MSP की फाईल मेज पर | इस फाईल पर मोदी को कौन साईन नहीं करने दे रहा

नमस्कार मैं दीपक शर्मा और मेरे
चाहते हैं गारंटी देना चाहते हैं किसानों
को देना चाहते लेकिन क्या करें
व्यापारियों का एग्रो कंपनियों का इतना

जोर है इतना दबाव
है कि मोदी जी पिछले कई दिन से फैसला नहीं
ले पा
रहे अब सवाल यह है कि अगर मोदी जी किसानों
को लीगल गारंटी देते हैं एमएसपी की मिनिमम

सपोर्ट प्राइस की एक बेहतर दाम की उनकी
फसल के लिए अगर एक गारंटी देते हैं लीगल
गारंटी तो क्या सबसे ज्यादा नुकसान सबसे
ज्यादा नुकसान व्यापारियों को होगा एग्रो
कंपनियों को होगा और जिसमें खास तौर पर

अडानी ग्रुप और अंबानी यानी रिलायस ग्रुप
इनकी जो तमाम कंपनियां है एग्री सेक्टर से
एग्रो सेक्टर से क्या इनको भी नुकसान होगा
और सवाल यह भी है कि क्या एक तरफ जो किसान
है और दूसरी तरफ जो व्यापारी मित्र है

इनके बीच में उलझते चले जा रहे हैं मोदी
और उनके टेबल पर एमएसपी की फाइल पड़ी हुई

है उस परे धीरे-धीरे थूल जम रही है और
सामने जी हां और एकदम सामने मोदी जी के
चुनाव है क्योंकि 1520 दिन के बाद 2024 के

फाइनल चुनाव जी हां उसका ऐलान हो सकता है
10 मार्च को 12 मार्च को 14 मार्च को 1520
दिन में चुनाव का ऐलान होने जा रहा है
फाइनल होने जा रहा है सवाल इस बात का है

किय जो 1520 दिन है क्या इन 1520 दिनों
में मोदी जी एमएसपी की फाइल पर साइन
करेंगे तैयार हो जाएंगे गारंटी देने के
लिए तैयार हो जाएंगे क्या फिर वो एक
स्पेशल सेशन बुलाएंगे या फिर ऑर्डिनेंस
लाएंगे वो क्या करेंगे क्या वो फैसला

लेंगे क्या उस फाइल को व पढ़ेंगे और फैसला
लेंगे और अगर नहीं
लेंगे तो क्या वाकई बहुत बड़ा झटका खाने

जा रहे हैं वह 2024 के फाइनल में खासकर
उत्तर भारत
में अब अगर मोदी जी एमएसपी पर डिसीजन नहीं
लेते हैं अगर किसानों के साथ वह समझौता
नहीं करते तो फिर चुनाव में क्या वह वाकई

झटका खा जाएंगे अब दोस्तों इसके दो कारण
है दो महत्त्वपूर्ण कारण है पहला कारण यह
है कि जिस तरह पिछले कुछ दिनों में चार
पांच दिनों में यह आंदोलन और भड़कता जा
रहा है टियर गैस छोड़े जा रहे हैं ठी
चार्ज हो रही है रबर बुलेट छोड़े जा रहे

हैं किसान घायल हो रहे हैं और हद यह हो गई
कि गोली भी चल गई और वोह गोली सीधे एक
युवा किसान के सर के पीछे लगी ऐसा लोग कह
रहे हैं किसानों का आरोप उसकी मौत हो गई
अब यह जो युवा किसान जब से शहीद हुआ है और

अभी तक इसका क्रीमेशन नहीं हुआ है यह एक
तरह से आप कह सकते हैं जो खबर है य जो
हादसा है यह चिंगारी की तरह पूरे उत्तर
भारत प हर किसान खाब में हर किसान संगठन
में अब सिर्फ यही चर्चा है कि क्या यह

सरकार अब गोली भी चलाएगी
हालात यह हैं कि चाहे वोह पंजाब हो चाहे
वोह हरियाणा का इंटीरियर हो चाहे वह
राजस्थान हो चाहे वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश
हो कुछ हिस्सा हिमाचल और उत्तराखंड का
चारों

तरफ ये आंदोलन धीरे-धीरे तेज होता जा रहा
है और जगह-जगह से गांव-गांव से जिसे पिंड
कहते हैं पंजाब में पिंड से गांव से
विलेजेस से ट्रैक्टर निकल रहे हैं और
जमीनी सच्चाई यह है कि बहुत से गांव हां
मजबूत संगठन है किसानों के वहां पर
बैरिकेड लगा दिए गए कि ट्रैक्टर सड़क पर

ना है हाईवे पर पहला कारण आंदोलन बहुत
तेजी से आग की तरह फैलता जा रहा है दूसरा
कारण य जहां आग लग रही है य जहां चिंगारी
भड़क रही है जिस इलाके में दिल्ली के
चारों
तरफ पंजाब भी है हरियाणा भी है पश्चिमी

उत्तर प्रदेश मध्य देश तक मैं कर्नाटक की
बात ही नहीं कर रहा हूं जहां किसान वहां
भी आंदोलन कर र मैं तमिलनाडु की बात नहीं
कर रहा हूं मैं इस एरिया की बात कर रहा
हूं 4050 सीटों तक का असर हो सकता है यह
बहुत ही मजबूत किसान बेल्ट है जाट बहुल ब

अगर मोदी जी ने फैसला नहीं
लिया तो बहुत मुश्किल होगी क्योंकि 40 50
सीटें जो 2014 में इसी इलाके में 2019 में

इसी इलाके में मोदी जी ने जीती थी उससे हो
सकता है हाथ धोना
पड़े अब दोस्तों अडानी और अंबानी गौतम भाई
अडानी और मुकेश अंबानी मोदी जी के दो खास
मित्र बहुत ही आप कह सकते हैं प्रिय मित्र

पैसे वाले बहुत ही पैसे वाले मित्र या यूं
कहे सबसे पैसे वाले मित्र 140 करोड़ के इस
देश में इंटरेस्ट इनके भी हालांकि दोनों
ने अडानी ने और अंबानी ने अब तक लिखा पड़ी
में कहा कि उन्हें कांट्रैक्ट फार्मिंग से
कोई मत मतलब नहीं वो इस इशू में कहीं भी

इवॉल्व नहीं है लेकिन हकीकत य सच्चाई ये
है कि अडानी साहब का एक बहुत बड़ा फोकस
एग्रो सेक्टर में अडानी एग्री लॉजिस्टिक्स
करके कंपनिया उनके जो गोदाम है वेयर
हाउसेस है जहां पर वो अनाज स्टोर करते हैं
वो ना सिर्फ पंजाब हरियाणा में पूरे देश

भर में और भी ज्यादा वोह आगे बढ़ना चाहते
हैं सिर्फ हिमाचल में वो सेब तक सीमित
नहीं है एक बहुत बृहद कार्यक्रम है हटाने

का इस पर मैं तफसील से आगे बात करूंगा या
फिर कभी वीडियो बनाऊंगा और यही हाल
बनाऊंगा सिर्फ इतना कहना चाहता हूं प्रेशर
कॉर्पोरेट लॉबी का भी
है तो दोस्तों 152 दिन यानी 10 मार्च के

बाद कभी भी इलेक्शन अनाउंस हो सकता है और
जब इलेक्शन अनाउंस हो जाएंगे आचार संहिता
लग जाएगी तो फिर डील के लिए कोई जगह नहीं
है किसान और सरकार के बीच फिर डील नहीं हो
सकती फिर कहां आप ऑर्डिनेंस लाएंगे आचार
संहिता लग जाएगी तो 15-20 दिन का समय मोदी

जी के पास है उसी में उनको फैसला लेना है
क्या वो फैसला लेंगे और ये जो किसान है
क्या ये घर वापस जाएंगे इस शहादत के बाद

कई किसान अब तक मर चुके हैं शहीद हो चुके
हैं इसके बाद यह किसान घर वापस जाएंगे और
किसान कहां का भगत सिंह की भूमि का नि भगत
सिंह की भूमि का वह किसान जिसका एक भाई
बॉर्डर पर खड़ा है चाहे व पाकिस्तान
बॉर्डर हो चाहे चाइना बॉर्डर हो और एक भाई

जो है वो शंभू बॉर्डर पर खड़ा हुआ है जहां
उसको रबर बुलेट खानी पड़ रही है अपनी ही
सरकार से तोय किसान क्या वापस जाएंगे या
आगे बढ़ेंगे आने वाले कुछ दिन में क्या
होने जा रहा है क्या एक बहुत भीषण टकराव
होने जा रहा है और दूसरी तरफ अंबानी अडानी
कॉर्पोरेट का इंटरेस्ट क्या है क्या वाकई

मोदी जी झुक रहे हैं मुझे लगता है कि एक
ऐसा एक्सपर्ट होना चाहिए जो एग्रो पॉलिसी
को समझे कृषि नीतियों को भी समझे जो किसान
नेता भी हो जो इस आंदोलन से भी जुड़ा
हो जो थोड़ा बहुत मोदी जी को भी समझता हो
आप कह सकते हैं कि ना सिर्फ वो एक एग्रो

एक्सपर्ट हैं बल्कि इस पूरे आंदोलन में हर
नेता से जुड़े हुए हैं सीधे चलेंगे समय
बिल्कुल भी जाया नहीं करूंगा चौधरी
पुष्पेंद्र सिंह के पास बड़े किसान नेता
पुष्पे जी मेरा पहला सवाल है आपको क्या
लगता है कि यह जो आंदोलन है क्योंकि हमने
देखा कि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई
हैं हादसे हुए हैं एक 21 साल के किसान को
एक युवा किसान को जिस तरह से सर पर गोली

लगी और जिस तरह से कंट्रोवर्सी है आज जिस
तरह से हिसार में लाठी चार्ज हुआ है किसान
जो है उनके जत्थे के जत्थे निकल रहे हैं
बॉर्डर की तरफ क्या आपको लगता है कि मोदी

 

सरकार मोदी सरकार बहुत प्रेशर में है
चुनाव के 152 दिन बचे हैं अब अनाउंस होने
में तो 20 दिन मोदी सरकार के पास है और
इतने ही दिन किसानों के पास है आपको क्या
लगता है
कि सरकार प्रेशर में मोदी अमित शाह प्रेशर
में और अगर है तो फिर क्यों है देखिए दीपक

जी जिस प्रकार पिछला आंदोलन हुआ था दिल्ली
के चारों तरफ और 13 महीने तक किसानों ने
लोहा लिया था डटे रहे थे मोदी जी को मालूम

है कि चुनाव से पहले यदि किसान य जम गए जो
कि यह जम चुके हैं तो यह जब तक जो है अपनी
मांगों को नहीं मनवा लेंगे तब तक यह यहां
से लौटने वाले नहीं है आज की तारीख में

हरियाणा पंजाब के बीच में अंतरराष्ट्रीय
बॉर्डर जैसा बना दिया गया है रो जो है
किसानों के ऊपर तरह तरह के अत्याचार किए
जा रहे हैं सीधा गोली मार कर के वो भी सर

में गोली मार कर के जो है किसानों को मौत
के घाट उतारने का काम कर रही है आंसू गैस
के गोले तो हजारों की तादाद में जैसे कोई
दिवाली का पटाखे हम सुनते हैं उस तरह की
नाए हुई है और यह सरकार बिल्कुल दमनकारी

नीति और हरियाणा को तो ओपन जेल बना दिया
गया है कोई भी किसान का जत्था किसी हालत
में भी हरियाणा से कहीं भी चलने को तैयार
तो उसके ऊपर लाठी चार्ज आंसू गैस और इस
तरह का कर दिया जाता है ऐसी सरकार शायद

इमरजेंसी में भी नहीं रही होगी पुलिस
स्टेट से भी आगे कोई हिटलर शही होती है उस
तरह की स्थिति इन्होंने इस वक्त बना दी है
क्योंकि इन्ह मालूम है कि यदि देश का

किसान इसमें अड़ गया तो कहीं ना कहीं बहुत
बड़ा राजनीतिक खामियाजा भी इनको उठाना पड़

सकता है अगर मोदी जी ने मोदी सरकार ने अगर
एमएसपी की गारंटी नहीं दी सपोज करिए नहीं
दी और अगर सरकार गारंटी देती तो अब तक
चुकी होती अगर सरकार गारंटी देने से पीछे

हट रही है तो फिर यह आपको आंदोलन किधर
जाता हुआ दिख रहा है देखिए दीपक जी एमएसपी
की लीगल गारंटी के बिना किसान नेता भी अगर
कोई कॉम्प्रोमाइज करना चाहे तो इतना जोश
है किसानों में कि वही पीछे नहीं हटेंगे
और उस नेता को ही खारिज करने का काम कर

दिया जाएगा अभी पियूष गोयल जी ने वहा जाकर
के एक चार पांच फसलों को हम पा साल तक

कांट्रेक्ट पर खरीद लेंगे एमएसपी की व ऐसा
ऑफर दिया था उसको किसानों ने रिजेक्ट कर
दिया उसके बाद जो संयुक्त किसान मोर्चा है

जिसने दिल्ली के चारों तरफ आंदोलन किया था
वह भी इस आंदोलन में कूद पड़ा है उन्होंने
अनेकों कार्यक्रम चाहे रेल रोको हो रोड
जाम हो टोल फ्री हो ट्रैक्टर मार्च हो इस
तरह की घोषणा कर दिए तो यह तो व्यापक और

बड़ा आंदोलन बनता चला जा रहा है कोई भी
व्यक्ति बिना एमएसपी की गारंटी के घर लौट
ही नहीं सकता किसी हालत में नहीं लौट सकता

चौधरी साहब एक बात जो है मैं कहूंगा चलिए
इसकी इस पूरे मुद्दे की जड़ में जाते हैं
और मैं आपसे बहुत संक्षेप में एक सवाल का
जवाब चाह रहा हूं और मुझे लगता है आपसे

बेहतर हिंदुस्तान में कोई बता भी नहीं
सकता है मोदी जी के लिए प्रॉब्लम क्या है
संक्षेप में मोदी की प्रॉब्लम भाई उनके

जेब से पैसा थोड़ी ना जा रहा है उन्हें
एमएसपी की लीगल गारंटी देने में क्या
प्रॉब्लम है असली चीज बताइए असली वजह क्या
है देखिए एमएसपी की लीगल गारंटी जैसा कि

हमने अनेकों अखबारों में भी लिखा है इसमें
आर्थिक बोझ सरकार के ऊपर नहीं पढ़ना है
सीट
मैं कह रहा हूं कि भैया जब आर्थिक बोझ
नहीं पड़ना भाई तो मैं पूछ रहा हूं चौधरी
साहब वजह क्या है व्हाट इज द रीजन क्यों

नहीं दे रहे जी जी जी उसी पर मैं आ रहा
हूं देखिए मुख्य वजह यह है कि भाई यह
व्यापारियों का संरक्षण करने वाली सरकार
है ये नहीं चाहते कि व्यापारियों को भी जो
व्यापारी 25 30 पर की लूट हमारी करता

लगातार पिछले 70 साल से चला रहा है वो लूट
जारी रहनी चाहिए क्योंकि वही व्यापारी
इनकी फंडिंग करता है कहीं ना कहीं भाजपा
की तो यह नहीं चाहते जो है किसानों को सही

रेट मिले किसान मजबूत हो और मजबूत होगा तो
अन्य मांगों के लिए भी आंदोलन करने के लिए
उतारू होगा तो यह नहीं चाहते यह जो है
कहीं ना कहीं सूट बूट की जो सरकार वाला

जुमला है बिल्कुल ठीक है यह इंडस्ट की
अडानी अडानी ने बहुत बड़े गोदाम बना दिए
वो फूड के बिजनेस में बहुत लंबे चौड़े
स्केल पर जो है घुस चुका है तो धीरे धीरे
बिजनेस में कबजा करना चाहते हैं जी फूड के

बिजनेस में जो है कबजा करके और फिर ऊंचे
दामों में कंज्यूमर से इन सब चीजों को
बेचेंगे ऐसी इनकी योजना है जी एक चीज और
क्योंकि आपके पास हर जगह से पूरे देश भर

से आपके पास खबरें आ रही हैं क्या ये जो
हम देख रहे हैं यह सिर्फ पंजाब हरियाणा
बॉर्डर पर 2 लाख किसानों की भीड़ है या जो

किसान हैं क्या यह ढाई ती लाख किसान है
सिर्फ जो इस वक्त एजीटेशन कर रहे हैं या
आपका मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश हो
पंजाब का इंटीरियर हो हरियाणा हो दिल्ली
के चारों तरफ बहुत बड़ी संख्या में

किसानों में प्रतिक्रिया हो रही है और आने
वाले दिनों में यह जो संख्या है
आंदोलनकारियों की ये मल्टीप्लाई होगी

देखिए दीपक जी जिस प्रकार से हरियाणा की
सरकार ने दमनकारी नीतियां अपनाई है बॉर्डर
पर उसके अलावा ये नोटिस दे रहे हैं घर-घर
जाकर के तो इनको आशंका तो है ही कि किसान
जो है एकजुट हो रहा है मूवमेंट कर रहा है

अलग-अलग प्रोग्राम घोषित कर रहा है जो
किसानों के प्रमुख चेहरे हैं उनको जाकर के
नोटिस एनएसए
तक लगाने की बात कही जा रही है बाद में जब
क्रिटिसिजम हुआ तो उसको इन्होंने विड्रॉ
किया एनएसए वाली को लेकिन आपकी संपत्ति
कहां-कहां है क्या-क्या आपके बैंक अकाउंट

उसको जप्त कर लिया जाएगा तो इससे पता लग
रहा है कि और बाकी सारे देश से हमें जो
खबरें आ रही है कर्नाटक से जो किसान चले
थे व ट्रेन से आ रहे थे उनको भोपाल में
उतार लिया गया उधर हनुमानगढ़ से हमें

रिपोर्ट आ रही है कि जो है इसी तरीके की
पुलिसिया कार्रवाई कर दी गई गांव-गांव के
बाहर बैरिकेडिंग लगा लगाने का काम ये
सरकार कर रही है तो आंदोलन तो वो इससे भी
ज्यादा बड़ा व्यापक बनेगा आप जो है

बिल्कुल पेशेंस से देखते रहिए और ना ये
वापस जाएंगे ना हटेंगे इस बार किसानों के
ऊपर सीधे गोली चलाई गई है और कोई पुलिस
फोर्स कभी भी सीधा सर में गोली नहीं मार
सकती अगर कोई उत्पात भी कर रहा है तब भी
आप पैरों में गोली मारने के अधिकारी है तो

आप जो है इस तरह की हरकत और फिर आप बॉर्डर
क्रॉस करके दूसरे स्टेट में जाकर के ये
कारवाही कर रहे हैं वो भी इलीगल है तो अभी
इन्होंने मुआवजे की घोषणा की है एक करोड़
की नौकरी भी उसकी बहन को देने की बात की

है लेकिन उसको इन्होने कह दिया है किसान
संगठनों देखो पैसे की बात नहीं है आपको उस
अधिकारी के खिलाफ कारवाई करनी पड़ेगी जो
इस तरह के ऑर्डर वहां दे रहा है क्योंकि

कल को फिर दूसरे किसी किसान भाई की हमारी
मृत्यु गोली से हो सकती है जी अभ आपने जो
गोली का प्रकरण कहा ये जो 21 साल का किसान
बेटा है शुभकरण जिसके सर के पीछे गोली लगी
है और हॉस्पिटल में जो सुपरिंटेंडेंट थे

मेडिकल सुपरिंटेंडेंट उन्होंने अपने
प्रारंभिक उसमें बयान में यही कहा था कि
हमें ऐसा लग
बुलेट इंजरी से मौत हुई है यानी गोली सर
पर लगी लेकिन मैं देख रहा हूं कि अगर भगवत
मान एक करोड़ रुपए का कंपनसेशन दे रहे हैं

या
उनकी बहन को नौकरी दे रहे हैं वह इस पर
तैयार क्यों नहीं रहे सरकार पर सरकार से
मतलब अब क्या डिमांड है किसानों

की देखि किसान यह कह रहे हैं कि भाई ठीक
है यह कंपनसेशन ठीक है लेकिन मेन डिमांड
यह है कि आपको एफआईआर दर्ज करनी चाहिए उस
अधिकारी के खिलाफ जिस अधिकारी के आदेश पर

यह गोली चली क्योंकि कल को फिर गोली चलेगी
और ये क्रॉस बॉर्डर गोली चलने वाली है चल
रही है और आप ये समझिए कि कल को
यदि ये पंजाब की पुलिस भी वहां खड़ी हो गई
आ करते कि हमारे एरिया में अगर आपने गोली

चलाई तो हम भी गोली चला देंगे कैसी स्थिति
यहां के सिविल वॉर की स्थिति जो है देश
में क्रिएट हो जाएगी और कौन सा अधिकार है
कि बॉर्डर स्टेट को बिल्कुल काट छाट करने
का काम जो है एक हरियाणा की सरकार जो
भाजपा की सरकार है वो कर दे आप एक

सेंसिटिव स्टेट को अलग लग कर रहे हैं
खालिस्तानी उनको कह रहे हैं पुलिस अधिकारी
आईपीएस अधिकारी बंगाल में ड्यूटी पे था
उसको खालिस्तानी बताया गया ये कोई छोटी
घटनाएं नहीं हो रही है ये बहुत बड़े जो
विनाशक बीज अलगाव के बीज बोने का काम यह
देश ये भाजपा कर रही है जो देश को भुगतने

पड़ेंगे ये बताइए लेकिन पंजाब में तो
भाजपा की सरकार नहीं है पंजाब में तो आम
आदमी पार्टी की सरकार है तो वो फिर एफआईआर
क्यों नहीं लिख रहे अगर हरियाणा पुलिस की
तरफ से गोली चली है तो हरियाणा में तो

बीजेपी की सरकार है एफआईआर में पुलिस
अधिकारियों का नाम क्यों नहीं लिखा जा
सारे आईपीएस ऑफिसर एक हो गए हैं बिल्कुल
यह बात बिल्कुल ठीक कही आपने कि भाई कहीं
ना कहीं पुलिस यह कह रही है कि साहब यह हम
नहीं कर सकते बाकी हम कंपनसेशन दे सकते
हैं लेकिन उन्होंने इल्लीगल एक्ट किया है

पुलिस भी कोई अपनी मर्जी से सिविल ड्रेस
में भी थे मैं आपको बताऊं जींस पहनी हुई
है ऐसी फोटो मेरे पास है और ऊपर उन्होंने
हेलमेट पहना हुआ है यह पुलिस अधिकारी थे
या कहीं भाजपा के आर एसस के गुंडे थे इसका

कोर्ट्स का आदेश है कि सिविल पुलिस जब ऐसी
घटना होती है तो सिविल में नहीं जा सकते
आप सिविल ड्रेस में नहीं जा सकते तो यह
घटना यही रोकनी पड़ेगी इसके लिए चाहे कुछ
भी करना पड़े एफआईआर दर्ज करनी पड़ेगी और
इसकी जो है जांच करके सजा देनी

पड़ेगी लेकिन मुझे एक चीज आप कह रहे हैं
कि पुलिस वाले सादी साधे ड्रेस में सिविल
ड्रेस में थे जींस पहने थे टीशर्ट पहने थे
कहीं उन्होंने पिस्तौल भी छुपा रखी होगी
और फिर वहां से फायर कर दिया लेकिन पुलिस
ने
इतना इतना बड़ा कदम चौधरी साहब ले लिया कि
जनता है किसान है आपने पिस्तौल किसी की
पिस्तौल से गोली तो चली होगी तो आपके पास
जो प्रारंभिक रिपोर्ट है यह गोली ऐसा तो

नहीं किसानों के मेंही से किसी से चल गई
हो या आपको य लगता है कि यह एक टारगेटेड
अटैक
था गोली जो चलाई गई वह हरियाणा की तरफ से
आई और मतलब जानबूझ के जिसे कहते हैं कि एक
सोची समझी साजिश के तहत गोली चला केर उ

नको
वहां से खद करने की कोशिश थी आपके पास
खनौरी बॉर्डर से किस तरह की खबरें आ रही
है जो आप किसानों से बात कर रहे मौके प जो
लोगों ने बताया हमें वो यही बात बताई कि
हम लोग जो है वहां पर प्रोटेस्ट कर रहे थे
अचानक उधर से जो जब आंसू गैस के गोले और
अन्य चीजें होती है तो ये लोग भगर मस्ती

है ये लोग पीछे को हटते पीछे को भागते हैं
तो इनकी पीठ उन पुलिस वालों की तरफ है उस
वक्त अचानक एक लड़का नीचे गिर जाता है तो
लोगों को लगता है कि ये क्यों गिरा शायद
वैसे ही गिर गया फिर देखते हैं कि जो है
उसके खून निकल रहा है और बिल्कुल ही वो

क्योंकि वो ऑन द स्पॉट उसकी डेथ हो गई सिर
में गोली लगने के बाद उसके बचने का कोई
तरीका नहीं था ऑन द स्पॉट उसकी डेथ हो गई

उसको कंधे पर लाद करके लोग भागे हैं और
उसको अस्पताल लाए और पीछे उसके फोटो भी
वायरल है कि किस तरीके से पीछे की साइड
यहां पर सिर पर उसके गोली का निशान है यह

भी मुझे आशंका है कि वह पुलिस नॉन पुलिस
बोर से भी गोली य इन्होंने मार दी हो वहां
से कि भाई कल को यह ना आए कि पुलिस की तरफ
से गोली चली है तो हम लोग नॉन पुलिस सब
तरह के हथियार पुलिस के पास होते हैं जी

आपको लगता है कि अगर देर सवेर इसमें
हरियाणा पुलिस ने जो जिस पुलिस अधिकारी के
कहने पर गोली चलाई गई उसको आइडेंटिफिकेशन
शक्ती सीबीआई की सुप्रीम कोर्ट मॉनिटर कर
सकता है
जुडिशियस क्या यह मसला बढ़ेगा और सरकार को
तत्काल अभी अगर सरकार समझदारी इसी में कि
अभी उस अधिकारी को आइडेंटिफिकेशन

इस मांग पर बिल्कुल कोई कंप्रोमाइज नहीं
होगा क्योंकि अगर कारवाई आज नहीं की गई तो
वह कल दूसरी बार जो है गोली चलाने की
हिम्मत दिखाएंगे इसके इसके लिए जो है
भगवंत मान सरकार आम आदमी की सरकार को भी

कटघरे में खड़ा किया जा रहा है कि आप पैसे
की बात मत करो पैसे तो हम भी इनको दे सकते
हैं लेकिन आगे हमारे और जो अन्य नौजवान है
अन्य लोग हैं उनके ऊपर भी कारवाई नहीं
होगी इसकी गारंटी कौन लेगा और वैसे भी अभी

तक भी इलीगल तरीके से जो है बॉर्डर के इधर
यानी कि पंजाब हरियाणा सरकार पंजाब बॉर्डर
के अंदर जो है सेलिंग कैसे कर सकती है

पैलेट गंस चलाए जा रहे हैं और शांतिपूर्ण
बैठे हुए किसानों के ऊपर ये कारवाई हो रही
है इसके विषय में भी बड़ा प्रेशर किसान
नेताओं ने मान सरकार के ऊपर बनाया हुआ है
कि कारवाई करें तो कारवाई तो इनको अंत में

करनी पड़ेगी जी चलिए चौधरी साहब आखरी चीज
बता दी आप क्या चाहते हैं आप चाहते हैं कि
26 फरवरी से फिर आप पूछ करेंगे आप चाहते
हैं कि सरकार आपको लिखित ऑर्डर दे कि भाई
हम एमएसपी के एजेंडे पर बात करने को तैयार
है यह हमारी गारंटी यह हमारा ड्राफ्ट है

आइए बैठ के बात करते हैं अगर एमएसपी पर
सरकार आगे आ जाए ड्राफ्ट के साथ तोय
आंदोलन खत्म हो जाएगा तीन चार दिन के अंदर
नहीं नहीं एमएसपी पर बातचीत हो और कानून
का मसौदा आए कि यह बना दिया है हमने और

इसको अब हम स्पेशल सेशन बुलाकर या
अध्यादेश के माध्यम से जो भी टेक्निक टीज
है हम हम इसको कानून की शक्ल दे रहे हैं
हमने दे दिया है हमने मुकदमे वापस ले लिए
हैं हमने टेनी के खिलाफ एक्शन कर दिया है

हमने सारे के सारे इंटरनेट खोल दिए हैं
आपके
मतलब आप चाहते हैं चौधरी साहब आप ये चाहते
हैं कि अब इस बार सीधे-सीधे डिसीजन हो नो
कमेटी इस बार बिल्कुल बिल्कुल इस बार

डिसीजन हो और उसका इंप्लीमेंटेशन हो केवल
हवाहवाई बातों करने से अब जो है झांसे में
आने वाला किसान इस बार इनके
नहीं चलिए चौधरी साहब आपने जो बात कही

किसानों के बिहाव में नेताओं के बिहाव में
अब एक चीज आपने कही कि बिना इंप्लीमेंटेशन
के हमको को इस बार आदेश चाहिए हमें कमेटी
नहीं चाहिए उधर मैं देख रहा हूं कि 12 या

13 मार्च तक इलेक्शन अनाउंस हो जाएंगे इस
तरह की भी खबरें आ रही है बहुत कम दिन बचे

हैं दो हफ्ते का समय है 15 दिन 20 दिन है
ऐसे में मोदी जी क्या फैसला लेते हैं
क्योंकि आप ये भी कह रहे हैं कि चाहे वो
कर्नाटक से भी किसान निकल चुका है पश्चिमी
उत्तर प्रदेश से निकल रहा है हरियाणा से

निकलना चाहते हैं गांव गांव में बैरिकेड
लगा दिए गए हैं किसानों के ट्रैक्टर हर
जगह रोके जा रहे हैं मुझे लगता है की देश
हित में बेटर यही है कि बातचीत करके इस

मसले को खत्म करना जाए वरना चुनाव मुहाने
पर है और यह जो गुबार है या जो उबाल है
किसानों
का कुछ भी हो सकता है और आने वाले दिन
मुझे लगता है कि काफी चुनौती पूर्ण होंगे
किसान नेताओं के लिए भी और मोदी जी के लिए

आप आए आपने वि बाकी से सारी बातें रखी
बहुत-बहुत शुक्रिया अपने दोस्तों की तरफ
से थैंक यू सो मच चौधरी
धन्यवाद

Leave a Comment