Nitish Kumar को बड़ा झटका लगेगा, Tejashwi Yadav की दोगुनी होगी ताकत ! BJP का गेम फंस गया

नमस्कार आप देख रहे हैं न्यूज फशन और मैं
हूं प्रियदर्शन बिहार में बिहार विधान
परिषद की 11 सीटों के लिए 21 मार्च को
चुनाव होना है आज ही निर्वाचन आयोग ने
इसकी घोषणा की और इसके साथ ही बिहार में

कई राजनीतिज्ञों के सियासी किस्मत का
फैसला भी 21 मार्च को तय होगा यह आज तय हो
गया लेकिन इस चुनाव में बिहार के
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बड़ा झटका
लगने वाला है जी हां नीतीश कुमार की
पार्टी जदयू को इस चुनाव में बड़ा झटका

लगना तय है और उनके सबसे बड़े सियासी
प्रतिद्वंदी राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी
यादव के लिए यह चुनाव बल्ले-बल्ले वाली
स्थिति में होने जा रही है क्योंकि
तेजस्वी यादव के लिए यह चुनाव एक तरीके से
उनकी ताकत को दोगुना करने वाला है तो वहीं

दूसरी ओर अगर हम नीतीश कुमार के सहयोगी
भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो भारतीय
जनता पार्टी जहां थी वहीं रह जाएगी वहीं
जो राष्ट्रीय जनता दल के गठबंधन सहयोगी
हैं यानी कि कांग्रेस तो कांग्रेस के लिए
इस चुनाव में एक तरीके से एक बड़ी चुनौती

यह है कि जो उसकी एक सीट है उस सीट को वह
बचा ले लेकिन इसी में एक बड़ी परेशानी यह
भी है कि इस चुनाव में भले ही राष्ट्रीय
जनता दल के साथ महागठबंधन में वाम दल
मौजूद हो लेकिन वाम दल एक बार राजत का खेल
बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं तो ये पूरा
का पूरा कैसे होगा कैसे राष्ट्रीय जनता दल
के लिए यह चुनाव बल्ले बल्ले वाली स्थिति
में है तो नीतीश कुमार के लिए झटका लगने

वाले स्थिति में है अगर आप इसको बिहार के
सियासी समीकरणों से समझिए तो बिहार में
बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटें हैं अब
इसे ऐसा समझिए कि बिहार में जो विधान

परिषद का चुनाव होता है उसके लिए विधायकों
के द्वारा वोट किया जाता है और एक विधान
परिषद की सीट के लिए 21 विधायकों के
समर्थन की जरूरत होती है यानी कि अगर किसी
दल को अपने एक व्यक्ति को विधान परिषद

भेजना है तो उसके लिए उसे 21 विधायकों के
समर्थन की जरूरत होगी तो मौजूदा समय में
अगर हम बिहार में विधान परि सभा के
सदस्यों की स्थिति को देखें तो जिन 243
सदस्यों वाले विधानसभा में दलों की स्थिति
है उसमें भारतीय जनता पार्टी के पास

सर्वाधिक 78 विधायक हैं दूसरे नंबर पर
राष्ट्रीय जनता दल है जो कि 76 विधायक हैं
हालांकि राजत के पास पहले 79 विधायक थे

लेकिन 12 जनवरी को जब नीतीश कुमार ने
बिहार में अपना विश्वास मत्र पेश किया था
उस दौरान राजद के तीन विधायक वहां से
टूटकर एनडीए के खेमे में आ गए थे तो राजद
की के जो ताकत है वह कम करके 76 हो गई थी
इसके अतिरिक्त तीसरे नंबर पर जनता दल
यूनाइटेड है जिसके पास 45 विधायक हैं चौथे

नंबर पर कांग्रेस है जिसके 19 विधायक हैं
जबकि वाम दलों के अगर हम संयुक्त वोटों को
को गिने तो उनके कुल 16 विधायक हैं इसके

अतिरिक्त हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के चार
विधायक हैं एक निर्दलीय विधायक है एक
विधायक
एआईएमआईएम के हैं और जैसा मैंने आपको
बताया कि राजत से टूट कर के तीन विधायक भी
आए हैं जो एनडीए खेमे में है तो अब आइए कि

बिहार में किन-किन लोगों की सीटें खाली हो
रही हैं जिनके लिए चुनाव होना है तो इसमें
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी
शामिल है इतना ही नहीं राजद नेता और बिहार
विधान परिषद में विपक्ष के नेता राबरी

देवी भी शामिल हैं और यही नहीं भारतीय
जनता पार्टी के भी कई बड़े चेहरे यानी कि
मंगल पांडे से लेकर शहनवाज हुसैन तक की
सीटें खाली हो रही हैं तो जदयू के पास
मौजूदा समय में चार सीटें हैं जो रिक्त हो

रही हैं इसमें नीतीश कुमार खालिद अनम
रामेश्वर महत और संजय झा के नाम शामिल हैं
वहीं राजत की दो सीटें खाली हो रही हैं
जिसमें राबरी देवी और रामचंद्र पूर्वे की
सीट है जबकि भारतीय जनता पार्टी के मंगल

पांडे शहनवाज हुसैन और संजय पासवान का
कार्यकाल मई 2024 में पूरा हो रहा है
कांग्रेस के प्रेमचंद्र मिश्रा और
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संतोष सुमन की
सीटें भी रिक्त होंगी क्योंकि उनका भी
कार्यकाल मई के महीने में पूरा हो रहा है

ऐसे में अगर हम बिहार विधानसभा में दलीय
स्थिति पर नजर डालें तो इस बार के चुनाव
में कई बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं
जैसा मैंने आपको पहले ही बताया कि इस

चुनाव में सबसे बड़ा झटका जदयू को लगना तय
माना जा रहा है जबकि राजद और भाजपा के लिए
एक तरीके से कह सकते हैं कि बल्ले-बल्ले
वाली स्थिति रहेगी और कांग्रेस के साम ने
चुनौती इकलौती सीट बचाने की है तो

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संतोष सुमन की
किस्मत एनडीए के घटक दलों के द्वारा तय की
जाएगी अब अगर आइए हम बिहार में विधानसभा

के सीटों की स्थिति पर बात करें तो जैसा
मैंने आपको बताया कि बिहार में 21
विधानसभा के सदस्यों के वोट से एक विधान
परिषद चुने जाते हैं तो अगर हम दलीय
स्थिति की बात करें तो दलीय स्थिति यह है
कि जो सत्ता पक्ष है यानी कि एनडीए का
खेमा है तो एनडीए के खेमे को छह विधान
परिषद की सीटें मिलनी तय मानी जा रही है

लेकिन यहां उलटफेर यह हो रहा है कि इस
उलटफेर में नीतीश कुमार की पार्टी की दो
सीटें कम रही हैं जबकि दूसरी ओर जो
महागठबंधन है यानी कि राजत कांग्रेस वाम
दलों वाला गठबंधन उसके खेमे में पांच
सीटें जा रही हैं लेकिन राजद की ताकत
दोगुनी हो रही है यानी कि मौजूदा समय में

जो राजद के दो एमएलसी हैं उसकी ताकत बढ़
के चार भी हो सकती है इसे ऐसे समझिए पहले
हम आ जाएं जरा जनता दल यूनाइटेड के ऊपर तो
जनता दल यूनाइटेड के लिए जैसा मैंने आपको

बताया कि नीतीश कुमार का कार्यकाल पूरा हो
रहा है तो नीतीश कुमार का निर्वाचन होना
करीब-करीब तय है नीतीश कुमार के लिए बिहार
के विधान मुख्यमंत्री हैं जदयू के
राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तो विधान परिषद में

लंबे अरसे से नीतीश कुमार वहां हैं और इस
बार भी नीतीश कुमार की जो सीट रिक्त हो
रही है उस पर नीतीश कुमार का निर्वाचन तो
जदयू की ओर से तय है क्यूंकि जदयू के पास

45 विधायक हैं 21 वोट चले जाएंगे नीतीश
कुमार के लिए शेष 21 वोटों से वह एक और
सीट आसानी से जीत जाएंगे तो अब दूसरा
उम्मीदवार कौन होगा तो अगर हम बात करें
संजय झा की तो जदयू के एक संजय झा का
कार्यकाल पूरा हो रहा है लेकिन संजय झा
पहले ही राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो रहे

हैं तो संजय झा का पत्ता पहले ही यहां से
गायब हो चुका है अब बचे जदयू के दो और
उम्मीद जो कि अभी मौजूदा समय में एमएलसी
हैं एक है खालिद अनवर और एक मैंने आपको

जैसा बताया कि तो इन तमाम चीजों की स्थिति
में जदयू अब अपने दूसरे उम्मीदवार के तौर
पर किसे लाएगी यह एक बेहद अहम बात होगी
क्योंकि जनता दल यूनाइटेड की ओर से नीतीश
कुमार का जाना तय है दूसरा उम्मीदवार कौन
होगा उसकी किस्मत का फैसला नीतीश कुमार
करेंगे पार्टी करेंगे लेकिन इस पूरा पूरे
के पूरे उलटफेर में नीतीश कुमार की पार्टी
जो मौजूदा समय में चार उनकी रिक्तियां

होंगी उनकी ताकत घटकर दो रह जाएगी क्योंकि
2121 के गणित के हिसाब से 42 विधायकों के
अपने समर्थन से जदयू के केवल दो ही लोग
एमएल स बन सकते हैं यानी कि जदयू को दो

सीटों का झटका लगना तय है अब जरा आ जाते
हैं भारतीय जनता पार्टी के पास तो जैसा
मैंने आपको बताया कि भाजपा की ओर से मंगल
पांडे शहनवाज हुसैन और संजय पासवान इन
तीनों का कार्यकाल पूरा हो रहा है न तीनों
के लिए भाजपा के पास फिलहाल 78 विधायक हैं
तो 78 विधायकों की स्थिति में भाजपा को
तीन एमएलसी पद को रिटेन करने के लिए 63
विधायकों की जो समर्थन की जरूरत है तो 78

चकि विधायक है तो यानी से 2121 के गणित के
हिसाब से 63 विधायकों के हिसाब से भारतीय
जनता पार्टी के तीनों एमएलसी फिर से आ

सकते हैं लेकिन पेच यह है कि लोकसभा का
चुनाव भी होना है कहा जा रहा है कि लोकसभा
चुनाव को लेकर के भारतीय जनता पार्टी बड़ी
तैयारियों में लगी है अपने कई प्रमुख
चेहरों को इस बार के लोकसभा चुनाव में
उतार सकती है और कई लोग लोकसभा चुनाव
लड़ना भी चाहते हैं जिसमें शहनवाज हुसैन

का नाम भी प्रमुखता से लिया जा सकता है
यानी कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से कौन
तीन लोग एमएलसी बनेंगे इस पर कोई क्लेरिटी
नहीं है एनडीए का जैसे मैंने आपको बताया
कि छह सीटें वह जीत सकते हैं तो छठी सीत

इसलिए क्योंकि जो हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा
के संतोष सुमन हैं उनका कार्यकाल पूरा हो
रहा है हालांकि जो हिंदुस्तानी वाम मोर्चा
है उनके पास तो केवल चार ही विधायक हैं
लेकिन अगर हम गणित देखें तो हिंदुस्तानी
वाम मोर्चा के चार विधायक और भाजपा के तीन
एमएलसी बनने के बाद भी उनके पास 15 वोट
बचेंगे जबकि इसके अतिरिक्त जदयू के पास भी
वोट रहेंगे तो इन सबको जोड़ कर के एक
हिंदुस्तानी यवा मोर्चा के उम्मीदवार

संतोष सुमन आसानी से फिर से एमएलसी बन
सकते हैं और इसके अतिरिक्त अगर हम बात
करें तो राजद की तो राष्ट्रीय जनता दल के
लिए इस बार एक बड़ी स्थिति सुखद इसलिए है

क्योंकि राबरी देवी तो पुनः एमएलसी बन ही
जाएंगी क्योंकि राजत के वोटों की संख्या
फिलहाल 76 है तीन सीट जीतने के लिए उनको
जो 21 21 21 का फार्मूला है उसके हिसाब से
63 वोट चाहिए तो रामचंद्र पूर्वे को भी
अगर उम्मीदवार बनाया जाता है तो वह भी

आसानी से जीत जाएंगे राबरी जेवी भी जीत
जाएंगी और तीसरे उम्मीदवार को लेकर के
राष्ट्रीय जनता दल को तय करना है कि हमारा

भी जो राजद है उसके पास वोट बचेंगे और वो
वोट साथ ही साथ जो कांग्रेस के प्रेमचंद्र
मिश्रा हैं जिनका कार्यकाल पूरा हो रहा है
तो कांग्रेस के पहले से ही 19 विधायक हैं

अगर दो विधायकों का उन्हें समर्थन मिल गया
तो आसानी से कांग्रेस के एक उम्मीदवार जा
सकते हैं संभव है कि इस बार भी प्रेमचंद्र
मिश्रा ही चले जाए
तो इस स्थिति के बाद भी वामपंथी दलों के

16 विधायकों का वोट बचेगा तो इन्हीं
वामपंथी दलों के 16 वोट प्लस राजद के शेष
बचे हुए वोट इन सबको जोड़ कर के राष्ट्रीय
जनता दल इस बार चाहेगी कि हमारा चौथा
उम्मीदवार भी एमएलसी बने यानी कि

राष्ट्रीय जनता दल इस बार अपनी ताकत
दोगुनी कर सकता है जो राबरी देवी और
रामचंद्र पूर्वे के रूप में दो सीटें उके
रिक्त हो रही हैं उनकी जगह राजद के चार

एमएलसी निर्वाचित हो सकते हैं और यह सब जो
सं विधायकों का अंक गणित है उसके हिसाब से
हो रहा है तो यह एक तरीके की ऐसी स्थिति
होगी जिसमें इ हाल फिलहाल ही जो बिहार में

बड़ा सत्ता परिवर्तन का खेल दिखा और उसमें
नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की ओर से
खेला करने खेला होने के तमाम उलटफेर वाले
चीजें देखने को मिली उन सबके बाद अब
एमएलसी के चुनाव में एक बड़ा खेला यह हो

जाएगा कि नीतीश कुमार की ताकत आधी रह
जाएगी यानी कि चार के बदले उन के दो ही
विधायक एमएलसी हो जाएंगे और राजद के दो के
बदले चार एमएलसी हो जाएंगे जबकि इसके
अतिरिक्त कांग्रेस के एक की स्थिति में एक
ही रहेंगे और हिंदुस्तानी अवा मोर्चा के

भी एक के एक भाजपा के एक के एक एमएलसी
रहेंगे तो यह पूरा का पूरा गणित है जिस पर
अब 21 मार्च के चुनाव के बाद तय होगा कि
कौन किस स्थिति में आता है कौन जाएगा कौन

नहीं जाएगा लेकिन जो दो लोग एमएलसी बनने
उसमें नीतीश कुमार और राबरी देवी का नाम
तो पूरी तर
k

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