UP में 35 सीटों पर फंस गई BJP | 272 तक पहुंचने के लाले पड़े | Deepak Sharma | Modi | Yogi | Akhilesh

नमस्कार मैं दीपक शर्मा और मेरे य मंच पर
आपका

स्वागत दोस्तों क्या मोदी जी का जो सबसे
मजबूत गढ़ जो सबसे मजबूत किला है उत्तर
प्रदेश जहां से दो बार दो बार उन्होंने
होलसेल थोक के भाव सीटें जीती और दोनों
बार यूपी की बदौलत मोदी जी प्रधानमंत्री

बने क्या यह जो मजबूत किला है इस बार इस
बार मोदी और शाह के लिए चैलेंज बनता जा
रहा है बड़ी चुनौती बनता जा रहा है और यह
बात मैं नहीं कह रहा हूं बीजेपी की अपनी
रिपोर्ट इंटरनल रिपोर्ट कह रही है कि यूपी
में इस

बार 35 सीटें फसी हुई हैं 35 सीट्स फंसी
हुई है 19 सीटें जो हैं वह ऑरेंज जोन में
है और 16 सीटें रेड जोन में यानी 35 सीटें
कहीं ना कहीं एक प्रॉब्लम है बीजेपी के
लिए चुनौती अब ये ऑरेंज और रेड जोन का
मतलब क्या है मैं आपको आगे समझाऊ फिलहाल
जो सबसे बड़ा सवाल है कि अगर यूपी में
चैलेंज है अगर यूपी में कहीं ना कहीं मोदी
जी के लिए मुसीबत

है तो फिर सरकार बनाने के लिए 272 का जो
मेजॉरिटी मार्के जो 272 सीटें मोदी जी को
चाहिए वो मोदी और शाह कहां से ला रहे हैं
अब दोस्तों ये ऑरेंज जोन क्या यह रेड जोन
क्या है यह लाइट ग्रीन जोन क्या है यह
ग्रीन क्या है यह जो रंगों की भाषा है य
भाषा क्या है दरअसल यह जो चुनावी

रणनीतिकार है बीजेपी की उनके जो कोड है
कलर कोड है इनको मैं आपको डिकोड करके
बताऊंगा कि इसका मतलब क्या है चुनाव की
स्ट्रेटेजी में मैं बताऊंगा आगे लेकिन
पहले असली खबर की तरफ कि देश के सबसे बड़े
सूबे में जो डबल इंजन की सरकार है जो योगी
और मोदी की सरकार

आखिर आज की तारीख में उसे प्रॉब्लम क्या
है यूपी में वैसे प्रॉब्लम अगर देखें तो
कई हैं कई प्रॉब्लम्स है लेकिन जो चार
पांच प्रॉब्लम्स है मैं चाहता हूं एक एक
पॉइंट आपके सामने रखूं और चंद सेकंड में
रखू ये जो चार पाच पॉइंट अगर आप समझ लेंगे
तो मोदी और शाह की परेशानी भी समझ लेंगे
और उत्तर प्रदेश कहां फस रहा है इसकी

तस्वीर भी थोड़ी क्लियर होगी और पॉइंट
नंबर वन मुस्लिम वोटर साइलेंट है लो
प्रोफाइल है उत्तर प्रदेश में यानी वो
मुस्लिम वोटर जो एक मुश्त वोट करता है जो
बल्क वोट है 18 से 20 पर है और कई ऐसी
कंसीट एसीज हैं सीट है जहां 30 पर 40 पर
40 पर से भी ज्यादा है 50 पर टच करता है
डिसाइसिव है एकदम साइलेंट है और जितने भी
इवेंट्स हैं चाहे वो पड़ोस के राज्य

उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड हो या
फिर काशी का मुद्दा हो या फिर मथुरा का
मुद्दा हो या और बहुत से मामले हो छोटे
बड़े मामले एनकाउंटर के बुलडोजर के
मुस्लिम रिएक्ट नहीं कर रहा है मुस्लिम
प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है खामोश है

स्ट्रेटजिकली खामोश है और यह चीज परेशान
कर रही है मोदी जी को शाह साहब को
रणनीतिकारों को क्योंकि ताली दोहा से बसती
है और क्योंकि मुस्लिम साइलेंट है तो
पॉइंट नंबर दो ओबवियस है सांप्रदायिक
ध्रुवीकरण नहीं हो रहा कमल

पोलराइजेशन नहीं हो रहा है और ऐसे में कई
सीटें जो कमल पोलराइजेशन के बल पर जहां
वोट का ध्रुवीकरण होता है व नहीं हो रहा
लेकिन एक और बड़ी बात इससे बड़ी परेशानी
यह है कि मुस्लिम साइलेंट जरूर है 20 पर
है लेकिन मुस्लिम इस बार बट नहीं रहा एक

और बड़ी मुसीबत है मुस्लिम इस बार एक साथ
एक मुश्त इंडिया एलायंस में जा रहा है और
राहुल गांधी और अखिलेश का जो गठबंधन था
जिसको तोड़ना चाहती थी बीजेपी जो गठबंधन
हो नहीं रहा था आखिरी वक्त पर

हुआ उसकी वजह यह थी कि अमित शाह चाहते थे
कि राहुल गांधी और अखिलेश हाथ ना मिलाए
क्योंकि अगर हाथ मिला लिया तो एक बड़ा
बल्क वोट एक मस्त

जाएगा बिग प्रॉब्लम पॉइंट नंबर फोर और
पॉइंट नंबर फोर भी मुसीबत ही है मोदी जी
के लिए एक बड़ा चंक ऑफ वोट्स मुस्लिम और
साथ में अंबेदकर राइट अंबेदकर वादी ये जो
शहरों में जो एक नया वोटर है सिर्फ दलित
की बात नहीं हो रही अति पिछड़ों की बात
नहीं हो रही अंबेदकर राइट जो कभी काशीराम
ने क्रिएट किया था ये अंबेदकर राइट

मुस्लिम्स के साथ है कुछ अति पिछड़े भी
हैं समाजवादी पार्टी के कुछ आप कह सकते
हैं जो बैकवर्ड वोट हैं वह भी उनके साथ है
यह जो एक लामबंदी हो रही है और साथ में
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान जाटों की
कुछ खाप वो इसमें जुड़ रही है यह जो

इक्वेशन बन रहा है यह भी बीजेपी के लिए एक
मुसीबत है 2014 और 19 में ऐसी स्थिति नहीं
थी और एक और पॉइंट यह जो पर्चे लीक हो रहे
हैं नौकरियां नहीं मिल रही है जगह जगह
बेरोजगारों पर जो लाठी चार्ज हो रही है यह
जो हर घर में या हर दूसरे घर में एक
बेरोजगार युवा है यह कुछ अलग सोच रहा है य
जो अलग सोच है यह बीजेपी की तरफ नहीं जा
रही है

यह भी एक मुसीबत
है अब दोस्तों आप ये जानना चाह रहे होंगे
कि यह ग्रीन और लाइट ग्रीन और ऑरेंज और
रेड यह क्या है अगर आप चार्ट देखेंगे तो
ग्रीन का मतलब यहां पर जो बीजेपी के जो
पोल स्ट्रेटजिस्ट है इलेक्शन स्ट्रेटजिस्ट

है ग्रीन का मतलब है वो सीटें जो पूरी तरह
से सुरक्षित है जहां बीजेपी बड़े आराम से
जीती जैसे गाजियाबाद की सीट है नोएडा गौतम
बुद्ध नगर की सीट है या फिर आप कह सकते
हैं बुल शहर है अलीगढ़ है मथुरा है आगरा
यह जो बेल्ट है जहां तीन-तीन लाख चार चार

लाख पा पा लाख वोट से बीजेपी जीतती आई है
यह सुरक्षित सीट है य प्रत्याशी के कोई
मायने नहीं ग्रीन का मतलब यह सीट बीजेपी
की झोली में आ चुकी उत्तर प्रदेश में इस
तरह की 29 सीट लाइट ग्रीन का मतलब है जहां
कम अंतर से कम अंतर से जीत हुई है और
ऑरेंज का मतलब है जहां कांटे की टक्कर है
जहां जीत की गारंटी नहीं है कहीं 10000 से
जीत हो गई तो कहीं 15000 से जीत हो गई
कहीं 5000 से कम से जीत हुई कहीं 45000 से
जीत हुई नो गारंटी फॉर विक्ट्री

विनेबिलिटी की जहां गारंटी नहीं वो ऑरेंज
है और रेड मतलब रेड जोन मतलब जो सीटें
बीजेपी हार चुकी है या हार सकती 16 सीटें
ऐसी है कुल मिलाकर ऑरेंज और रेड में 35 है
और जो सीटें जीत सकती है उत्तर प्रदेश में
45 मैं अपने एक्सपर्ट के साथ को और
एक्सप्लेन करूंगा सीट वाइज एक्सप्लेन करने
की कोशिश

करूंगा अब दोस्तो पिछले 48 घंटे में एक और
डेवलपमेंट उत्तर प्रदेश में हुआ अखिलेश
यादव जो जिन्होंने गठबंधन किया राहुल
गांधी के साथ उनको सजा के तौर पर सीबीआई
का नोटिस दिया गया चाणक्य ने नोटिस थमा
दिया और मायावती जी के जो भतीजे हैं
उत्तराधिकारी आकाश आनंद साहब इन्होंने

क्योंकि इनके विधायक ने बीजेपी का समर्थन
किया था राज्यसभा में और वैसे भी मायावती
जो दिल्ली से बताया जा रहा है ऐसा लोग
कहते हैं वो वही काम कर रही वही फैसले ले
रही है अब तक तो उसका इनाम दिया गया आज
इनको वाई कैटेगरी की सिक्योरिटी कमांडो
सिक्योरिटी दे दी गई है आनंद जी को चाणक्य
ने लेकिन सवाल इस बात का है कि क्या इन सब
मेहरबानियां के बावजूद

क्या अपने भविष्य के बारे में भी मायावती
कुछ सोच रही हैं कि अगर जीरो सीट लेकर आई
तो फिर क्या होगा क्या पार्टनरशिप हो सकती
है आचार संहिता के बाद और वैसे भी मायावती
बहुत अनप्रिडिक्टेबल है वो क्या कहेंगी आप
पहले से नहीं बता सकते अमित शाह भी नहीं
बता सकते तो उस पर भी बातचीत होगी और
बातचीत यह भी होगी आज के एक्सपर्ट

प्रोफेसर रविकांत से कि क्या वाकई मोदी जी
के लिए 35 सीटें 35 सीटें 80 में से 35
सीटें जीतना बहुत मुश्किल है ऑरेंज जोन और
रेड जोन और अगर 35 सीटें फंस रही हैं तो
बीजेपी क्या 5055 पे आ रही है यूपी में और
5055 पे आ रही है

फिर सरकार कैसे बनेगी ज्यादा वक्त नहीं
लूंगा चलते हैं प्रोफेसर रविकांत जी के
पास लखनऊ जो पहला सवाल है वो यह है कि 35
ऐसी सीटें हैं 35 80 में से 35 सीट ऐसी जो

लेटेस्ट रिपोर्ट है जो ऑरेंज और रेड
कैटेगरी में ऑरेंज मतलब कहीं ना कहीं बहुत
कम अंतर से बीजेपी जीती थी वो सीटें वो
हार भी सकती है और रेड जोन मतलब जो सीटें
बीजेपी हार चुकी है कुल मिलाकर 19 सीटें
ऑरेंज में है और 16 सीटें रेड में है 35
सीटें उत्तर प्रदेश में आपको लगता है कि य

जो मोदी 400 पार 400 पार कर रहे हैं कसी
400 पार के नारे से 80 में से 80 सीट ले
जाएंगे या जो फसी हुई सीट हैं ये गले की
हड्डी
है देख ये मोदी जी का केवल नैरेटिव है वो
बनाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन असली

तस्वीर तो आपको पूर्वांचल में और पश्चिमी
यूपी में खास सके जो अ सहारनपुर वाली
बेल्ट है जो मुरादाबाद बली बेल्ट है इसमें
आपको समझ में आएगा कि पिछले इलेक्शंस को
आप देखेंगे दो ही इलेक्शन हम देख ले तो
भारतीय जनता पार्टी अगर चुनाव जीती भी है

तो बड़ी मशक्कत से जीती है अदर वाइज चुनाव
हारी है यही वो एरिया है जहां डॉक्टर साहब
मैं मैं चाह रहा हूं मैप भी देखें हमारे
जो दोस्त हैं ये सीटें जो डॉक्टर साहब आप
जिक्र कर रहे हैं ये सहारनपुर है बिजनौर
है

नगीना है मुरादाबाद रामपुर संभल अमरोहा और
इत्तफाक से बड़ी मुश्किल से इसमें से दो
सीटें कैराना और मुजफ्फर नगर मिली थी
बीजेपी को अगर देखें तो बीजेपी 90 पर
सीटें हारी है मोदी जी की जब लहर चली है
तब भी मैं आपसे जानना चाह रहा हूं कि यह
जो लहर के बावजूद 2019 की सर्जिकल

स्ट्राइक के बावजूद 90 पर सीटें इस बेल्ट
में यानी ये जो मेरठ की बेल्ट है
मुरादाबाद की बेल्ट है सहारनपुर की बेल्ट
है जो अमरोहा तक आ रही
है क्या कारण है कि 90 पर सीटें हार गई
बीजेपी उसके दो बड़े फैक्टर है दीपक जी एक
तो यह कि इस बेल्ट में जो मुस्लिम आबादी
है वो 30 से लेकर के 50 फीसद तक है जी और
इसी बेल्ट में खाटी अंबेडकराइट लोगों का

एक पूरा हुजूम है आप बिजनौर से लेकर के और
चले जाइएगा उस पूरे पश्चिम के जहां से
नगीना है जहां से मायावती आती है जहां
चंद्रशेखर आजाद है सहारनपुर वाली बेल्ट तो
वहां प जो अंबेडकरा मूवमेंट रहा है बीएसपी
का मूवमेंट रहा है कांशीराम साहब की पूरी

प्रयोगशाला रही है उस वजह से भारतीय जनता
पार्टी वहां सैद बारी नहीं कर सकती 19 से
यह जो इलेक्शन होने जा रहा है वो और
ज्यादा थोड़ा फर्क करेगा और इसमें आपको
दिखेगा कि जो जाट है किसान है उसकी
नाराजगी भी भारी पड़ेगी तो ये तीसरा पॉइंट
जुड़ेगा बीजेपी के लिए कि जहां उन जाट
बेटियों का अपमान हुआ पहलवान बेटियों का

और किसानों पर अपने लाठियां चलाई गोलियां
चलाई अपने आंसू गैस के गोले छोड़े तो उनका
जो अपमान है और बेटियों का जो अपमान हुआ
है यह बड़ा फैक्टर पश्चिमी उत्तर प्रदेश
में होने जा रहा है दीपक जी इस इलेक्शन
में और इसीलिए भारतीय जनता पार्टी को यहां
पानी भरना पड़ेगा पानी भर इतना आसान नहीं
है इस बार मुजफ्फरनगर कैराना
नहीं आप सही कह रहे हैं कि पानी भरना
पड़ेगा मैं एक चीज डॉक्टर साहब यहां पूछना
चाह रहा था क्या अमित शाह और मोती भी यह
चीज भाप रहे थे कि भाई यहां पर वह बहुत
कमजोर हैं बार-बार यहीं पर हार हुई है
बीजेपी को तो इसीलिए उन्होंने जयंत चौधरी
चौधरी चरण सिंह के पोते को जयंत चौधरी
आरएलडी को अपने साथ कर लिया क्या जयंत
चौधरी से ये जो नुकसान हो रहा है बीजेपी
को इस पूरी बेल्ट में क्या यहां पर जैन
चौधरी को शामिल करके इसकी भरपाई हो सकती
है बीजेपी को कुछ नुकसान बीजेपी कम कर
सकती
है दीपक जी अगर मैं यह कहूं कि कदापि नहीं
हो रही है तो लोग इस पर शायद भरोसा ना
करें क लगे भाई चड़क महोदय है उनके पास
लेकिन सच्चाई यह है कि जयंत चौधरी के
बीजेपी में जाने से बीजेपी को कोई फायदा
नहीं है बल्कि उल्टा लॉस हो सकता है
क्योंकि पश्चिमी यूपी की जो राजनीति है वो
3 बरादरी वाली जो पॉलिटिक्स है उसमें जाट
बनाम पॉलिटिक्स होती है तो जो अति पिछड़ा
है जो दलित है वो जाट के साथ कभी जाता ही
नहीं है पिछले आप इलेक्शन से देख लीजिए तो
जयंत चौधरी के साथ जाने से बीजेपी को कोई
फायदा नहीं होने जा रहा जितना मैं समझ रहा
हूं आज की तारीख में कल को क्या होगा मैं
नहीं कह सकता लेकिन आज की तारीख में अति
पिछड़ा और दलित ये दो चंक जो बीजेपी को
मिल सकते थे
वो जाट वोट के वजह से साथ में आने की उनकी
गुंजाइश बेहद कम हो गई डॉक्टर साहब एक और
आपसे चाहता हूं अगर आप यह नक्शा देखें इस
नक्शे पर कुछ और सीटें हैं जहां पर बीजेपी
पूर्वांचल में फंसी हुई जैसे बस्ती की सीट
है संत कबीर नगर की सीट है लालगंज है
आजमगढ़ है घोसी है बलिया है जौनपुर है
मछली शहर है गाजीपुर है चंदौली है भदोई है
रॉबर्ट गंड एक पूरा चंक आप कह सकते हैं
मोदी बनारस से जहां लड़ते हैं उसके चारों
तरफ यह जो मैंने सीटें गिनाई बस्ती में
पिछली बार बड़ी मुश्किल से 3 हज वोट से
जीती थी लालगंज बीजेपी हार गई आजमगढ़ हार
गई इस बार फिर वही चांसेस है घोसी हारी
बलिया जो है बड़ी मुश्किल से जीती जौनपुर
हार गई बीजेपी गाजीपुर हार गई मनोज सिन्हा
जैसे बड़े नेता जो इस वक्त जम्मू कश्मीर
के लेफ्टनंट गवर्नर वो यहां पर हार गए तो
यह जो लगातार हार इस बेल्ट पर मिल रही है
पूर्वांचल की तो क्या आपको लगता है कि
यहां भी मुस्लिम और अंबेदकर आइट का जातीय
समीकरण ऐसा है जिस जातीय समीकरण को बीजेपी
पैसे से राशन से किसी भी तरह से तोड़ नहीं
पा रही है और यह फिर एक बार फसाए गी बाजी
को डेफिनेटली यह वही कांशीराम साहब की
जमीन है जहां पर लंबा उन्होंने संघर्ष
किया दूसरा यह अगर आप थोड़ा और पहले
जाएंगे आप तो राजनीति के और पत्रकारिता के
माहिर खिलाड़ी रहे हैं यह बेल्ट
कम्युनिस्ट बेल्ट भी रही है व असर भी रहा
है तो बाम पंथ के ऊपर कांशीराम जी जब आए
थे तो ये और ज्यादा मजबूत हो कर के ये
सामने आती है पूरी बेल्ट जिसमें हिंदुत्व
का सीधा विरोध है माने बीजेपी का सीधा
विरोध है और मुस्लिम आबादी भी बड़ी संख्या
में तो ये दो कारण है तौर पर पूर्वांचल
में बीजेपी को कमजोर करने के और इसके
अलावा आप देखिएगा बीजेपी ने इसके लिए जो
पेश बंदी की है ओम प्रकाश राजभर अनुप्रिया
पटेल संजय निषद इन तीन लोगों को खास कर के
जो निषद है चौहान है पटेल है और जो कश्यप
है इन पर थोड़ा सा उसने निशाना साधा है कि
ताकि ये जो अति पिछड़ा है वो अगर बीजेपी
के साथ आ जाए तो थोड़ा सा उनके बचने के
लिए कोई गुंजाइश बनती है लेकिन जो
अंबेडकराइट और जो मुस्लिम वोट है वो अगर
और जो समाजवादी पार्टी का यादव बेल्ट भी
है ये और यादव यहां अंबेडकराइट है खास बात
ये है मौर्या अंबेडकराइट है इस बेल्ट में
कुर्मी अंबेडकराइट है इस बेल्ट में तो
आपके जो पश्चिमी यूपी वहां पर जाता
अंबेडकराइट लेकिन यहां पर पिछड़ा
अंबेडकराइट है और इसीलिए भारतीय जनता
पार्टी के लिए मुसीबत बनेगा और मुझे लगता
है इस चुनाव में भी जब अखिलेश और कांग्रेस
पार्टी एक साथ आ रही है तो अति पिछड़े का
विश्वास कांग्रेस पार्टी के प्रति हो रहा
है नॉन जाटव दलित का भी विश्वास कांग्रेस
पार्टी की तरफ हो रहा है तो इससे फायदा
मिलेगा एलायंस को और यह कहीं ना कहीं
बीजेपी के लिए मुसीबत बनने जा रहा है जी
मैं मायावती के सवाल पर जरूर आऊंगा एक अहम
सवाल है क्योंकि मायावती और जब बाकी
समाजवादी पार्टियां एक साथ आती हैं एक
सोशलिस्ट मूवमेंट जो है अपने चर्म पे अपने
पीक पर जाता है और उसका बड़ा नुकसान
बीजेपी ने आज से नहीं 1993 से बीजेपी उस
नुकसान को झेलती आ रही है और इसीलिए मोदी
और शाह कोशिश करते हैं कि मायावती को कभी
इस खेमे में ना जाने दो मैं आऊंगा उस सवाल
पर एक चीज मैं पूछ रहा हूं हमने देखा राम
मंदिर पर एक बड़ा सा एक मूवमेंट हुआ और
उसके बाद बहुत से छोटे-छोटे
तनाव की की घटनाएं ऐसी हुई जहां पर
सांप्रदायिक तनाव हो सकता था फिर
उत्तराखंड जो पड़ोस का राज्य उत्तर प्रदेश
का वहां यूनिफॉर्म सिविल कोड आ गया लेकिन
मुसलमान जो है वो रिएक्ट नहीं कर रहा है
उत्तर प्रदेश का मुसलमान जो 20 पर आप कह
सकते हैं हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा
मुस्लिम आबादी उत्तर प्रदेश में मुसलमान
बहुत ही कम रिएक्ट कर रहा है चुप है खामोश
है मतलब जिस उत्तर प्रदेश में हम देखते
हैं अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी है जहां
पर लखनऊ एक मुस्लिम धर्म गुरुओं का गढ़ है
जहां देवबंद है मुस्लिम एकदम साइलेंट है
आपको लगता है यह जो साइलेंस है यह मोदी जी
के लिए परेशानी का सबब है मुसलमान रिएक्ट
नहीं कर रहा इसलिए मोदी और अमित शाह का
हिंदू कार्ड नहीं चल रहा अगर हिंदू कार्ड
नहीं चल रहा तो फिर योगी का कोई मतलब नहीं
है बुलडोजर का कोई मतलब नहीं है आपको लगता
है यह जो मुसलमानों की जो खामोशी है यह
कहीं ना कहीं बीजेपी को सता रही है
डेफिनेटली कोई सांप्रदायिक ध्रुवीकरण
उत्तर प्रदेश में नहीं दिखाई पड़ रहा इस
समय राम मंदिर के बाद आपने यूसीसी का भी
जिक्र किया मैं आपको थोड़ा और दूर ले चलता
हूं काशी के मामले में भी कोर्ट का फैसला
आया वहां पूजा शुरू हुई मथुरा में भी
कोर्ट का फैसला आया कि अब उस पर बात वो
होगा सुनवाई होगी लखनऊ में जहां मैं बैठा
हुआ हूं वहां लक्ष्मण टीला टीले वाली
मस्जिद है उस पर भी फैसला आया कि उस पर
सुनवाई होगी लेकिन नहीं कोई रिएक्शन नहीं
मुस्लिम सीधा यह कह रहा है कि हमें
संविधान पर कानून पर भरोसा है जो फैसला
होगा हमें स्वीकार्य होगा इसमें रिएक्शन
कोही है ही नहीं तो वो देवबंद से लेकर के
और लखनऊ तक कहीं कोई गफलत नहीं और यही वजह
है कि बीजेपी परेशान है उसको धर्मीक चाहिए
बिना धर्मीक के आप उत्तर प्रदेश में जो
चाहते हैं वो नहीं हो सकता है और इसीलिए
जो आपने रेड जोन और जन की जिक्र की यह
बदस्तूर जारी है और इसकी संभावना बेहद कम
है आपको लगता है कि मुस्लिम स्ट्रेटजिकली
एक रणनीति के तहत खामोश है नंबर एक खामोश
भी है और एक मुश्त वोट भी करेगा राहुल
गांधी और अखिलेश की इस जोड़ी को और क्या
हम यह कह सकते हैं कि चाहे ओवैसी खड़े हो
जाए या कोई खड़ा हो जाए अब मुसलमान
सीधे-सीधे एक इंडिया एलायंस की तरफ जा रहा
है और अगर एक साथ जाता है और एक ऐसे स्टेज
पर जाता है जब उत्तर प्रदेश में
पोलराइजेशन नहीं तो क्या आपको लगता है यह
एक बहुत बड़ी चुनौती है मोदी जी को लिए जो
400 पार का नारा दे रहे
हैं निश्चित रूप से यहां करीब 18 से 20
फीसद मुस्लिम है उत्तर प्रदेश में और जो
दो हिस्से आपने बताए हैं वहां पर तो बड़ी
तादाद है और कोई रिएक्शन नहीं ओवैसी साहब
भी आ रहे शायद सात लोकसभा सीटों पर वो
चुनाव लड़ने जा रहे हैं लेकिन जो
माइनॉरिटी है उसका सी कहना है कि हम आज
संविधान और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई
में साथ खड़े हैं राहुल गांधी के और
अखिलेश यादव के अखिलेश यादव से जो नाराजगी
थी वो भी दूर उन्होंने कर ली है कि राहुल
गांधी के साथ वो आ गए हैं तो अब हम अलायंस
के साथ जाएंगे वो यह भी देख रहे हैं कि
मायावती जी भी आ जाए तो हम उनके साथ
जाएंगे तो यह जो इस समय स्ट्रेटजी है वह
बेहद आप कह सकते हैं सकारात्मक है एलायस
के लिए और उतनी ही मुसीबत वाली है बीजेपी
के लिए मायाव जब 2019 में अखिलेश के साथ
लड़ी तो उनको 10 सीटें मिली 10 सीटें उनको
लोकसभा की मिली और एक रिकॉर्ड सीट आप कह
सकते हैं पिछले 10 साल में बेस्ट
परफॉर्मेंस मायावती की 2019 में
थी उनका जो वोट परसेंटेज था अगर आप
स्क्रीन पर देखें तो उस वक्त उनका वोट
परसेंटेज था
1943
19.4 परज उनका वोट शेयर था 2019 में सीटें
मिली 10 2014 में मायावती अकेले लड़
वोट शेयर 19 से ज्यादा था 19.7 से था
लेकिन मायावती को एक भी सीट नहीं मिली
यानी वोट शेयर बड़ा है फिर भी मायावती को
सीट नहीं मिली लेकिन जिस जैसे ही समाजवादी
पार्टी उनके साथ आती है भले ही वोट शेयर
कम हो लेकिन वो तहलका मचाती है 10 सीट ले
जाती है आपको लगता है कि बहन जी अगर सपा
की या इंडिया लायंस की सवारी नहीं करती
हैं परहेज करती हैं ईडी से इनकम टैक्स से
अकेले लड़ती है तो क्या बहन जी एक ऐसे
रास्ते पर जा रही है जहां आगे टी पॉइंट है
जहां दीवार है बसपा के दरवाजे वहां बंद हो
जाएंगे क्या पार्टी खत्म हो सकती है
मूवमेंट ढेर हो सकता है अगर एक भी सीट
नहीं मिली और अकेले लड़ेंगी तो क्या यह
आत्मघाती हो सकता है बहन जी के लिए हा
निश्चित रूप से हाथी जो है दीपक जी बिना
महावत के वार करने की स्थिति में नहीं है
उसे सवारी चाहिए अब वो हाथी साइकिल को भी
ऊपर बिठा सकता है और पंजे के साथ भी चल
सकता है लेकिन अगर यह नहीं होता है जैसा
कि आपने कहा और जो आंकड़े दिखाए आपने
जाहिर तौर पर वोट परसेंटेज भी कितना भी हो
लेकिन अगर परिस्थितियां ऐसी है उत्तर
प्रदेश की कि अगर आपके साथ कोई एक नहीं है
सपा नहीं है या कांग्रेस नहीं है तो फिर
आशातीत सफलता बीएसपी को नहीं मिल सकती
पिछले तीन चार इलेक्शन के आंकड़े ये कहते
हैं कि वो अकेले सफल नहीं हो सकती हैं अगर
वो अकेले जाती है तो वो इस बार और ज्यादा
अपना नुकसान करेंग पिछले विधानसभा के आप
आंकड़े देख लीजिए एक सीट थी केवल और 12.9
पर वोट था 13 पर से भी नीचे आ गया था इस
बार ये लग रहा है कि अगर वो अकेले चुनाव
लड़ती है तो जो उनका आधार वोट है जाटव वो
भी उनके हाथ से खिसक सकता है ओ सारा
मूवमेंट और सारा जो संविधान को बचाने की
लड़ाई है वो वो कहीं ना कहीं खतरे में
पड़ती जा रही है तो वो जो पढ़ा लिखा और
अंबेडकरा जाटा है वो भी अभी इंतजार कर रहा
है कि बहन जी एलायस में आए अगर नहीं आती
है तो फिर वह अलायंस के साथ जाएगा बहन जी
के साथ नहीं जा सकता हां जो गांव का है जो
मायावती को आपको लगता है आपको लगता है कि
ये जो परिस्थिति जो हम और आप डिस्कस कर
रहे हैं और आप सच्चाई बता रहे हैं अगर यह
सच्चाई जाहिर तौर पर मायावती भी जानती है
बहन जी भी जान रही है हमसे आपसे 10 गुना
ज्यादा उनका पॉलिटिकल एक्सपीरियंस है क्या
एन वक्त पर मायावती कोई बड़ा फैसला ले
सकती है क्योंकि अब 101 दिन बचे हैं चुनाव
के ऐलान में आचार संहिता लगने के बाद मुझे
आज भी पता नहीं क् यकीन है कि वो साथ
आएंगी अलायंस के साथ आएंगी और इसलिए यकीन
है कि वो हमेशा पिछले तीन चार दशक में वो
दलितों के लिए वंचितों के लिए लड़ाई लड़ती
रही और अगर वो नहीं आती है तो डेफिनेटली
जो आपने कहा जो आशंका आपकी है वही आशंका
मेरी भी है कि फिर लोगों को विचार करना
पड़ेगा कि बीएसपी कहां पहुंचेगी उसका
भविष्य क्या होगा जी नहीं सही कह रहे आप
और एक चीज यह भी हो सकती है बीच का रास्ता
भी निकल सकता है अगर मायावती एक सीट एक
टेसट अंडरस्टैंडिंग कर ले बिना ऑफिशियल
बिना ऑफिशियल अलायंस में आए अगर वो सीट
एडजस्टमेंट कर लेती है जिस तरह का खेल
हमेशा करते हैं अक्सर अगर वो पर के पीछे
थोड़ा सा उम्मीदवार सिलेक्शन ये सब कुछ
अखिलेश यादव या कांग्रेस के साथ मेलजोल
करके करें तो हो सकता है उसमें उनको भी
फायदा मिले दो चार सीट उनको मिल जाए और
कुछ फायदा इंडिया लायंस को हो जाए बहरहाल
देखना आगे राजनीति क्या होती है लेकिन एक
बात आपने कही कि मुस्लिम्स का साइलेंस
होना एक मुश्त इंडिया अलायंस को जाना और
दो जो पॉकेट्स आपने बताई एक पूर्वांचल की
और एक पश्चिमी उत्तर प्रदेश की वहां पर
जिस तरह से कई मुद्दे हैं एक मुद्दा किसान
आंदोलन का भी है एक मुद्दा यह भी है कि
अंबेदकर इट और मुस्लिम एक तरह से समीकरण
बना रहा है मुझे ऐसा लगता है कि फाइट जैसा
डॉक्टर साहब आप कह रहे हैं टफ है और आने
वाले दिनों में हो सकता है इसकी काट मोदी
और शा करें देखना है क्या होता है क्योंकि
नोटिस तो अखिलेश यादव को सीबीआई का जा ही
चुका है बहरहाल डॉक्टर साहब आप आए लास्ट
लाइन जो आपने कही कि भाई देयर इज अ फाइट
ये 400 पार ये एक नारा है नारे के अलावा
कुछ नहीं है हकीकत ये है कि 35 सीटें 35
सीटें उत्तर प्रदेश में फसी हुई है ऑरेंज
और रेड जोन में डॉक्टर साहब खुलकर बोलने
का और बेबाकी से बोलने का वो भी लखनऊ में
योगी जी के घर से आप दो-तीन किलोमीटर पर
आपका घर है और इतनी हिम्मत से आप बोलते
हैं मैं तो दात दूंगा आपको और मैं चाहूंगा
ईश्वर से कि आपकी जो सरस्वती जिहा प आ
जाती है जब आप बात करते हैं समझाते हैं
ऐसा ही रहे और आप हम लोगों को समझाते रहिए
बताते रहिए कि असली लड़ाई क्या हो रही है
पदे की थैंक यू सो मच सर फॉर जॉइनिंग दिस
प्रोग्राम

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