Rahul gandhi – Tejashvi Yadav की ये लाल गाड़ी, Bihar में Modi के पसीने छुड़ाएगी ?

तेजस्वी की ये लाल रंग की गाड़ी राहुल के
साथ मिलकर निकली बिहार में भारत जोड़ो
न्याय यात्रा के दौरान 14 किलोमीटर के रोड

शो पर और इस दौरान तेजस्वी और राहुल की जो
जोड़ी काफी मजबूत दिखाई दी वहीं तेजस्वी
यादव नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए नजर

लेकिन आप लोग तो सब लोग अच्छे से जानते
हैं हमारे मुख्यमंत्री जी कैसे
हैं किसी का सुनना नहीं चाहते थके हुए
मुख्यमंत्री
को थके ही हुए हैं
ना तो ये तस्वीरें दरअसल बिहार के सासाराम
की है जहां पर तेजस्वी ने गाड़ी चलाई पीछे
आपको पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार भी

बैठी हुई नजर आ रही हैं और तेजस्वी की बगल
वाली सीट पर राहुल गांधी है तो एकदम दिखाई
दे रहा है कि यह अलायंस जो तेजस्वी और
राहुल के बीच में है क्योंकि ये दोनों ही

पार्टियां ऐसी है आरजेडी और कांग्रेस जो
जो नरेंद्र मोदी के ईडी रेड समन और हर तरह
के प्रेशर एजेंसी प्रेशर जिसको कहते हैं
उन सबके सामने झुकती हुई नजर नहीं आ रही
है और लगातार जैसे नीतीश कुमार के साथ भी
जब सरकार से बाहर हो गए हैं तेजस्वी यादव
तो वह कह रहे हैं कि बिहार में हम नरेंद्र
मोदी को रोक कर दिखाएंगे भले ही नीतीश जी
आप अपने वादे से और अपने लक्ष्य से भटक गए
हो देश में संप्रदायिक शक्तियों को रोकना
है जो लोग देश में बोने का काम करते हैं
तो इस बार किसी भी कीमत पर चाहे हमको

कितना भी सहना पड़े कितना भी कुर्बानी
देना पड़े लेकिन नितीश जी को हम लोग लेकर

के चलेंगे और 2024 में बीजेपी को मोदी जी
को सत्ता से बेदखल करने का काम करेंगे वही
पत्रकारों से प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान
बात करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय
प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक बहुत बड़ी बात
कही
और बिल्कुल बेबाक तरीके से कहा है सवाल
पूछा है जब पत्रकार की तरफ से एक सवाल यह
आया कि जी वह जो किसान है उनमें से जिससे
वह बात की गई वह तो बोल रहे थे कि जी हमको
यह सरकार को गिराना है तो उस पर पवन खेड़ा

ने बहुत वाजिब सवाल पूछा कि अगर कोई किसान
अपने मन की बात करना चाहता है नरेंद्र

मोदी के ग्राफ को गिराना चाहता है नरेंद्र
मोदी की सरकार को हटाना चाहता है तो वह
फिर एंटी नेशनल हो गया आपके हिसाब से मतलब
कोई इस में कोई ऐसा शख्स आपको मिलना नहीं
चाहिए जो कि नरेंद्र मोदी के लिए वोट ना
करना चाहता सर एक सवाल
है फम र मोद का ग्राफ नीचे लाना है इसलिए
अब क्या वो फार्मर अपना मंशा राजनीतिक

क्लीनिंग नहीं बता सकता क्या वह नहीं बोल
सकता कि मैं मैं इस देश में अलग तरह की
राजनीति चाहता हूं किसान बोल दे कि मुझे
मोदी को हराना है तो वो देशद्रोही हो गया

कमाल है साहब 2014 में तो आप में से कई
लोग बोलते थे कि हमें कांग्रेस को हराना
है तो हमने तो आपको देशद्रोही नहीं कहा था

क्या वो वोटर नहीं है क्या मोदी जी को वोट
दे तो वह हिंदुस्तानी है देशप्रेमी है
देशभक्त है मोदी जी के खिलाफ बोले तो वो
देशद्रोही है यह किस तरह की व्यवस्था ला
रहे हैं साहब और उसके बाद उन्होंने सीधे
ये बोला और बिल्कुल वाजिब सवाल उठाया कि

आखिर ये जो ग्राफ आपके चैनलों पर दिखाई
देता है नरेंद्र मोदी का हर समय बढ़ते हुए
ये कैसे दिखाई देता है वो कौन है शख्स जो
कि आप लोगों को मैसेजेस करते हैं और आप
लोगों से पूरे हेडलाइन मैनेजमेंट करवाते

हैं यह ग्राफ कैसे ऊपर रखा जाता है अब आप
सुन लीजिए क्योंकि उसमें आप सब भी भागीदार
हैं आपके जो मालिक है वह भी भागीदार हैं
कैसे उन पर दबाव होता है उन पर किस तरह की

व्यवस्था होती है आपस में किस तरह की
लेनदेन होती है कि व ग्राफ ऊपर रखा जाए
कौन है हिरेन जोशी मैं फिर पूछता
हूं क्यों आप लोगों को एसएमएस भेजते हैं व
क्यों ट मैसेज आते हैं आपके एडिटर्स के
पास हिर जोशी के यह ग्राफ ऊपर ऐसे रखा

जाता है मतलब सही कहा पवन खेड़ा ने उस
जमाने की बात आप कर लीजिए जब 2014 से पहले
डॉक्टर मनमोहन सिंह की यूपीए टू की सरकार

नरेंद्र मोदी के प्रवक्ता बने घूम रहे हैं
एंकर्स एडिटर्स यही लोग सवाल करते थे उस
वक्त प्रधानमंत्री से पीपल से आई वाज अ
साइलेंट प्राइम मिनिस्टर आई थिंक दिस दिस
वॉल्यूम स्पीक फॉर देम सेल्व एंड आई डोंट
वांट टू बोस्ट अबाउट

माय गोल्स आर माय अचीवमेंट एज द प्राइम
मिनिस्टर बट द इवेंट्स दैट टूक प्लेस आर
वेल डिस्क्राइब्ड इन दिस दस वॉल्यूम
पर्टिकुलर द वॉल्यूम व्हिच डील्स विद द

प्राइम मिनिस्टर स्पीक्स आई सर्टेनली वुड
लाइक टू से दैट आई वाज नॉट द प्राइम
मिनिस्टर हु वाज अफ्रेड ऑफ टॉकिंग टू द
प्रेस
आई
[प्रशंसा]
आई मेट द प्रेस रेगुलरली एंड ऑन एवरी

फॉरेन ट्रिप दैट आई अंडरटुक आई हैड ए
प्रेस कॉन्फ्रेंस ऑन रिटर्न इन द प्लेन और
आफ्टर इमीडिएट आफ्टर लैंडिंग सो देर लार्ज
नंबर ऑफ दोज प्रेस कॉन्फ्रेंसेस हुज
रिजल्ट्स आर आल्सो डिस्क्राइब एंड

आई रिमेंबर वेरी विविडली इन 2005 न आई
वेंट टू वाशिंगटन नेशनल प्रेस
क्लब इनवाइटेड मी टू एड्रेस अवर ऑफिशल्स र
नर्वस ट आई ड नॉट बी एबल टू मैनेज नेशनल
प्रेस क्लब बट ट वास
वेरी सक्सेसफुल कॉन्फ्रेंस एंड दैट
कान्फ्रेंस ट् व बेटम रिकॉर्ड इ पब्लिश इन
ल दैट विल गिव यू एन आइडिया ऑफ व्हाट आई
वाज एबल टू अचीव इन डीलिंग विद लेडीज एंड
जेंटलमैन तब इन्हें पता होता था कि

प्रधानमंत्री से सवाल किए जाने चाहिए और
सवाल की क्या परिभाषा है वह सब ये लोग भली
भाती इससे वाकिफ थे और आज इनको देख लीजिए
इनको तो किसी ने एंटी नेशनल नहीं कहा इनको
तो किसी ने नहीं कहा कि भैया आप जो है

भाजपाई हैं जो कि आप इस तरह के सवाल पूछ
रहे हैं उस समय पर भी और जाहिर सी बात है
कोई किसान अगर इस बात से परेशान है किज
हमारी बात नहीं मानी जा रही है हमें
दिलासा दे दिया जाता है उसके बाद भी कुछ
नहीं होता हम परेशान हो गए हैं जी इस
सरकार से हम इसको गिराना चाहते हैं हम
नहीं चाहते यह सरकार दोबारा आए तो यह सोच

रखना गलत कहां से हो गया यह तो सोच यह तो
यही तो आम आदमी करता है ना चुनावों का
मतलब क्या होता है 5 साल का या फिर अपने
से किए हुए वादों का या फिर उनके
मेनिफेस्टो के जवाब मांगे जाएं और जब आप
अपने प्रॉमिस पर अपने वादों पर खरे नहीं

उतरते तो जनता के पास पूरा हक होता है यह
कहने का भी और यह करने ने कहा भी कि आपको
वो सरकार से गद्दी से हटा दे पर जब मीडिया
बन चुका हो गोदी मीडिया तो फिर आखिर क्या

किया जाएगा और इसीलिए राहुल गांधी एक लंबा
ट्वीट करके लिखते हैं मोदी उनका प्रचार
तंत्र और मित्र मीडिया गरीबों और किसानों
के दुश्मन हैं जब बात भारत बनाने वालों के
हित की आती है तो सरकारी एक्सपर्ट्स को

बजट की चिंता सताने लगती है पर बात बजट की
नहीं नियत की है उद्योगपति मित्रों के
लाखों करोड़ों के ऋण और टैक्स माफ पर चुप
उन्हें जल जंगल और जमीन भेंट किए जाने पर
चुप पीएसयू को औने पौने दाम पर बेचे जाने
पर चुप पर किसानों को एमएसपी की गारंटी
गृह लक्ष्मि हों को सम्मान और अग्निवीर को
पेंशन देने की बात पर सवाल ही सवाल इतिहास

गवाह है कि कांग्रेस बड़े और क्रांतिकारी
कदम लेने से कभी डरी नहीं है हरित क्रांति
हो बैंक राष्ट्रीयकरण हो पब्लिक सेक्टर्स
का निर्माण हो या फिर आर्थिक उदारीकरण
हमारे फैसलों ने हमेशा देश के भविष्य की

नीव रखी है आज हर किसान को एमएसपी दिलाना
वक्त की मांग है और कांग्रेस का यह फैसला
भी मील का पत्थर साबित होगा यह ग्रामीण
अर्थव्यवस्था समेत देश के करोड़ों किसान
परिवारों का जीवन बदल कर रख देगा हम फैसले

राजनीति के लिए नहीं देश के लिए करते हैं
तो किसान आंदोलन के बीच में जहां नरेंद्र
मोदी की सरकार इस वक्त कोई भी ब्रेक थ्रू
पाने में विफल नजर आ रही है वहां कांग्रेस
को एक मौका मिला है कि किसानों की एमएसपी
की इस लीगल गारंटी की बात को वह आगे लेकर
अपने 2024 के लोकसभा चुनाव में उतरे क्या

होगा इसका परिणाम क्या लगता है आपको क्या
है आपकी राय जरूर लिखें कमेंट बॉक्स में

जयते

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