फोटो भी जारी कर दिया गया अखने यादव से भी
बात कर ली गई व भागे भागे भारतीय जनता
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अगले दिन राजा
भैया के यहां पहुंच गए और लोगों का कहना

है कि राजा भिना भैया बिना योगी आदित्यनाथ
की मर्जी के यादव से बात कर नहीं सकते और
अखिलेश यादव कभी नहीं चाहेंगे कि भाजपा
मजबूत हो उत्तर प्रदेश में तो केम क्या है
गणित क्या
है कौन सा गणित ऐसा है जो मोदी के पसीने

ला रहा है कौन सा गणित ऐसा है जो भारतीय
जनता पार्टी का आला कमान सा है वो छोटे
चाणक को उलझा रहा है उत्तर प्रदेश में फसा
रहा है और यह सब रहेगा तो 400 पार का सपना
कहां पूरा होगा कैसा पूरा होगा यह सारी

बातें की है हमने विस्तार से प्रोफेसर अय
दुवे जी के पास साथ जानेमाने पत्रकार तमाम
बड़े टीवी चैनलों पर आप उनको देखते रहते
हैं बहुत गहरी समझ है राजनीति की बहुत
गहरी समझ है मनोविज्ञान की समाजशास्त्र की

तो जाहिर है अय दुबे बताएंगे बहुत बड़े
खुलासे करेंगे आपसे रिक्वेस्ट है पूरा
इंटरव्यू सुनिए जरूर और अपनी राय से अवगत
कराइए जरूर चैनल को जवाइन करने के साथ

चलते हैं इन तमाम बातों के जवाब लेने के
लिए अभय दुबे जी के साथ स्वागत है अभय
दुबे जी 4 पीएम न्यूज नेटवर्क में आपका और
आज मैं यह बात यहां से शुरू करना चाहता
हूं कि मुझसे कहीं ज्यादा आपने चुनाव देखे
हैं मुझसे कहीं ज्यादा राजनीतिक दल देखे

हैं लेकिन इतना बड़ा खयाली पुलाव और गोदी
मीडिया का इतना ज्यादा ढोल बजाना कि अबकी
बार 400 पार मैं चैनलों पर देख रहा था कुछ
प बाकायदा बहस चल रही है और चैनल के एंकर
यह साबित कर रहे हैं कि अबकी बार 400 पार
कोई देश का प्रधानमंत्री इतने कॉन्फिडेंस

के साथ झूठ कैसे बोल सकता है पहले तो ये
हो रहा था कि इंडिया गठबंधन बिखर गया अब
तो सब में लड़ाई हो गई उत्तर प्रदेश में
लड़ाई हो गई दिल्ली में हो गई लेकिन जिस
तरह से उत्तर प्रदेश में सीटों का बहुत

सहज बटवारा हुआ और समाजवादी पार्टी से
संकेत आ रहे कि अखिलेश आदम न्याय यात्रा
में शामिल होंगे दिल्ली में भी मामला लगभग
सुलझ गया उसके बाद 400 पार यह आंकड़ा
क्यों कहा जाता है सबको पता है कि झूठ है
तो यह बात क्यों बारबार कही जा रही है मैं
आपको 2019 की याद दिलाऊंगा 2019 में तो
कोई इंडिया गठबंधन नाम की कोई चीज थी नहीं

सोचा भी नहीं गया था बारे में जो जो गैर
भाजपा विपक्ष की एकता थी वो तकरीबन जीरो
थी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी
बहुजन समाज पार्टी ने गठजोड़ किया था

लेकिन वह गठजोड़
भी उस तरीके से उसके पीछे कोई राष्ट्रीय
परिपेक्ष नहीं था उसके पीछे उसके पास कोई
प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं था
उसके पीछे कोई राष्ट्रीय नारा नहीं था कोई
नेशनल नैरेटिव नहीं था उसके पीछे एकता का

तो मतदाता की समझ में नहीं आता था कि भाई
इनको हम क्यों वोट दें क्योंकि भाई उतर
विधानसभा का चुनाव तो हो नहीं रहा है उसके
बावजूद भी भाजपा को कितनी भाजपा को कितनी

सीटें मिली थी भाजपा को 303 सीटें प्राप्त
हुई थी उसके बावजूद
अच्छा आज एक गैर भाजपा एकता का एक प्रतीक
स्वरूप इंडिया गठबंधन है मैं यह मान सकता
हूं कि यह उतनी बड़ी एकता नहीं है जितनी
बड़ी एकता शुरू में हम सब लोगों ने सोची
थी कि होगी उतनी व्यवस्थित एकता भी नहीं
है कई राज्यों में यह चीज बिखर भी गई है

इंडिया गठबंधन के जो शुरुआती कर्णधार थे
नीतीश कुमार उनको भाजपा ने फोड़ लिया या
खुद ही वो इसलिए मुझे लगता है आए इसीलिए
थे ताकि वो बाद में खुफिया तौर पर आए और

बाद में चले जाए मैं तो ये मानता हूं इस
बात को तो यह सब अब पिछली बार के मुकाबले
इस बार परिस्थिति बिल्कुल बदली हुई है
विपक्ष कई जगहों के कई जगहों पर एकता बद्ध
है दिल्ली में कोई एकता नहीं थी इस वक्त
दिल्ली में खबर आ रही है कि आम आदमी

पार्टी और कांग्रेस के बीच में चार और तीन
के फार्मूले पर सलाह हो गई है कांग्रेस
जहां तक अभी तक मुझे जानकारी मिली है
कांग्रेस पूर्वी दिल्ली लड़ेगी कांग्रेस
चांदनी चौक से लड़ेगी और कांग्रेस उत्तर

पूर्व दिल्ली नॉर्थ ईस्ट दिल्ली से लड़ेगी
जहां पर दंगे हुए थे बाकी चार सीटों पर आम
आदमी आम आदमी पार्टी लड़ेगी और मुझे यह भी
पता चला है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस
में गुजरात को लेकर भी कुछ सीटों का एक
कुछ होगा व आम आदमी पार्टी को भी कुछ
मिलेगा मेरे ख्याल से दिल्ली में जो
समझौता नहीं हो पा रहा था उसके पीछे यह

कारण भी था शायद संभवत पता चलेगा और साफ
कि वह गुजरात में कांग्रेस आम आदमी पार्टी
कुछ देने के लिए तैयार नहीं हो रही थी अब
आप देखिए जो कली जब समाजवादी पार्टी में
और कांग्रेस के अंदर उत्तर प्रदेश को लेकर

जो समझौता हुआ उस समझौते में एक खजरा की
सीट भी मिली है हावा पार्टी को पहले तो दो
विधानसभा की सीट भी देने को तैयार नहीं थे

वो बल तो कहीं पर समझौता नहीं हुआ है
लेकिन कहीं पर समझौता हुआ तो ऐसी स्थिति
में भारतीय जनता पार्टी के लिए
2024 2019 के मुकाबले मुश्किल

है फिर आप देखि अब आप वहा चलिए आप ऊपर
चलिए यानी आप उत्तर पूर्व चलिए उत्तर
पूर्व का सबसे बड़ा राज्य कौन सा है असम

मैं एक करके इसलिए कह रहा हूं ता बात ठीक
समझ में आए हमारे दर्शकों की असम है असम
में कांग्रेस का बाकायदा एक पुराना
स्थापित जनाधार है असम में कांग्रेस उत्तर
प्रदेश की तरह नहीं हो गई है असम में

कांग्रेस पिम बंगाल की तरह नहीं है असम
में कांग्रेस एक मजबूत पार्टी है जिसकी
जबरदस्त टक्कर भारतीय जनता पार्टी के साथ
पिछली बार भी हुई थी और इस बार भी होने

वाली है राहुल गांधी ने अपनी भारत जड़
न्याय यात्रा में शुरुआत में ही सबसे
ज्यादा समय आसाम में गुजारा और उन्होंने
सीधी सधी हेमंत विश् शर्मा को चुनौती दी

हेमंत शर्मा ने उनके लाफ एफआईआर लिखने की
धमकी दी फर बाद में बोले चुनाव के बाद
एफआईआर तो ये मेरा मानना यह है कि वहां भी
कांग्रेस को लाभ होने वाला है कांग्रेस का
पिछला नजा था उससे कांग्रेस बेहतर नतीजा
निकालेगी इस बार कांग्रेस कर्नाटक में भी

बेहतर नतीजा निकालेगी मैं बिल्कुल बंड लिख
दे रहा हूं आपको जिस तरह पिछली बार हुआ था
उस तरीके से नहीं
होगा कांग्रेस तेलंगाना में भी बेहतर

नतीजे निकालेगी तेलंगाना में तो कांग्रेस
की सरकार है भाजपा को पली बार चार सीट
मिली थी इस बार चार सीट नहीं मिलेगी हो
सकता उ दो सीट मिले हो सकता उसे एक सीट
मिले हो सकता एक भी सीट ये स्थिति व तो एक
ऐसी स्थिति में पहली भाजपा के सामने असली
और पहली चुनौती ये है कि पहले 272 ला के
दिखाया ये बड़ी बात कही आपने पहली चुनौती

ये है पहले आप 272 ला के दिखाए दूसरी
चुनौती ये है कि अब आप 300 पार करके ला
300 पार करें हम इसके बाद ही तय होगा ना

कि आप फिर 350 पहुंचेंगे कि नहीं
पहुंचेंगे 370 पहुंचेंगे कि नहीं
पहुंचेंगे
अच्छा ये मैं ये मान सकता हूं कि हर
पार्टी अपने लक्ष्य को बढ़ा के पेश करती
है अपने कार्यकर्ताओ में उत्साह भरने के
लिए अरे थोड़ा मोड़ बढ़ाए लेकिन इना इतना
इतना बढ़ा देंगे 400 इसम कोई बुरी बात
नहीं है लेकिन इस चीज को जिस तरीके से
प्रधानमंत्री कह रहे हैं और जिस अहंकार के
साथ कह रहे हैं वह उल्टा पड़ सकता है मैं
ये कह रहा हूं हालाकि नेताओं के लिए कोई
फर्क नहीं पड़ता उनकी बात उल्टी पड़
जाए तो उल्टा पड़ सकता है मुझे तो इस बात
मुझे तो इसकी कोई संभावना नहीं लगती अच्छा
य ये जो आप बात कह रहे हैं कि पहले तो 272
लेकर आओ मेरे कई लोगों से बात ई सबका
मानना य है कि बीजेपी जो लोगों को मोटा
मोटा मान रहे हैं जो भाजपा के थोड़े थोड़े
थोड़े थोड़े समर्थक कह सकता हूं आधे भक्त
नहीं 50 पर समर्थक है वो भी कह रहे हैं कि
अ मुझे बीजेपी हमको 230 240 के आसपास आती
नजर आती है अ जी अगर 230 240 तक आई हो मान
लीजिए एनडीए की सरकार बनने की स्थिति आई
तो क्या लगता है आपको 230 या 240 वाली
सरकार जो एनडीए की बनेगी क्या वो अपना
नेता नरेंद्र मोदी को ही चुने गी नहीं
नहीं देखिए सवाल यह है कि भाजपा की कितनी
कम सीटें होने की सूरत में भाजपा की कम
सीटें कितनी होती है अगर भाजपा की सीट 272
से 10 सीटें कम रही 15 सीटें कम रही तब तो
नरेंद्र मोदी ही उसके स्वाभाविक रूप से
नेता रहेंगे और फिर जो एनडीए के दूसरे
गठबंधन है उनसे जुगाड़ की जाएगी फिर न तीन
मैं मानता हूं तीन क्षेत्रीय शक्तियों के
साथ इन्होंने एक सीक्रेट पैक्ट कर रखा है
नरेंद्र मोदी ने और वो सीक्रेट पैक्ट बहुत
महत्त्वपूर्ण है उसकी लोगों को जानकारी
नहीं है उस सीक्रेट पैक्ट की का प्रोटोकॉल
क्या है ये लोगों को पता नहीं है मुझे कोई
पत्रकार इसका खुलासा करेगा तो हम लोग उसके
बारे में जानेंगे मैं अपने मित्रों से
वहां पर बात करने पता लगाने की कोशिश
करूंगा एक तो ब जनता दल से सीक्रेट पैक्ट
है इनका जगनमोहन रेड्डी की पार्टी सीक्रेट
पैक्ट है और उसी उसके उसके विपक्ष में जो
खड़े हुए हैं चंद्रबाबू नायडू तेलगु देशम
उसके साथ भी दोनों पार्टियों सीक्रेट
पैक्ट कर रखा है और चंद्रशेखर राव से के
साथ भी तेल इनका सीक्रेट पैक्ट तो चार
क्षेत्री शक्तियों के साथ इनका सीक्रेट
पैक्ट है एक क्षेत्री शक्ति दो क्षेत्री
शक्ति एक ही प्रदेश की है आ आंध्र
प्रदेश उनका मानना यह है कि अगर हमारी 272
से कम पड़ती है तब हम इन लोगों की मदद
लेंगे इसलिए यह पैक्ट किया गया है ये एक
तरह की देखा जाए हेजिंग है हेजिंग होती है
ना यानी आपने एक सुरक्षा चक्र बना लिया है
अपने में जरूरत पड़ी आपातकाल में तो आप
सुरक्षा चक्र की की मदद करेंगे ये सब ये
क्यों किया उन्होने बताइए ये किसी
क्षेत्री शक्ति से उनको सीक्रेट पैक्ट
करने की जरूरत क्या थी इस जरा सोचिए मैं
इस बात को बारबार उठाता हूं कोई मेरी इस
बात का जवाब नहीं देता आपके सामने भी सवाल
रख रहा हूं जरूरत क्या पड़ी अगर इनको इतना
विश्वास है हमें 370 सीटें प्राप्त होंगी
तोह बीजू जनता दल से सीक्रेट पैक्ट करने
की जरूरत क्या पड़ी इन् आंध्र प्रदेश की
दोनों पार्टियों के साथ में और तेलंगाना
में जो हार गई है पार्टी उसके साथ सीक्रेट
पैक्ट करने की आवश्यकता उ क्यों पड़ी
क्यों मनी मन अंदर कहीं लगता है कि हम ऐसा
ना हो कहीं फल जाए इन सब लोगों को 200 च
भी याद आता है 2004 इन लोगों का दु स्वपन
है
इ पार्टी
जी जबक जो आज भी इंडिया शाइनिंग कैंपेन चल
रही
हैय सब फ ट्रिलियन सब इंडिया शाइनिंग
कैंपेन है उस इंडिया कपेन का क्या हा मब
प्रबोध महाजन तो सवेरे वक्त पत्रकार गया
उनसे इंटरव्यू लेने के लिए जब काउंटिंग
होने काउंटिंग होने से पहले तो उस वक्त वो
अपनी ट्रेड मिल के ऊपर व्यायाम कर रहे थे
तो ट्रेड मिल पर व्यायाम करते हुए प्रमोध
महाजन ने जवाब दिया कि वो तो स है हमने तो
अपना मंत्रिमंडल में मंत्र मंडल बना लिया
विभाग बांटने की हम सोच रहे किसको कौन सा
विभाग मब जीत तो बिल्कुल एकदम निश्चित
मानी जाती मान रहे थे ा क्या हुआ चुनाव
हार गए 10 साल तक सत्ता से बाहर रहना पड़
तो वो चीज इन लोगों के दिमाग में है
लगातार इसलिए ये कोई भी गुंजाइश छोड़ना
नहीं चाहते हैं हर एक आदमी को तोड़ रहे
हैं हर एक की हेजिंग कर रहे हैं अपने जो
पार्टियां इनके खिलाफ है उन पार्टियों के
साथ भी अच्छे संबंध बनाने की कोशिश कर रहे
हैं केवल वही पार्टियां जो सीधे-सीधे इनकी
टक्कर में है उनको छोड़कर बाकी सभी
पार्टियों को अपने दायरे में लेने की
कोशिश कर रहे हैं यहां तक कि अकाली दल के
साथ भी इन्होंने समझौता नहीं हुआ अकाली दल
के साथ में अगर कांग्रेस में
और कांग्रेस में और आम आदमी पार्टी में
पंजाब में समझौता हो जाता तो यह भी अकाली
दल के साथ समझौता कर लेती है अकाली दल
समझौता करने को तैयार नहीं होता ककन दोनों
ने समझौता नहीं किया इसलिए उन दोनों ने भी
समझौता नहीं कर लिया अकाली दल के साथ भी
इनका एक तरह का अनकहा बंदोबस्त इन्होंने
बना लिया है क्यों इनका जो बाकी जो एनडीए
है वो तो कुछ है ही नहीं ना के बराबर है
और इस बार यह भी जानते हैं कि बिहार में
नीतीश कुमार उम्मीदवार
हारेंगे हां तेजस्वी के पक्ष में बल ब
उनको देखिए ना तो रामविलास ना तो चिराग
पासवान की पार्टी के लोग वोट
उस तरह से पहले देते थे
ही माझी के लोग वोट देंगे ही उपेंद्र
कुशवा के लोग वोट देंगे ना मुकेश सनी के
लोग वोट देंगे और ना ही भारतीय जनता
पार्टी का
जनाधार वोट देने में नीतीश को उतना उत्साह
दिखाएगा तो ये ऐसी स्थिति है जिसमें इनके
लिए यह सब तरह तरह के बंदोबस्त करने जरूरी
है खुद इनके मन में शंका है कि ये 300 का
2019 का फिगर दोहरा पाएंगे या नहीं दोहरा
पाएंगे इस ये बिल्कुल हवाई किस्म की बातें
है कि हम 370 प्राप्त करेंगे और एनडीए के
गठजोड़ सहयोगी दलों की मदद से हम 400 पार
चले जाएंगे ये कह रहे और अभय जी हमारे
महाराष्ट्र में जो स्थानीय संपादक है जिते
दक्षित उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र
में भारतीय जनता पार्टी के प्रति बड़ा
गुस्सा है लोगों में महाराष्ट्र के
बड़े-बड़े उद्योग गुजरात भेज दिए गए और
जिस तर से ये तोड़फोड़ की गई है सहानुभूति
उद्धव के पक्ष में ज्यादा है वहां पर
कि उसके संग ठाकरे परिवार के संग धोखा
दिया गया बड़ी इंडस्ट्री गुजरात भेज दी गई
टैक्स वहां चला गया नौकरिया वहा चली गई तो
महाराष्ट्र भी क्या आपको लगता है कि बड़ा
डेंट महाराष्ट्र भी पड़ सकता है नहीं
हकीकत है आप अभी देखिए दो दो देश के बूट
को नापने वाले दो सर्वे हुए एक सर्वे
नीतीश कुमार की पलटी मारने से पहले का है
और एक नीतीश कुमार की पलटी मारने के बाद
का सर्वे आज तक में जो सर्वे हुआ वो नीतीश
कुमार की पलटी मारने के बाद हुआ एबीपी
सर्वे हुआ था व नीतीश कुमार के पलटी मारने
के पहले हुआ दोनों ही सर्वे में
महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी पिछड़
रई है इंडिया गठबंधन के मुकाबले
महाराष्ट्र में महायुति और म महायुति का
और महाविकास आड़ी महाविकास आड़ी इंडिया
गठबंधन है महायुती
एनडीए तो वहां पर दोनों जगह पिछड़ गई है
वहां पर और ये आपकी बात बिल्कुल सही है जो
मराठा वोटर है उसकी हमदर्दी जो है वो
उद्धव ठाकरे के
साथ उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री के तौर पर भी
उनका रिकॉर्ड बहुत अच्छा था हालांकि वो
उतने चतुर राजनेता नहीं साबित हो पाए कि
अपनी पार्टी को टूटने से बचा पाते और
भाजपा ने उनकी पार्टी को तोड़ दिया लेकिन
एक व्यक्ति के तौर पर और वो जनता को जो
आश्वस्त निभाते प्रशासक के तौर पर
मुख्यमंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल बहुत
अच्छा रहा यहां तक कि जब मुख्यमंत्रियों
की रेटिंग होती थी तो उद्धव ठाकरे का नाम
मुख्यमंत्रियों की क्षमता वान
मुख्यमंत्रियों की रेटिंग में काफी ऊपर
हुआ करता था तो मैं ये मानता हूं कि यह
दोनों जगह भाजपा के लिए वाटरलू साबित हो
सकते हैं इसलिए नेपोलियन वाटरलू में जाकर
हार गया था विश्व विजेता था लेन वाटरलू के
मैदान में पराजित हो गया था नेपोलियन
इसीलिए एक मुहावरा बन गया वो उसके लिए
वाटरलू साबित हो सकता है अच्छा जी दूसरा
राज आता है उत्तर प्रदेश जहां पर बड़ा
सपने थे कि हम 70 पार 75 पार 80 की 80
जीतेंगे क्या लग रहा है इस समाजवादी
पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन के बाद क्या
वाकई में पिछली बार से ज्यादा सीटें
जीतेंगे उतनी जीतेंगे कम रह जाएंगे क्या
आपको चकि आप उत्तर प्रदेश में आपका बड़ा
लंबा बराय आप य बहुत सालों गुजारे हैं
राजनीति देखी है आपने क्या लग रहा है
उत्तर प्रदेश क्या संदेश देगा एनडीए के
लिए और इंडिया उतर कम से कम एक संदेश तो
दे ही दिया है कि जो गैर भाजपा विपक्ष की
एक हद तक एकता में एक हद तक एकता हो
गई कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच
में एकता का सीधा मतलब यह है कि उत्तर
प्रदेश का जो अल्पसंख्यक वोटर है उसकी
दिशा उसके मतदान की दिशा धारित हो गई वहा
कोई कंफ्यूजन नहीं है किसी किस्म का विवाद
नहीं है किसी किस्म का भ्रम नहीं है उसको
कहां वोट देना है उसको पता है फिर पिछड़ी
जातियों के लिए एक पूरा ध्रुव प्राप्त हो
गया और ऊंची जातियों में जितने भी
असंतुष्ट तत्व है जो आदित्यनाथ सरकार से
असंतुष्ट है या भारतीय जनता पार्टी में
आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ जो तिकड़म होती
रहती है उससे असंतुष्ट लोग हैं उन सबके
लिए भी एक ध्रुव मिल गया है और अभी कल से
कल शाम से चौकाने वाली खबर आ रही हैब मैं
आप हम और आप बातचीत कर रहे थे शाम को उसके
बाद जब मैंने एक टीवी टीवी देखा और अपने
कुछ साथियों से बातचीत की तो उन्होने
बताया कि राजा भैया के साथ में समाजवादी
पार्टी का समझौता हो सकता है आज भी टीवी
पर इस प्रकार के विश्लेषण चल रहे थे तो
राजा भैया के साथ समझौता हो सकता है तो
मैं तो ये मानता हूं आप ज्यादा इस मामले
में जानते हैं कि आप ज्यादा नजदीक है इन
बातों के मेरा मानना है कि बिना योगी जी
की मौन सहमति के राजा भैया समाजवादी
पार्टी के साथ समझौता नहीं कर सकते
या कर सकते हो तो बताइए नहीं कर सकते एकदम
नहीं कर सकते बहुत सम्मान है राजा भैया
योगी आदित्यनाथ का सम्मान करते हैं और अभी
तो अभी तो राज्यसभा को लेकर बड़ा पेज फसा
हुआ है बड़ी मजेदार घटना हुई राज्यसभा को
चुनाव को लेकर आठवा प्रत्याशी संजय सेठ के
रूप में उतार दिया भारतीय जनता पार्टी ने
संजय सेठ के बहुत बड़ा ब बिल्डर है
शारी अब संजय सेठ को योगी आदित्यनाथ पसंद
नहीं सब जानते
हैं उनको बहुत लोग पसंद नहीं करते बहुत
लोग पसंद नहीं करते हैंक वो पहले समाजवादी
पार्टी में थे तमाम धन दत कमाई बड़े बड़े
कारनामे काले कारनामे रहे जमीनों पर कब्जा
बजा अब उनके सबसे रोचक बात ये हुई कि एक
एफआईआर दर्ज कराई जाती है थाने में कि
संजय सेठ के पुत्र पत्र बधु आ रहे थे
रास्ते में लोगों ने उनकी गाड़ी रोककर लखन
में उनसे लूटपाट करने की कोशिश करी किसी
तरह से व बच के भागे मुख्यमंत्री के घर के
लगभग
रहते एक किलोमीटर भी दूरी प नहीं रहते हैं
संजय सेठ के बेटे और पुत्र वधु के साथ शाम
को रात में ऐसी घटना हो जाए कि उनको लूटने
की कोशिश की जाए गाड़ी रोकी जाए उनकी तो
नेचरली सनसनी होती है और फिर पूरे कानून
व्यवस्था पर सवाल उठते हैं तो यह संजय सेठ
के संग यह घटना हुई और चुनाव चल ही रहे थे
तो नेचरली सुर्खिया आ गई 24 घंटे में
पुलिस की एसपी ने बाकायदा बयान जारी किया
कि ये घटना झूठी है झूठी बात कोई लूटपाट
नहीं हुई हल्की गाड़ी टकराई थी मामला था
अब सवाल ये उठ र कि संजय सेठ योगी सरकार
को कानून व्यवस्था के नाम पर बदनाम क्यों
करना चाह रहे हैं उनका बेटा ऐसी तो लिखेगा
नहीं तो इस तरह की बातें भी लखनऊ की
राजनीतिक गल्याण में बहुत चर्चा का विषय
बनी हुई है कि राजा भैया का एंगल राजा
भैया किधर जाएंगे और जैसे ही समाजवादी
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजा भैया के घर
गए राजा भैया से अखिलेश यादव की बात कराई
उसके तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी के
प्रदेश अध्यक्ष राजा भैया के घर पहुंच गए
यानी दो दो वोट वाली पार्टी के राजा भैया
अब इस केंद्र में आ गए कि समाजवादी पार्टी
और भाजपा दोनों उनको लेना चाहती है तो ये
सवाल सवाल सवाल ये नहीं है कि दो वोट वाले
सवाल ये है देखिए कुछ लोगों कुछ लोग एक
खास तरह की राजनीति के नुमाइंदे बन जाते
हैं हा राजा भका चेहरा जो है ना उनका
चेहरा जो है उस राजनीति का घोषणा पत्र बन
जाता है ज आत राज जी है वो एक खास तरह की
पॉलिटिक्स का मॉडल पेश करते हा उन्होने
बुलडोजर मॉडल पेश किया या कितने लोगों के
ऊपर बुलडोजर चलाया उन्होंने लेकिन देखिए
उससे एक मॉडल बन गया उसको आप सही गलत जो
भी कहे उसकी विवेचना हम लोग किसी अन्य
कार्यक्रम पर करेंगे कि वो करना उचित है
कि नहीं व उसके अंदर लोकतांत्रिक तत्व
कितने हैं अलोकतांत्रिक तत्व कितने हैं
मैं तो मानता हूं कि जो इजराइल ने
फिलिस्तीन के अंदर जिस तरीके से घर गिराए
थे एक जमाने में बुलडोजर लेकर तो ये पूरा
मॉडल वहां से लिया गया है राष्ट्रीय सम
सेवक संघ ने और आदित्यनाथ जी ने वो मॉडल
वहां से उठाया है वेरल वो वो एक अलग अलग
मुद्दा है उस हम लोग फिर कभी चर्चा करेंगे
तो वो राजा भैया जो है व एक उत्तर प्रदेश
की राजनीति के एक खास मॉडल की नुमाइंदगी
करते हैं और उनका मॉडल और योगी आदित्यनाथ
का मॉडल यह दोनों एक एक आपस में जुड़े हुए
हैं जब से व मुख्यमंत्री बने हुए हैं अगर
वह समाजवादी पार्टी के साथ में जा सकते
हैं या इतना ऐसा सोच भी सकते हैं इसका
मतलब यह है
कि सब कुछ ठीक नहीं है भारतीय जनता पार्टी
के अंदर उत्तर प्रदेश के स्तर पर सब कुछ
ठीक नहीं है वैसा नहीं है जैसा आला कमान
कल्पना कर रहा है कि होगा दूसरे लोकसभा
चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जहां तक
मेरी समझ है लोकसभा चुनाव को कोई भी
प्रदेश हो बागडोर पूरी तरीके से केंद्र के
हाथ में रहेगी मुख्यमंत्री की हैसियत
ज्यादा से ज्यादा प्यादे की रहेगी उस
मुख्यमंत्री को एक निर्देश मिलेगा
मुख्यमंत्री को एक लाइन मिलेगी उस लाइन पर
मुख्यमंत्री को हर जगह काम करना है योगी
प्यादे बन के तो रहने वाले हैं नहीं हा और
उनको जो वहां से लोग आएंगे उनकी टीम जो
आएगी वही सब जगह चुनावी मुहिम वही चलाएगी
सब जगह उसी तरीके से सारा का सारा होगा
टिकट विकट बांटने में भी वही की चलेगी
इनकी नहीं चलेगी किसी की कम से कम जो
आमतौर पर भाजपा का तरीका है अब उत्तर
प्रदेश में वो किस तरीके से प्रोसेस होता
है योगी जी उसम कितना सशक्त हस्तक्षेप
करते हैं और अपनी बात बनवाते हैं वो एक
अलग देखने लायक बात होगी लेकिन मॉडल
भारतीय जनता पार्टी का ही है लोकसभा चुनाव
लड़ने का तो इसकी वजह से मैं समझता हूं
काफी फ्रिक्शन की गुंजाइश है मैंने कल अव
जी राजा भैया को फोन किया और मैंने राजा
भैया से
पूछा मैंने कहा रघुराज जी ये खबरें चल रही
है कि आप समाजवादी पार्टी में जा सकते हैं
समाजवादी पार्टी से बात चल रही है तो बड़ी
जोर से हसे बोले अरे संजय भैया आप भी क्या
बातें कर रहे हैं मैं टार मुद्दा है क्या
अरे बोले कुशल क्म पूछने आए थे कोई
राजनीति की बात नहीं लेकिन वो बात तो टाल
गए उ हसी मजाक में और बाकी बातें दर की
करने लगे मुझसे वो लेकिन मैंने एक चीज नोट
करी जो फोटो जारी हुआ
नरेश उत्तम और रघुराज प्रताप सिंह राजा
भैया दोनों खाना खा रहे हैं एक्चुअली व
राजा भैया का घर है घर के अंदर नरेश उत्तम
का और राजा भैया का खाना खाते हुए फोटो तो
तभी खींचेगा चाहे वो रघुराज के आदमी खींचे
राजा भैया के आदमी की न
जब अनुमति देंगे तो मतलब वो फोटो भी नरेश
उत्तम के सामने थाली रखी है राजा भै के
सामने थाली रखी है तो क्या वो फोटो रिलीज
कराने का भी एक लॉजिक नेता कोई काम बिना
लॉजिक के नहीं करता हर चीज में एक मैसेज
देता है तो ये मैसेज था राज भैया का कि
भैया मैं इधर भी जा सकता
हूं ठीक बात नहीं नहीं बिल्कुल है वो तो
मैसेज है मैं ये कहता हूं इस चीज अभी
देखिए लोकसभा चुनाव कम से कम हालाकि किसी
भी घटनाक्रम को पढ़ने में 24 घंटे क्या 24
घंटे भी बहुत ज्यादा होते हैं लोकसभा
चुनाव भी बहुत दूर है लोकसभा चुनाव से
पहले उत्तर प्रदेश का राजपूत समुदाय का
चिंतन क्या है वो किस रूप में सोच रहा है
देखिए समाजवादी पार्टी के लिए उत्तर
प्रदेश का राजपूत समुदाय अजनबी नहीं है हा
अमर सिंह मुलायम सिंह के आत्मा रहे अमर
सिंह को छोड़ दीजिए मैं तो अमर सिंह के
बहुत पहले की बात बता रहा हूं द्वि
जातियों में ब्राह्मणों के ब्राह्मणों को
अगर आप छोड़ द तो उसमें वैश्य जाति और
राजपूत जाति राजपूत समुदाय यह दोनों इन
दोनों का एक अच्छा खासा हिस्सा कई जिलों
में समाजवादी पार्टी के प्रति हमदर्दी
रखता था और समाजवादी पार्टी के लिए काम
करता रहता बाद में अमर सिंह के आने पर वो
बात अमर सिंह के जरिए अब व्यक्त होने लगी
लेकिन अमर सिंह के पहले से ही ये
परिस्थिति थी हा मोहन सिंह और जनेश्वर
मिश्रा दोनों
दाए मुलायम सिंह ने जब चुंगी कर खत्म किया
था अमर सिंह का दूर दूर तक पता नहीं था तो
तमाम जो व्यापारी दुकानदार थे व्यापारी थे
छोटे माल लाने ले जाने वाले लोग थे उन
सबको कदम बहुत अच्छा लगा था तो मुलायम
सिंह के साथ अच्छे संबंध उन लोगों के बन
गए थे बाद में जब पूरी तरह फोकस एमवाई के
ऊपर हो गया मुस्लिम यादव की ऊपर हो गया तब
जातियां हट गई और भाजपा ने उनको फिर
हिंदुत्व के भगवा झंडे के तले एकता बद्ध
भी कर लिया लेकिन अभी पिछले विधानसभा
चुनाव से यह प्रक्रिया चल रही है मैं यह
मानता हूं यह प्रक्रिया जो है पिछले
विधानसभा चुनाव से चल रही है जो ऊंची
जातियों की एकता है उस ऊंची जातियों की
एकता में गैर भाजपा विपक्ष भी सैन नाने की
कोशिश कर रहा है समाजवादी पार्टी पूरी
कोशिश कर रही है कि ब्राह्मण समुदाय के
अंदर सन लगाई जाए परशुराम के जरिए ये उसने
विधानसभा चुनाव के पहले भी की थी और अभी
फिर कोशिश चल रही है उसके बाद में अभी
देखिए जो नरेश उत्तम की राजा भैया से
मुलाकात हुई है वो इस बात का दूसरा सबूत
है कि वो प्रक्रिया वो चल रही है और जिला
स्तर पर ये कोश किस तरह चल रही होंगी ये
हम लोगों को पता नहीं है ठीक बात है बकुल
प्रदेश स्तर पर चल रही है देखिए जो चीज
प्रदेश स्तर पर चलती है वो उसको देख के
जिला स्तर पर भी कोशिश की जाती है
समाजवादी पार्टी का टिकट अगर किसी राजपूत
उम्मीदवार को मिलेगा तो आप सोचिए राजपूतों
के वोट वहा किधर जाएंगे स्वाभाविक है क
उसको राजपूत वोट यादव वोट मुसलमान वोट ये
सारा का सारा मिलने वाला है जम
के उसको वहां बिरादरी को लगेगा कि वो
जीतने वाला है हमारा बंदा उस आसपास के
निर्वाचन क्षेत्रों पर भी असर पड़ता है
उसम तो देखिए चुनाव भारत में काफी जटिल
चीज होती है जब तक आप चुनाव जीत ना जाए तक
जीते घोषित नहीं होते आप हां कुछ भी होता
है एंड टाइम प कुछ भी होता है कुछ भी हो
जाए तो स्थानीय स्तर पर जो अपनी वोट सही
रख लेगा वो चुनाव में उस पार्टी को हरा
देगा जिस पार्टी के बड़े-बड़े दावे हैं और
क्या है
य तो य है कि भारतीय जनता पार्टी अगर चार
पाच छ सीट भी हार जाती है 10 सीट भी
भारतीय जनता पार्टी हार जाती उसकी रिकवरी
करने के लिए उसके पास स्पेस नहीं है कहीं
नहीं बिल्कुल ठीक कहीं नहीं है मजे की बात
य जब फोटो की बात चली है तो एक फोटो और
चर्चा में है ओपी राजर अपने विधायकों के
साथ योगी आदित्यनाथ के पास गए और ट्वीट
किया कि हम सब हमारी पार्टी के विधायक ने
आज मिले हैं और हमने कहा कि हम एनडीए के
पक्ष में वोट करेंगे राजसभा में तो लोग उस
चुटकी ले रहे हैं वो कह रहे हैं कि योगी
आदित्यनाथ की ब्रांडिंग तो यही थी कि
उन्होंने मुख्तार अंसारी निपटा दिए और
मुख्तार अंसारी का विधायक बेटा अगर जेल से
बाहर आ गया होता तो आज वो भी योगी
आदित्यनाथ के संघ खड़ा होकर इनम से फोटो
खिंचा रहा होता क्योंकि वो राज पार्टी का
है तो इस मैसेज से जो सोशल मीडिया में
मैसेज चला या ना भी चलता तब भी ओपी राजभर
का बेटा विधायक बेटा मुख्तार अंसारी का
विधायक बेटा ओपी राजब की पार्टी का है जो
एनडीए का हिस्सा है इससे योगी नाथ की जो
माफिया के ब्रांडिंग के खिलाफ ब्रांडिंग
थी उसको तो धस किया गया ना क ना कहीं ये
सवाल ओम प्रकाश राज से पूछा भी गया है
पत्रकारों ने य सवाल पूछा है इसका उन्होने
ली ती वाला जवाब दिया था जब वो गए थे एडीए
में दोबारा तब उसे बात मैंने भी इटर किया
मैंने भी इटर किया बोते मुझसे बोलते है कि
वो तो अखिलेश यादव का कैंडिडेट था तो
मैंने कहा कि क्या वो जो विधानसभा में
लिखा है उसपे अखिलेश यादव लिखा है
समाजवादी पार्टी लिख है भाई आपका पार्टी
का नाम लिखा है ना आप क्यों नहीं निकाल
देते आप पार्टी से निकाल दो अभी तक पार्टी
में नहीं वो नहीं निकाल सकते वो नहीं
निकाल सकते और जो आदित्यनाथ जी की जो अपनी
किताब है उसमें
उन्होंने केंद्र सरकार के और भाजपा आला
कमान के आग्रह के बावजूद भी ओम प्रकाश
राजब को उ सूची में डाल रखा है इनको कोई
लिफ्ट नहीं
देनी उनको कोई लिफ्ट नहीं मिलेगी सूची में
उनको नाम उनका नाम डाल रखा है
इसीलिए हां तो वो बेचारे परेशान है आप
देखो ना कब से आए हुए हैं कब से वो
मिनिस्टर एंड वेटिंग है मंत्री बनाने को
राजी नहीं है चुनाव सिर पर आ गया लोकसभा
का तो योगी आद घो में जो हुआ घोष के चुनाव
नतीजे ने उनकी संभावनाए और भी खत्म कर दी
और भी खत्म कर दी तो मेरे कहने का मतलब
अभय जी कि योगी आदित्यनाथ जिद्दी है आप
उनको बहुत ज्यादा झुका नहीं सकते अग अपनी
जिद प आ गए तो मैं ये जानना चाहता हूं कि
अगर आपने जैसे कहा कि मुख्यमंत्री की
हैसियत प्यादे की तरह होगी सीएम अब इस
लेवल पर आ गए उ प्यादा तो नहीं बनाया जा
सकता तो क्या देख पड़गा संजय जी जो टिकट
बट उत्तर प्रदेश में भाजपा के उसम देखना
पड़ेगा उसम आदित्यनाथ जी कितने लोगों को
टिकट दिलवाने में समर्थ हो पाते ठीक बात
है ये बात सही है आपकी ठीक है उसी से त
होगा कि उत्तर प्रदेश में उनका भविष्य
क्या
है और एक एक दो सीट वाले जो राज है मैं
देख रहा था लद्दाख में जो सरकार के विरोध
में रैली
निकली लदाख के इहा में नहीं इतनी बड़ी
रैली निकली होगी तो भली एक सीट हो दो सीट
हो मणिपुर मिजोरम इसम भी जो केंद्र के
प्रति नाराजगी है मुझे लगता है उत्तर
पूर्व स्वार भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ
कुछ
बोलेगा भाई नरेंद्र मोदी को य श्रे दिया
जाता था जब से वो आए हैं तब से उत्तर
पूर्व में भाजपा का प्रसार हुआ है भाजपा
का प्रसार क्या हुआ कांग्रेस दलबदल करवाए
गए उनके तीन मुख्यमंत्री पूर्व
कांग्रेसी त्रिपुरा मणिपुर असम नो पूर्व
कांग्रेसी है तो उनकी जो कार्यकर्ता
पंक्ति है उनके पास है नहीं राष्ट्रीय सम
सेवक संघ का काम वहां नहीं था तो उनके पास
आधार नहीं है उसका तो कांग्रेसियों से
लेकर उन्होंने अपना आधार बनाया है तो इस
बार जो मणिपुर की घटना हुई है उस घटना ने
भारतीय जनता पार्टी की जो दावेदारियां थी
उत्तर पूर्व के बारे में उसकी काफी पोल
खोली है अभी आप देखिए रेखा शर्मा है जो कि
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष है वो
संदेश खाली के मुद्दे पर बहुत ज्यादा
सक्रिय है बंगाल गई हुई है वहीं बैठी हुई
है लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही है
पश्चिम बंगाल में शासन लगाए जाने की वकालत
कर रही है जो काम इनका महिला आयोग का नहीं
है महिला आयोग का काम महिलाओं के रक्षा
काम है किसी राज्य में राजपत शासन लगाने
की मांग करना महिला आयोग का काम नहीं है
वही वही रेखा शर्मा जब मणिपुर में
स्त्रियों को निर्वस्त्र करके घुमाया जा
रहा था और उनके गुप्तांगों को अपमानित
किया जा रहा था उस वक्त रेखा शर्मा क्या
कर रही क्या वो मणिपुर गई थी तब उन्होंने
केवल एक खत भेज दिया था वहा के मुख्य सचिव
और डीजीपी को बस इसके अलावा महिला आयोग ने
मणिपुर को लेकर कोई हस्तक्षेप
नहीं यानी पूरी तरह महाराष्ट्री महिला
आयोग जो है भारतीय जनता पार्टी की चुनावी
भारतीय जनता पार्टी का चुनावी संगठन बना
हुआ है बिल्कुल ठीक बात है सारी संवैधानिक
संस्थाओं का यही हाल कर रखा है और जाहिर
है कि इस बार का चुनाव बहुत रोचक और बहुत
मजेदार और बहुत संकेत लेकर आएगा बहुत-बहुत
शुक्रिया अ जी आपने इतनी विस्तार से हमको
सारी बातें समझाई धन्यवाद तो ये थे अभय
दवे जी और फिर घूम फिर के बात ये आ रही है
कि संभव नहीं है इस बार 400 पार मुश्किल
है इस बार 272 पार आप क्या सोचते हैं अपनी
राय से जरूरत कराइए चैनल को जवाइन कीजिएगा
सब्सक्राइब करिएगा हमारे राज्यों के चैनल
है 4 पीएम यूपी बिहार गुजरात महाराष्ट्र
राजस्थान कर्नाटक मध्य प्रदेश और फ पम
बॉलीवुड उन्हें भी सब्सक्राइब करिएगा
शुक्रिया थैंक

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