Sudarshan Setu: कैसे बना देश का सबसे लंबा केबल ब्रिज

किसी भी नदी या समुद्र में पुल बनाने से
पहले उस जगह की अच्छे से जांच की जाती है
देखा जाता है कि वहां पुल बन सकता है या
नहीं किन-किन जगहों पर पिलर बनाए जा सकते
हैं जब पुल में ज्यादा गहराई होती है तो

उसके हिसाब से जमीन चुनी जाती है इसका
प्लान बनाने के बाद ही पुल बनाने का काम

शुरू होता है फिर पानी के बहाव मिट्टी की
स्थिति आदि को ध्यान रखते हुए पुल बनाया
जाता है आज बात पुल की इसलिए क्योंकि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे
लंबे केबल पुल सुदर्शन सेतु का उद्घाटन

किया यह पुल गुजरात के बेड द्वारका में
बना है और इस पुल की भव्यता की काफी चर्चा
हो रही है सोशल मीडिया पर इस पुल की काफी
तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं यह पुल अरब

सागर में बेड द्वारका द्वीप को मुख्य भूमि
यानी मेन लैंड ओखा से जोड़ने का काम करेगा
पहले ओखा से बेड द्वारका जाने के लिए

लोगों को बोट पर निर्भर रहना पड़ता था अब
बोट पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा ब्रिज
बनाने के लिए कम से कम 980 करोड़ की लागत
आई है पुल का उद्घाटन करने के बाद मोदी ने
द्वारका के द्वारकाधीश मंदिर जाकर पूजा

अर्चना की वहां के लोगों से भी मिले अब
पुल की खासियत की बात पुल की लंबाई लगभग ा
किलोमीटर की है यहां दो फुटपाथ बनाए गए
हैं जो ा मीटर चौड़े हैं साथ ही इसमें
सौर्य पैनल लगे हैं जो 1 मेगावाट बिजली
पैदा कर सकते हैं अधिकारिक जानकारी के
अनुसार लगभग ा किलोमीटर लंबे इस पुल का
निर्माण 980 करोड़ की लागत से किया गया है
पूरे पुल के बीच 900 मीटर लंबा केबल

आधारित हिस्सा है और पुल तक पहुंचने के
लिए 2 किमी लंबी सड़क मार्ग है बता दें
चार लेन वाले इस 27 मीटर चौड़े पुल में
दोनों तरफ 2ई मीटर चौड़े फुटपाथ हैं इस

पुल को पहले सिग्नेचर ब्रिज के नाम से
जाना जाता था और अब इसका नाम बदलकर
सुदर्शन सेतु रख दिया गया है बेड द्वारका

ओखा बंदरगाह के पास यह द्वीप है जो
द्वारका शहर से लगभग 30 किमी दूर है जहां
भगवान श्री कृष्ण का प्रसिद्ध द्वारकाधीश
मंदिर है पहले तीर्थ यात्रियों को बेड

द्वारका तक पहुंचने के लिए नौका परिवहन पर
निर्भर रहना पड़ता है इस पुल के निर्माण
से वह कभी भी यात्रा कर
सकेंगे

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