Modi के 370 सीटों के दावे की कलई खोल दी Yogendra Yadav ने | जबरदस्त इंटरव्यू

नमस्कार मैं दीपक शर्मा और मेरे
ंचवट लाने का दावा कर रहे हैं बारबार दावा
कर रहे हैं
370 सीट्स

370 सीटें और वह भी अकेले अपने दम पर अब
यह दावा है या फिर मोदी जी का जुमला है
इसका आज लिटमस टेस्ट करेंगे सवाल यह भी है
कि क्या वाकई क्या वाकई मोदी जी तीसरी बार
प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं या फिर जो
जमीनी सच्चाई है जो हकीकत

है वो कुछ और है दोस्तों आज एक बेहद खास
मेहमान योगेंद्र यादव जानेमाने राजनीतिक
शास्त्री सोशल एक्टिविस्ट और सबसे बड़ी
बात कि यह पिछले से पिछले साल यानी 20222
में और फिर 2023 में एक लंबी यात्रा पर
निकले दक्षिण से उत्तर की तरफ कन्याकुमारी

से कश्मीर की तरफ 4000 किलोमीटर से ज्यादा
पैदल चलना देश की नब्स को समझना मिजाज को
समझना और इस बार राहुल गांधी के साथ फिर
से पूरब से पश्चिम की तरफ ये बढ़ रहे हैं
और आप कह सकते हैं कि आसाम का मिजाज लेकर

फिर बंगाल को समझकर बिहार को देखकर झारखंड
को जानकर अब उत्तर प्रदेश में डबल इंजन
वाले उत्तर प्रदेश में जहां योगी और मोदी

हैं
वहां पर यह यात्रा फिलहाल पहुंच चुकी है
आगे बढ़ रही है सबसे बड़ी बात कि जो देश
की धड़कन है उस धड़कन को आज आप जरूर महसू


करेंगे जब योगेंद्र यादव बहुत सी नई
जानकारियां आपके साथ साझा करेंगे एक बात
बड़ी कही योगेंद्र जी ने उन्होंने आज कहा
कि यह जो चुनाव है अगर यह मोदी के नाम पर
लड़ा गया जैसा कि गोदी मीडिया चाह रही है
ये जो गोदी मीडिया का प्रोजेक्शन है या
सेफोलॉजिस्ट और सर्वे एजेंसियों का
प्रोजेक्शन है मोदी मोदी मोदी अगर मोदी के

नाम पर य चुनाव लड़ा जाता
है फिर मोदी का रास्ता आसान है और अगर यह
चुनाव मोदी बनाम मुद्दा है मोदी बनाम
इश्यूज है जो देश के इश्यूज हैं जो देश को
परेशान कर रहे हैं अगर वो इशू सामने आते
हैं तो फिर यह सफर वाकई आसान नहीं मोदी जी
के लिए और भी बहुत सी जानकारि
योगेंद्र यादव ने साझा करी है वो चाहे
ममता बनर्जी के बंगाल में जो फाइट है बहुत

डिसाइसिव फाइट है उसके बारे में आपको बहुत
भीतर तक जानकारियां मिलेंगी बिहार में अगर
आपकी दिलचस्पी है या फिर झारखंड में
दिलचस्पी है व भी यह बताएंगे कि आखिर क्या
वजह है कि हेमंत सुरेन को एक सिटिंग चीफ
मिनिस्टर को मोदी को अरेस्ट करना
पड़ा और क्या डबल इंजन की सरकार क्या

बुलडोजर की सरकार उसके अंदर क्या दिखा
उसके भीतर क्या दिखा बुलडोजर और उत्तर
प्रदेश के भीतर योगेंद्र यादव ने
क्या-क्या देखा है आंखें वहां भी चौक गी
आपकी मैं ज्यादा वक्त नहीं लूंगा योगेंद्र
यादव जी आपके सामने हैं देश की धड़कन देश
के मिजाज को समझिए पल्स को समझिए पल्स ऑफ

नेशन को समझिए और एक चीज मैं जरूर अशोर कर
रहा हूं बातचीत में आपको लगेगा कि बात
कांग्रेस की नहीं हो रही है कांग्रेस के
दृष्टिकोण की बात नहीं है बात देश के
दृष्टिकोण की है और यह चुनाव सबसे ज्यादा
डिसाइसिव क्यों है हिंदुस्तान की जो हाल

फिलहाल का जो इतिहास है जो मॉडर्न इंडियन
हिस्ट्री है उसमें चुनाव इंपोर्टेंट क्यों
है मेरा पहला सवाल माय फर्स्ट
क्वेश्चन मेरा पहला सवाल यह कि मैं मोदी
जी को लगातार सुन रहा हूं उनका मैंने
लोकसभा में राज्यसभा में उनका भाषण सुना
उसके बाद जो भी वो रैली कर रहे हैं एक चीज
वो बोल रहे हैं बारबार 370 370 370 370

सीटें हम ला रहे हैं 370 सीटें ला रहे हैं
400 पार जा रहे हैं आप
क्योंकि ईस्ट टू वेस्ट एक आप यात्रा पर
निकले हैं उससे पहले आप एक साउथ टू नॉर्थ
आप यात्रा कर चुके हैं ऐसा कोई राज्य नहीं
बचेगा जहां योगेंद्र यादव पहुंचे नहीं

होंगे जहां की नब्ज आपने टटोली नहीं होगी
अगर 370 की हम बात समझे तो ऐसे ऐसा लगता
है कि ये तो फिर एक तरफा मुकाबला है अगर
कोई 370 की बात कर रहा है तो फिर तो वन
साइडेड है क्या यह मुकाबला वन साइडेड है
2024 का या आपको लगता है कि अभी भी टक्कर

है अभी भी लड़ाई है ये जो 2024 का फाइनल
है दीपक भाई शुरुआत तो वैधानिक चेतावनी से
करूं जो सिगरेट के पैकेट पर लिखी होती है
वो यह कि मैं केवल विश्लेषक नहीं हूं आप
अभी भी विश्लेषक मानते हैं इनायत आपकी
मेहरबानी मैं राजनीतिक कार्यकर्ता हूं और

इस यात्रा को सिर्फ देख नहीं रहा इस
यात्रा में शामिल हूं क्योंकि मुझे लगता
है कि आज देश प बहुत बड़ा खतरा है और ऐसी
यात्रा या ऐसा कोई भी प्रयास किसी भी और
पार्टी द्वारा किया जाए उसका हम हिस्सा है
तो मैं एक इसमें एक टीम का प्लेयर
कांग्रेस का सदस्य नहीं हूं लेकिन इंडिया

गठबंधन का शुभचिंतक हूं इस यात्रा का हम
सफल जो आपने प्रश्न किया प्रधानमंत्री के
370 वाली बात पे देखिए मैं समझता हूं यह
स्वाभाविक है उनका अधिकार भी है हर राज हर
नेता का अधिकार होता है मैं तो सहता हूं
कर्तव्य होता है कि वह अपने कार्यकर्ता का
मनोबल ऊंचा रखे चुनाव से पहले कोई नेता

खरगे जी भी कह रहे हैं कि जीतेंगे कल
अखिलेश ने भी कहा है कि बीजेपी बुरी तरह
से हारेगी पछाड़ देंगे उनको यह सब अपने
कार्यकर्ता का मनोबल बनाए रखने के लिए और
सिर्फ मनोबल बनाए रखने का नहीं है मैं
समझता हूं कि युद्ध के मैदान में जो उतरता
है जो जीत का विश्वास लेकर नहीं उतरता वो
तो लड़ाई लड़ ही नहीं सकता तो

प्रधानमंत्री दावा करें और वैसे भी वो तो
मनोविज्ञान अच्छा समझते हैं तो
प्रधानमंत्री यह दावा करें स्वाभाविक है
400 पर अटक क्यों गए 500 भी कह सकते थे
कोई दिक्कत नहीं है आप 500 भी कहने से कौन
रोक सकता है कौन सा कानून है जो कहता हो
कि 500 सीट की बात नहीं कर सकते 600 की

करते थोड़ा दिक्कत हो जाती 500 तक तो
चलेगा तो मगर दिक्कत मुझे तब आती है जब
मीडिया उनके इस नैरेटिव को पकड़ लेता है
वहा तराज शुरू होता है कि भाई आपका य काम
नहीं है प्रधानमंत्री का तो काम है बीजेपी
के वर्कर को एफ्यूज करना उनकी ड्यूटी है

मगर उसके पीछे पूरा मीडिया वही रट ले ले
400 पार 400 पार 400 पार वहां दिक्कत होती
है आपको याद होगा आप भी राजनीति क्लोज
देखते रहे और मैं आपको देखते हुए देख रहा
हूं आपको ध्यान है पिछली बार हरियाणा में
कांग्रेस का बीजेपी का क्या दावा था 75
बार जी 2019 का विधानसभा चुनाव था लोकसभा
में बीजेपी अच्छे से जीती थी और बीजेपी कह
रही थी पिछली बार तो खाली हमारी 45 सीट आई
थी 50 सीट आई थी इस बार तो हम 75 पार
जाएंगे पूरा मीडिया 75 पार 75 पार लगा हुआ
था आई कितनी

41 तो मीडिया करता है वहा दिक्कत
है मैं चुनाव के बारे में कोई भविष्यवाणी
नहीं करना चाहता एक जमाना था जब मैं
भविष्य बताने का काम करता था जो छोटा मोटा
है भविष्य बनाने का काम करता हूं मैं
भविष्यवाणी नहीं करूंगा मैं केवल इतना
बताना याद दिलाना चाहता हूं जो लोग

भविष्यवाणी करना चाहते हैं उनके लिए सा दे
देना चाहता हूं आप अगर सोचना चाहते हैं कि
चुनाव में क्या होगा आप 2019 को
स्टार्टिंग पॉइंट मान लीजिए और फिर अपने
आप से पूछिए ऐसे कौन से राज्य हैं जहां
बीजेपी पिछली बार की तुलना में सीटें बढ़ा

सकती है किलाना शुरू कीजिए और ऐसे कौन से
राज्य हैं जहां बीजेपी आज की तारीख में
लगता है कि सीटें तो कम होंगी ही होंगी
कितनी कम होंगी इस पर बहस हो सकती है
लेकिन कम तो होंगी ही होंगी इन दोनों को
आप गिनती कर लीजिए और उसके बाद आप गिनती

शुरू कीजिए तो मेरा इतना ही केवल आग्रह है
कि एक टेबल खोल लीजिए पेन हाथ में रख
लीजिए आपको एक्सेल शीट पसंद है एक्सेल शीट
ले लीजिए जो कुछ भी बात करें उन आंकड़ों
को सामने रख के कीजिए हवाबाजी में 370
470 य कोई इसके आधार पर चुनाव थोड़ी त

होते हैं आपको ध्यान से आकड़े देखने होते
जब आप देखेंगे कि किन राज्यों में बीजेपी
की संख्या पिछली बार से बढ़ सकती है आप भी
राजनीति समझते हैं मैं भी राजनीति थोड़ी
समझता हूं न ये कौन से राज्य है जहां बढ़

सकती है बताइए घट सकती है वो मैं आपको दना
से गिना देता हूं बंगाल है बिहार में अब
आप कहेंगे पिछली बार जितनी घट सकती थी
उतनी अब नहीं घटेगी क्योंकि नीतीश बाबू
शिफ्ट कर गए हैं लेकिन 40 में से 39 तो
नहीं आने वाली ना जी 40 39 है उनके

पास महाराष्ट्र 48 में से 41 सीट थी एनडीए
के पास जी और कर्नाटका 28 में से 27 सीट
उनके पास है
तो यहां पर जो कटौती होगी उसका उसकी भरपाई
कहां से होगी मेरा केवल ये प्रश्न है मैं
कोई आंकड़े नहीं दे रहा कोई भविष्यवाणी
नहीं कर रहा मैं सिर्फ कह रहा हूं कि आप
टेबल में खाने बना लीजिए उसके बाद

भविष्यवाणी कर लीजिए हवाई चीज ना हो बस
मेरा इतना ही आग
है आपको आपको लगता है कि कर्नाटक
महाराष्ट्र बिहार और

बंगाल तीन तो बहुत ही बड़े राज्य हैं
बंगाल 42 सीट है 40 सीट बिहार में है 48
सीटें महाराष्ट्र में है और तकरीबन 28
सीटें कर्नाटक में 1 स के ऊपर के फिगर यही
चला जाता है ये चार राज्य आपको लगता है एक
दुखती रग है मोदी जी के लिए कहीं ना कहीं
प्रेशर है उन

पर देखिए मुझे लगता है मोदी जी वगर मोदी
जी के विचारों से मेरी जो भी असहमति हो वो
यह लोग मूर्ख लोग नहीं है जो गणित आप और
मैं बैठकर यहां सोच रहे हैं ये अमित शाह
और मोदी भी कर चुके होंगे हमसे पहले ही कर
चुके होंगे और जो कुछ भी इलेक्टोरल मूव्स

आप देख रहे हैं वो उसके कारण हो रहा है
आखिर क्यों है कि वो नीतीश कुमार से सब
कुछ होने के बाद नीतीश कुमार की पार्टी
खत्म करने के लिए बीजेपी ने क्या कुछ नहीं
किया और नीतीश कुमार को खत्म करने के लिए
राजनीतिक रूप से बीजेपी ने क्या कुछ नहीं
किया उसके बाद क्या मजबूरी है जो नीतीश
कुमार को लेक आ रहे हैं उन्होंने गणित

करके देखा होगा ना महाराष्ट्र में अजीत
पवार को यह कहने के बाद कि सब पता नहीं
क्या-क्या गालियां दी थी कहा था कि दुनिया
का महाराष्ट्र का पूरे संसार का ब्रह्मांड
का सबसे भ्रष्ट आदमी है ये सब कहने के बाद
आप उसको क्यों लेकर आ रहे हैं कुछ तो गणित
किया होगा इन्होंने

तो मैं समझता हूं कि यह दुख तिरक तो है
कर्नाटका में इतनी बुरी हार के बाद आप
कैसे वहां से उभर ये बीजेपी की चिंता तो
है इससे यह निष्कर्ष हमें कतई नहीं
निकालना चाहिए कि अरे बीजेपी तो हार गई
अरे ये तो बस वो है क्योंकि जो काम

प्रधानमंत्री करें उसको सर के बल खड़ा
करके हम करना शुरू कर दे वो तुक की बात
नहीं है हम गंभीर बात कर रहे हैं और इस
गंभीर बात में यह मान लेना कि भाई
कर्नाटका में तो बीजेपी हारेगी हारेगी यह
सब मैं नहीं मानता बीजेपी की चुनौती बहुत

गंभीर है और बीजेपी जो कुछ काम करती है
बड़ा सिस्टमिक तरीके से करती है कम से कम
बीजेपी ने बाकी चीजें कीया नहीं की राजकाज
तो उनका बहुत ही ढीला है राज करना तो राज
करके और देश में वास्तव में इस देश की
इकॉनमी को संभालना लॉ एंड ऑर्डर को
संभालना यह सब उन्हें नहीं आता है चुनाव
लड़ना उन्हें इतना तो मानना पड़ेगा और
चुनाव लड़ते हैं पांचों साल बीजेपी तो

चुनाव ही लड़ती है बाकी पार्टियां साढ़े
चार साल तक राज करती है छ महीना चुनाव
लड़ती है बीजेपी बीच में हो सकता है छ
महीना कभी राज कर लेती हो साढ़े साल वो
चुनाव भी लड़ती है तो चुनाव लड़ने का

उन्हें कायदा पता है हम आप यह ना मान ले
कि इसलिए वहां कर्नाटका में तो हारेगी
हारेगी महाराष्ट्र में भी जाएगी नहीं मैं
ऐसा नहीं मानता गंभीर बातें हम ना करें
लेकिन कम से कम इन चार राज्यों में बहुत
गहरी चुनौती है बीजेपी को और बीजेपी के

लिए जितनी सीट पिछली बार थी उनको बचाना
बहुत टेढ़ी खीर है क्या होगा हम नहीं जा
भविष्यवाणी में क नहीं करना चाहता मैं
सिर्फ इतना कहना चाह रहा हूं कि देख
बीजेपी को एक सबसे बड़ी बात पता है कि
अंतत कोई भी खेल जो होता है चाहे वह
क्रिकेट का हो चाहे टेनिस का विंबलडन हो

या इलेक्शन हो अंतत वो एक मेंटल गेम उसमें
सब कुछ है ट्रेनिंग भी है स्ट्रेंथ भी है
स्किल भी है लेकिन आखिरी दिन जब आप कोर्ट
पर उतरते हैं तो वो एक मेंटल गेम होता है
और बीजेपी जानती है कि उस मेंटल गेम में
अगर आपने हरा दिया तो बाकी चीज की कोई
परवाह नहीं बाकी सब तो ठीक ठाक है मीडिया

इनकी जेब में है पैसा इनके पास है इलेक्शन
कमीशन इनकी कई बातों को मानता है तो बस और
ये जो सारा हो रहा है 370 400 पार ये वो
मेंटल गेम है खेल ये है कि मैच शुरू होने
से पहले वक ओवर हो जाए जैसा 2019 में हो
गया था इतना आकित कर दो ऐसा माहौल बना दो
कि मैच से पहले ग्राउंड छोड़ के भाग जाए
दूसरी टीम ये खेल है मैं केवल इतना आग्रह
कर रहा हूं कि इससे बचे सब लोग विश्लेषक
भी बचे अपोजिशन पार्टी भी बचे
बस यो जी मैं आऊंगा आसाम पर भी आऊंगा
बंगाल पर भी आऊंगा और यह जो यात्रा जिसमें
आप एक इंपॉर्टेंट प्लेयर है उस यात्रा पर
मैं जरूर बात करूंगा आपने जो
पल्स पकड़ने की कोशिश करी उस पल्स पर भी
हम बात करेंगे लेकिन एक चीज यहां पर
मैं जरूर पूछना चाहूंगा आपसे कि 2014 का
चुनाव भी बहुत आपने करीब से देखा 2019 का
भी देखा और अब 2024 के मुहाने पर हम खड़े
हुए 24 19 और 14 य जो पिछले दो चुनाव थे
2014 और 19 के और अब जो चुनाव होने वाला
है इसमें आपको फर्क क्या दिखता है ई से आप
कैसे डिफरेंट करते हैं 19 को 244 से 14 को
24 से देख सबसे बड़ा डिफरेंस तो ये है कि
अब 10 साल की इनकंबेंसी बीजेपी के पास है
और आपको जनता को ये बताना पड़ेगा कि 10
साल में आपने क्या किया 2014 में आपको कुछ
बताने की जरूरत नहीं थी कि आपने क्या किया
अच्छे दिन आएंगे पर्याप्त था 201 में 2018
आते-आते बताने में हाफ ने लग रही थी
बीजेपी फिर उसके बाद बालाकोट हुआ पुलवामा
हुआ भगवान जाने किसने करवाया कैसे हुआ
लेकिन उसके बाद बीजेपी को किसी को कुछ
बताने की जरूरत नहीं थी और जैसा मैंने कहा
मैच से पहले वक हो गया अब 10 साल हो गए तो
पहला सवाल तो ये है 10 साल में आपने क्या
किया यह किसी भी पार्टी की ड्यूटी भी होनी
चाहिए और पूछने वाले का अधिकार भी होना
चाहिए आप 10 साल से सत्ता मुझे बताइए आपने
क्या किया अच्छा किया होगा जरूर आप पा साल
और लीजिए नहीं किया तो भैया रास्ता देखिए
दूसरों को जगह दीजिए लोकतंत्र का सामान्य
नियम है अब आप देखिए बीजेपी क्या कर रही
है सारा खेल पिछले दो तीन महीने ने का
क्या है कि किसी तरह से इस सवाल का जवाब
ना देना पड़े अरे वो मंदिर मंदिर अरेरे
अयोध्या प्राण प्रतिष्ठा भगवान राम जय
श्री राम माने ये ना पूछ लेना कि पिछले 10
साल में क्या किया फिर यह हिंदू नहीं है
यह वहां गए यह मुसलमान के समर्थक हर मामले
में कहीं ना कहीं इस देश में हिंदू
मुसलमान करवा देना कल जो बंगाल में हुआ
कोई कोई पगड़ी पहने हुए पहले कपड़े तक
मामला था पगड़ी पर भी पहुंच क्या है कि वो
उसको देना फिर आप संसद में आते हैं संसद
में आप श्वेत पत्र पेश करते हैं किस पे
आपने 10 साल जो काम किया उस परे नहीं 10
साल पहले जिसने 10 साल राज किया था उसके
बारे में श्वेत पत्र जारी करते हैं कभी
सुना है आपने इस तरह की बात स्वेत पत्र
जारी हुए हैं पिछली सरकारों के बारे में
भी हुए हैं लेकिन सामान्यत कोई पार्टी जब
सत्ता में आती है देखती है कि तिजोरी खाली
है कुछ हमारे पास नहीं है वो श्वेत पत्र
जारी करके देश की जनता को बताती है कि
देखो हमें जो अर्थव्यवस्था मिली है या फला
चीज में हमें जो स्थिति मिली है यह है
आपको पूरी सच्चाई हम बता द अगर यह करना था
तो 2014 का जून उसके लिए ठीक समय था 2015
में आप कर देते आपको समय लग गया थोड़ा
जानने में अब 2024 में देश की जनता को बता
रहे हो कि 2014 में क्या हाल थे मतलब इससे
बड़ा मजाक कोई हो सकता है तो कुल मिलाकर
बीजेपी जानती है 10 साल हो गए हैं दिखाने
को कुछ है नहीं तो कुछ इस तरह की बातें
करो जिससे इसका जवाब ना देना पड़े ये जो
है यह दबाव जो बीजेपी प और दूसरा दबाव यह
है कि जिस राज्य में मैक्सिमम सीट आ सकते
थे वहां तो आ गई अब गुजरात में 26 में से
26 है आप 28 तो ला नहीं सकते गुजरात में
राजस्थान में 25 में से 24 जमा एक है मध्य
प्रदेश में 29 में से 28 है हरियाणा में
10 में से 10 दिल्ली में सात में से सात
उत्तराखंड में पांच में से पांच हिमाचल
में चार में से चार
उधर छत्तीसगढ़ में 11 में से न 11 में से
न झारखंड में 14 में से 11 अब आप और वहां
तो कहां बढ़ाएंगे सीट आपके पास बढ़ाने को
है नहीं नए इलाकों में आप जा नहीं पाए हैं
10 साल में काम करके दिखाने को कुछ है
नहीं इसलिए देश को भरमा की य जो कोशिश हो
रही है दुर्भाग्यवश और मुझे केवल इसी पर
तराज है आप काम कीजिए अगर जनता मानती है
आपने बहुत अच्छा काम किया बिल्कुल आपका
अधिकार है और यह देश देश को बिल्कुल फर
नरेंद्र मोदी जी मिलने चाहिए अगर ऐसा कुछ
है तो लेकिन आप इसकी बजाय अपने 10 साल के
राज के अलावा सब आए बाए बात करके चुनाव
जीतना चाहते हैं वो मुझे कबूल नहीं है वो
ठीक नहीं जी आप योगेंद्र जी आसाम में थे
नॉर्थ ईस्ट में थे खासकर आसाम में एक बहुत
रोजी पिक्चर जो टीवी चैनल्स दिखा रहे हैं
वो ये है कि हेमंत विश्व शर्मा बहुत
मजबूती से इस वक्त गुवाहाटी में है पूरा
नॉर्थ ईस्ट कंट्रोल कर रहे हैं और एक गेम
चेंजर है वो क्या आपको लगता है कि आसाम
में इस बार 14 में से पिछली परफॉर्मेंस जो
नौ सीट की थी बीजेपी की या उससे ज्यादा
सीटें बढ़ेंगी या आपको लगता है कि आपको
आसाम में एंटी इनकंबेंसी दिखी जनता में
रोश दिखा या वहां की जो जमीनी सच्चाई है
आसाम की बिल्कुल अलग है जो हम दिल्ली में
देख रहे हैं मैं आपको केवल य कहता हूं अगर
हेमंत विश्वा शर्मा इतने ही मुतमइन होते
इतने
ही कॉन्फिडेंट होते तो गुवाहाटी में इस
यात्रा के साथ वह सब करने की क्या जरूरत
थी यात्रा में कांग्रेस पार्टी ने कहा कि
आप हमें गुवाहाटी शहर से इस यात्रा को रोड
शो को निकालने दीजिए और कांग्रेस ने कहा
कि आप एटली वह रूट हमें दे दीजिए जो 10
दिन पहले आपने नड्डा साहब को दिया
था नहीं वो नहीं देंगे डर क्या था
पता होना चाहिए क्या डर था बार-बार किसी
जगह पर जो किया हा हेमंत विश्वा शर्मा का
एक बात जरूर है दिक्कत य कि इस देश में जो
नैतिकता के मानदंड बाकी लोग राजनेताओं ने
तो छोड़ ही दिए हैं मीडिया ने भी अब इस
चीज को छोड़ दिया है साम दम दंड भेद का
इस्तेमाल करके जब कोई व्यक्ति कुछ कर लेता
है तो उसकी पार्टी वाले उसके चमचे उसके
दरबारी तो उसके ताली पीटते ही है मीडिया
भी ताली पीटना शुरू कर देता है जिस तरह का
काम हेमंत विश् शर्मा जी कर रहे हैं इस
वक्त नॉर्थईस्ट में उसकी कीमत इस देश को
बहुत समय तक अदा करनी पड़ेगी ऐसा नहीं है
जो मणिपुर में हो रहा है मणिपुर किसकी
करतूत है मणिपुर में जो हुआ उसमें एक
आरएसएस के मेजर फंक्शन थे और एक हेमंत
विश्वास यह दो लोगों ने मणिपुर के अंदर
जिस तरह के काम किए जिसकी कुछ कलाई अब
धीरे-धीरे खुल रही है क्योंकि एक सीक्रेट
डील होने वाला था वो सीक्रेट डील होने के
लिए किस तरह के काम किए गए वो उस जड़ में
है जबकि आगे जो कुछ देश में हुआ तो
पूर्वोत्तर को खाली तिकड़म के सहारे
कंट्रोल करना मैं ऐसा नहीं कह रहा हूं कि
हेमत विश्वा शर्मा पहले व्यक्ति है
जिन्होंने ऐसा काम किया है दुर्भाग्यवश
इससे पहले भी देश में पूर्वोत्तर को सिर्फ
पैसे और तिकड़म से कंट्रोल करने की बारबार
कोशिश हुई कई बार कुछ समय के लिए सफल भी
हो जाती थी और उसकी वजह से देश को इंसें
का सामना करना पड़ा था और आज जो हेमत
विश्वा शर्मा के बारे में कहा जाता है कि
वह पूर्वोत्तर के अमित शाह अब यह बात
अच्छी है बुरी है वही तय करें भगवान तय
करें तो किसी व्यक्ति को मुझे जो कोई कह
दे कि आप फला जगह के अमित शाह है तो मैं
तो बड़ा घबरा जाऊंगा चिंता में पड़ जाऊंगा
कि मैंने क्या काम ऐसा कर दिया जब मेरे पे
ऐसा विश्लेषण लगाया गया लेकिन उनको हो
सकता है बहुत अच्छा लगे ये चीज हर एक का
अपना अपना नजरिया होता है लेकिन जिस तरह
से वहां पर खेल हो रहे हैं देखिए
पूर्वोत्तर इस देश का बहुत वेदन शल इलाका
है किसी भी देश के बॉर्डर उसके बड़े
संवेदनशील इलाके होते हैं और वहां क्षुद्र
राजनीतिक हित के लिए खतरनाक खेल खेलने से
हो सकता है आपको कुछ दो चार सीट एक्स्ट्रा
आ जाए एक दो राज्य में आप कायम कर ले
लेकिन याद रखिए आप देश के भविष्य के साथ
खिलवाड़ कर रहे जिसकी कीमत कभी कभी करनी
पड़ेगी अदा आपका आकलन है कि नॉर्थईस्ट एक
चुनौती रहेगी खासकर जो आपने कहा कि हेमंत
विश्व शर्मा की जो गवर्नेंस है जो स्टाइल
ऑफ गवर्नेंस है जिसको लोग अमित शाह से मैच
कर रहे हैं वह जमीनी सच कुछ और है और
मणिपुर में जो कुछ हुआ या हो रहा है वहां
पर हेमंत विश्व शर्मा एक की प्लेयर है या
की कंस्पिरेटर आप कह सकते हैं योग जी वहां
से आपका काफिला जो बढ़ता है व बंगाल
पहुंचता है और बंगाल
में ऐसा लोग कह रहे मैं तो दिल्ली की
निगाह से ही सवाल कर सकता हूं मैं तो
बंगाल गया नहीं बंगाल आप गए बंगाल में
आपको क्या दिखा कि बीजेपी 2019 की तरह
आपको मजबूत दिखती है या आज बीजेपी की जो
स्ट्रेंथ है क्योंकि बहुत से नेता हमने
देखे जो बीजेपी से वापस चले गए जो आए थे
तृणमूल कांग्रेस से वो वापस गए यहां तक कि
जो बाबुल
सुप्रिनिक थे वो भी वापस चले गए क्या
बीजेपी अभी भी एक बहुत ताकतवर फ्रंट पर
खड़ी है या आपको लगता है कि सिचुएशन इज
डिफरेंट नाउ इन बंगाल
देखिए मैं फिर कह रहा हूं कि मैं इसको
चुनाव की दृष्टि से नहीं देख रहा हूं कक
आपकी दिलचस्पी पत्रकार की होनी भी चाहिए
दिलचस्पी चुनाव मेरी उसम ना कोई दिलचस्पी
है इस वक्त और ना क्योंकि यह करना मेरा
काम नहीं है सिर्फ य जो जमीनी हकीकत है व
यह है कि बंगाल में बीजेपी ने 2019 के
चुनाव में अप्रत्याशित सफलता हासिल की उसे
18 सीट वहां पर कोई व्यक्ति नहीं था सा आ
फलत बीजेपी को देने को तैयार था उसको 18
सीट आई अप्रत्याशित सफलता मिली उसके बाद
बीजेपी ने चढ़ाई की दल बल धन लेकर चढ़ाई
की 2021 में और यह था कि भाई आ रही है
इतनी सीट आ रही है इत्यादि वो सब करके
बीजेपी नंबर दो पार्टी तो बन गई लेकिन जिस
तरह के दावे किए जा रहे थे उसके कहीं भी
नजदीक नहीं पहुंची
बीजेपी उसके बाद से बीजेपी का पतन हुआ है
ये मेरा कोई सब्जेक्टिव मूल्यांकन नहीं
अखबारों की फ्रंट जैसा आपने बताया बड़े
बड़े लोग पार्टी को छोड़ के और
दुर्भाग्यवश बंगाल में आज ही नहीं पिछले
25 30 साल से और इसके लिए केवल तृणमूल
कांग्रेस या बीजेपी को दोष देना सही नहीं
होगा य लेफ्ट हट के जमाने से शुरू हो गया
था बहुत स्थानीय स्तर पर बहुत हिंसा हो
रही
है और काफी तनाव हिंसा यह सब हुआ है
बीजेपी ने ने की भी है और उसकी शिकार भी ई
है दोनों बातें और जमीन पर बीजेपी का
संगठन संगठन तो था नहीं एक लहर थी बीजेपी
जलाने की कोशिश कर रही थी और उस लहर में
बीजेपी ने स्थानीय स्तर पर काफी तरह के
लोगों को उस वक्त इकट्ठा कर लिया था यह
हवा देके कि जीत रहे अब तो बीजेपी सत्ता
में आ रही है 21 में बीजेपी ने माहौल बना
रखा जब वो माहौल टूटा तो उसके बाद से
बीजेपी काफी कमजोर हुई है सांगठनिक दृष्टि
से और अगर आप पंचायत चुनाव को देख तो
पंचायत चुनाव में बीजेपी की स्थिति
विधानसभा की तुलना में बहुत कमजोर हुई है
अगर आप यह मान के भी चले कि व शायद पूरी
तरह से फेयर बंगाल में पंचायती इलेक्शन
नहीं हुए और वह काफी समय से नहीं हो रहे
हैं फिर केवल इस साल नहीं मैं 203 साल का
रिकॉर्ड है कि बंगाल में पंचायती इलेक्शन
में रूलिंग पार्टी की तरफ से दखल होता है
यह सब भी मान ले तब भी बीजेपी कमजोर हुई
क्या बीजेपी कमजोरी को केवल प्राण
प्रतिष्ठा से ढक लेगी अब इसका तो मैं जवाब
नहीं दे सकता लेकिन बीजेपी कमजोर हुई है
इसमें तो कोई संदेह बीजेपी वाले भी नहीं
करेंगे बिग चैलेंज आप वहां से आगे बढ़े आए
और फिर झारखंड
आए जाहिर तौर पर यात्रा है योगेंद्र जी
सुबह है शाम है दोपहर है सूर्योदय भी हो
रहा है सूर्यस्त भी हो रहा है और यात्रा
अनवरत चल रही है आगे लोगों के साथ खाना खा
रहे हैं आप चाय पी रहे हैं बातचीत हो रही
है रुक गए जैसे बहुत स्लो पैसेंजर ट्रेन
चलती है और मुसाफिरों से बात होती है इस
तरह का मंजर है तो लोग क्या करते हैं जो
अलग-अलग लोगों से मुख्तलिफ लोगों से जो
गुफ्तगू होती है बातचीत होती है युवाओं से
होती है और लोगों से होती है कोई कामगार
से होती है सोसाइटी का पल्स क्या मिल रहा
है अगर मैं बंगाल बिहार झारखंड इन तीनों
को क्लब कर दूं जो हमारा पूर्वी क्षेत्र
है हिंदुस्तान का जो पूर्व है उसमें आपको
क्या देखता है
लोग क्या कहते हैं उनके गिले शिकवे आपको
क्या लगते हैं पहले से ज्यादा बढ़ गए हैं
जब भी आप दिल्ली से दूर जाए इन बुनियादी
इन इलाकों में जाए तो यह जो गुबार दिल्ली
के मीडिया का है उससे बाहर निकल के आप
सच्ची दुनिया में पहुंचते हैं जिसमें
समस्याएं हैं अभाव है दिक्कत है मगर सच्चे
हैं आख के
सामने जो समस्या है वो बिल्कुल बुनियादी
पहली बात जो हर जगह केवल इन तीन इलाकों
में नहीं बेरोजगार
इतना बड़ा मुद्दा इस देश का है केवल
आंकड़ों की मतलब कुछ बेरोजगारी होती है
जहां आंकड़ों से आपको मेजर करना पड़ता है
7 पर थी 8 पर हुई 6 पर हुई है ना जैसे
बुखार का है बुखार आपको 99 है कि 100 है
वो करने के लिए थर्मामीटर ही लगाना पड़ता
है लेकिन 103 है या नहीं 99 है कि 103 है
उसको आप माथे पर हाथ रख के बता सकते हो कि
भाई कुछ है बेरोजगारी इस देश में उस
अवस्था में पहुंच जहा माथे पर हाथ लगाइए
किसी गांव में दो कदम रख लीजिए किसी 10
नौजवानों के पास खड़े होकर बात कर लीजिए
किसी चार औरतों के साथ रसोई में बैठकर पूछ
लीजिए रोजगार के बारे में बच्चों के बारे
में लोग बरस पड़ते हैं क्या बात कर रहे
हैं आप मजाक कर रहे हैं पूछना क्या रोजगार
की क्या स्थिति है बस आप सिर्फ इतना पूछ
लीजिए और फिर 15 मिनट के लेक्चर के लिए
तैयार रहिए लोग बताते हैं क्या स्थिति है
जो बाकी आप कितनी भी कर लीजिए थर्ड
लार्जेस्ट जीडीपी य सब आकड़े आप किसी के
पास बैठ के पूछिए रसोई की क्या अवस्था है
कैसा चल रहा ठीक हो रहा है खाना चल रहा है
और यह वह इलाके जहां खाना भी एक मुद्दा
है तुरत आपको औरत बता देगी देखि जो राशन
में मिलता है राशन में मिलता है इसमें कोई
संदेह नहीं अधिकांश लोगों को राशन मिला
जहा सरकार कह रही है मगर राशन एक हफ्ते से
ज्यादा नहीं चल रहा है वो कहते हैं राशन
में तेल नहीं है तेल तो खरीदना पड़ेगा दाल
खरीदनी पड़ेगी और जो चावल या रोटी आटा
मिलता है सात दिन 10 दिन चलता है उसके बाद
रसोई कैसे चलाए ये एक मुद्दा है मनरेगा एक
मुद्दा है बंगाल
में इस से पता नहीं क्यों राष्ट्रीय
मुद्दा नहीं बनती है बंगाल में मनरेगा के
21 लाख मजदूरों की मजदूरी पर केंद्र सरकार
पिछले तीन साल से बैठी हुई है कह रही है
हम उनकी मजदूरी रिलीज नहीं करेंगे वो काम
कर चुके हैं
बात की मैंने उनसे काम करके बैठे हैं और
मनरेगा आई इसलिए थी कि मजदूर जो कि सुबह
कुआं खोदता है शाम को पानी पीता है उसको
तुरंत कुछ मिल जाए तीन साल से उनका किसी
मजदूर का 00 हजार रुका हुआ है किसी का 00
हज रुका हुआ है क्यों केंद्र सरकार को
बेसिकली टीएमसी से खुंदक है और अपनी खुंदक
निकालने के लिए केंद्र सरकार ने कह रखा है
मनरेगा के रिकॉर्ड गलत है बंगाल के हम
इसकी जांच करवाएंगे अरे जांच करवाओ आपस
में अपनी लड़ाई झगड़ा सुलझा लो
ये 21 लाख गरीबों को क्यों रोक रखा है
आपने ये एक मुद्दा है और स्वास्थ्य शिक्षा
की इस इलाके में तो जो आप चर्चा ना करें
वही अच्छा है आप झारखंड से बढ़कर मैं
नितीश पर नहीं आ रहा हूं नितीश पर क्या
पूछूं आपसे अब तो कुछ पूछना बचा नहीं
नितीश बाबू के बारे में लेकिन एक सवाल मैं
छोटा सा जरूर पूछूंगा आत्मा कभी उनसे कुछ
पूछती है
क्या जैसे आप प्रेडिक्शन स्किप कर रहे थे
मैंने नितीश जी को स्किप कर दिया
मैं एक सवाल क् आप झारखंड में रहे झारखंड
में जिस तरह से वहां के उस वक्त के
मुख्यमंत्री हेमंत सुरेन में उनकी लास्ट
प्रेस से जो बातचीत थी मैं उनका वो सुन
रहा था उसमें उन्होंने कहा कि जिस जमीन के
मामले में ये जो लैंड डील है ये लैंड डील
फ्रॉड है मैंने ही जांच कराई थी जिसके
कागज तैयार ही नहीं हो सकते जो जमीन बेची
नहीं जा सकती उस मामले में मुझे गवाहों के
आधार पर फंसाया जा रहा है और ये एक गलत हो
रहा है और हमने फिर देखा कि वो अरेस्ट हुए
एक सिटिंग चीफ मिनिस्टर और उनको जेल भेजा
गया हेमंत सुरेन के साथ जो हुआ एक आदिवासी
मुख्यमंत्री के साथ आपको लगता है कि यह
डिसीजन महंगा पड़ेगा जब झारखंड के लोगों
से आपकी बात हुई क्या ये डिसीजन मोदी का व
कुछ ज्यादा मतलब दो कदम आगे निकल गए
मोदी होना चाहिए तो सही भाई बताइए मतलब
देखिए इस देश में राज्य सरकारों के साथ
जानती पहले भी हुई है इंदिरा गांधी के
जमाने में 80 के दशक में कई बार जातिया
राज्य सरकारों को बर्खास्त भी किया गया
लेकिन किसी मुख्यमंत्री को आप जेल में डाल
दे और वह भी इस तरह के आरोप प यह तो
बिल्कुल ना सुना ना देखा बिल्कुल उस
कैटेगरी के अंदर है और खुलम खुला मतलब कोई
छुपी हुई बात नहीं है खुलम खुला है भैया
या तो इस पाला बदल के इस तरफ आ जाओ नहीं
तो जेल है वो कहते इधर बॉलेट है उधर बुलेट
है फिल्म का डायलॉग है ये वो वाला माम इधर
बॉलेट है उधर बुलेट है लेलो तो ऐसा होता
है क्या कहीं ये क्या लोकतंत्र हो रहा है
और यह काम आप एक आदिवासी मुख्यमंत्री के
साथ करें जिसके सपनों को लेकर झारखंड
प्रदेश बनाया गया था कहीं ना कहीं यह
उम्मीद तो करनी चाहिए कि एक ये आदिवासी
अस्मिता पर चोट है और याद रखिए बाकी जगह
पे ये गठबंधन को लेकर तनातनी है झारखंड
में कोई तनातनी नहीं है झारखंड का गठबंधन
है काम कर रहा है और वो चल रहा है गठबंधन
तो इसलिए मुझे लगता है कि कहीं जनता में
सहानुभूति है इस बात को है होगी ऐसी
उम्मीद करनी चाहिए न एक सवाल यहां पूछना
बड़ा लाजमी था अपने दोस्तों की तरफ से
उनका भी प्रेशर रहता है राहुल गांधी की इस
यात्रा में आप साथ चल रहे हैं और पिछली
यात्रा में भी आप साथ थे राहुल गांधी जो
इशू उठा रहे हैं ओबीसी का इशू है दलितों
का है मुस्लिम्स का है गरीब गुरबत में
जीने वाले लोगों का इशू उठा रहे आपको लगता
है कि यह जो इशू है यह कम्युनिकेट हो रहा
है इसमें एक ट्रैक्शन मिल रहा है आपको
लगता है कि राजनीति में एक नई लकीर खींचने
की कोशिश राहुल गांधी कर रहे हैं और कहीं
ना कहीं यह जो एक पिछड़ा दबा कुचला य जो
एक बहुत बड़ा एक आप कह सकते हैं वर्ग है
एक बहुत बड़ी आबादी है क्या ये एक इसका
ट्रैक्शन आपको मिल रहा
है देखिए इस यात्रा का ना तो मैं आयोजक
हूं ना मैं इसका चल
रहे साथ चल
रहेर मैं भी हमसफर के तौर पर पूछ रहा हूं
मैं हमराज के तौर पर नहीं पूछ र हम सफर के
राज
नहीं मुझे दो तीन चीजों का संतोष होता है
कि इस देश में कोई हाथ में माइक लेके
पब्लिक के सामने अडानी और उसकी करतूतों के
बारे में बात करता है सच बात ये है आप और
मैं भी जानते हैं इस देश के अधिकांश
नेताओं की और केवल रूलिंग पार्टी की मैं
बात नहीं कर रहा हिम्मत नहीं है अडानी का
नाम लेने की नंबर दो कोई खड़ा होकर इस देश
में कहता है कि गरीबी की ये स्थिति है इस
देश में महंगाई यह है लोगों के लिए जीना
मुहाल हो रहा है नंबर तीन
इस देश में जातिगत विषमता है अगड़े पिछड़े
दलित आदिवासी इनमें अंतर है और चंद
जातियों ने इस देश में तमाम पदों पर
प्रतिष्ठा पर कब्जा कर रखा है यह इस देश
की ऐसी कड़वी सच्चाई है जो कोई नहीं बोलता
हर कोई जानता है और कोई नहीं बोलता इसके
बारे में एक व्यक्ति है जो बोल रहा है अब
बोलने का तरीका कितना प्रभावी है
कम्युनिकेशन कितना होता है यह ऐसे सवाल है
जिनको पहली बार उठाने वाले को कई बार
कोड़े भी सहने पड़ते हैं आपको ध्यान होगा
बीपी सिंह ने जब वो सवाल उठाया था तो जो
बीपी सिंह के दुश्मन थे मतलब जिनको ओबीसी
मंडल रिजर्वेशन से नुकसान होना था वह सब
तो रातो रात गिरोह बंद हो गए और जिनको
फायदा होना था उन बेचार को 10 साल तक पता
नहीं लगा कि उनको फायदा होना था बीी आज
उसको मसीहा बताते लेकिन तब किसी को ध्यान
नहीं था तो यह सब संकट हो सकते हैं और कोई
राहुल गांधी में उस तरह की बाक पट तो है
नहीं जो कि प्रधानमंत्री में है लेकिन
पिछले कुछ दिनों से मैं देख रहा हूं कि
राहुल गांधी ने एक नए तरीके का बात करने
का तरीका निकाला है वो मंच पर खड़े होके
भाइयों बहनों मित्रों वो सब छोड़ छाड़ के
सीधा लोगों से बात कर रहे हैं अच्छा कौन
हो अच्छा ये कहां से आए क्या दिक्कत हुई
अच्छा प्रॉब्लम है लो तुम मेरा माइक लो
तुम बोलो ना अब इस राष्ट्रीय नेता के मंच
से कोई साधारण व्यक्ति माइक पकड़ के अपनी
बात कह रहा है वो ठीक से कह भी नहीं पाता
है एक दो लोग बीच में रोना शुरू कर दिए वो
सब कुछ हुआ मैं मेरी दृष्टि में बहुत
पावरफुल कम्युनिकेशन है पावरफुल
कम्युनिकेशन केवल लदार भाषा नहीं होती
सच्चाई को उघड़ के देश के सामने अपने उसके
अनगर स्वरूप में रख देना अपने आप में बहुत
पावरफुल कम्युनिकेशन है वो हो रहा है वो
देश के लिए बेहद जरूरी है अब उससे शॉर्ट
टर्म में क्या फायदा होता है इसको हम
देखेंगे लेकिन लंग टर्म ऐसी का होना बेहद
जरूरी
था यो आप आए और बड़ा अच्छा लगा बातचीत
करके एक सवाल है जो मुझे लगता है कि मेरा
पीछा मेरे जो दोस्त हैं वो नहीं छोड़ेंगे
वो बहुत कमेंट करेंगे अगर मैंने वो पूछा
नहीं जैसे मोहम्मद रफी या किशोर कुमार
आपके प्रोग्राम में आए और आप उनसे कहेंगे
सबब एक गाना तो सुना दीजिए कोई अगर
मोहम्मद रफी साहब से हम ये ना कहे तो
सोचिए एंकर का क्या हाल होगा कि साहब आपने
कम से कम इतना तो कहना चाहिए था अब आप एक
सेफोलॉजिस्ट की पहचान जो हम लोग जब हम लोग
कॉलेज डेज में थे आपको तब से देखते आते
योगेंद्र यादव जब नाम आता है एक सेफोलॉजी
पॉलिटिकल साइंटिस्ट एक राजनीत शास्त्र ये
सारी चीजें दिमाग में आती है इलेक्शन
दिमाग में आता है आप और जिस तरह से प्रणव
राय बैठते थे या विनोद दुआ साहब थे वो तीन
चेहरे आते थे उस हम लोग दूरदर्शन देखते थे
तो एक अंतिम सवाल में दोस्तों की तरफ से
कहूंगा और मैं माफी के साथ कहूंगा कि आपने
शुरू शुरू में कई बार आपने कहा साब मैं इस
पर नहीं बोलूंगा क्या लग रहा है 2024
क्योंकि देखिए संवाद आपसे होते रहेंगे
सिलसिला शुरू हो चुका है लेकिन एक मुझे
लगता है कि मोहम्मद रफी साहब से इतना तो
पूछा
जाए मैं नहीं पूछ दोस्त पूछ रहे स बताना
मेरा कर्तव्य है लग क्या रहा है आपको व्ट
इ गोइंग टू हैपन इन 20 लास्ट क्वेश्चन सर
पूछना आपका अधिकार है सच बताना मेरा
कर्तव्य है और सच यह है कि लॉजिस्ट को 10
साल पहले मर चुका
है वो पूर्व जन्म था और मैं कई बार सच में
बैठ के सोचता भी हूं कि अच्छा मैंने जीवन
के इतने वर्ष वो करते हुए क्यों
बिताए मैं बिल्कुल गिनती नहीं मैं आपसे कह
रहा हू मैंने इसलिए सवाल किया क्योंकि आप
रणभूमि में है मैदान में खड़े हैं कि मोदी
जी 272 क्रॉस कर रहे हैं क्या सरकार उनकी
बनने जा रही है आपको लगता है सफर मुश्किल
है मोदी साहब का यह मैं पूछ रहा था अगर यह
चुनाव मोदी मोदी का चुनाव होता है जाहिर
है मोदी जी आगे निक चाहे उनके पक्ष में हो
चाहे उनके विरोध में आप बातें करें अगर यह
चुनाव मुद्दे का चुनाव बनता है तो उनका
सफर बहुत मुश्किल है क्योंकि मुद्दों पर
उनको देने के लिए कुछ नहीं तो भविष्यवाणी
यही मेरी है मोदी या मुदा अगर मोदी है तो
बीजेपी बहुत आगे है अगर मुद्दा है तो 272
उनके हाथ में
नहीं योग जी बड़ी बात आपने कही कि अगर
मोदी मोदी है तो फिर मुमकिन हो सकती है
जीत और अगर मुद्दों की बात होती इश्यूज की
बात होती है तो फिर ये चुनाव बहुत टफ है
योग जी आप आए और इस मसरूफियत के बीच में
जो आपने य लमहे निकाले मैं उसका इतना
शुक्र गुजार हूं और खासकर जो दोस्तों की
तरफ से फरमाइश थी आपको लाने की हालाकि आप
आए और मुझे लगता है कि किस तरह से मैं
आपका धन्यवाद शुक्रिया मेरे पास लव की कमी
है ब सो नाइस ऑफ यू जॉइनिंग दिस प्रोग्राम
थैंक यू सो मच सर थंक य बात हुई इसके लिए
आपको शुक्रिया क्योंकि टीवी प इतनी
चिल्लाहट होती है आजकल संजीदा बात इतनी कम
होती है दोबारा फिर मिलेंगे थैंक यू सर
थैंक यू सो मच
सर

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