Tejashwi Yadav का सियासी कद बढ़ा, दोस्तों के उड़े होश, अब क्या?

सम्मान दीजिए उनके दुख सुख में पति पिछड़
का आदिवासी भाइयों का अब चक भाइयों का
भागीदार बनोगे बताओ हाथ उठा के बताओ बनोगे
ना तो हम ज्यादा कुछ नहीं कहेंगे अब आप
लोगों को य काम करना
पड़ेगा काम कीजिएगा
ना हम भी सा

रहेंगे साथ साथ काम करेंगे नमस्कार न्यूज़
फ नेशन देख रहे हैं आप और मैं हूं आपके
साथ साक्षी ा देखिए 3 मार्च को जिस तरीके
से पटना के गांधी मैदान में जन विश्वास

महारैली को लोगों का समर्थन मिला उससे इस
चीज से नकारा नहीं जा सकता है कि जो
तेजस्वी यादव का सियासी कद है वह कहीं ना
कहीं बढ़ा है लेकिन वही मंच पर मौजूद
इंडिया एलाइंस के कई ऐसे नेता हैं जिनमें
जो है एकता नहीं देखी गई जिनमें कहीं ना

कहीं मन मिटाओ दिखा क्या है इनसाइड स्टोरी
आइए आपको बताएंगे इस वीडियो में राष्ट्रीय
जनता दल की रविवार को पटना में हुई रैली
को इंडिया एलायस के प्रमुख राजनीतिक दलों
का ना सिर्फ पूरा समर्थन मिला बल्कि बड़े
नेताओं ने शिरकत भी की कांग्रेस के
राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिका जुन खड़के और
राहुल गांधी के अलावा भाजपा के डी राजा

माकपा के सीताराम टुरी सीपीआई एमएल के
दीपंकर भट्टाचार और समाजवादी पार्टी के
नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम

अखिलेश यादव भी पहुंचे थे राजनीति से
सरोकार रखने वाले लालू परिवार के पाच
सदस्य भी मंच पर मौजूद थे वहीं राजत के
राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव उनकी
पत्नी पूर्व सीएम रावड़ी देवी बेटी मीसा

भर्ती के अलावा दोनों बेटे तेजस्वी और तेज
प्रताप तो रैली के आयोजक ही थे आपको बता
दें कि 20 फरवरी से 1 मार्च तक बिहार में
जन विश्वास यात्रा के बाद तेजस्वी यादव ने
3 मार्च को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान
में जन विश्वास रैली का आयोजन किया था
वहीं रैली में उमड़ी भारी भीड़ से तेजस्वी

यादव का उत्साह तो यकीनन बढ़ा होगा साथ ही
पस्त पड़े इंडिया एलायंस के नेताओं को भी
रैली की भीड़ से ऑक्सीजन मिला होगा लालू
यादव भी अपने दौरे में तरह-तरह के नामों
से रैलियां करते रहे हैं लेकिन वर्षों बाद

आरजेडी की शायद इतनी शानदार रैली पहली बार
हुई है रैली की सफलता का श्रय सीधे-सीधे
तेजस्वी यादव को ही जाएगा क्योंकि इसके
लिए उन्होंने बिहार में 10 दिनों का पहले
तूफानी दौरा किया रैली उन्हीं की योजना
परिकल्पना थी चुनावी रणनीतिकार प्रशांत
किशोर रैली में आए लोगों को भाड़े की भीड़

बताते हैं ऐसा होता भी है इसीलिए प्रशांत
किशोर के आकलन को एक बारगी खारिज नहीं
किया जा सकता है पर राजनीति में दशक से भी
कम का सफर तय करने वाले तेजस्वी यादव इतनी
भीड़ अगर अपने दम पर जुटा पाए तो इसे कमतर
आंकने की बात बेईमानी लगती है रैली के मंच
पर मौजूद तमाम नेताओं ने संबोधन किया आपको
बता दें कि उम्र दराज और अनुभवी नेता भी
उसमें शामिल थे पीएम नरेंद्र मोदी की

आलोचना में सबसे सबने जो है अपनी अर्जी
जाया की लेकिन तेजस्वी अपने 17 महीने के
कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते बताते रहे
जनता का आशीर्वाद मिलने पर बिहार में
रोजगार के भरमार के सपने दिखाते रहे नीतीश
कुमार के महागठबंधन से अलग होने पर
उन्होंने तंज तो किया लेकिन शब्दों की

मर्यादा का ख्याल रखा वहीं मलिकार्जुन
खड़के की तरह उनकी जुबान से ना नीतीश
कुमार के लिए जहर बुझे शब्द निकले और ना
नरेंद्र मोदी की कडड आलोचना गूंजी खड़के
के निशाने पर तो नीतीश कुमार नहीं थे

लेकिन मोदी को खड़के ने झूठों का सरदार कह
दिया वहीं तेजस्वी यादव ने मोदी की आलोचना
में भी नीतीश को ही निशाने पर रखा
उन्होंने कहा कि मोदी जी कई तरह की गारंटी

दे रहे हैं पर क्या वह चाचा यानी कि नीतीश
कुमार के ना पलटने की गारंटी दे सकते हैं
तो देखिए कोई माने चाहे ना माने लेकिन जिस
तरीके से 3 मार्च को गांधी मैदान के अ
गांधी मैदान में जो भीड़ देखी गई उससे

जाहिर तौर पर जो है अ राजत सुप्रीमो का और
य कह ले तेजस्वी यादव का भी जो है उत्साह
बढ़ा है और इससे कहीं ना कहीं तेजस्वी
यादव का जो सियासी कद है वह भी बढ़ता नजर
आ रहा है लेकिन क्या इससे सत्ता पक्ष को

कोई टेंशन होगी यह तो देखने वाली बात होगी
लेकिन फिलहाल के लिए इस खबर में बस इतना
ही और ऐसी तमाम खबरों से अपडेट रहने के
लिए देखते रहे न्यूज फ
नेशन

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