Modi ने तो कहा था , न खाऊँगा , न खाने दूँगा , फिर यहाँ कौन खा गया ?

नमस्कार
दोस्तों यह तस्वीरें याद है आपको अगर आपको
याद नहीं है तो आपको याद दिला देते हैं
फिर बताते हैं कि आज ये तस्वीरें मैं दिखा
क्यों रहा हूं गौर से देखिए इन तस्वीरों
को एक टनल जैसा दिख रहा है
अंडरपास दीवारों पर चित्रकारी की गई
है प्रधानमंत्री मोदी वॉक कर रहे हैं उस
टनल

में अब सामने एक फीता दिख रहा है
प्रधानमंत्री मोदी एक फीता काट रहे हैं
साथ में हरदीप पुरी हैं पियूष गोयल हैं
केंद्रीय मंत्री सबने तालियां बजा
दी दूसरी तस्वीर प्रधानमंत्री
मोदी एक खुली जीप पर सवार हो रहे हैं अब
खुली जीप चल पड़ी

है चारों तरफ दृश्य प्रधानमंत्री मोदी देख
रहे हैं फूलों से सजी हुई गाड़ी है और अब
इसके बाद फिर एक तस्वीर का इसी का पहलू
देखिए आगे बहुत अच्छी सी सड़क कहे टनल कहे
सुरंग कहे उसमें प्रधानमंत्री मोदी जाते
हुए दिख रहे हैं निहार रहे हैं दीवारों को

चित्रकारी को कलाकृतियों
को रंगीन रोनियो को और एकदम निहार रहे हैं
बहुत गदगद भाव से प्रधानमंत्री मोदी चल
रहे हैं और जब प्रधानमंत्री मोदी ऐसे

निहारते हुए गाड़ी से एक टनल में चल रहे
हैं तो जाहिर है कई कैमरे और उन कैमरों के
जरिए लाइव तस्वीरें देश भर के सामने जा
रही हैं वही तस्वीर और उसके बाद बताता हूं
कि तस्वीर आज देखना और दिखाना जरूरी क्यों
है इसका मतलब क्या है फिर एक

तस्वीर अब इस तस्वीर में आपको दिख रहा
होगा कि प्रधानमंत्री मोदी उसी टनल में
ऐसे झुककर कुछ उठा रहे हैं कुछ का कचरा है

सड़क पर ऐसे उन्होंने कचरा जैसा कुछ उठाया
प्लास्टिक या कुछ और उसके बाद फिर
प्रधानमंत्री मोदी ऐसे पैदल चल रहे हैं और
जो दीवार पर कलाकृतियां हैं पेंटिंग
है उसको देखते हुए फिर नीचे आए और फिर एक
प्लास्टिक की बोतल है जो वहां किसी ने
फेंक दी होगी और वो प्लास्टिक की बोतल

प्रधानमंत्री ने उठाया क्योंकि उन्हो
उन्हें स्वक्षता अभियान के एंबेसडर है
उन्हें इस तरह से कचरा फेंका हुआ दिखा तो
पसंद नहीं आया तो ये तीन तस्वीरें और यह

तस्वीरें तब की है 19 जून 2022 की जब
दिल्ली में
प्रगति मैदान अंडर पास का उद्घाटन देश के
प्रधानमंत्री ने किया था जो करीब करब सवा
किलोमीटर का अंडर पास

है और जब प्रधानमंत्री ने उद्घाटन किया था
तब भी हम लोगों को लगा कि देश में मंत्री
हैं उन उस महकमे के मंत्री हैं जिस महकमे
ने यह अंडरपास तैयार किया है केंद्रीय

मंत्री हरदीप पुरी साथ में दिख रहे
हैं उस अंडर पास का उद्घाटन मंत्री कर
सकते थे लेकिन एक अंडर पास का उद्घाटन भी
लगा कि प्रधानमंत्री खुद करें क्योंकि

सारा श्रेय तो खुद लेना है भाषण खुद देना
है लजी खुद करनी है बड़ी-बड़ी बातें खुद
करनी है और बताना यह है कि जो भी हो रहा
है वह मैं कर रहा हूं मैं ही मैं हूं और
कोई नहीं एक को हम द्वितीय नास ती इसलिए
प्रगति मैदान के इस अंडरपास का

प्रधानमंत्री ने उद्घाटन किया और दिलचस्प
तस्वीर वो थी जब लगा कि प्रधानमंत्री
जिसमें जिस अंडरपास का उद्घाटन कर रहे हो
पूरी साफ सफाई उसके पहले हो जाती है
एसपीजी सिक्योरिटी सब तामझाम वहां पता

नहीं किसने व कचरा और प्लास्टिक का डब्बा
फेंक दिया था ताकि प्रधानमंत्री जी जब आए
कैमरे सामने हो तो डब्बा उठाए देश देखे कि
प्रधानमंत्री कितने सहज आदमी हैं कितने आम
आदमी की तरह कैसे हैं कि सड़क के किनारे

से उन्होंने प्लास्टिक और बोतल और कचरा भी
उठाया तो किसने फेंका होगा पता नहीं या
कैमरे के लिए फेंका गया होगा पता नहीं
बहरहाल आज यह तस्वीर मौजू क्यों है
क्योंकि एक दूसरी तस्वीर अब है अब यह
दूसरी तस्वीर जो देखेंगे देख रहे हैं आप
यह दूसरी तस्वीर प्रधानमंत्री मोदी ने जो

प्रगति मैदान के अंडर पास टनल का उद्घाटन
किया था प्रगति मैदान अंडर पास और भैरो
मार्ग अंडर पास बोलते हैं उसके ठीक 13 दिन
बाद का है 1 जुलाई
2000 13 क्या 12 दिन हुए 1 जुलाई 2022 का

जब जबरदस्त बारिश हुई थी और उस अंडरपास
में इतना पानी भर गया था कि अंडरपास को
दोनों तरफ से बंद कर दिया गया था और उसमें
कोई गाड़ी नहीं जा सकती थी और वोह पानी
भराओ जल भराओ बारिश के मौसम में लगातार
रहा और लगातार कई बार अंडरपास को बंद करना

पड़ा और उसके बाद बारिश में यही हाल उस
अंडरपास का रहा छिटपुट खबरें अखबारों में
छपती रही लेकिन यह सवाल किसी चैनल ने पूछा
नहीं कि जिस अंडरपास का उद्घाटन खुद देश

 

के प्रधानमंत्री ने किया बड़ी-बड़ी बातें
की उस अंडरपास के उद्घाटन के वक्त क्या की
वो भी बताऊंगा वह अंडरपास 10 दिन के बाद
बारिश में उस अंडरपास का यह हाल क्यों हो
गया लेकिन अब पता चला है एक बड़ी खबर आई
है बड़ी खबर यह आई है कि प्रगति मैदान के
इस अंडरपास को बनाने वाली जो कंपनी है लसन

से हो रहा है और इसमें डिफेक्ट है और इस
वजह से एलएनटी को खराब निर्माण और काम में
देरी होने की वजह से नोटिस जारी किया गया
है और उसके बाद जवाब तलब किया गया एलएनटी
से और कहा यह भी गया है कि पीडब्ल्यूडी
विभाग ने इस फ्लाईओवर डिवीजन के मुख्य
अभियंता रहे प्रदीप कुमार परमार जो अब
सीपीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता हैं

गुवाहाटी में पोस्टेड है उनको और
कार्यकारी अभियंता मतलब एग्जीक्यूटिव
इंजीनियर इकबाल सिंह को भी नोटिस भेजा है
और कहा है इन नोटिस में कि उनके खिलाफ
अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों ना की
जाए मतलब जून 2022 में बना डेढ़ साल मान

लीजिए और उस डेढ़ साल में बारिश के मौसम
में ह में उसका अंडरपास का यही हाल रहा अब
सोचिए कि जो अंडरपास एक महीने बाद भी चलने
लायक नहीं था जिस अंडरपास को अभी तक पूरा
नहीं किया गया जो खबरें देख रहा हूं उसके

मुताबिक उस अंडरपास को जो पूरा होने की जो
उसके मियाद थी उससे काफी देर उसमें विलंब
हो चुका है 2017 में टेंडर जारी किया गया
पीडब्ल्यूडी ने जो नोटिस जारी किया उसके
मुताबिक और उसके बाद 2019 में इसका

निर्माण पूरा होना था लेकिन प्रोजेक्ट
पूरा हुआ देर से अभी भी वैसे बहुत हिस्से
उसके कुछ जो डिफेक्टिव हैं वह बनने हैं
रिपेयर होने 200 में 22 में इसका उद्घाटन
हुआ और उसके बाद पता चला उसमें खामियां ही

खामियां है और खर्च कितना हुआ 777 करोड़
रपए मतलब लगभग 00 करोड़ प करोड़ से कंडर
पास दिल्ली में बना सरकार के खजाने से
सरकारी पैसे से प्रधानमंत्री मोदी ने खुद
उद्घाटन किया गाजे बाजे के साथ बड़े-बड़े

दावे के साथ और उसके बाद उस अंडरपास में
डिफेक्टिव खामियां कमियां और कमियों की
कलंबी लिस्ट है वो बताऊ आज टाइम्स ऑफ
इंडिया में बहुत बड़ी खबर छपी है लेकिन
उसके बाद नोटिस एलएनटी को और उन
इंजीनियरों को जिन इ इंजीनियरों की देखभाल
में रख जिनकी जिम्मेदारी थी सुपरविजन की
उन इंजीनियर्स को नोटिस भेजा है तो सोचिए
कि इसमें कितना घपला घोटाला हुआ प 00

करोड़ के इस प्रोजेक्ट में और यह हुआ
केंद्र सरकार की नाक के नीचे और हुआ उस
प्रोजेक्ट

में जिस प्रोजेक्ट का उद्घाटन खुद प्रधान
मंत्री मोदी करने गए थे प्रधानमंत्री मोदी
तो कहते हैं ना कि वो तो ड्रोन से देख
लेते हैं विकास कार्यों को कहां देश में
क्या काम हो रहा है बड़ी नजर रहती है
ड्रोन से और जहां यह अंडरपास है प्रगति
मैदान वहां से जो प्रधानमंत्री निवास है
बमुश्किल तीन या 4 किलोमीटर है 3-4
किलोमीटर दूर है और दो ढा किलोमीटर दूर

वहां से केंद्र सरकार के सारे मंत्रालय
हैं हरदीप पुरी का ऑफिस है और उसके बाद
वहां घपला घोटाला इस तरह से हुआ कि जो बना

रिपोर्ट नहीं है लेकिन वो डिफेक्टिव है
जैसे बनना चाहिए था नहीं बना जल भरा हुआ
उसमें और भी कमियां है एक लंबी लिस्ट
टाइम्स ऑफ इंडिया ने छापी है कि इसमें अ
जल भराव जल निकासी की व्यवस्था नहीं है
जगह-जगह कंक्रीट की दीवारों में दरारें
हैं पानी रिसाव की दिक्कत है

अ उसके बाद पानी निकालने के लिए गड्ढे जो
बनने चाहिए वो गायब हैं ब्रांच टनल के
जंक्शन पर जल निकासी की दिक्कत है छत से
पानी टपकता है अनुचित अ रखरखाव है और भी
बहुत सारी चीजें लंबी चौड़ी लिस्ट है जो

टाइम्स ऑफ इंडिया में आज छपी है न भारत
टाइम्स और बाकी अखबारों में जो नोटिस जारी
किया गया पीडब्ल्यूडी की तरफ से एलएनटी को
हालांकि एलएनटी ने उसमें अपनी कुछ सफाई भी
दी है कुछ जगह देख रहा हूं उसमें यह भी है

कि उन खामियों का जिक्र बीच-बीच में कुछ
अखबार की तरफ से मीडिया संस्थानों की तरफ
से रिपोर्ट में होती रही लेकिन उससे कोई
फर्क नहीं पड़ा एलएनटी ने कहा है कि

पीडब्ल्यूडी के खिलाफ उसने 00 का काउ 500
करोड़ का काउंटर क्लेम किया है एलएनटी कुछ
और कह रही है कंपनी कुछ और क रही है लेकिन
पीडब्ल्यूडी के हवाले से अब बात आती है जो
मैं कह रहा हूं कि अगर दिल्ली में यह इस
तरह की योजना में ऐसी लापरवाही वर्ती गई

जो खुद जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी
ने किया और इस सरकार पर करप्शन के सीधे
चार्ज या करप्शन के पर कोई लगा दे कि
सरकार की योजनाओं में करप्शन होता है
बीजेपी के नेता बिलबिला उठते हैं लेकिन
अगर करप्शन के मामले की जांच करने वाली जो

एजेंसियां हैं वो सरकार के दबाव में
सरकारी किसी ठेके में जांच ही ना करें तो
करप्शन का पता कैसे चलेगा और अगर सीएजी है
देश में जो सीएजी अपनी रिपोर्ट में कह दे
कि सरकार की किस-किस योजना में या किस-किस
एक्सप्रेसवे में घपले घोटाले हुए और उस पर
कोई बात ना हो तो क्या बात हो उस पर भी
बात करने से पहले जरा प्रधानमंत्री मोदी

ने इस अंडरपास के उद्घाटन के वक्त क्या
कहा था जरा सुनिए कुछ सेकंड का ये वीडियो
है इससे आपको पता चलेगा कि लफा जीी करना
बड़ी-बड़ी बातें करना और उसके बाद

प्रोजेक्ट का यह हाल होना इसके लिए
जिम्मेदारी कौन और अगर प्रधानमंत्री मोदी
इस आधुनिक भारत के इस टनल की की व हवाई
बटोरने गए थे तो फिर यह खामिया अगर हुई तो
इसकी जिम्मेदारी किसकी सुनिए मोदी जी को
दिल्ली
को केंद्र सरकार की तरफ
से आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
का एक बहुत ही सुंदर उपहार मिला
है
अभी जब मैं टनल से गुजर रहा
था तो मन में बहुत सी सारी बातें आ रही
थी इतने कम समय
में इस इंटीग्रेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर को
तैयार
करना जरा भी आसान नहीं
था जिन सड़कों की इर्दगिर्द य कॉरिडोर बना
है वो दिल्ली की सबसे व्यस्ततम सड़कों में
से एक
है हर
रोज लाखों गाड़ियां गुजरती
है और यह जो टनल बनी है उसके ऊपर तो सात
रेलवे लाइंस गुजर रही
है इन सारी मुश्किलों के
बीच कोरोना
धमका उसने नई परिस्थितियां पैदा की और
हमारे देश ऐसे किछ भी काम करो तो जुडिशरी
के दरवाजे खटखटाने वालो लोगों की भी कमी
नहीं है हर चीज में अड़ंग के डालने वाले
होते होते ही
है अनेक मुसीबतें पैदा होती है देश को आगे
ले जाने
में इस प्रोजेक्ट को भी वैसी कठिनाइयों से
गुजरना
पड़ा
लेकिन यह नया भारत
है समस्याओं का समाधान भी करता है
नए संकल्प भी लेता
है और उन संकल्पों को सिद्ध करने के लिए
अहर निश प्रयास करता है मोदी जी ने कहा था
कि दिल्ली को केंद्र की तरफ से बहुत सुंदर
उपहार मिला है और इतने कम समय में कॉरिडोर
तैयार हुआ है आसान नहीं था उन्होंने यह भी
कहा यह नया भारत है समस्याओं का समाधान
करता है संकल्पों को सिद्ध करने का प्रयास
करता है तो कौन सा संकल्प था किस संकल्प
के तहत दिल्ली में ऐसा कॉरिडोर तैयार हुआ
जिस कॉरिडोर को सुचारू रूप से उस कॉरिडोर
का इस्तेमाल ही जनता नहीं कर पाई बारिश के
महीने में कई-कई दिन तक जल भरा और अब
पीडब्ल्यूडी खुद मान रहा है जो सरकारी
महकमा है कि इसमें गड़बड़ियां हुई और उसके
बाद एलएनटी को नोटिस भेज भेजा गया है
इसमें यह भी कहा गया है कि अ इस प
पीडब्ल्यूडी की तरफ से जो खबरें आ रही है
कि इसमें कई तरह की खामियां हैं जिन्हें
ठीक नहीं किया गया है तकनीकी कमियों के
कारण सरकार को परियोजना के के प्रबंधन और
संचालन में नुकसान उठाना पड़ा है टनल और
अंडरपास का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों
के लिए मौजूदा स्थिति में संभावित खतरा बन
गया है जिसका यह परियोजना जैसा कि मैंने
बताया 777 करोड़ की लागत से बनी थी जिसका
खर्च केंद्र सरकार ने उठाया था तो यह तो
स्थिति इस परियोजना की है अब बात आती है
इसमें कितना खाया किसने खाया उस इंजीनियर
साहब ने खाया पीडब्ल्यूडी के किसी अधिकारी
की मिली भगत थी क्या थी यह तो जांच होगी
तब पता चलेगी लेकिन इस सरकार में उस तरह
से जांच होती नहीं है जहां जांच और उस तरह
की कोई रिपोर्ट होती है उसको कैसे दबा
दिया जाता है
जैसे सीएजी की रिपोर्ट के हवाले से इसी
अगस्त में कहां-कहां से खबर आई आई कि
आयुष्मान योजना अयोध्या विकास परियोजना और
द्वारका एक्सप्रेस योजना सहित कई योजनाओं
के बारे में जिक्र आया कि उसमें
गड़बड़ियां हुई कैक की रिपोर्ट ने खुलासा
किया था कि हरियाणा से दिल्ली तक जो
द्वारका एक्सप्रेसवे बन रहा है उसमें 18
करोड़ में बनाने की अनुमति थी लेकिन
एनएचएआई ने इसे बनाने में 250 करोड़ खर्च
किए 18 करोड़ में बनना था 250 करोड़ खर्च
किए सीएजी की रिपोर्ट थी उसी समय यह
रिपोर्ट आई कि आसमान भारत में धांधली हुई
है कैग की रिपोर्ट में कहा गया कि
आयुष्मान योजना के तहत
3446 ऐसे मरीजों के इलाज पर 6 करोड़ 97
लाख यानी लगभग 7 करोड़ का भुगतान किया गया
जो पहले से मर चुके थे मतलब 7 करोड़ का
भुगतान ऐसे मरीजों के इलाज में कर दिया
गया जो इस दुनिया में थे ही नहीं इलाज कर
दिया गया पैसे किसने खाए ये कौन बताएगा
मोदी जी तो कहते थे ना खाऊंगा ना खाने
दूंगा यह खा कौन रहा है यह कौन खा रहा है
जिस खाने वाले का पता नहीं चल रहा है खा
रहा डकार भी नहीं ले रहा है एजेंसियां
सारी विपक्षी राज्यों में चाहे झारखंड हो
चाहे बिहार हो जहां-जहां विपक्ष की
सरकारें हैं वहां सारी एजेंसियां स सक्रिय
है चाहे बंगाल हो लेकिन यहां जो खा रहे
हैं लोग और खाकर डकार भी नहीं ले रहे हैं
व उस उन उनकी गिरफ्तार है उन पर शिकंजा
कसने की कितनी जानकारी कितनी खबरें आप तक
आती है उसी सीएजी में ये भी कहा अयोध्या
विकास से लेकर विकास को लेकर बनाए जा रहे
स्वदेश दर्शन योजना पर भी कैग ने कहा कि
परियोजना में ठेकेदारों को 19 करोड़ 73
लाख का अनुचित लाभ दिया गया यानी लगभग 20
करोड़ उसी में यह भी कहा गया कि आसमान
योजना के तहत 75 लाख लाभार्थी एक ही
संख्या के मोबाइल नंबर से जुड़े हुए हैं
75 लाख लाभार्थी लाभार्थी आसमान योजना में
एक ही नंबर से जुड़े हुए थे अब समझिए ये
घपले घोटाले कहां हो रहे हैं और हुए तो
पकड़े कितने गए कहते तो अच्छा लगता है ना
खाऊंगा ना खाने दूंगा वो नारा हमें भी याद
है तो आप लोगों ने यकीन भी किया कोई खा भी
नहीं रहा कोई खाने भी नहीं दे रहा लेकिन
यह कौन खा रहा है कली मोदी जी का भाषण था
लोकसभा में संसद में जब राष्ट्रपति के
अभिभाषण पर चर्चा का जवाब दे रहे थे पीएम
मोदी तो उन्होंने बहुत कुछ कहा कि हमने
सरकारी रिकॉर्ड से 10 करोड़ फर्जी नाम
हटाए हैं 3 लाख करोड़ गलत हाथों से जाने
से रोका 3 लाख करोड़ रुपए कांग्रेस के
कार्यकाल में यह हुआ वो हुआ हमने यह किया
वो किया सीएजी रिपोर्ट जो कहता है सो और
जो इतनी खबरें जानकारियां इस बीच इतने
सालों में आई वो पूर्वांचल एक्सप्रेस में
टूट फूट की खबरें आती है वह और जो यह
अंडरपास दिल्ली में हुआ यह ऐसा तो है नहीं
कि इसमें एकदम जीरो करप्शन होगा कहीं कोई
बेईमानी नहीं होगी कहीं कोई गड़बड़ी नहीं
हुई होगी और तब प स करोड़ की लागत से
केंद्र सरकार के खर्चे से ऐसा अंडरपास बन
गया जो 10 दिन बाद इस्तेमाल करने लायक
नहीं रह गया बहरहाल कहा जा कि अब फाइलें
मंगवाई जा रही है शायद जांच होगी तो
फिलहाल सिर्फ इतनी सी बात कि चूंकि एजेंसी
अपनी है जांच करने
वाला जांच करने की जिम्मेदारी आदेश देने
की जिम्मेदारी सरकार की है सब कुछ अपना है
तंत्र अपना है तोता अपना है इसलिए कहीं
ऐसे घपले घोटालों की खबर नहीं आती और अब
लगभग 10 साल हो गए तो इसलिए यह मत मानिए
कि सब कुछ बहुत चंगा है और राजा
हरिश्चंद्र का रामराज्य चल रहा है तय आपको
करना है
फिलहाल इस वीडियो को यही खम करते हैं फिर
मुलाकात होगी किसी और वीडियो
में नमस्कार

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