Ranneeti: Vladimir Putin की परमाणु धमकी, Nato का पलटवार | Parmanu War | America | Ukraine War

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के
प्रमाण युद्ध की धमकी का असर अमेरिका और
यूरोप पर दिखने लगा है यूरोप ने अपने
हथियारों के प्रोडक्शन को बढ़ाने का ऐलान
कर दिया है नमस्कार मैं हूं मधुरेंद्र

कुमार और आप देख रहे हैं मेरे साथ रणनीति
और आज के इस एपिसोड में आपको हम ये समझाने
वाले हैं यह बतला वाले हैं कि किस तरह से
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने परमाणु

युद्ध की धमकी दी उसके बाद अमेरिका और
यूरोप सखते में है और जाहिर है कि पुतिन
के इस बयान को हल्के में लेना कोई नहीं

चाहता अमेरिका ने भले ही इसको डाउन प्ले
करने की कोशिश की और इस बयान को गैर
जिम्मेदाराना बताया लेकिन यूरोप में जिस

तरह की खलबली मची है यूरोप जिस तरह से
अपने हथियारों के प्रोडक्शन को बढ़ाने जा
रहा है और जिस तरह से पुतिन के इस धमकी
भरे लहजे को सीधे तौर पर आगामी युद्ध के

परिपेक्ष में देख रहा है उससे साफ है कि
रूस और यूक्रेन का युद्ध भड़कते हुए अपनी
आगोश में पूरी दुनिया को ले ले तो इसमें
आश्चर्य नहीं होना चाहिए प्रमाण युद्ध की

जिस धमकी को दरअसल रूस के राष्ट्रपति ने
ओपन फोरम में दिया वो अपने आप में बतला के
लिए काफी है कि ये धमकी सिर्फ और सिर्फ जो
है अमेरिका और यूरोप की सीमाओं तक सीमित
नहीं रहने वाली जाहिर है इसके दुष्परिणाम

दुनिया को झेलने होंगे यह दरअसल धमकी
क्यों दी गई इसके कारण क्या है इसके
परिपेक्ष क्या हैं यह भी समझना बेहद जरूरी
है तो आप यूं समझिए यह कि जिस तरह से
यूक्रेन जो है इस वक्त रूस के साथ युद्ध
में तीसरे साल में प्रवेश कर चुका है जी

हां वही यूक्रेन जिसको लगता था कि रूस चंद
महीनों के ही लड़ाई में मसल देगा 2 साल से
युद्ध जारी है पिछले 20224 से लेकर अगर आप
देखें तो जाहिर तौर पर अगर आप 2022 की तरफ
जाएं तो फरवरी से लेकर और अब तक 2 साल बीत

चुके हैं तीसरे साल में 2024 में युद्ध चल
रहा है और अभी भी यूक्रेन पर जिस बढ़त और
जिस जीत की उम्मीद पुतिन को थी व हासिल
नहीं हो पाया है लेकिन फिलहाल युद्ध में
ऐसी स्थिति दिखाई दे रही है कि यूक्रेन के
पास भी हथियारों की कमी है उसी हथियारों
की कमी को पूरा करने के लिए इस वक्त

जेलेंस्की जो है वो नेट देशों के संपर्क
में है यूरोपीय देशों के संपर्क में हैं
और उसी क्रम में उनको दरअसल जिस तरह का
भरोसा फ्रांस की तरफ से दिया गया मैक्रो
की तरफ से दिया गया अपनी सेना को उतारने

का ऐलान किया गया उससे भड़क उठे पुतिन और
इतने भड़क उठे कि उन्होंने परमाणु हमले की
धमकी दे दी परमाणु युद्ध की धमकी दे दी और
दरअसल इस धमकी के साथ-साथ उन्होंने अपने
हथियारों की फेहरिस्त भी गिना दी कि किस

तरह के हथियारों का प्रयोग रूस करेगा ऐसे
हथियार जो न्यूक्लियर वेपंस को ले जाने
में सक्षम हैं ऐसे हथियार जो कि
इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के तौर

पर जाने जाते हैं बात हम सरमत की कर रहे
हैं जो कि रूस के सबसे हम कहें कि
अत्याधुनिक सबसे खतरनाक सबसे भयावह
हथियारों में से एक है ऐसा आईजीएम जो कि
अपने साथ अपने वॉर हेड में जो है

न्यूक्लियर वेपंस को लेकर जाने में सक्षम
है और इसी धमकी के बाद दुनिया इस वक्त
सखते में है इसी धमकी के बाद अमेरिका इसको
डाउन प्ले कर रहा है मैथ्यू मिलर ने जो
बयान अमेरिका की तरफ से दिया वह साफ तौर

पर कहा कि रूस का य बयान और खास तौर पे
व्लादिमीर पुतिन का यह बयान बेहद गैर
जिम्मेदाराना है इस तरह के बयान जो है
अपने आप में युद्ध की आग में चिंगारी को
और ज्यादा भड़काने वाला है और जाहिर तौर

पर उसका असर इस वक्त टो में भी देखा जा
रहा है बात हम नेटो की करें तो ये समझना
बेहद जरूरी है कि टो 1949 में बना एक ऐसा
ऑर्गेनाइजेशन है जिसमें अमेरिका और यूरोप
के देश शामिल हैं उसका विस्तार भी किया जा

रहा है और उसके विस्तार से भी दरअसल रूस
बेहद खपा है क्योंकि इसी विस्तार के क्रम
में ये युद्ध शुरू हुआ क्योंकि नेटो में
ही दरअसल जिस तरह से यूक्रेन शामिल होने
जा रहा था उसके बाद जो है रूस ने उस पर

हमला किया और युद्ध इस वक्त जारी है तो
उसी नेटो की आड़ में इस वक्त देखें तो यह
युद्ध जो कि पिछले 2 साल से जारी है तीसरे
साल में प्रवेश कर चुका है वो परमाणु
युद्ध की शक्लो सूरत लेगा इस तरह की बात
अब खुद पुतिन करते नजर आ रहे हैं तो इसके

दो मायने साफ तौर पर समझे जा सकते हैं एक
मायने तो ये हैं कि दरअसल अगर नेटो इस
युद्ध में प्रवेश करता है यानी यूक्रेन के
पक्ष में प्रवेश करता है तो इसका मतलब यह
है कि दरअसल यूक्रेन को और ज्यादा ताकत

मिलेगी यूक्रेन रूस के साथ इस युद्ध को और
लंबा कर पाएगा और ऐसे में पुतिन का जो
दरअसल टारगेट है कि जिस तरह से यूक्रेन इस
वक्त कमजोर है जिस तरह से यूक्रेन में इस
वक्त हथियारों की कमी है यह सही समय है कि

गर्मियों के आते-आते रूस जो है अपने
टारगेट को अचीव करे डोन बास लोहस टनेस का
जो इलाका है दरअसल जिसको रूस अपना इलाका
घोषित कर चुका है उसको पूरी तरह से अपने
अधि सत्य में ले ले और उसके बाद इस युद्ध

की समाप्ति की घोषणा कर ले लेकिन यूक्रेन
को अगर और हथियारों की सप्लाई मिलती है
नेटो का सपोर्ट मिलता है तो पुतिन के लिए
कर पाना तीसरे साल में भी संभव नहीं होगा
2024 की गर्मियों में भी व अपने टारगेट को
अचीव नहीं कर पाएंगे और इसी क्रम में
दरअसल जेलेंस्की को जिस तरह से इनुल

मैक्रोन का सपोर्ट मिला उसके बाद रूस को
ये लगने लगा कि दरअसल उसका टारगेट और
यूक्रेन में अपनी बढ़त को बनाए रखना
मुश्किल हो सकता है और ऐसे वक्त में पुतिन
काया बयान बेहद मायने रखता है इस बयान के

दूसरे परिपथ को भी समझ लीजिए चूंकि मार्च
के इसी महीने में 15 से 17 मार्च के बीच
में रूस में राष्ट्रपति का चुनाव होने
वाला है यह सर्वविदित है कि फिर से पुतिन
ही आएंगे यह सर्वविदित है कि पुतिन के साथ
जो है जिस तरह का वहां सपोर्ट है वो पुतिन
को एक बार फिर से सत्ता को अगले 6 साल के

लिए दे दिया दे देगा वैसे भी जो संवैधानिक
व्यवस्था है उसमें पुतिन बदलाव कर चुके
हैं और इस बदलाव के तहत वो समझिए कि 83

साल तक अपने जीवन के कार्यकाल में
राष्ट्रपति रह सकते हैं यानी उनका
कार्यकाल स्टालिन से ही बड़ा हो सकता है
और जाहिर तौर पर इसके लिए वह अपनी
संवैधानिक व्यवस्थाओं में बदलाव कर चुके
हैं लेकिन इस वक्त अगर यूक्रेन का मुद्दा

भारी पड़ता है तो रूस में पुतिन के लिए जो
फजीत है व और बढ़ सकती है पुतिन नहीं
चाहते कि चुनाव के न मौके पर रूस यूक्रेन
युद्ध के जो छीट हैं वह उनके ऊपर उठे आए
जाहिर है कि ऐसे माहौल में दरअसल मैक्रो
का सपोर्ट जेलेंस्की को मिलता है उनका

सपोर्ट यूक्रेन को मिलता है तो ये पुतिन
को तो नागवार गुजरेगा ही और इसीलिए चुनावी
मौके पर दरअसल 2 घंटे 6 मिनट के अपने
संबोधन में सीधे-सीधे पुतिन ने हमला बोलते
हुए नेटो को आगाह कर दिया नेटो को ये
चेतावनी दे दी कि अगर इस युद्ध में नेटो

का प्रवेश होता है तो ये युद्ध यहीं नहीं
रुकेगा बल्कि ये एक परमाणु युद्ध में बदल
जाएगा अब तस्वीर के दूसरे पहलू को समझिए
क्योंकि नेटो एक ऐसा ऑर्गेनाइजेशन है 1949
में इसको बनाया गया था तब यूएसएसआर हुआ

करता था यूएसएसआर के साथ अमेरिका का जो
कोल्ड वॉर था वो वॉर दरअसल जिस तरह से
जारी था और इस वॉर के बीच जो है नेटो का
जो गठन हुआ उसने दरअसल यूएसएसआर के साम

ने
सबसे बड़ी चुनौती पेश की क्योंकि नेटो का
य संविधान कहता है कि टो के किसी एक देश
पर कोई भी हमला करता है तो टो के समूचे 12

सदस्य देश जो हैं मिलकर प्रतिकार करेंगे
मिलकर पलटवार करेंगे यह ट की ताकत है
हालांकि टो की इस ताकत के उलट आप ये भी
समझ सकते हैं कि 1991 में जब यूएसएसआर का
पूरी तरह से विघटन हो गया और रूस सिर्फ

बचा तब ये हो सकता था कि दरअसल टो का
अस्तित्व जो है वह आगे ना बना रहे लेकिन
इस अस्तित्व को बनाए रखा गया और अब यही
अस्तित्व जो है एक बार फिर से रूस से
टकराता हुआ दिखाई दे रहा है और इसी बात को
लेकर दरअसल परमाणु युद्ध की आशंका इस वक्त
दर्ज की जा रही है इस बीच पोलैंड में

पोलैंड से खबर आ रही है मैं आपको बताऊं कि
पोलैंड में जो तैनाती है दरअसल एयर डिफेंस
सिस्टम की अमेरिका की उसको दरअसल अगले 3
महीने तक और बढ़ा दिया है अमेरिका ने इस
वक्त मेरे पास जो जानकारी निकल कर आ रही
है उस जानकारी के मुताबिक मैं आपको यह

बतला सकता हूं कि यह खबर है दरअसल कि जो
फर्स्ट बटालियन है 62 ईयर डिफेंस आर्टिलरी
रेजीमेंट की अमेरिका की जिसका हेड
क्वार्टर जो है कैनवस टेक्सस में है वो
अगले ती महीने तक पोलैंड में बनी रहेगी तो
इससे आप समझ सकते हैं कि पोलैंड दरअसल

वो
अ देश है जो कि यूक्रेन की सीमा से सीधे
तौर पर लगता है और वह खुला समर्थन जो है
वो यूक्रेन को देता है यही वो बॉर्डर
एरिया है जहां से आप समझिए कि यूक्रेन को
रसत हथियार साजो सामान हर तरह की सप्लाई
मिलती है पोलैंड खुलकर यूक्रेन के साथ जो
है है युद्ध के पहले दिन से खड़ा है और

वाया हम देखें कि पोलैंड और यूक्रेन यह
सपोर्ट नेटो का जारी है लेकिन अगर नेटो
खुलकर इस युद्ध के मैदान में उतरता है तो
परिणाम क्या होंगे इसकी झलक जो है वह एक
हम कह सकते हैं कि पुतिन ने दुनिया के

सामने पेश कर दी है दूसरी तरफ अगर देखें
तो अमेरिकी संसद में लगभग 60 बिलियन डॉलर
का जो ऐड है यूक्रेन को जाने के लिए वो भी
अटका पड़ा है अब यह देखना है कि मैक्रो के

बयान के बाद दरअसल पुतिन ने भले ही
न्यूक्लियर हमले की और परमाणु युद्ध की
धमकी दे दी है उसका असर कितना व्यापक
पड़ता है और दूसरी तरफ यह देखना है कि
क्या अमेरिका अपना जो फाइनेंशियल ऐड है वो
यूक्रेन को रिलीज करता है या फिर वो भी
अटक जाता है ये सब कुछ ऐसे घटनाक्रम है जो
कि तय करेंगे कि आगे रूस और यूक्रेन युद्ध
का भविष्य क्या होगा ये ऐसे घटनाक्रम है
जो आने वाली गर्मियों में इस युद्ध की

पटकता को या तो पूरी तरह से लिख देंगे या
फिर इसे हम कहें कि इतना भड़का देंगे कि
ये अमेरिका और यूरोप को अपने युद्ध के

आगोश में ले लेगा जिसके छींटे दुनिया भर
में पढ़ेंगे तो फिलहाल रूस और यूक्रेन वॉर
के रिपोर्ट में इतना ही आगे हम इसके क्रम
में होने वाले और घटनाओं से आपको रूबरू
कराएंगे उसका भी विश्लेषण पेश करेंगे
फिलहाल मुझे और मेरे सहयोगी राकेश रावत को
दीजिए
इजाजत

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